ब्रह्माण्ड : क्या ? क्यों ? कैसे ?

darkenergy श्याम उर्जा (Dark Energy) (11/2/2006) - यह विषय एक विज्ञान फैटंसी फिल्म की कहानी के जैसा है। श्याम ऊर्जा(Dark Energy), एक रहस्यमय बल जिसे कोई समझ नहीं पाया है, लेकिन इस बल के प्रभाव से ब्रह्मांड के पिंड एक दूसरे से दूर और दूर होते जा रहे है। यह वह काल्पनिक बल है जिसका दबाव ऋणात्मक है और सारे ब्रह्मांड में फैला हुआ है। सापेक्षता वाद के…
darkmatter श्याम पदार्थ(Dark Matter) (11/3/2006) - भौतिकी में श्याम पदार्थ उस पदार्थ को कहते है जो विद्युत चुंबकीय विकिरण (प्रकाश, क्ष किरण) का उत्सर्जन या परावर्तन पर्याप्त मात्रा में नहीं करता जिससे उसे महसूस किया जा सके किंतु उसकी उपस्थिति साधारण पदार्थ पर उसके गुरुत्व प्रभाव से महसूस की जा सकती है। श्याम पदार्थ की उपस्थिति के लिये किये गये निरीक्षणों…
कणो की स्पिन ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 01 : मूलभूत कण और मूलभूत बल (3/28/2011) - यह श्रंखला ‘पदार्थ और उसकी संरचना‘ पर आधारित है।  इस विषय पर हिन्दी में लेखो का अभाव है ,इन विषय को हिन्दी में उपलब्ध कराना ही इस श्रंखला को लिखे जाने का उद्देश्य है। इन श्रंखला के विषय होंगे: 1. मूलभूत कण(Elementary particles) 2.मूलभूत बल(Elementary Forces) 3.मानक प्रतिकृति(Standard Model) 4.प्रति पदार्थ(Antimatter) 5. ऋणात्मक पदार्थ(Negative Matter) 6. ग्रह, तारे, आकाशगंगा  और निहारिका…
सूर्य की परिक्रमा करता हुये प्रस्तावित लीसा के तीन उपग्रह जो लेसर किरणो के प्रयोग से गुरुत्विय तरंगो की जांच करेंगे। ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 02 : मूलभूत कण और मूलभूत बल (4/4/2011) - भौतिकी मे विभिन्न कणो द्वारा एक दूसरे कणो पर डाला गया प्रभाव मूलभूत बल कहलाता है। यह प्रभाव दूसरे किसी प्रभाव के द्वारा प्रेरीत नही होना चाहीये। अब तक चार ज्ञात मूलभूत बल है, विद्युत-चुंबकिय बल, कमजोर नाभिकिय बल, मजबूत नाभिकिय बल तथा गुरुत्वाकर्षण। क्वांटम भौतिकी के अनुसार पदार्थ के कणो के मध्य विभिन्न बल…
GUT ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 03 : मूलभूत बल – महा एकीकृत सिद्धांत(GUT) (4/11/2011) - महा एकीकृत सिद्धांत(Grand Unified Theory) विद्युत-चुंबकिय बल, कमजोर नाभिकिय बल तथा मजबूत नाभिकिय बल के एकीकरण का सिद्धांत है। यह नाम प्रचलित है लेकिन उचित नही है क्योंकि यह महा नही है ना ही एकीकृत है। यह सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण का समावेश नही करता है अर्थात पूर्ण एकीकरण नही हुआ है। यह सिद्धांत पूर्ण सिद्धांत भी नही है क्योंकि…
मानक प्रतिकृति (Standard Model) ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 04 : मानक प्रतिकृति(Standard Model) (4/18/2011) - इस श्रंखला मे अब तक मूलभूत कण तथा मूलभूत बल की चर्चा हुयी है। मानक प्रतिकृति (Standard Model) मूलभूत बल तथा मूलभूत कणों के सम्पूर्ण ज्ञात सिद्धांतो का समावेश करता है। अब तक के लेखो मे वर्णीत महा एकीकृत सिद्धांत(Grand Unified Theory)  मानक प्रतिकृती का ही एक भाग है। यह सिद्धांत 20 वी शताब्दी की शुरुवात से लेकर…
StandardModel ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 05 : मानक प्रतिकृति की कमियाँ और आलोचनाएं (4/25/2011) - मानक प्रतिकृति(Standard Model) एक सफल सिद्धांत है लेकिन इसमे कुछ कमीयां है। यह कुछ मूलभूत प्रश्नो का उत्तर देने मे असमर्थ है जैसे द्रव्यमान का श्रोत, मजबूत CP समस्या, न्युट्रीनो का दोलन, पदार्थ-प्रतिपदार्थ असममिती और श्याम पदार्थ तथा श्याम उर्जा का श्रोत। एक समस्या मानक प्रतिकृति(Standard Model) के गणितिय समिकरणो मे है जो साधारण सापेक्षतावाद…
DarkMatter ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 06 : श्याम पदार्थ (Dark Matter) (5/2/2011) - 1928 मे नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी मैक्स बार्न ने जाट्टीन्जेन विश्वविद्यालय मे कहा था कि “जैसा कि हम जानते है, भौतिकी अगले छः महिनो मे सम्पूर्ण हो जायेगी।” उनका यह विश्वास पाल डीरेक के इलेक्ट्रान की व्यवहार की व्याख्या करने वाले समीकरण की खोज पर आधारित था। यह माना जाता था कि ऐसा ही समिकरण प्रोटान…
darkmatter ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 07 : श्याम पदार्थ (Dark Matter) का ब्रह्माण्ड के भूत और भविष्य पर प्रभाव (5/9/2011) - श्याम पदार्थ की खोज आकाशगंगाओं के द्रव्यमान की गणनाओं मे त्रुटियों की व्याख्या मात्र नही है। अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सभी प्रचलित सिद्धांतों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिये हैं। श्याम पदार्थ का अस्तित्व ब्रह्माण्ड के भविष्य पर प्रभाव डालता है। महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory) 1950 के दशक के मध्य…
ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर) ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 08 : श्याम ऊर्जा(Dark Energy) (5/16/2011) - ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सबसे प्रचलित तथा मान्य सिद्धांत के अनुसार अरबो वर्ष पहले सारा ब्रह्माण्ड एक बिंदू के रूप मे था। किसी अज्ञात कारण से इस बिंदू ने एक विस्फोट के साथ विस्तार प्रारंभ किया और ब्रह्माण्ड आस्तित्व मे आया। ब्रह्माण्ड का यह विस्तार वर्तमान मे भी जारी है। इसे हम महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory) कहते है। एडवीन हब्बल…
पदार्थ और प्रतिपदार्थ (हायड्रोजन और प्रति हायड्रोजन) ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 09 :प्रति पदार्थ(Anti matter) (5/23/2011) - प्रकृति(१) ने इस ब्रह्माण्ड मे हर वस्तु युग्म मे बनायी है। हर किसी का विपरीत इस प्रकृति मे मौजूद है। भौतिकी जो कि सारे ज्ञान विज्ञान का मूल है, इस धारणा को प्रमाणिक करती है। भौतिकी की नयी खोजों ने सूक्ष्मतम स्तर पर हर कण का प्रतिकण ढूंढ निकाला है। जब साधारण पदार्थ का कण प्रतिपदार्थ के कण से टकराता है दोनो…
