2021 रसायन नोबेल पुरस्कार :बेजामिन लिस्ट तथा डेविड मैकमिलन


वर्ष 2021 का रसायन नोबेल पुरस्कार बेजामिन लिस्ट(Benjamin List) तथा डेविड मैकमिलन(David W.C. MacMillan) को दिया गया है। पढ़ना जारी रखें 2021 रसायन नोबेल पुरस्कार :बेजामिन लिस्ट तथा डेविड मैकमिलन

2021 भौतिकी नोबेल पुरस्कार : सुकोरो मनाबे , क्लाउस हैसलमेन तथा जिओर्जिओ परीसी


पृथ्वी का वातावरण एक ऐसी ही अत्याधिक जटिल प्रणालीयों मे से एक है। मनाबे और हाइसेलमन ने वातावरण के भौतिक गणितीय माडेल के निर्माण मे महत्वपूर्ण क्रांतिकारी आरंभिक नींव निर्माण का कार्य किया है। परीसी ने जटिल प्रणाली सिद्धांत संबधित अनेक समस्याओं के हल के लिए सैद्धांतिक समाधानों पर कार्य किया है।

सुकीरों मनाबे ने दर्शाया कि वातावरण मे कार्बन डाई आक्साइड की बड़ी हुई मात्रा से पृथ्वी की सतह पर तापमान बढ़ा है। 1960 के दशक मे उन्होंने पृथ्वी के वातावरण के माडेल के निर्माण कार्य मे योगदान दिया और वे विकिरण संतुलन और उसके द्वारा वायु द्रव्यमान के ऊर्ध्वाधर स्थानांतरण के मध्य सम्बद्ध खोजने वाले पहले व्यक्ति थे। उनके इस कार्य से मौसमी माडेल निर्माण की नींव का निर्माण हुआ।

इसके दस वर्ष पश्चात क्लाउस हाइसेलमन वातावरण और मौसम को जोड़ने वाला माडेल बनाया। इस माडेल ने दर्शाया कि किस तरह से वातावरण के अव्यवस्थित और अराजक होने के बावजूद मौसमी माडल मे मे बदलाव की गणना की जा सकती है और सटीक पूर्वानुमान लगाए जा सकते है। उन्होंने ऐसी विधियों की खोज की जिसके द्वारा मौसम मे प्राकृतिक तथा मानवीय हस्तक्षेप द्वारा पड़ने वाले विशिष्ट संकेतों और हस्ताक्षरों को पहचाना जा सकता है। उनकी इन्ही विधियों से प्रमाणित किया गया कि पृथ्वी पर बढ़ते तापमान के लिए मानव द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाई आक्साइड उत्तरदाई है।

1980 के आसपास जिओर्जिओ परीसी ने जटिल प्रणालियों मे छुपे हुए पैटर्न की खोज की। उनकी खोज जटिल प्रणाली सिद्धांत के अध्ययन मे सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनकी खोजो के द्वारा किसी पूर्णत: अव्यवस्थित जटिल पदार्थ या घटना को समझना और उससे संबधित भिन्न भिन्न कारकों की व्याख्या संभव हुई है। इन खोजों का प्रयोग भौतिकी के अतिरिक्त अन्य क्षेत्र जैसे गणित, जीव विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान और मशीन लर्निंग होता है। पढ़ना जारी रखें 2021 भौतिकी नोबेल पुरस्कार : सुकोरो मनाबे , क्लाउस हैसलमेन तथा जिओर्जिओ परीसी

2021 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार :डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन


वर्ष 2021 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कारों का ऐलान सोमवार 4 अक्टूबर 2021 को किया गया है। इस बार को यह पुरस्कार डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन को मिला है।
ऊष्मा, शीत और स्पर्श संबधित हमारी संवेदनायें हमारे जीवन के लिए अत्यावश्यक है। इन्ही के द्वारा हम अपने आसपास के विश्व को महसूस करते है। अपने रोजमर्रा के जीवन मे हम इन संवेदनाओ को हम बहुत आसानी से लेते है लेकिन हमारा तंत्रिका तंत्र इन को किस तरह से समझता है, वह तापमान और दबाव को किस तरह से महसूस करता है ? इस वर्ष के चिकित्सा नोबेल पुरस्कार विजेताओ ने इस प्रश्न का उत्तर दिया है।

