समय के आर-पार विज्ञान: प्रागैतिहासिक काल से वैश्विक सभ्यताओं तक
रात गहरी हो चली थी। घर के आँगन में हल्की-सी ठंडी हवा बह रही थी। आकाश में तारों की चादर ऐसे बिछी थी जैसे किसी अदृश्य गणितज्ञ ने ब्रह्मांड की ज्यामिति को फिर से रच दिया हो। मैं, अपने दोनों हाथों में चाय का कप लिए, अपनी दोनों पुत्रियों गार्गी और अनुषा के बीच बैठा था। अफ्रीका की महान सभ्यताओं और उनके वैज्ञानिक योगदानों की चर्चा अभी समाप्त हुई थी, लेकिन दोनों की आँखों में अभी भी जिज्ञासा शेष थी।
अनुषा ने धीरे से पूछा, “ताऊजी, क्या यह सब यहीं समाप्त हो जाता है? क्या विज्ञान की यह यात्रा केवल अफ्रीका तक सीमित थी?”
मैं मुस्कुराया, जैसे किसी पुराने पांडुलिपि का अगला पृष्ठ खोलने जा रहा हूँ। “नहीं बेटा, अफ्रीका तो एक विशाल अध्याय था, लेकिन मानव ज्ञान की पुस्तक अभी समाप्त नहीं हुई है। अब हम उस यात्रा के अंतिम और सबसे विस्तृत समेकन की ओर बढ़ेंगे, जहाँ सारी सभ्यताएँ एक-दूसरे से जुड़ती हैं, एक वैश्विक वैज्ञानिक चेतना बनाती हैं।”
गार्गी ने उत्सुकता से कहा, “तो फिर चलिए, हम उन सभ्यताओं की यात्रा पर चलते हैं जहाँ गणित ने तर्क का रूप लिया, खगोल शास्त्र ने ब्रह्मांड को समझने का प्रयास किया, और विज्ञान ने सभ्यता को दिशा दी।”
मैंने सिर हिलाया, और जैसे ही शब्दों की डोर खुली, समय पीछे की ओर बहने लगा।
हम सबसे पहले पहुँचे प्रागैतिहासिक मानव के युग में, जहाँ कोई लिखित भाषा नहीं थी, लेकिन अवलोकन की शक्ति जन्म ले रही थी। यह वह समय था जब मनुष्य ने आकाश में चंद्रमा के बदलते आकार को देखा, ऋतुओं के परिवर्तन को समझा, और गुफाओं की दीवारों पर संकेतों के माध्यम से समय को दर्ज करना शुरू किया। यही वह बीज था जिससे आगे चलकर गणित और खगोल शास्त्र का वृक्ष विकसित हुआ। यहाँ विज्ञान किसी सिद्धांत के रूप में नहीं था, बल्कि जीवन के अनुभव के रूप में था।
अनुषा ने पूछा, “तो क्या विज्ञान की शुरुआत किताबों से नहीं, बल्कि देखने से हुई थी?”
मैंने उत्तर दिया, “हाँ, बेटा, सबसे पहले विज्ञान आँखों से जन्मा और फिर मस्तिष्क में विकसित हुआ।”
इसके बाद हम पहुँचे सुमेरिया की धरती पर। यहाँ पहली बार मानव ने व्यवस्थित लेखन और गणना की प्रणाली विकसित की। यह वह समय था जब अंक केवल गिनती के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन और व्यापार के लिए भी उपयोग होने लगे। सुमेरियन लोग 60 आधारित संख्या प्रणाली लेकर आए, जो आज भी समय (घंटे, मिनट, सेकंड) में जीवित है।
गार्गी ने आश्चर्य से कहा, “तो हमारे समय का हर सेकंड उसी प्राचीन सभ्यता का ऋणी है?”
मैंने कहा, “बिल्कुल, हर टिक-टिक में सुमेर की छाया है।”
फिर हम पहुँचे बेबीलोनिया और बेबीलोन की भूमि पर। यहाँ गणित ने और परिष्कृत रूप लिया। वर्गमूल, ज्यामितीय समस्याएँ और खगोलीय गणनाएँ यहाँ की विशेषता थीं। बेबीलोनियों ने ग्रहों की गति को समझने की कोशिश की और खगोलीय तालिकाएँ बनाईं। यह वही भूमि थी जहाँ आकाश को पहली बार गणना की वस्तु माना गया।
अनुषा ने धीरे से कहा, “तो क्या ग्रहों की गति पहले गणित में बदली गई और फिर समझी गई?”
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