pic-antimatter-300x291 ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 10 : क्या प्रति-ब्रह्माण्ड(Anti-Universe) संभव है? (6/6/2011) - सैद्धांतिक रूप से तथा प्रायोगिक रूप से यह प्रमाणित हो चुका है कि प्रति पदार्थ का अस्तित्व है। अब यह प्रश्न उठता है कि क्या प्रति-ब्रह्माण्ड का अस्तित्व संभव है ? हम जानते है कि किसी भी आवेश वाले मूलभूत कण का एक विपरीत आवेश वाला प्रतिकण होता है। लेकिन अनावेशित कण जैसे फोटान (प्रकाश कण), ग्रैवीटान(गुरुत्व बल धारक कण) का…
200px-Antimatter_Rocket ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 11 : प्रतिपदार्थ(Antimatter) के उपयोग (6/13/2011) - प्रति पदार्थ यह मानव जाति के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। वर्तमान मे यह चिकित्सा जैसे क्षेत्रो मे प्रयोग किया जा रहा है, तथा भविष्य मे इसे ईंधन , अंतरिक्ष यात्रा के लिए रॉकेट ईंधन तथा विनाशक हथियारों के निर्माण के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
श्याम वीवर द्वारा गैस के निगलने से एक्रेरीशन डीस्क का निर्माण तथा एक्स रे का उत्सर्जन ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 12 : श्याम विवर (Black Hole) क्या है? (6/27/2011) - श्याम विवर (Black Hole) एक अत्याधिक घनत्व वाला पिंड है जिसके गुरुत्वाकर्षण से प्रकाश किरणो का भी बच पाना असंभव है। श्याम विवर मे अत्याधिक कम क्षेत्र मे इतना ज्यादा द्रव्यमान होता है कि उससे उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण किसी भी अन्य बल से शक्तिशाली हो जाता है और उसके प्रभाव से प्रकाश भी नही बच पाता है। श्याम…
श्याम वीवर का परिकल्पित चित्र ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 13 : श्याम विवर के विचित्र गुण (7/4/2011) - श्याम विवर कैसे दिखता है ? कल्पना कीजिए की आप किसी श्याम विवर की सुरक्षित दूरी पर(घटना क्षितीज Event-Horizon से बाहर) परिक्रमा कर रहे है। आप को आकाश कैसा दिखायी देगा ? साधारणतः आपको पृष्ठभूमी के तारे निरंतर खिसकते दिखायी देंगे, यह आपकी अपनी कक्षिय गति के कारण है। लेकिन किसी श्याम विवर के पास गुरुत्वाकर्षण दृश्य…
किसी घूर्णन करते हुये श्याम वीवर द्वारा घुर्णन अक्ष की दिशा मे इलेक्ट्रान जेट का उत्सर्जन किया जा सकता है, जिनसे रेडीयो तरंग उत्पन्न होती है। ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 14 : श्याम विवर कैसे बनते है? (7/11/2011) - जब तक तारे जीवित रहते है तब वे दो बलो के मध्य एक रस्साकसी जैसी स्थिति मे रहते है। ये दो बल होते है, तारो की ‘जीवनदायी नाभिकिय संलयन से उत्पन्न उष्मा’ तथा तारों का जन्मदाता ‘गुरुत्वाकर्षण बल’। तारे के द्रव्यमान से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण उसे तारे पदार्थ को  केन्द्र की ओर संपिड़ित करने का प्रयास करता है, इस संपिड़न…
universe_center_wide ब्रह्माण्ड का केन्द्र कहाँ है? (9/13/2013) - सरल उत्तर है कि ब्रह्माण्ड का कोई केन्द्र नही है! ब्रह्माण्ड विज्ञान की मानक अवधारणाओं के अनुसार ब्रह्माण्ड का जन्म एक महाविस्फोट(Big Bang) मे लगभग 14 अरब वर्ष पहले हुआ था और उसके पश्चात उसका विस्तार हो रहा है। लेकिन इस विस्तार का कोई केण्द नही है, यह विस्तार हर दिशा मे समान है। महाविस्फोट…
इस चित्र मे हर प्रकाशित बिन्दु एक आकाशगन्गा है ब्रह्मांड का अंत कैसे होगा ? (3/5/2014) - वैज्ञानिक को “ब्रह्मांड की उत्पत्ति” की बजाय उसके “अंत” पर चर्चा करना ज्यादा भाता है। ऐसे सैकड़ों तरिके है जिनसे पृथ्वी पर जीवन का खात्मा हो सकता है, पिछले वर्ष रूस मे हुआ उल्कापात इन्ही भिन्न संभावनाओं मे से एक है। लेकिन समस्त ब्रह्मांड के अंत के तरिके के बारे मे सोचना थोड़ा कठिन है।…
fabric_of_space_warp गुरुत्विय तरंगो की खोज: महाविस्फोट(Big Bang), ब्रह्मांडीय स्फिति(Cosmic Inflation), साधारण सापेक्षतावाद की पुष्टि (3/24/2014) - Update :BICEP2 के प्रयोग के आंकड़ो मे त्रुटि पायी गयी थी। इस प्रयोग के परिणामो को सही नही माना जाता है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा सूर्य के आसपास उसके गुरुत्वाकर्षण द्वारा काल-अंतराल(space-time) मे लाये जाने वाली वक्रता के फलस्वरूप करती है। मान लिजीये यदि किसी तरह से सूर्य को उसके स्थान से हटा लिया जाता है तब पृथ्वी…
Universe ब्रह्माण्ड की 13 महत्वपूर्ण संख्यायें (7/29/2014) - इलेक्ट्रानिक्स फ़ार यु के अक्टूबर 2014 अंक मे प्रकाशित लेख कुछ संख्याये जैसे आपका फोन नंबर या आपका आधार नंबर अन्य संख्याओं से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। लेकिन इस लेख मे हम जिन संख्याओं पर चर्चा करेंगे वे ब्रह्मांड के पैमाने पर महत्वपूर्ण है, ये वह संख्याये है जो हमारे ब्रह्मांड को पारिभाषित करती है,…
humanbodytemp तापमान : ब्रह्माण्ड मे उष्णतम से लेकर शीतलतम तक (9/12/2014) - उष्ण होने पर परमाणु और परमाण्विक कण तरंगीत तथा गतिमान होते है। वे जितने ज्यादा उष्ण रहेंगे उतनी ज्यादा गति से गतिमान रहेंगे। वे जितने शीतल रहेंगे उनकी गति उतनी कम होगी। परम शून्य तापमान पर उनकी गति शून्य हो जाती है। इस तापमान से कम तापमान संभव नही है। यह कुछ ऐसा है कि…
Gravitational-lensing-B गुरुत्विय लेंस क्या होता है? (9/27/2014) - गुरुत्विय लेंस अंतरिक्ष में किसी बड़ी वस्तु के उस प्रभाव को कहते हैं जिसमें वह वस्तु अपने पास से गुज़रती हुई रोशनी की किरणों को मोड़कर एक लेंस जैसा काम करती है। भौतिकी  के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत की वजह से कोई भी वस्तु अपने इर्द-गिर्द के व्योम (“दिक्-काल” या स्पेस-टाइम) को मोड़ देती है और बड़ी वस्तुओं में यह मुड़ाव अधिक होता…
अंतरिक्ष से संबधित 25 अजीबोगरिब तथ्य जो आपको चकित कर देंगे (5/27/2015) - 1. अंतरिक्ष पुर्णत: निःशब्द है। ध्वनि को यात्रा के लिये माध्यम चाहिये होता है और अंतरिक्ष मे कोई वातावरण नही होता है। इसलिये अंतरिक्ष मे पुर्णत सन्नाटा छाया रहता है। अंतरिक्ष यात्री एक दूसरे से संवाद करने के लिये रेडियो तरंगो का प्रयोग करते है। 2. एक ऐसा भी तारा है जिसकी सतह का तापमान…
ब्रह्माण्ड का अंत : अब से 22 अरब वर्ष पश्चात (7/11/2015) - जो भी कुछ हम जानते है और उसके अतिरिक्त भी सब कुछ एक महाविस्फोट अर्थात बिग बैंग के बाद अस्तित्व मे आया था। अब वैज्ञानिको के अनुसार इस ब्रह्मांड का अंत भी बड़े ही नाटकीय तरिके से होगा, महाविच्छेद(The Big Rip)। ये नये सैद्धांतिक माडेल के अनुसार ब्रह्मांड के विस्तार के साथ, सब कुछ, आकाशगंगाओं से लेकर, ग्रह, तारे, परमाण्विक कण से लेकर काल-अंतराल (Space-Time)तक अंततः दृश्य से बाहर होने से पहले विदीर्ण हो जायेंगे! अभी से घबराने की बात नही है लेकिन इस महा-भयानक प्रलयंकारी घटना का प्रारंभ अब से 22 अरब वर्ष बाद होगा।
motion_2 ब्रह्माण्ड के बाहर क्या है? (8/12/2015) - मान ही लिजिये की आपके मन मे कभी ना कभी यह प्रश्न आया होगा कि ब्रह्माण्ड के बाहर क्या है? खगोलशास्त्री जानते है कि बिग बैंग के पश्चात से ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है, लेकिन यह विस्तार किसमे हो रहा है? किसी भी खगोल शास्त्री से आप यह प्रश्न पूछें, आपको एक असंतोषजनक उत्तर…
किसी घूर्णन करते हुये श्याम वीवर द्वारा घुर्णन अक्ष की दिशा मे इलेक्ट्रान जेट का उत्सर्जन किया जा सकता है, जिनसे रेडीयो तरंग उत्पन्न होती है। श्याम विवर: 10 विचित्र तथ्य (10/26/2015) - श्याम विवर या ब्लैक होल! ये ब्रह्मांड मे विचरते ऐसे दानव है जो अपनी राह मे आने वाली हर वस्तु को निगलते रहते है। इनकी भूख अंतहीन है, जितना ज्यादा निगलते है, उनकी भूख उतनी अधिक बढ़्ती जाती है। ये ऐसे रोचक विचित्र पिंड है जो हमे रोमांचित करते रहते है। अब हम उनके बारे…
supernova_artist_impression_624x351_beijingplanetarium_nocredit अब तक का सबसे ताकतवर सुपरनोवा ASASSN-15lh (1/17/2016) - खगोलविदों ने अब तक के सबसे ताक़तवर सुपरनोवा ASASSN-15lh की खोज की है। इस सुपरनोवा का मूल तारा भी काफ़ी विशाल रहा होगा- संभवतः हमारे सूर्य के मुक़ाबले 50 से 100 गुना तक बड़ा। इस फट रहे तारे/मृत्यु को प्राप्त हो रहे तारे को पहली बार बीते साल जून 2015 में देखा गया था लेकिन…
lanternanim प्रकाशगति का मापन (2/8/2016) - प्रकाशगति का मापन कैसे किया गया ? यह प्रश्न कई बार पुछा जाता है और यह एक अच्छा प्रश्न भी है। 17 वी सदी के प्रारंभ मे और उसके पहले भी अनेक वैज्ञानिक मानते थे कि प्रकाश की गति जैसा कुछ नही होता है, उनके अनुसार प्रकाश तुरंत ही कोई कोई भी दूरी तय कर…
गुरुत्वाकर्षण तरंग की खोज : LIGO की सफ़लता (2/12/2016) - लगभग सौ वर्ष पहले 1915 मे अलबर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein)ने साधारण सापेक्षतावाद का सिद्धांत(Theory of General Relativity) प्रस्तुत किया था। इस सिद्धांत के अनेक पुर्वानुमानो मे से अनुमान एक काल-अंतराल(space-time) को भी विकृत(मोड़) कर सकने वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगो की उपस्थिति भी था। गुरुत्वाकर्षण तरंगो की उपस्थिति को प्रमाणित करने मे एक सदी लग गयी और…
InformationTheory विश्व को बदल देने वाले 10 क्रांतिकारी समीकरण (2/26/2016) - विश्व के सर्वाधिक प्रतिभावान मस्तिष्को ने गणित के प्रयोग से ब्रह्माण्ड के अध्ययन की नींव डाली है। इतिहास मे बारंबार यह प्रमाणित किया गया है कि मानव जाति के प्रगति पर्थ को परिवर्तित करने मे एक समीकरण पर्याप्त होता है। प्रस्तुत है ऐसे दस समीकरण। 1.न्युटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम न्युटन का नियम बताता…
हर्टजस्प्रुंग-रसेल आरेख तारों की अनोखी दुनिया (3/5/2016) - लेखक -प्रदीप (Pk110043@gmail.com) आकाश में सूरज, चाँद और तारों की दुनिया बहुत अनोखी है। आपने घर की छत पर जाकर चाँद और तारों को खुशी और आश्चर्य से कभी न कभी जरुर निहारा होगा। गांवों में तो आकाश में जड़े प्रतीत होने वाले तारों को देखने में और भी अधिक आनंद आता है, क्योंकि शहरों…
gn-z11 GN-Z11: सबसे प्राचीन तथा सबसे दूरस्थ ज्ञात आकाशगंगा (3/11/2016) - लेख संक्षेप : GN-z11 यह एक अत्याधिक लाल विचलन(high redshift) वाली आकाशगंगा है जोकि सप्तऋषि तारामंडल मे स्थित है। वर्तमान जानकारी के आधार पर यह सबसे प्राचीन तथा दूरस्थ आकाशगंगा है। GN-z11 के प्रकाश के लालविचलन का मूल्य z=11.1 है जिसका अर्थ पृथ्वी से 32 अरब प्रकाशवर्ष की दूरी है। GN-z11 की जो छवि हम…
LIGO_GravityWaves_2 LIGO ने दूसरी बार गुरुत्वाकर्षण तरंग देखने मे सफ़लता पायी (6/16/2016) - वैज्ञानिको ने दूसरी बार गुरुत्वाकर्षण तरंगो को पकड़ने मे सफ़लता पायी है। गुरुत्वाकर्षण तरंगे काल-अंतराल(space-time) मे उत्पन्न हुयी लहरे है, ये लहरे दूर ब्रह्माण्ड मे किसी भीषण प्रलय़ंकारी घटना से उत्पन्न होती है। वैज्ञानिको ने पाया है कि ये तरंगे पृथ्वी से 1.4 अरब प्रकाशवर्ष दूर दो श्याम विवरो(black hole) के अर्धप्रकाशगति से टकराने से उत्पन्न…
antimatter-energy02 प्रतिपदार्थ(Antimatter) से ऊर्जा (11/3/2016) - प्रतिपदार्थ(Antimatter) से ऊर्जा के निर्माण का सिद्धांत अत्यंत सरल है। पदार्थ(matter) : साधारण पदार्थ जो हर जगह है। नाभिक मे धनात्मक प्रोटान और उदासीन न्युट्रान, कक्षा मे ऋणात्मक इलेक्ट्रान से निर्मित। प्रतिपदार्थ(Antimatter) : इसके गुणधर्म पदार्थ के जैसे ही है लेकिन इसका निर्माण करने वाले कणो का आवेश पदार्थ का निर्माण करने वाले कणो से…
vision-of-the-observable-universe-e1420559669915 ब्रह्मांड का व्यास उसकी आयु से अधिक कैसे है ? (11/7/2016) - ब्रह्मांड के मूलभूत और महत्वपूर्ण गुणधर्मो मे से एक प्रकाश गति है। इसे कई रूप से प्रयोग मे लाया जाता है जिसमे दूरी का मापन, ग्रहों के मध्य संचार तथा विभिन्न गणिति गणनाओं का समावेश है। और यह तो बस एक नन्हा सा भाग ही है। निर्वात मे प्रकाश की गति 299,792 किमी/सेकंड है, यह…
श्याम वीवर द्वारा गैस के निगलने से एक्रेरीशन डीस्क का निर्माण तथा एक्स रे का उत्सर्जन ब्लैक होल की रहस्यमय दुनिया (11/14/2016) - कृष्ण विवर(श्याम विवर) अर्थात ब्लैक होल (Black hole) अत्यधिक घनत्व तथा द्रव्यमान वाले ऐसें पिंड होते हैं, जो आकार में बहुत छोटे होते हैं। इसके अंदर गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि उसके चंगुल से प्रकाश की किरणों निकलना भी असंभव होता हैं। चूंकि यह प्रकाश की किरणों को अवशोषित कर लेता है, इसीलिए यह…