डेविड जूलियस ने मिर्च मे पाए जाने वाले एक रसायन कैप्साइसीन का प्रयोग किया, कैप्साइसीन त्वचा मे जलन उत्पन्न करता है। इस रसायन के प्रयोग से से डेविड ने हमारी त्वचा मे एक ऊष्मा महसूस करने वाले तंत्रिका तंत्र के सिरे का पता लगाया। अरडेम पेटापुटीन ने दबाव कोशिकाओ के प्रयोग से त्वचा मे यांत्रिकी दबाव महसूस करने वाली एक नई तरह की तंत्रिकाओं का पता लगाया। इन क्रांतिकारी खोजों से हमारी तंत्रिका तंत्र द्वारा ऊष्मा , शीत और यांत्रिकी दबाव के महसूस करने की प्रक्रिया को समझने मे मदद की है। इन वैज्ञानिकों ने हमारी संवेदना और आसपास के वातावरण के मध्य चल रही जटिल प्रक्रियाओ को समझने मे बिखरी कडीयो को जोड़ा है। पढ़ना जारी रखें 2021 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार :डेविड जूलियस और अरडेम पेटापुतीन

पेगासस : स्पाइवेयर क्या है ?


स्पाइवेयर मालवेयर का एक प्रकार है जो कंप्यूटर पर इंस्टॉल किया जाता है और उपयोगकर्ताओं की गैर-जानकारी में उनके बारे में सूचनाएं एकत्र किया करता है। स्पाइवेयर की उपस्थिति आमतौर पर उपयोगकर्ताओं से छिपी होती है। विशिष्ट रूप से, स्पाइवेयर चुपके से उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत कंप्यूटर पर इंस्टॉल किया जाता है। हालांकि, कभी कभी, कीलॉगर्स जैसे स्पाइवेयर साझा, कॉर्पोरेट, या सार्वजनिक कंप्यूटर के मालिक द्वारा भी इंस्टॉल किये जाते हैं ताकि गुप्त रूप से अन्य उपयोगकर्ताओं की निगरानी की जा सके।
स्पाइवेयर शब्द से पता चलता है कि यह एक सॉफ्टवेयर है जो उपयोगकर्ता के कंप्यूटर पर गुप्त रूप से निगरानी रखता है, जबकि स्पाइवेयर का काम महज निगरानी से भी कहीं ज्यादा है। स्पाइवेयर विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करता है, जैसे कि इंटरनेट सर्फिंग की आदतें और जिन साइटों पर जाया जाता है वह जानकारी। मगर, स्पाइवेयर अतिरिक्त सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करके और वेब ब्राउज़र को पुनःनिर्देशित करने जैसे अन्य तरीकों से उपयोगकर्ता के कंप्यूटर के नियंत्रण में भी हस्तक्षेप कर सकता है। कुछ स्पाइवेयर को कंप्यूटर सेटिंग्स को बदलने के लिए जाना जाता है, जिससे कनेक्शन की गति, अलग-अलग होमपेज की गति और/या इंटरनेट और/या अन्य प्रोग्रामों की कार्यक्षमता धीमी हो जाती है।
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चंद्रमा : सुपर मून, ब्लड मून, ब्ल्यू मून और चंद्र ग्रहण


26 मई 2021 को चंद्र ग्रहण है, इस चंद्र ग्रहण को क्यों कहा जा रहा है सुपर ब्लड मून ?

26 मई को चंद्र ग्रहण के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में सुपर ब्लड मून दिखाई देगा। ये एक अनोखी घटना होती है जब चंद्र ग्रहण लगेगा और हमें ब्लड मून यानी लाल रंग का चांद दिखाई देगा। 26 मई को पूरा चांद पृथ्वी की छाया में चला जाएगा। और जब वो हमारे ग्रह की छाया में नहीं होगा, वो पहले से बड़ा और चमकदार दिखेगा।

ये साल 2021 का दूसरा सुपर मून है। पहला सुपर मून 26 अप्रैल को देखा गया था। आंशिक चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर शुरू होकर 6 बजकर 22 मिनट तक चलेगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण पश्चिमी उत्तर अमेरिका, पश्चिमी दक्षिण अमेरिका और पूर्वी एशिया में देखा जा सकेगा। इसी दौरान 14 से 15 मिनट के लिए ब्लड मून नज़र आएगा। पढ़ना जारी रखें चंद्रमा : सुपर मून, ब्लड मून, ब्ल्यू मून और चंद्र ग्रहण

अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन


अपोलो 11 मिशन के क्रू सदस्य रहे अंतरिक्षयात्री माइकल कोलिंस का निधन हो गया है। उन्होंने 28 अप्रैल को आख़िरी सांस ली। 90 वर्षीय कोलिंस के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कोलिंस के परिवार ने बताया, “वो लंबे समय से कैंसर से बड़ी बहादुरी से लड़ रहे थे लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने आख़िरी दिन शांति से अपने परिवार के साथ बिताए।”

अपोलो मिशन के दौरान कोलिंस चंद्रमा की कक्षा में ही रुके थे जबकि उनके सहयोगी नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे थे। पढ़ना जारी रखें अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन