2026 रसायन नोबेल पुरस्कार :हेनरी बी. कागन (Henri B. Kagan)और केन्सो सोआई (Kenso Soai)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज ने रसायन में 2026 का नोबेल पुरस्कार हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई को “असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस में नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज के लिए” देने का फ़ैसला किया है।

जब रसायन ने अपने ही जैसे अणुओं को बनाना सीख लिया

2026 का रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार : दर्पण-जैसे अणुओं की दुनिया में एक अद्भुत खोज

प्रकृति में एक विचित्र रहस्य छिपा है। हमारे हाथों की तरह कुछ अणु भी ऐसे होते हैं जिनके दो रूप एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं। देखने में दोनों बिल्कुल समान लग सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी भी तरह घुमाकर एक-दूसरे के ऊपर पूरी तरह नहीं रखा जा सकता। रसायन विज्ञान में इन्हें चिरल (Chiral) अणु कहा जाता है। जीवित संसार इस अंतर को बहुत गंभीरता से लेता है—हमारे शरीर में किसी दवा का एक दर्पण-रूप उपयोगी हो सकता है, जबकि दूसरा कम प्रभावी या बिल्कुल अलग जैविक प्रभाव वाला हो सकता है। इसलिए रसायनज्ञों के सामने लंबे समय से एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है—रासायनिक प्रतिक्रिया में दर्पण-रूपों में से केवल वांछित रूप को कैसे बनाया जाए? इसी चुनौती को समझने और नियंत्रित करने की दिशा में असाधारण योगदान के लिए फ्रांसीसी रसायनज्ञ हेनरी बी. कागान और जापानी रसायनज्ञ केन्सो सोआई को 2026 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उनका काम विशेष रूप से गैर-रेखीय प्रभाव (Non-linear effects) और असिमेट्रिक ऑटाकैटलिसिस (Asymmetric Autocatalysis) से जुड़ा है। पढ़ना जारी रखें 2026 रसायन नोबेल पुरस्कार :हेनरी बी. कागन (Henri B. Kagan)और केन्सो सोआई (Kenso Soai)

2026 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : कार्ल डाइसेरोथ (Karl Deisseroth), पीटर हेगेमैन (Peter Hegemann) और जॉर्ज नागेल (Georg Nagel)


चिकित्सा में 2026 का नोबेल पुरस्कार ‘ऑप्टोजेनेटिक्स’ के लिए दिया गया है — यह एक ऐसी तकनीक है जिससे यह पता लगाना संभव हो गया है कि जीवित मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाएं (nerve cells) यादों, भावनाओं और व्यवहारों को कैसे आकार देती हैं। पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल ने एक कोशिकीय शैवाल (single-celled alga) में ‘चैनलरोडोप्सिन’ (channelrhodopsin) नामक एक अद्भुत प्रोटीन की खोज की। कार्ल डेइसेरोथ ने इस प्रोटीन को तंत्रिका कोशिकाओं के लिए प्रकाश-नियंत्रित स्विच में बदल दिया। इन पुरस्कार विजेताओं ने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में एक नए युग की नींव रखी है। पढ़ना जारी रखें 2026 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार : कार्ल डाइसेरोथ (Karl Deisseroth), पीटर हेगेमैन (Peter Hegemann) और जॉर्ज नागेल (Georg Nagel)

माइकल फैराडे: प्रयोगशाला के उस जादूगर की कहानी जिसने बिजली को दुनिया की ताकत बना दिया


उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में बिजली और चुंबकत्व आज की तरह समझे हुए विज्ञान नहीं थे। बिजली कभी रहस्यमय चिंगारी थी, तो चुंबक एक विचित्र प्राकृतिक पदार्थ। यह स्पष्ट नहीं था कि बिजली और चुंबकत्व के बीच कोई गहरा संबंध है। इसी दौर में एक साधारण परिवार में जन्मे एक ऐसे व्यक्ति ने विज्ञान की दुनिया में कदम रखा, जिसके पास न विश्वविद्यालय की डिग्री थी, न किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान की औपचारिक शिक्षा। उसके पास था—असीम जिज्ञासा, प्रयोग करने का जुनून और प्रकृति को अपने हाथों से समझने की अद्भुत क्षमता।