78 विचार “ब्रह्माण्ड : क्या ? क्यों ? कैसे ?&rdquo पर;

    • अभी दोनो सिद्धांत मे एकरूपता नही है। क्वांट्म सिद्धांत के अनुसार ग्रेविटान होना चाहिये, जबकि सापेक्षतावाद के अनुसार काल-अंतराल मे गुरुत्वाकर्षण से वक्रता आती है। दोनो भिन्न सिद्धांत है, दोनो गुरुत्वाकर्षण के मामले मे मेल नही खाते है।

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    • सौर मंडल का आकार निश्चित नही है, जिससे उसके व्यास के बार मे कहना कठीन है। सौर मंडल की सीमा किसे माना जाये यह भी कहना कठीन है, नेपच्युन अंतिम ग्रह है, लेकिन उसके बाद प्लूटो, सेडना माकेमाकी जैसे बौने ग्रह है। इसके अलावा हजारो अज्ञात पिंड हो सकते है। नेपच्युन के बाद हजारो ज्ञात अज्ञात धूमकेतु भी है।

      यदि हम नेपच्युन को सौर मंडल की सीमा माने तो सौर मंडल का व्यास 9.09 अरब किमी होगा।

      वायेजर 1 सौर मंडल के बाहर जा चुका है। वायेजर 2 अभी भी सौर मंडल के अंदर है।

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    • चन्द्रयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के एक अभियान व यान का नाम है। चंद्रयान चंद्रमा की तरफ कूच करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष यान है। इस अभियान के अन्तर्गत एक मानवरहित यान को २२ अक्टूबर, २००८ को चन्द्रमा पर भेजा गया और यह ३० अगस्त, २००९ तक सक्रिय रहा।

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    • प्राकृतिक मोती को समुद्री जीव सीप (नैकर) जन्म देता है। जिन सीपों के ऊपर मौलस्क का कठोर आवरण होता है, वे सभी मोती उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं। कभीकभार किसी सीप में छेद हो जाता है जिसके कारण रेत के कण सीप के अंदर घुस जाते हैं। तब सीप उस हानिकारक रेत कण से प्रतिकार हेतु कैल्शियम कार्बोनेट नामक पदार्थ का उत्सर्जन करता है। कैल्शियम कार्बोनेट उस रेत कण के ऊपर परत दर परत चढ़ता जाता हैं। धीरे-धीरे यह एक सुंदर सफेद रंग के गोले का रूप धारण करने लगता है, जोकि अंततः सुंदर एवं दुर्लभ मोती का रूप धारण कर लेता है। मोती एकमात्र ऐसा रत्न है, जिसे एक समुद्री जीव अपनें शरीर के अंदर जन्म देता है। मोती को अंग्रेजी में ‘पर्ल’ के नाम से जाना जाता है। पर्ल शब्द की उत्पत्ति लातिनी भाषा के शब्द ‘प्रीग्ल’ से हुई है, जिसका अर्थ गोलाकार होता है। आजकल मोतियों का निर्माण कृत्रिम ढंग से अत्यधिक मात्रा में होने लगा है। इसे ‘मोती की खेती’ (पर्ल कल्चर फॉर्मिंग) के नाम से जाना जाता है। इस ढंग से खेती होता है जिसमें सीप में छेद करके रेत कणों को प्रविष्ट करा दिया जाता है और उसके बाद कण पर कैल्शियम कार्बोनेट की परत जमने लगती है और आखिरकार मोती का रूप लेता है। कुछ ही दिनों के बाद सीप को चीरकर मोती को निकाल लिया जाता है। कृत्रिम ढंग से मोतियों का उत्पादन जापान में सबसे ज्यादा किया जा रहा है। बाज़ार में नकली मोतियों का भी प्रचलन है, जिसे सीप से नहीं बनाया जाता। बल्कि जिप्सम अथवा शीशे से बनाया जाता है।

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    • गुरुत्वाकर्षण से। जब भी कोई भी दो पिंड एक दूसरे के समीप होते होते है तब वे गुरुत्वाकर्षण से बंध जाते है और एक दूसरे की परिक्रमा शुरु कर देते है। इस परिक्रमा का बिंदु दोनो के मध्य एक ऐसा बिंदु होता है जिस पर दोनो का गुरुत्वाकर्षण संतुलित होता है, इसे गुरुत्व केंद्र कहते है।
      ग्रह और तारे के संदर्भ मे यह गुरुत्व केंद्र तारे के निकट या तारे के आंतरिक भाग मे होता है। जिससे ग्रह तारे की परिक्रमा करता है।

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    • पृथ्वी ही नही सभी ग्रह तारे अपनी धुरी पर घूर्णन करते है। यह प्रक्रिया ग्रह और तारे के जन्म से जुड़ी हुयी होती है। ग्रह और तारो का निर्माण धूल और गैस के विशाल बादल से होता है जिसमे यह बादल गुरुत्वाकर्षण से घूर्णन प्रारंभ कर देता है। यह बादल धीरे धीरे तारे और ग्रहों मे बदल जाता है। इस बादल के प्रारंभिक घूर्णन के कारण इससे बने ग्रह और तारे भी घूर्णन करते रहते है। इस कोणीय संवेग के संरक्षण का नियम(Law of conservation of angular momentum) भी कहते है।

