खगोल भौतिकी 26 :ब्रह्माण्डीय पृष्ठभूमी विकिरण और उसका उद्गम (THE COSMIC MICROWAVE BACKGROUND RADIATION AND ITS ORIGIN)


लेखिका याशिका घई(Yashika Ghai)

मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’ शृंखला के छब्बीसवें लेख मे हम बिग बैंग के प्रमाण अर्थात ब्रह्माण्डीय पृष्ठभूमी विकिरण(THE COSMIC MICROWAVE BACKGROUND RADIATION) की चर्चा करेंगे। 1978 मे इसकी खोज ने इसके खोजकर्ताओं को नोबेल पुरस्कार दिलवाया था। अब इस महान खोज के बारे मे कुछ आधारभूत जानकारी देखते है।

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ब्रह्मांड का आकार स्थिर नही है, इसका विस्तार हो रहा है, यह तथ्य 20 वी सदी की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण खोज है। इसका अर्थ यह भी होता है कि भूतकाल मे किसी समय ब्रह्मांड छोटा, घना और उष्ण रहा होगा। इस अत्याधिक घनत्व और तापमान की अवस्था मे ब्रह्माण्ड प्लाज्मा अवस्था मे रहा होगा जिसमे पदार्थ और विकिरण के मध्य ऊष्मीय संतुलन(thermal equilibrium) था। इस अवस्था मे कुछ भी घनीभूत होकर वर्तमान मे दृश्य परमाणुओं, अणुओं और पदार्थ का निर्माण नही कर सकता है। इसके पश्चात ब्रह्मांड का विस्तार हुआ, पदार्थ और विकिरण का तापमान कम हुआ। वर्तमान मे गणना के अनुसार ब्रह्मांड की आयु 13.7 अरब वर्ष है। लेकिन ब्रह्मांड के जन्म के पश्चात के आरंभिक 400,000 वर्ष मे कोई ऐसी अद्भूत घटना हुई। इस लेख मे हम उसी अद्भूत घटना और उस घटना के अवशेष प्रमाणो की चर्चा कर रहे है।

कमजोर पृष्ठभूमी विकिरण अनुसन्धान/आविष्कार

1965 मे बेल प्रयोगशाला(Bell Lab) के रेडीयो खगोलशास्त्री आर्नो पेन्जिआस(Arno Penzias) और राबर्ट विल्सन(Robert Wilson) मिलकर मंदाकिनी(milky way) आकाशगंगा के रेडीयो संकेतो का मानचित्र बनाने का प्रयास कर रहे थे। जब वे कृत्रिम उपग्रहों से प्रतिध्वनित संकेतो को प्राप्त करने वाले हार्न रेडीयो एंटीना को केलिब्रेट कर रहे थे तब उन्हे एंटीना से प्राप्त संकेतो मे एक स्थाई शोर मिल रहा था। यह स्थाई शोर रेडीयो वर्णक्रम के माइक्रोवेव भाग मे शक्तिशाली था। यह शोर वैज्ञानिको को एंटीना को अंतरिक्ष मे किसी भी दिशा मे घुमाने पर मिल रहा था, अर्थाय वे इस शोर को हर ओर से प्राप्त कर रहे थे। इसका अर्थ यह था कि यह शोर पृथ्वी या कृत्रिम उपग्रहों से ना होकर खगोलीय/ब्रह्मांडीय उद्गम से था। इसी शोर को हम ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण (THE COSMIC MICROWAVE BACKGROUND RADIATION) के नाम से जानते है।

यूरोपियन अंतरिक्ष संस्थान के प्लैंक उपग्रह द्वारा 2013 मे खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण का लिया चित्र, इस चित्र मे सूक्ष्म विचलन या अस्थिरता स्पष्ट है। An image of the cosmic microwave background radiation, taken by the European Space Agency (ESA)'s Planck satellite in 2013, shows the small variations across the sky.

यूरोपियन अंतरिक्ष संस्थान के प्लैंक उपग्रह द्वारा 2013 मे खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण का लिया चित्र, इस चित्र मे सूक्ष्म विचलन या अस्थिरता स्पष्ट है। An image of the cosmic microwave background radiation, taken by the European Space Agency (ESA)’s Planck satellite in 2013, shows the small variations across the sky.

ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण (CMB)क्या है ?

ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण (THE COSMIC MICROWAVE BACKGROUND RADIATION) का तापमान 2.7 K है और इसका वर्णक्रम किसी उष्मीय ब्लैक बाडी आरेख (thermal black body curve)का पालन करता है। अपने जन्म से वर्तमान अर्थात 13.7 अरब वर्ष तक ब्रह्मांड लगातार विस्तृत तथा शीतल हो रहा है। ब्रह्मांड के जन्म के 400,000 वर्ष बाद इसका तापमान गीर कर 3000 डीग्री सेल्सीयस हो चुका था। इस समय ब्रह्माण्ड मे सबसे सरल परमाणु बने और पदार्थ विकिरण ऊर्जा से अलग हुआ। इस समय जो प्रकाश उत्पन्न हुआ वह उस समय से ही अंतरिक्ष मे यात्रा कर रहा है और वही ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण है।

इस विकिरण को हम पृथ्वी पर या अंतरिक्ष मे हमारे हर ओर देख सकते है। इसे देखना अर्थात ब्रह्मांड के जन्म “बिग बैंग” के पश्चात की उत्तरदीप्ति(afterglow) को मापना है। हम 3000 डीग्री सेल्सीयस तापमान की उत्तरदीप्ति की बजाय इसे हम -270 डीग्री(3K)तापमान पर देखते है। तापमान मे यह कमी ब्रह्मांड के विस्तार से आई है जिससे इस विकिरण का तापमान कम हुआ है।

 

ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण तथा बिगबैंग सिद्धांत(CMB and the Big Bang Theory)

COBE द्वारा खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण का लिया चित्र।

COBE द्वारा खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण का लिया चित्र।

पदार्थ और विकिरण के विच्छेद से पहले ब्रह्मांड अत्यंत घना और उष्ण था, इस अवस्था वह हर प्रकार के विकिरण के लिये अपारदर्शी(opaque) था। पदार्थ और विकिरण के विच्छेद के पश्चात यह अपारदर्शी अवस्था से पारदर्शी अवस्था मे आया। इस अवस्था के अवशिष्ट विकिरण को ही हम आज ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण के रूप मे देखते है। 1992 मे COBE उपग्रह ने सारे आकाश का सर्वेक्षण कर ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण का मापन किया। COBE ने पाया कि यह विकिरण अंतरिक्ष मे समांगी(uniform) रूप से वितरीत है और इसका हर दिशा मे स्थिर तापमान है। अब प्रश्न उठता है कि जब ब्रह्मांड इतना समांगी था तो आज जो हम हम भिन्न संरचनाये जैसे तारे और ग्रह देखते है , वे कैसे निर्मित हुये ?

ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण पूरी तरह से समांगी(uniform) नही है, इसके तापमान मे सूक्ष्म अस्थिरता है, जोकि 100,000 मे एक भाग है। इसी सूक्ष्म विचलन या अस्थिरता के कारण आकाशगंगा/तारे और ग्रह बन पाये है। ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण यह बिग बैंग घटना का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस घटना के 13.7 अरब वर्ष पश्चात भी इस के अण्वेषण ब्रह्मांड के जन्म, आरंभ , विस्तार के साथ अन्य महत्वपूर्ण संबधित गतिविधियों के बारे मे जानकारी मिलती है।

लेखिका का संदेश

ब्रह्माण्डीय/खगोलीय पृष्ठभूमी विकिरण यह खगोलभौतिकी मे एक महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख के साथ हम इस शृंखला के अंतिम भाग तक पहुंच गये है। इस शृंखला के अंतिम चार लेखो मे हम कुछ सामान्य विषयो पर चर्चा करेंगे। हमारे साथ बने रहीये।

मूल लेख: THE COSMIC MICROWAVE BACKGROUND RADIATION AND ITS ORIGIN

लेखक परिचय

याशिका घई(Yashika Ghai)

संपादक और लेखक : द सिक्रेट्स आफ़ युनिवर्स(‘The secrets of the universe’)

लेखिका ने गुरुनानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर से सैद्धांतिक प्लाज्मा भौतिकी(theoretical plasma physics) मे पी एच डी किया है, जिसके अंतर्गत उहोने अंतरिक्ष तथा खगोलभौतिकीय प्लाज्मा मे तरंग तथा अरैखिक संरचनाओं का अध्ययन किया है। लेखिका विज्ञान तथा शोध मे अपना करीयर बनाना चाहती है।

Yashika is an editor and author at ‘The secrets of the universe’. She did her Ph.D. from Guru Nanak Dev University, Amritsar in the field of theoretical plasma physics where she studied waves and nonlinear structures in space and astrophysical plasmas. She wish to pursue a career in science and research.

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