उस व्यक्ति का नाम था माइकल फैराडे (Michael Faraday)।

फैराडे ने विद्युतचुंबकत्व और विद्युत-रसायन के क्षेत्र में ऐसे प्रयोग किए जिन्होंने आधुनिक विद्युत युग की नींव रखी। आज बिजली पैदा करने वाले जनरेटर, विद्युत मोटर, ट्रांसफॉर्मर और अनेक विद्युत उपकरण जिन सिद्धांतों पर काम करते हैं, उनमें फैराडे के प्रयोगों की केंद्रीय भूमिका है।

लेकिन फैराडे की कहानी केवल वैज्ञानिक खोजों की कहानी नहीं है। यह उस व्यक्ति की कहानी भी है जिसने औपचारिक शिक्षा की सीमाओं को पार कर अपनी जिज्ञासा और प्रयोगशीलता के बल पर विज्ञान के इतिहास में अमिट स्थान बनाया। पढ़ना जारी रखें माइकल फैराडे: प्रयोगशाला के उस जादूगर की कहानी जिसने बिजली को दुनिया की ताकत बना दिया

पॉल डिराक:  वैज्ञानिक जिसने गणित में छिपे ब्रह्मांड को खोजा


बीसवीं शताब्दी की भौतिकी में कुछ वैज्ञानिक ऐसे हुए जिन्होंने केवल नई खोजें नहीं कीं, बल्कि यह बदल दिया कि हम प्रकृति को देखने और समझने का तरीका क्या होना चाहिए। पॉल एड्रियन मौरिस डिराक (Paul Adrien Maurice Dirac) उन्हीं महान वैज्ञानिकों में से एक थे।

डिराक का नाम क्वांटम यांत्रिकी, सापेक्षता, एंटीमैटर और आधुनिक क्वांटम फील्ड थ्योरी के विकास के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया है। उनकी सबसे अद्भुत विशेषता यह थी कि वे प्रकृति के बारे में भौतिक कल्पनाओं की अपेक्षा गणितीय संरचना और उसकी सुंदरता पर अधिक भरोसा करते थे।

उनका प्रसिद्ध विचार था कि किसी भौतिक सिद्धांत की सुंदरता केवल सजावट नहीं है; वह इस बात का संकेत हो सकती है कि सिद्धांत प्रकृति की वास्तविक संरचना के करीब है।

शांत स्वभाव का असाधारण वैज्ञानिक
पॉल डिराक का जन्म 8 अगस्त 1902 को ब्रिस्टल, इंग्लैंड में हुआ था।

उनका बचपन और शिक्षा सामान्य अर्थों में असाधारण वैज्ञानिक बनने की तैयारी जैसी नहीं दिखती थी। उन्होंने पहले इंजीनियरिंग का अध्ययन किया और बाद में गणित की ओर आकर्षित हुए। धीरे-धीरे उनकी रुचि उस समय विकसित हो रही नई क्वांटम भौतिकी की ओर चली गई।

डिराक अत्यंत शांत, कम बोलने वाले और अंतर्मुखी व्यक्ति माने जाते थे। वे अनावश्यक बातचीत पसंद नहीं करते थे। उनके बारे में वैज्ञानिक समुदाय में यह धारणा प्रसिद्ध थी कि यदि उनके पास कहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण न हो, तो वे चुप रहना पसंद करते थे।

लेकिन जब वे गणितीय समीकरण लिखते थे, तो वही शांत व्यक्ति प्रकृति के सबसे गहरे रहस्यों को व्यक्त कर देता था। पढ़ना जारी रखें पॉल डिराक:  वैज्ञानिक जिसने गणित में छिपे ब्रह्मांड को खोजा

ड्रैगन की धरती पर विज्ञान का उदय


दक्षिण अमरीकी सभ्यताओं की अद्भुत यात्रा समाप्त होने के बाद उस रात वातावरण में एक गहरी शांति थी। चंद्रमा की हल्की रोशनी आँगन में फैल रही थी। गार्गी और अनुषा अभी भी माया और इंका सभ्यताओं के रहस्यों में डूबी हुई थीं। मैं उनके चेहरों पर उस जिज्ञासा को देख रहा था जो किसी भी सभ्यता के असली ज्ञान का प्रारंभ होती है।

“ताऊजी,” अनुषा ने धीरे से पूछा, “क्या दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इतना ही अद्भुत विज्ञान विकसित हुआ था?”

