इस चिठ्ठे के बारे मे

यह चिठ्ठा विज्ञान की नयी पुरानी जानकारी इंद्रजाल पर उपलब्ध कराने का एक प्रयास है। विज्ञान से जुडे हर विषय पर मैं लिखने का प्रयास करुंगा लेकिन मेरे पसंदीदा विषय जैसे ब्रह्माण्ड और उसकी उत्पत्ती , भौतिकी से जुडे लेख ज्यादा होने की संभावना है।

इस चिठ्ठे मे मैं मौलिकता का दावा नही करता हूं, अधिकतर सामग्री इंद्रजाल पर उपलब्ध जानकारी या मेरे द्वारा पढ़ी गयी पुस्तकों, लेखो से ली गयी होगी। मेरा योगदान उन्हे अनुवाद और संपादन कर प्रकाशन करना मात्र होगा।

यदि मेरा यह प्रयास सफल रहा तो मैं यह सामग्री हिन्दी वीकी के लिये उपलब्ध कर दूँगा।

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62 विचार “इस चिठ्ठे के बारे मे&rdquo पर;

    • मनिष, पृथ्वी गेंद के जैसे गोल है। किसी गेंद पर एक स्थान से यात्रा करना प्रारंभ करोगे तो वापिस उसी स्थान पर आओगे। इसका कोई अंतिम बिंदु नही मिलेगा।

      मानलो कि एक बड़ी सी फ़ुटबाल पर चिंटी चल रही है क्या वह कभी किसी अंत पर पहुंचेगी? वह गेंद पर गोल गोल घुमते रहेगी। बस पृथ्वी जैसी विशाल गेंद पर हमारी स्थिति भी चिंटी जैसे है।

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    • हम बचपन से सुनते आये है कि सूर्य आग का गोला है। लेकिन यह असत्य है।
      सूर्य पर आग नही जल रही है लेकिन वह दीप्तिमान है।
      सूर्य की दीप्ति उसकॆ केंद्र मे चल रही नाभिकिय संलयन की प्रक्रिया से उत्पन्न भीषण ऊर्जा से है। इस प्रक्रिया मे दो हायड्रोजन के परमाणु आपस मे विलिन होकर एक हिलियम परमाणु बनाते है।
      यह प्रक्रिया हायड्रोजन की ज्वलन प्रक्रिया से भिन्न है जिसमे हायड्रोजन आक्सीजन से रासायनिक प्रक्रिया कर पानी बनाती है।

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  1. सर जी मुझे लगता है की big beng का सीदांत गल्त है । तारो के दूर फेलने का कारण ये नही कुछ और है । मुझे लगता हे की हमारा पूरा ब्र्मांड एक बहुत बड़ी गेलेक्सी है । और इस ब्र्मांड की सारी गेलेक्सी उसी बड़ी गेलेक्सी में है ।ओर ब्र्मांड के केन्द्र में िवशाल पावर है जो इसे गितमान बनाती है ।

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    • १. तारे टूटते नहीं है, जिसे हम तारे टूटना कहते है वे छोटे पत्थर या चट्टानों होती हैं। इनका वज़न कुछ किलो से लेकर कई टन तक हो सकता है। वे प्ृथ्वी के वातावरण में आकर जल उठते है और तारे का भ्रम उत्पन्न करते हैं। इनकी दिशा सामान्यतः पृथ्वी के घूर्णन के विपरीत अर्थात पूर्व से पश्चिम होती है,लेकिन वे अन्य दिशाओं में भी जा सकते हैं।
      २. इन्द्र धनुष गोलाकार होते है, क्योंकि वे वातावरण में पानी की बूँदों से प्रकाश के गुज़रने से बनते है।

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      • Sir good afternoon….. Sir aap ek lekh manushya ki utpatti par
        likhen…. Matlab pehle brahmand bana phir salon baad prithvi
        bani..Phir hajaron salon tak barish hui tab mahasagar bane phir
        achanak ek ekkoshkiya jeev ka janm hua.. Phir usse bahukoshkiya prani
        bane.. Dianasor utpann hua….Phir achanak bhuchal aaya ..Ek pind
        prithvi se takraya….Dianasor mare gaye……Karodo salon baad
        manushya ka dheere dheere kramik vikash hua….Usne aag kaise jalai
        kaise usne pathar ke hathiyar banaye baad mei paltu jaan var
        banaye…… Aur aaj yahan tak pahuncha………..Please sir ish par
        ek vistrit lekh likhen….Lekh bada hoga ishliye do teen ya jyada part
        karen…….Thank u sir