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      • सूर्य या किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोल पिण्डों को ग्रह कहते हैं।
        तारे (Stars) स्वयंप्रकाशित (self-luminous) उष्ण गैस की द्रव्यमात्रा से भरपूर विशाल, खगोलीय पिंड हैं। इनका निजी गुरुत्वाकर्षण (gravitation) इनके द्रव्य को संघटित रखता है। मेघरहित आकाश में रात्रि के समय प्रकाश के बिंदुओं की तरह बिखरे हुए, टिमटिमाते प्रकाशवाले बहुत से तारे दिखलाई देते हैं।

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    • कण कैसे भार प्राप्त करते हैं, हिग्स कण इस संदर्भ में एक उत्तर प्रस्तुत करता है। भौतिकविदों ने परिकल्पना की कि करीब 13.7 बिलियन वर्ष पहले बिग बैंग के बाद जब ब्रह्माण्ड ठंडा हुआ, तब कणों के साथ हिग्स फील्ड बना।

      इस परिदृश्य के तहत, हिग्स फील्ड ब्रह्माण्ड में व्याप्त हो गया और जिस किसी कण ने इसके साथ पारस्परिक क्रिया की, हिग्स बोसन के ज़रिए उसे भार मिल गया। जितना ज्यादा उनमें पारस्परिक क्रिया हुई, वो उतने ज्यादा भारी बने। वो कण जो हिग्स फील्ड के साथ नहीं जुड़ते, वो बगैर भार के रह जाते हैं।

      “ये शहद के एक बड़े कुंड की भांति है,जैसे-जैसे कण इससे होकर गुज़रते हैं, उनकी गति प्रकाश की गति से कम होती है और ऐसा लगता है कि वो भार हासिल कर रहे हैं।”

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    • प्रकाश ऊर्जा का रूप है। तारो मे हायड्रोजन के संलयन से हिलीयम बनती है, इस प्रक्रिया मे कुछ पदार्थ ऊर्जा मे परिवर्तित होता है जिसका कुछ भाग प्रकाश के रूप मे मुक्त होता है। बल्ब मे ऊर्जा इलेक्ट्रान के गर्म होने पर फोटान के उत्सर्जन के रूप मे मुक्त होती है, जोकि प्रकाश ही है। इसी तरह की प्रक्रिया अग्नि मे भी होती है। यह एक सतत प्रक्रिया है और सारे ब्रह्मांड मे भिन्न भिन्न रूप मे चलते रहती है।

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    • परमाणु (एटम) किसी तत्व का सबसे छोटा भाग है जिसमें उस तत्व के रासायनिक गुण निहित होते हैं। परमाणु के केन्द्र में नाभिक (न्यूक्लिअस) होता है जिसका घनत्व बहुत अधिक होता है। नाभिक के चारो ओर ऋणात्मक आवेश वाले एलेक्ट्रान चक्कर लगाते रहते है.
      अणु पदार्थ का वह छोटा कण है तो प्रकृति के स्वतंत्र अवस्था में पाया जाता है लेकिन रासायनिक प्रतिक्रिया में भाग नहीं ले सकता है। रसायन विज्ञान में अणु दो या दो से अधिक, एक ही प्रकार या अलग अलग प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है।

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      • आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का (meteor) और साधारण बोलचाल में ‘टूटते हुए तारे’ अथवा ‘लूका’ कहते हैं। उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड (meteorite) कहते हैं। प्रायः प्रत्येक रात्रि को उल्काएँ अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं, किंतु इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या अत्यंत अल्प होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से इनका महत्व बहुत अधिक है क्योंकि एक तो ये अति दुर्लभ होते हैं, दूसरे आकाश में विचरते हुए विभिन्न ग्रहों इत्यादि के संगठन और संरचना (स्ट्रक्चर) के ज्ञान के प्रत्यक्ष स्रोत केवल ये ही पिंड हैं।

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