मैं मुस्कुराया, “हाँ, और अब हम जिस सभ्यता की यात्रा करने जा रहे हैं, वह तो और भी गहरी और निरंतर विकसित होने वाली थी, प्राचीन चीन।”

गार्गी ने उत्सुकता से पूछा, “पापा, क्या भारत और चीन का संपर्क बहुत पुराना है?” मैंने मुस्कुराकर कहा, “हाँ बेटा, इतना पुराना कि ज्ञान, धर्म और यात्राएँ दोनों सभ्यताओं के बीच पुल बन गई थीं। क्या तुमने चीनी यात्री Xuanzang का नाम सुना है? भारत में उन्हें युआन स्वांग या ह्वेनसांग भी कहा जाता है।”

अनुषा ने तुरंत पूछा, “क्या वे सच में इतने दूर चीन से भारत आए थे?”

मैंने सिर हिलाते हुए कहा, “हाँ, सातवीं शताब्दी में उन्होंने हजारों किलोमीटर की कठिन यात्रा की, उनकी यह यात्रा पहाड़ों, रेगिस्तानों और खतरनाक रास्तों को पार करते हुए भारत आई थी। उनका उद्देश्य केवल यात्रा करना नहीं था, बल्कि भारत के ज्ञान, विश्वविद्यालयों और बौद्ध ग्रंथों को समझना था। उन्होंने यहाँ के विद्वानों से संवाद किया, गणित, दर्शन, खगोलशास्त्र और चिकित्सा से जुड़े ज्ञान को देखा, और विशेष रूप से प्राचीन विश्वविद्यालयों में अध्ययन किया।”

गार्गी ने आश्चर्य से पूछा, “क्या वे यहाँ पढ़ने आए थे?”

मैंने कहा, “एक तरह से हाँ। उन्होंने भारत में लंबे समय तक रहकर ज्ञान अर्जित किया और फिर उसे चीन लेकर गए। उन्होंने भारत की वैज्ञानिक और बौद्धिक परंपराओं का विस्तृत विवरण लिखा, जिससे चीन को भारत की शिक्षा और विज्ञान के बारे में बहुत कुछ पता चला।

अनुषा ने धीरे से पूछा, “तो क्या चीन में विज्ञान का विकास भारत से जुड़ा था?”

मैंने आकाश की ओर देखते हुए उत्तर दिया, “ज्ञान कभी सीमाओं में बंद नहीं रहता। भारत और चीन दोनों ने एक-दूसरे से सीखा। युआन स्वांग की यात्रा हमें यह बताती है कि सभ्यताओं का विकास केवल अपने भीतर नहीं होता, बल्कि संवाद, यात्राओं और जिज्ञासा से होता है। और इसी से शुरू होती है हमारी अगली यात्रा, प्राचीन चीन में विज्ञान के उदय की कहानी, जहाँ तारों का अध्ययन, गणित की सूक्ष्मता और प्रकृति को समझने की अद्भुत जिज्ञासा धीरे-धीरे एक महान वैज्ञानिक परंपरा का रूप लेने लगी।”

गार्गी की आँखों में चमक आ गई, “क्या वहाँ भी खगोलशास्त्र और गणित उतना ही उन्नत था?”

मैंने उत्तर दिया, “केवल उन्नत ही नहीं, बल्कि व्यवस्थित, व्यावहारिक और दीर्घकालिक प्रभाव वाला भी। सबसे पहले हमें चीन की शुरुआत को समझना होगा। चीन की सभ्यता का उदय ह्वांग हो (पीली नदी) और यांग्त्ज़े नदी के किनारे हुआ। ये नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं थीं, बल्कि विज्ञान के जन्मदाता भी थीं। हर वर्ष आने वाली बाढ़ ने लोगों को मजबूर किया कि वे प्रकृति के नियमों को समझें। ”

अनुषा ने पूछा, “क्या यही विज्ञान की शुरुआत थी?”