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  2. मेरे मन में उठते इन सवालों का आप जवाब दे सके तो आपका आभार ,
    १. पृथ्वी अपनी धुरी पर [kmph] किस गति से घुमती है ?
    २. अंतरिक्ष में तैरते उपग्रह क्या किसी भी दिशा और किसी भी गति पर घूमते है या ये पृथ्वी की गति और ग्रुत्वाकर्षण पर निर्भर है ?
    ३.अंतरिक्ष में हम धरती को एक जगह रुक कर देख सकते है या हमे उसके साथ घूमना होगा ?
    इन प्रश्नों से सम्बंधित उत्तर में कोई विडिओ या फोटो क़े कोई लिंक हो तो दीजियेगा ,आपका धन्यवाद ,

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    • १. 1674.4 KM/hr
      २. अंतरिक्ष में तैरते उपग्रहों की दिशा और गति कई कारको पर निर्भर है, जिसमें उसकी कक्षा तथा प्रक्षेपण के समय पर प्राप्त गति मुख्य है। उसकी दिशा पृथ्वी की दिशा से विपरीत भी हो सकती है।
      ३. भूस्थानिक कक्षा (geostationary) के उपग्रह पृथ्वी के एक स्थान पर ही रहते है, इसलिये वे दूरसंचार में प्रयोग में आते है। अन्य उपग्रह से पृथ्वी का घुमना देख सकते है, लेकिन उपग्रह भी गति में होगा। पृथ्वी की गति और उपग्रह की गति में अन्तर से पृथ्वी की गति देखी जा सकती है, ठीक वैसे ही जब हम एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन की गति देख सकते है।

      आशीष

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  3. में बहुत दिनों से ऐसी ही एक वेबसाइट खोज रहा था ये रेसेअर्च में बहुत उपयोगी होगी …यदि और कोई वाब्सिते हे तो मुझे जरूर बताइए ..ये बहुत ही उपयोगी है

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  4. Usage of इंद्रजाल for internet is indeed an inovation. I myself feel that the supreme knowledge has been provide by the Sanskrit and Hindi only and English. It is our duty enrich the material knowledge in Hindi. By supreme knowledge I only mean the spiritual knwoledge and not the material science. Hindi and Sanskrit are already rich in Brahm Gyan.

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  5. मुझे यह जानकारी चाहिये कि जमीन पर 500मीटर की दूरी को क्या किसी इलेक्ट्रानिक गैजेट से डिजिटल अंकोँ मेँ नापा जा सकता है और यह दूरी डिजिटल अंकोँ मेँ गैजेट की स्क्रीन पर पढ़ी जा सके इनमेँ से किस गैजेट से 500मीटर की दूरी नापी जा सकती है(laser range finder या golf range finder या distanse laser meter) प्लीज मुझे कोई ईमेल करके बताये ps50236@gmail.com

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  6. जान कर सच में ख़ुशी हुई कि आप हिंदी भाषा के उद्धार के लिए तत्पर हैं | आप को मेरी ढेरों शुभकामनाएं | मैं ख़ुद भी थोड़ी बहुत कविताएँ लिख लेता हूँ | हाल ही में अपनी किताब भी प्रकाशित की | आप मेरी कविताएँ यहाँ पर पढ़ सकते हैं- http://souravroy.com/poems/

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  7. नमस्कार,
    मैंने आपका ब्लॉग देखा बेहद ही अच्छा लगा,इतने गूढ़ विषय को इतनी सरलता से समझा दिया है,इसके लिए आपका धन्यवाद,आशा करते हैं कि भौतिक के और गूढ़ रहस्य आपके द्वारा सामने आएंगे।

    आपका
    शंभुनाथ
    नई दिल्ली
    09891588889

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