खगोल भौतिकी 27 :सर्वकालिक 10 शीर्ष खगोलभौतिकी वैज्ञानिक (TOP 10 ASTROPHYSICISTS OF ALL TIME)


लेखक : ऋषभ
मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’ शृंखला अब समाप्ति की ओर है। इसके अंतिम कुछ लेखो मे हम खगोलभौतिकी के कुछ सामान्य विषयों पर चर्चा करेंगे। इस शृंखला के सत्ताइसवें लेख मे हम इतिहास मे जायेंगे और कुछ प्रसिद्ध खगोलभौतिक वैज्ञानिको(Astrophysicists) के बारे मे जानेंगे जिन्होने इस खूबसूरत विषय पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमने इस विषय से जुड़े 10 शीर्ष खगोलभौतिकी वैज्ञानिको की सूची बनाई है जिन्होने खगोलभौतिकी की दिशा बदल दी। ध्यान दिजिये कि इस सूची मे हमने खगोलशास्त्रीयों(Astronomers) और ब्रह्मांडवैज्ञानिको(Cosmologists) का समावेश नही किया है। लेख के अंत मे हमने कुछ उल्लेखनिय वैज्ञानिको का नाम दिया है।

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सर्वकालिक 10 शीर्ष खगोलभौतिकी वैज्ञानिक

10. मेघनाद साहा(Meghnad Saha)

योगदान: साहा का आयोनाईजेशन समीकरण( The Saha’s Ionization Equation)

मेघनाद साहा भारतीय खगोलभौतिकी वैज्ञानिक थे जिन्होने एक ऐसे समीकरण की व्युत्पत्ति दी जो उनके नाम पर है : साहा का आयोनाईजेशन समीकरण। इस समीकरण का प्रयोग तारों के वातावरण के अध्ययन के लिये किया जाता है। साहा पहले वैज्ञानिक थे जिन्होने तारे के वर्णक्रम का संबध उसके तापमान से जोड़ा था। खगोलभौतिकी(Astrophysics) और खगोलरसायन(Astrochemistry) मे उनका योगदान नींव का पत्थर है। साहा ने सौर किरणो(Solar rays) के भार और दबाव को मापने के लिये एक उपकरण का आविष्कार किया था। उनका हेली के धूमकेतू संबधित कार्य भी उल्लेखनीय है। यह खेद का विषय है कि पांच बार नामांकित होने के बावजूद वे नोबेल पुरस्कार से वंचित रहे।

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9. सेसीलीआ पेन-गेपोस्कीन(Cecilia Payne-Gaposchkin)

योगदान: तारों की संरचना

सेसीलिआ पेन एक ब्रिटिस-अमेरीकन खगोलशास्त्री और खगोलभौतिक वैज्ञानिक थी, जिन्होने उनके सहकर्मीयों के अनुसार भौतिकी मे सर्वश्रेष्ठ डाक्टरल शोधप्रबंध लिखा था। उन्होने अपने शोधप्रबंध मे प्रस्तावित किया था कि तारे मुख्यत: हायड्रोजन और हिलियम से बने होते है। इस शोधप्रबंध का महत्व शब्दो मे बयान नही किया जा सकता है। यह तथ्य है कि तारकीय खगोलभौतिकी(Stellar Astrophysics) की नींव ही इस शोधप्रबंध पर खड़ी है। तारकीय विकास(stellar evolution) का मान्य वर्तमान माडल इसी प्रस्तावित और प्रमाणित तथ्य पर आधारित है कि तारे हायड्रोजन और हिलियम से बने होते है। सेसीलीआ द्वारा प्रस्तावित यह शोधप्रबंध आरंभ मे अस्विकार कर दिया गया था क्योंकि यह उस समय की वैज्ञानिक सोच के अनुरूप नही था जो यह मानती थी कि पृथ्वी और सूर्य की संरचना मे कोई महत्वपूर्ण अंतर नही है।

अपने डाक्टरेट के पश्चात पेन ने मंदाकिनी(milky way) आकाशगंगा को समझने के लिये अत्याधिक दीप्ती वाले तारों का अध्ययन किया। उन्होने 10 परिमाण से अधिक दीप्तीमान सभी तारों का सर्वेक्षण किया। यह माना जाता है कि उन्होने अपने जीवन काल मे 30 लाख से अधिक तारों का अध्ययन किया। यही अध्ययन तारकीय विकासक्रम के माडल का आधार बना।

8. हार्लो शेपली(Harlow Shapely)

योगदान : मंदाकिनी (Milky Way)आकाशगंगा का आकार

जब भी आकाशगंगाओं की बात होती है तो हार्लो शेपली के योगदान को भूला नही जा सकता है। वे अमरीकन वैज्ञानिक थे और प्रिंसटन(Princeton) से स्नातक थे। उन्होने अपने कार्य का आरंभ सेफ़िड चर(Cepheid variables) तारों के अध्ययन से किया था। उनके मुख्य कार्यो मे सूर्य का आकाशगंगा मे विशिष्ट स्थान से विस्थापन था। उन्होने यह बताया था कि सूर्य एक औसत साधारण तारा है जो मंदाकिनी(Milkywat) आकाशगंगा के बाहरी क्षेत्र मे है। इस विस्थापन को पृथ्वी के सदीयो पुराने उस सिद्धांत से विस्थापन के तुल्य माना जाता है जिसमे माना जाता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र मे है और सारा ब्रह्मांड पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

26 अप्रैल 1920 को युनाईटेड स्टेस नेशनल अकेडमी आफ़ साईंस(United States National Academy of Sciences) मे हुई शेपली-कुर्टिस बहस(Shapely- Curtis debate) खगोलभौतिक विज्ञान के इतिहास मे एक मील का पत्थत है। एच कुर्टिस(H.Curtis) के साथ हुई यह बहस आकाशगंगा के बाह्य खगोल विज्ञान(extra-galactic astronomy) की शुरुवात थी। लेकिन शेपली की ब्रह्मांड मे दिखाई देनेवाले सर्पिलाकार(Spirals) आकृतियों संबधित मान्यता गलत थी। वे मानते थे कि ये सर्पिलाकार आकृतियाँ हमारी मंदाकिनी आकाशगंगा का ही भाग है। कुर्टिस और हब्बल ने प्रमाणित किया कि सर्पिलाकार आकृतियाँ अपने आप मे स्वतंत्र आकाशगंगाये है और हमारी आकाशगंगा से बाहर है।

7. एन्नी जंप केनन (Annie Jump Cannon)

योगदान: तारों का वर्णक्रम आधारित वर्गीकरण( Spectral Classification of Stars)

कभी आपने आकाश के अरबो खरबो से अधिक तारों के वर्गीकरण के बारे मे सोचा है ? यह आईडीया एक बधिर अमरीकन महिला वैज्ञानिक की देन है जिनका नाम है एन्नी जंप केनन। उन्होने खगोलभौतिकी का चेहरा बदल दिया और तारकीय खगोलभौतिकी को एक सैद्धांतिक आधार प्रदान किया।

1896 मे वे ’पिकरींग वुमन(Pickering’s Women)’ समूह का भाग बनी जोकि हार्वड वेधशाला(Harvard Observatory) के निदेशक द्वारा हेनरी ड्रेपर कैटेलाग(Henry Draper Catalogue) को पूरा करने के लिये नियुक्त की गई थी। हेनरी ड्रेपर कैटेलाग मे ब्रह्मांड मे 9 परिमाण से उपर के हर दृश्य तारे को मानचित्र मे अंकित करने की योजना थी। शीघ्र ही इस समूह की महिलाओं मे तारों के वर्गीकरण के आधार पर मतभेद उत्पन्न हो गये। हर महिला के पास एक अलग आइडीया था।
कैनन ने इसके लिये एक सर्वमान्य हल निकाला। उन्होने दक्षिणी गोलार्ध के दीप्तीमान तारों का अध्ययन आरंभ किया और इन तारों को अपनी स्वयं की तारा वर्गीकरण प्रणाली के आधार पर व्यवस्थित करना आरंभ किया। उन्होने हर तारे के वर्णक्रम का अध्ययन किया और उन्हे सात श्रेणीयों मे बांटा :: O,B,A,F,G,K तथा M वर्ग

यह भी पढ़े : तारों का वर्णक्रम के आधार पर वर्गीकरण

कैनन मे स्वयं ही किसी भी अन्य व्यक्ति से अधिक तारों का वर्गीकरण किया है, यह संख्या लगभग 350,000 तारों के है। उन्होने 300 चर तारे(variable), पांच नोवा(Nova) तथा एक स्पेक्ट्रोस्कोपिक युग्म(spectroscopic binary) तारा खोजा। उन्होने एक संदर्भग्रंथ सूची बनाई जिसमे 200,000 संदर्भ थे। उन्होने 1893 मे अपना प्रथम तारा खोजा था जिसकी पुष्टी 1905 तक नहे हो पाई थी। जब उन्होने तारों के केटेलाग पर कार्य करना आरंभ किया तो पहले तीन वर्षो मे उन्होने 1,000 तारों को वर्गीकृत किया। उसके बाद 1913 आते आते वह एक घंटे मे 200 तारों का वर्गीकरण करने लगी थी। उनका अनुभव इतना विस्तृत हो गया था कि वे वर्णक्रम को देखकर ही एक मिनट मे तीन तारों को वर्गीकृत करने मे सक्षम हो गई थी। उनका कार्य अत्याधिक सटीक होता था।

6. कार्ल जान्स्की(Karl Jansky)

योगदान : रेडीयो खगोलशास्त्र के जनक

कार्ल जान्सकी खगोलभौतिकी के कई अज्ञात रत्नो मे से एक है। वे अमरीकी भौतिक वैज्ञानिक थे जिन्होने रेडीयो खगोलशास्त्र की नींव रखी। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होने मंदाकिनी आकाशगंगा(Milky way) के केंद्र से आती रेडीयो तरंगो की खोज की थी।

जान्सकी रेडीयो इंजीनियर थे। उन्होने 20.5 MHz आवृत्ति की रेडीयों तरंगो को खोजने एक एंटीना बनाया था। उन्होने इस एंटीना को एक ऐसे टेबल पर रखा था कि वे उसे किसी भी दिशा मे घुमा सकते थे, इस एंटीना को “जान्सकी मेरी-गो-राउंड(Jansky’s merry-go-round)” नाम मिला था। इस एंटीना को घुमा कर वे रेडीयो तरंग के स्रोत की दिशा पता कर सकते थे। कई महिनो तक सभी दिशाओं से रेडीयो संकेतो को ग्रहण कर सूचीबद्ध करने के बाद जानस्की ने इन संकेतो को तीन वर्ग मे बांटा था: पास तड़ित वृष्टि(thunderstorms), दूर की तड़ित वृष्टि तथा एक हल्की सी अज्ञात स्रोत की रेडीयो तरंग। इस अज्ञात स्रोत रेडीयो तरंग की तीव्रता दिन मे एक बार बढ़ती और घटती थी, जिससे उन्होने आरंभिक अनुमान लगाया कि यह सूर्य की दिशा से आ रही है।

कुछ महीनों तक इस संकेत का पीछा करने के बाद इस संकेत का सबसे शक्तिशाली बिंदु सूर्य से दूर हट गया। जान्स्की ने यह भी पता लगा लिया था कि यह संकेत 23 घंटे और 56 मिनट के चक्र मे पुनरावर्ति करता है जोकि पृथ्वी के तारों के सापेक्ष एक पूर्ण घूर्णन(नक्षत्र दिन-sidereal day)के तुल्य है नाकि सूर्य के सापेक्ष पूर्ण घूर्णन(सूर्य दिवस/solar day) के। अपने इन निरीक्षणो को दृश्य खगोलीय मानचित्र से तुलना करने के पश्चात जानस्की ने पाया कि यह रेडीयो विकिरण मंदाकिनी आकाशगंगा से आ रहा है और यह आकाशगंगा के केंद्र की ओर धनु राशि(Sagittarius) की दिशा मे सबसे अधिक शक्तिशाली है।

उनकी इस खोज को बहुत प्रसिद्धि मिली। उनके सम्मान मे रेडीयो स्रोत की शक्ति की इकाई का नाम रखा गया है। चंद्रमा पर एक क्रेटर का नाम जान्स्की रखा गया है।

5. सुब्रमण्यन चंद्रशेखर(Subrahmanyan Chandrasekhar)

योगदान: चंद्रशेखर सीमा( The Chandrasekhar Mass Limit)

सुब्रमण्यन चंद्रशेखर नोबेल पुरस्कार विजेता सी वी रामण के भतिजे थे। वे भारतीय मूल के अमेरीकन खगोलभौतिकी वैज्ञानिक थे जिन्होने अपना अधिकतम करीयर संयुक्त राज्य अमरीका मे बिताया। चंद्रशेखर ने तारकीय खगोल भौतिकी क्षेत्र मे बहुत काम किया है। उनके कार्यो मे मुख्य अनुक्रम के बाद तारों के जीवन तथा श्वेत वामन, न्युट्रान तारों और ब्लैक होल के रूप मे मृत होने जैसे विषयों का समावेश है।

उन्होने भारत से भौतिकी मे स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी, उसके पश्चात भारत सरकार द्वारा प्रदत्त स्कालरशीप प्राप्त कर उच्च अध्ययन के लिये ट्रिनिटी(Trinity) कालेज चले गये। इंग्लैंड जाने के मार्ग मे चंद्रशेखर ने श्वेत वामन तारों मे डीजनरेट इलेक्ट्रान गैस की सांख्यकिय यांत्रिकी पर शोध किया और फ़ोव्लर(Fowler) के कार्यो मे सापेक्षतावाद संबधित सुधार किया। उन्होने स्थिर श्वेत वामन तारों के अधिकतम द्रव्यमान की मात्रा की गणना की। अब यह सीमा उनके नाम से ’चंद्रशेखर सीमा(Chandrasekhar Limit)’ के रूप मे जानी जाती है। इसका वर्तमान मूल्य 1.44 सौर द्रव्यमान माना जाता है। इससे अधिक द्रव्यमान होने पर श्वेत वामन संकुचित होकर न्यूट्रान तारा बन जायेगा। इस सीमा के सिद्धांत की एडींगटन(Eddington)ने कड़ी आलोचना की थी लेकिन एडींगटन बाद मे मान गये थे कि वे गलत थे। चंद्रशेखर को 1984 मे फ़ालर के साथ भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। उनके पुरस्कार की प्रस्तावना मे लिखा थ कि उन्हे भौतिकी का नोबेल पुरस्कार ” तारों की संरचना और विकास संबधित महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रियाओं के सैद्धांतिक अध्ययन के लिये” प्रदान किया जाता है।

4. एडवीन हबल(Edwin Hubble)

योगदान: हब्बल का नियम तथा आकाशगंगा बाह्य खगोलशास्त्र( Hubble’s Law And Extra-Galactic Astronomy)

एडवीन हब्बल का नाम खगोलशास्त्र और खगोलभौतिकी मे किसी परिचय का मोहताज नही है। शेपली के साथ हब्बल का आकशगंगाओं पर कार्य उल्लेखनीय है। 1921 मे हब्बल ने एक महत्वपूर्ण खोज की थी, उन्होने पाया था कि जो आकाशगंगा हमसे जितनी दूर है वह उतनी तेजी से हमसे दूर जा रही है। इस नियम को अब हबल का नियम कहते है। लेकिन इस नियम को सबसे पहल जार्ज लैमित्र(George Lemaitre) ने खोजा था जोकि एक पादरी थे। इसलिये हबल के नियम को हबल-लैमित्र नियम(Hubble-Lemaitre law) भी कहते है। इस नियम का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह सबसे पहला प्रमाण था जिसने यह बताया कि ब्रह्मांड का सतत विस्तार हो रहा है और यह नियम ही बिग बैंग सिद्धांत के समर्थन मे सबसे बड़ा और मजबूत प्रमाण है।

हब्बल ने ही यह तथ्य बताया था कि ब्रह्मांड केवल मंदाकिनी(Milky way) आकाशगंगा नही है, उसके बाहर भी बहुत कुछ है। हबल से पहले देव्यानी(Andromeda)आकाशगंगा, ट्राइन्गुलम(Triangulum) आकाशगंगा को हमारी ही मंदाकिनी आकाशगंगा मे ’निहारिका(‘nebulae)’ समझा जाता था। लेकिन हबल ने बताया कि ये अपने आप मे मंदाकिनी आकाशगंगा की तरह स्वतंत्र आकाशगंगाये है। इस खोज ने ब्रह्मांड संबधित सारी वैज्ञानिक धारणाओं मे आमूलचूल परिवर्तन ला दिया। हब्बल द्वारा हमारी आकाशगंगा के बाहर निहारिकाओं की खोज ने भविष्य के खगोलशास्त्रीयों के लिये एक नया मार्ग प्रशस्त किया। हब्बल ने आकाशगंगाओं के वर्गीकरण की प्रणाली भी बनाई जिसे हब्बल का ट्युनिंग फ़ार्क आरेख(Hubble’s tuning fork diagram) कहा जाता है।

यह भी पढ़े : आकाशगंगाये और उनका वर्गीकरण

उन्हे उस समय नोबेल पुरस्कार नही मिला, उस समय खगोलशास्त्र को भौतिकी की शाखा नही माना जाता था।

3. स्टीफ़न हाकिंग(Stephen Hawking)

योगदान: गुरुत्वीय सिंगुलरैटी प्रमेय तथा हाकिंग विकिरण( Gravitational Singularity Theorems And Hawking Radiation)

शीर्ष 10 खगोलभौतिक वैज्ञानिको मे स्टीफ़न हाकिंग का नाम अपरिहार्य है। वे बीसवीं सदी मे एक ऐसा नाम है जिसे परिचय की आवश्यकता नही है। हाकिंग के सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्यो मे रोजर पेनरोज के साथ प्रस्तावित गुरुत्वीय सिंगुलरैटी प्रमेय(gravitational singularity theorems) का समावेश होता है। उनका एक और महत्वपूर्ण कार्य हाकिंग विकिरण(Hawking radiation) है जोकि उन्ही के नाम पर है। हाकिंग ने ब्रह्मांड की व्याख्या के लिये सामान्य सापेक्षतावाद के सिद्धांत और क्वांटम यांत्रिकी को मिलाकर एक ग्रेंड युनिफ़ाईड थ्योरी बनाने की ओर कार्य किया था। वे क्वांटम यांत्रिकी के एकाधिक विश्व वाली अवधारणा(many-worlds interpretation) के प्रबल समर्थक थे।

हाकिंग के सबसे प्रसिद्ध कार्यो मे से एक ब्लैक होल एंट्रापी सूत्र (Black Hole entropy formula) है जिसे बेकेन्स्टाइन-हाकिंग सूत्र(Bekenstein-Hawking formula) के नाम से भी जाना जाता है। इसके अनुसार किसी ब्लैक होल की एन्ट्रापी उसके घटनाक्षितिज के क्षेत्रफ़ल के अनुपात मे होती है। इस समीकरण को उनकी कब्र पर उकेरा गया है। हाकिंग को नोबेल पुरस्कार नही मिला क्योंकि उनके सैद्धांतिक कार्यो का कोई प्रायोगिक प्रमाण नही है।

2. किप थोर्न(Kip Thorne)

योगदान : LIGO वेधशाला तथा गुरुत्वाकर्षण तरंगो का अन्वेषण(The LIGO Observatory And Detection of Gravitational Waves)

अब तक हमने जितने भी खगोलभौतिकी वैज्ञानिको की चर्चा की है वे या तो प्रायोगिक वैज्ञानिक थे या सैद्धांतिक वैज्ञानिक। अब हम दो ऐसे वैज्ञानिको की चर्चा कर रहे है जिन्हे इन दोनो पर महारत हासिल थी।

किप थोर्न भौतिकी नोबेल पुरस्कार विजेता है जोकि जान व्हीलर(John Wheeler) के छात्र और स्टीफ़न हाकिंग तथा कार्ल सागन(Carl Sagan) के मित्र रहे है। उन्होने 2017 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार मिला था जोकि LIGO वेधशाला के निर्माण और उसके द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंगो(gravitational waves) की खोज के लिये दिया गया था। उनका शोध कार्य मुख्यत: गुरुत्वाकर्षण भौतिकी(gravitational physics), सापेक्षिय खगोलभौतिकी(relativistic astrophysics) और गुरुत्चाकर्षण तरंगो पर केंद्रित रहा है। थोर्न के कार्य मे गुरुत्वाकर्षण तरंगो की शक्ति की गणना और उनका पृथ्वी पर अल्पकालिक हस्ताक्षर के निरिक्षण का समावेश रहा है। 1984 मे उन्होने LIGO की स्थापना मे वह सहसंस्थापक रहे जोकि दो स्थिर बिंदुओं के मध्य किसी हलचल को मापने के लिये था, इस तरह की हलचल केवल गुरुत्वाकर्षण तरंग ही उत्पन्न कर सकती है और इस तरह की किसी हलचल का सफ़ल निरीक्षण उनकी उपस्थिति को प्रमाणित करेगा।