“हाँ,” मैंने कहा, “विज्ञान अक्सर आवश्यकता से जन्म लेता है। प्राचीन चीनी लोगों ने देखा कि बाढ़ एक निश्चित चक्र में आती है। उन्होंने समय को मापना शुरू किया, ऋतुओं का अध्ययन किया, और धीरे-धीरे खगोलशास्त्र की ओर बढ़े।”

गार्गी ने उत्सुकता से पूछा, “ये तो हमने मिस्र, मेसोपोटामिया सभ्यता में भी देखा था, तो क्या चीनी लोगों ने भी कैलेंडर बनाया?”

“बिलकुल,” मैंने उत्तर दिया, “और वह केवल समय बताने का साधन नहीं था, बल्कि कृषि और शासन का आधार भी था।”

“चीन की सबसे प्रारंभिक राजवंशों में शिया और शांग का नाम आता है,” मैंने आगे कहा। “इन कालों में खगोलशास्त्र का प्रारंभिक विकास हुआ। शांग काल के लोग आकाश को देवताओं का क्षेत्र मानते थे, लेकिन वे उसे केवल पूजा नहीं करते थे, वे उसे समझने की कोशिश भी करते थे। उन्होंने सूर्य और चंद्रमा की गतियों का अवलोकन किया। ग्रहणों का अध्ययन किया गया। यह केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था।” पढ़ना जारी रखें ड्रैगन की धरती पर विज्ञान का उदय

रोमन सभ्यता: इंजीनियरिंग की ज्यामिति


संध्या का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल चुकी थी और घर की छत पर ठंडी हवा बह रही थी। मैं कुर्सी पर बैठा था, और मेरी पुत्री गार्गी और भतीजी अनुषा, मेरे पास आकर बैठ गईं। उनके हाथों में वही पुरानी नोटबुक थी जिसमें वे सभ्यताओं की कहानियाँ लिखती थीं।

“पापा,” गार्गी ने उत्सुकता से पूछा, “आपने हमें यूनान के वैज्ञानिकों, पायथागोरस, अरस्तू और टॉलेमी के बारे में बताया था। अब आगे क्या हुआ? क्या रोमनों ने भी गणित और विज्ञान को आगे बढ़ाया?”

मैं मुस्कुराया। “यही तो आज की कहानी है,” मैंने कहा। “आज हम जानेंगे कि कैसे यूनान की ज्ञान-परंपरा ने रोमन साम्राज्य में प्रवेश किया और वहाँ एक नए रूप में विकसित हुई।”

अनुषा ने तुरंत पूछा, “क्या रोमनों ने नए सिद्धांत बनाए, या सिर्फ यूनानियों की नकल की?”

मैंने धीरे से उत्तर दिया, “यही समझना सबसे रोचक है। रोमनों ने शायद यूनानियों की तरह गहरे सैद्धांतिक गणित का विकास नहीं किया, लेकिन उन्होंने विज्ञान को व्यवहारिक जीवन में उतारने की कला विकसित की और यही उनकी सबसे बड़ी देन है।”

आकाश में धीरे-धीरे तारे चमकने लगे थे। मैंने ऊपर देखते हुए कहा, “जब यूनान में टॉलेमी ब्रह्मांड का मॉडल बना रहे थे, उसी समय रोम एक विशाल साम्राज्य के रूप में उभर रहा था। उनका ध्यान केवल सिद्धांतों पर नहीं था, वे सड़कों, पुलों, जलसेतुओं और सैन्य संरचनाओं पर केंद्रित थे।”

गार्गी ने कहा, “मतलब उनका विज्ञान अधिक ‘प्रैक्टिकल’ था?”