थोर्न ने LIGO के इंजीनियरींग डीजाईन पर भी सहयोग दिया था, और डीजाईन मे LIGO की उन विशेषताओं के लिये सुझाव दिये थे जिन्हे प्रायोगिक आधार पर बनाया नही जा सकता था। इसके अलावा उन्होने तरंगो की पुष्टि के लिये आंकड़ो के विश्लेषण अल्गोरिदम पर भी सुझाव दिये थे। उन्होने LIGO के निर्माण के लिये सैद्धांतिक सहयोग दिया था, जिसमे ऐसे लक्ष्यो को पहचानना भी शामिल था जिनकी गुरुत्वाकर्षण तरंगो का निरीक्षण LIGO से किया जा सकता था। उन्होने LIGO की बीम ट्युब मे प्रकाश के प्रकिर्णन के नियंत्रण के लिये अवरोधको का भी डीजाईन किया था।

थोर्न ने सैद्धांतिक रूप से ऐसे वर्महोल(wormholes) की भविष्यवाणी की है जोकि काल-अंतरीक्ष(space-time) मे दो बिंदुओं के मध्य शार्टकट होंगे और उनके द्वारा अंतरखगोलीय यात्रा की जा सकेगी। इसे विज्ञान फ़तांशी फ़िल्म इंटरस्टेलर(Interstellar) मे दिखाया गया हओ। इसके अलावा उन्होने अन्ना झ्यत्कोव(Anna Zytkow) के साथ ऐसे लाल महाकाय तारों का पूर्वानुमान लगाया है जिसका केंद्रक न्यूट्रान तारे(neutron star cores) से बना होगा। इन्हे थोर्न-झ्यत्कोव पिंड(Thorne-Zytkow objects) कहा जाता है।

1. आर्थर एडिंगटन( Arthur Eddington)

योगदान: सामान्य सापेक्षतावाद का प्रथम प्रमाण तथा तारकीय विकास का सिद्धांत(First Proof of General Relativity And Theory of Stellar Evolution)


खगोलभौतिकी के इतिहास मे आर्थर एडिंगटन का नाम सबसे शीर्ष पर रखा जा सकता है। उन्हे अब तक का सबसे अधिक ऊर्जावान खगोलभौतिकी वैज्ञानिक माना जाता है। वे सैद्धांतिक और प्रायोगिक भौतिकी दोनो मे महारत रखते थे। उनके कार्यो को हम इन दोनो भागो मे बांट कर देखते है।

सैद्धांतिक कार्य

उस समय तारकीय/खगोलीय ऊर्जा का स्रोत पूरी तरह से अज्ञात था। हम यह नही जानते थे कि सूर्य और अन्य तारे किस तरह ऊर्जा उत्पन्न करते है। एडींगटन ने इस समस्या के सैद्धांतिक हल पर कार्य करना आरंभ किया। उन्होने तारो के अध्ययन मे भौतिकी और गणीत का प्रयोग किया। उन्होने अपने प्रसिद्ध शोधपत्र तारों की आंतरिक संरचना(The Internal Constitution of Stars) मे अनुमान लगाया कि तारों की ऊर्जा का स्रोत नाभिकिय संलयन(nuclear fusion) है जोकि उस समय मे प्रचलित विश्वास KH क्रियाविधि(KH mechanism) से हटकर था। बाद मे यह अनुमान सही प्रमाणीत हुआ। यह खोज इतनी क्रांतिकारी थी जिसका बयान शब्दो मे संभव नही है। इसी बिंदु से ही तारकीय खगोलभौतिकी(Stellar Astrophysics) का आरंभ होता है, इसी से तारकीय जीवन चक्र(stellar evolution) को समझा जा सकता है। एडींगटन ने सही अनुमान लगाया था कि तारों का आंतरिक तापमान करोड़ो केल्विन मे होना चाहिये। उन्होने की मुख्य अनुक्रम(main sequence) के तारों मे द्रव्यमान और दीप्ती(luminosity ) के मध्य संबध खोजा था। उन्होने दर्शाया था कि तारों के आंतरिक संतुलन मे गैस दबाव के साथ विकिरण दबाव(radiation pressure) की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

आईंस्टाइन और अन्य प्रमुख भौतिक शास्त्रीयों के साथ एडिंगटन ने भी ब्लैक होल के गणितिय आस्तित्व का विरोध किया था। इस विषय पर उनका भारतीय वैज्ञानिक सुब्रमण्यन चंद्रशेखर से गहरा विवाद भी हुआ था।

एडिंगटन की भूमिका सामान्य सापेक्षतावाद के अंतर्गत प्रथम पीढ़ी के ब्रह्मांडीय माडल(general relativistic cosmological models) के निर्माण मे भी थी। उनका मानना था कि आइंस्टाइन के स्थाई अवस्था(steady state) के ब्रह्माण्ड से वर्तमान के विस्तार करते ब्रह्मांड(expanding state) मे विकास के लिये ब्रह्मांडीय स्थिरांक(cosmological constant) की महत्वपूर्ण भूमिका रही होगी। उनका अधिकतर ब्रह्माडीय शोधकार्य ब्रह्मांडीय स्थिरांक के महत्व और गुणधर्मो के अध्ययन पर केंद्रित था। सापेक्षतावाद के गणितिय सिद्धांत मे एडिंगटन ने ब्रह्माण्डीय स्थिरांक की भूमिका को अपने आपको समयोजित करने की क्षमता माना था।

प्रायोगिक कार्य

एडिंगटन का सबसे महत्वपूर्ण प्रायोगिक कार्य सामान्य सापेक्षतावाद(General Relativity) का सत्यापन था। वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होने पूर्ण सूर्यग्रहण का फोटोग्राफ़ लिया था और दिखाया था कि तारे के प्रकाश मे वक्रता का मूल्य आइंस्टाईन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत द्वारा अनुमानिय मूल्य के समरूप है। इस खोज ने उन्हे विश्वपटल पर ला खड़ा किया और यह उनकी एक सबसे महत्वपूर्ण खोज भी थी।

एडिंगटन को सामान्य सापेक्षतावाद को सरल रूप से समझाने और लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होने सामान्य सापेक्षतावाद के सिद्धांत पर सरल अंग्रेजी मे ढेर सारे लेख लिखे। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान वैज्ञानिको के मध्य संचार टूट गया था और जर्मनी मे हो रहे नये शोधो के बारे मे शेष विश्व को कोई जानकारी नही थी।

उल्लेखनीय नाम

यह खगोलभौतिकी के शीर्ष दस वैज्ञानिको की सूची थी, इसमे खगोलशास्त्रीयों और ब्रह्मांड वैज्ञानिको का समावेश नही है। लेकिन कुछ खगोलभौतिकी वैज्ञानिकों का नाम उल्लेखनीय है और वे है राल्फ़ फ़ालर(Ralph Fowler), जयंत नार्लीकर(Jayant Narlikar),जान व्हीलर( John Wheeler), फ़्रेड हायल(Fred Hoyle), जोसेद फ़्राउनहोफ़र( Joseph Fraunhofer),हैन्स अल्फ़वेन( Hannes Alfven), कार्ल स्क्ववार्ज़चिल्ड( Karl Schwarzchild),एनार हर्त्ज़स्प्रंग( Ejnar Hertzsprung), अर्नो पेन्जिआस(Arno Penzias), हेनरी रसेल( Henry Russell),वाल्टर बाडे( Walter Baade),एलन गुथ( Alan Guth)तथा विज्ञान को लोकप्रिय बनाने वाले नील टाय्सन, मिचिओ काकू और कार्ल सागन।

लेखक का संदेश

हमने इस लेख को मूलभूत खगोलभौतिकी शृंखला मे एक विशेष कारण से जोड़ा है। यह कारण है कि जनता को इस क्षेत्र को दिशा देने वाले इन भौतिक वैज्ञानिको और खगोलभौतिक वैज्ञानिको को जानना चाहिये लेकिन बहुत कम लोग इन्हे जानते है। इनमे से अधिकतर का नाम लोकप्रिय विज्ञान की पुस्तको, वृत्तचित्रो और समाचारो मे नही आता है जबकि इन सबक योगदान वास्तविक और अतुल्य है। हमे इन लोगो को जानना चाहिये और इनके कार्यो और प्रयासो का सम्मान करते हुये प्रेरणा लेनी चाहिये।

मूल लेख : TOP 10 ASTROPHYSICISTS OF ALL TIME

लेखक परिचय

लेखक : ऋषभ

Rishabh Nakra

Rishabh Nakra

लेखक The Secrets of the Universe के संस्थापक तथा व्यवस्थापक है। वे भौतिकी मे परास्नातक के छात्र है। उनकी रूची खगोलभौतिकी, सापेक्षतावाद, क्वांटम यांत्रिकी तथा विद्युतगतिकी मे है।

Admin and Founder of The Secrets of the Universe, He is a science student pursuing Master’s in Physics from India. He loves to study and write about Stellar Astrophysics, Relativity, Quantum Mechanics and Electrodynamics.

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