“बिल्कुल,” मैंने कहा। “जहाँ यूनानियों ने पूछा ‘यह क्यों होता है?’, वहीं रोमनों ने पूछा ‘इसे हम कैसे उपयोग कर सकते हैं?’”

मैंने कहानी को आगे बढ़ाया, रोमन सभ्यता में विज्ञान का विकास किसी एक व्यक्ति या एक ग्रंथ के कारण नहीं हुआ, बल्कि यह उनके व्यावहारिक जीवन की आवश्यकताओं से उत्पन्न हुआ। जब रोम एक छोटे नगर से एक विशाल साम्राज्य में बदल रहा था, तब उसे सड़कों, जल-प्रबंधन, सैन्य योजना और प्रशासन के लिए गणित और विज्ञान की आवश्यकता थी।

अनुषा ने पूछा, “क्या उन्होंने खुद गणित विकसित किया?”

मैंने उत्तर दिया, “कुछ हद तक, लेकिन उन्होंने अधिकतर ज्ञान यूनान से लिया और उसे अपने तरीके से ढाला। उदाहरण के लिए, उन्होंने यूनानी ज्यामिति का उपयोग कर  सटीक निर्माण तकनीकें विकसित कीं।”

गार्गी ने अपनी नोटबुक खोलते हुए पूछा, “पापा, क्या रोमन संख्या प्रणाली उन्नत थी?”

मैंने थोड़ा गंभीर होकर कहा, “यही वह जगह है जहाँ रोमन गणित की कमजोरी सामने आती है।”

मैंने जमीन पर उंगली से लिखते हुए कहा, I, V, X, L, C, D, M

“यह है रोमन संख्या प्रणाली,” मैंने समझाया।

अनुषा ने तुरंत कहा, “स्कूल में पढ़ा था लेकिन इसमें तो जोड़-घटाना मुश्किल होगा!”

“बिल्कुल,” मैंने कहा। “यही कारण है कि रोमनों ने जटिल गणितीय सिद्धांत विकसित नहीं किए। उनकी संख्या प्रणाली स्थानमान (place value) पर आधारित नहीं थी, जो कि बाद में भारत में विकसित हुआ था।”

गार्गी ने उत्साहित होकर कहा, “मतलब भारतीय शून्य और दशमलव ने बाद में गणित को आगे बढ़ाया!”

मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया, “हाँ, लेकिन वह कहानी हम आगे सुनेंगे।”

हवा थोड़ी तेज़ हो गई थी। मैंने अपनी आवाज़ को थोड़ा ऊँचा किया, “रोमन सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत थी, उनकी इंजीनियरिंग।”

मैंने कहा, “उन्होंने ऐसे-ऐसे निर्माण किए जो आज भी खड़े हैं। जैसे कोलोसियम, विशाल जलसेतु (Aqueducts), और सैकड़ों किलोमीटर लंबी सड़कें।”

अनुषा ने आश्चर्य से पूछा, “इतनी सटीकता कैसे संभव थी?”

“ज्यामिति,” मैंने उत्तर दिया। “उन्होंने त्रिभुजों, कोणों और मापों का उपयोग करके संरचनाएँ बनाई। भले ही उन्होंने नए प्रमेय नहीं खोजे, लेकिन उन्होंने पुराने सिद्धांतों को अद्भुत स्तर तक लागू किया।”

गार्गी ने आसमान की ओर देखते हुए पूछा, “तो क्या रोमनों ने खगोल विज्ञान में कुछ नया किया?”

मैंने उत्तर दिया, “रोमनों का खगोल विज्ञान मुख्यतः यूनानी परंपरा पर आधारित था। उन्होंने टॉलेमी के भूकेन्द्रीय (Geocentric) मॉडल को अपनाया, जिसमें पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र माना गया था।”

अनुषा ने पूछा, “क्या उन्होंने इसे चुनौती नहीं दी?”

“नहीं,” मैंने कहा, “रोमन वैज्ञानिक अधिकतर ज्ञान के संरक्षक (preservers) थे, वे नवप्रवर्तक (innovators) नही थे।” पढ़ना जारी रखें रोमन सभ्यता: इंजीनियरिंग की ज्यामिति