ब्रह्मांड की उत्पत्ति


सृष्टि से पहले सत नहीं था, असत भी नहीं
अंतरिक्ष भी नहीं, आकाश भी नहीं था
छिपा था क्या कहाँ, किसने देखा था
उस पल तो अगम, अटल जल भी कहाँ था
ऋग्वेद(10:129) से सृष्टि सृजन की यह श्रुती

लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी यह श्रुति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी इसे रचित करते समय थी। सृष्टि की उत्पत्ति आज भी एक रहस्य है। सृष्टि के पहले क्या था ? इसकी रचना किसने, कब और क्यों की ? ऐसा क्या हुआ जिससे इस सृष्टि का निर्माण हुआ ?

अनेकों अनसुलझे प्रश्न है जिनका एक निश्चित उत्तर किसी के पास नहीं है। कुछ सिद्धांत है जो कुछ प्रश्नों का उत्तर देते है और कुछ नये प्रश्न खड़े करते है। सभी प्रश्नों के उत्तर देने वाला सिद्धांत अभी तक सामने नहीं आया है।

सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त सिद्धांत है महाविस्फोट सिद्धांत (The Bing Bang Theory)।

महाविस्फोट सिद्धांत(The Bing Bang Theory)

1929 में एडवीन हब्बल ने एक आश्चर्य जनक खोज की, उन्होने पाया की अंतरिक्ष में आप किसी भी दिशा में देखे आकाशगंगाये और अन्य आकाशीय पिंड तेजी से एक दूसरे से दूर हो रहे है। दूसरे शब्दों मे ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। इसका मतलब यह है कि इतिहास में ब्रह्मांड के सभी पदार्थ आज की तुलना में एक दूसरे से और भी पास रहे होंगे। और एक समय ऐसा रहा होगा जब सभी आकाशीय पिंड एक ही स्थान पर रहे होंगे, लेकिन क्या आप इस पर विश्वास करेंगे ?

तब से लेकर अब तक खगोल शास्त्रियों ने उन परिस्थितियों का विश्लेषण करने का प्रयास किया है कि कैसे ब्रह्मांडीय पदार्थ एक दूसरे से एकदम पास होने की स्थिती से एकदम दूर होते जा रहे है।

इतिहास में किसी समय , शायद 10 से 15 अरब साल पूर्व , ब्रह्मांड के सभी कण एक दूसरे से एकदम पास पास थे। वे इतने पास पास थे कि वे सभी एक ही जगह थे, एक ही बिंदु पर। सारा ब्रह्मांड एक बिन्दु की शक्ल में था। यह बिन्दु अत्यधिक घनत्व(infinite density) का, अत्यंत छोटा बिन्दु(infinitesimally small ) था। ब्रह्मांड का यह बिन्दु रूप अपने अत्यधिक घनत्व के कारण अत्यंत गर्म(infinitely hot) रहा होगा। इस स्थिती में भौतिकी, गणित या विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है। यह वह स्थिती है जब मनुष्य किसी भी प्रकार अनुमान या विश्लेषण करने में असमर्थ है। काल या समय भी इस स्थिती में रुक जाता है, दूसरे शब्दों में काल और समय के कोई मायने नहीं रहते है।*

इस स्थिती में किसी अज्ञात कारण से अचानक ब्रह्मांड का विस्तार होना शुरू हुआ। एक महा विस्फोट के साथ ब्रह्मांड का जन्म हुआ और ब्रह्मांड में पदार्थ ने एक दूसरे से दूर जाना शुरू कर दिया।

महा विस्फोट के 10-43 सेकंड के बाद, अत्यधिक ऊर्जा(फोटान कणों के रूप में) का ही अस्तित्व था। इसी समय क्वार्क , इलेक्ट्रान, एन्टी इलेक्ट्रान जैसे मूलभूत कणों का निर्माण हुआ। इन कणों के बारे हम अगले अंको मे जानेंगे।

10-34 सेकंड के पश्चात, क्वार्क और एन्टी क्वार्क जैसे कणो का मूलभूत कणों के अत्याधिक उर्जा के मध्य टकराव के कारण ज्यादा मात्रा मे निर्माण हुआ। इस समय कण और उनके प्रति-कण (१) दोनों का निर्माण हो रहा था , इसमें से कुछ एक कण और उनके प्रति-कण(2) दूसरे से टकरा कर खत्म भी हो रहे थे। इस समय ब्रम्हांड का आकार एक संतरे के आकार का था।

10-10 सेकंड के पश्चात, एन्टी क्वार्क क्वार्क से टकरा कर पूर्ण रूप से खत्म हो चुके थे, इस टकराव से फोटान का निर्माण हो रहा था। साथ में इसी समय प्रोटान और न्युट्रान का भी निर्माण हुआ।

1 सेकंड के पश्चात, जब तापमान 10 अरब डिग्री सेल्सीयस था, ब्रह्मांड ने आकार लेना शुरू किया। उस समय ब्रह्मांड में ज्यादातर फोटान, इलेक्ट्रान , न्युट्रीनो (३) और उनके प्रती कणो के साथ मे कुछ मात्रा मे प्रोटान तथा न्युट्रान थे।

प्रोटान और न्युट्रान ने एक दूसरे के साथ मिल कर तत्वों(elements) का केन्द्र (nuclei) बनाना शुरू किया जिसे आज हम हाइड्रोजन, हीलीयम, लिथियम और ड्युटेरीयम के नाम से जानते है।

जब महा विस्फोट के बाद तीन मिनट बीत चुके थे, तापमान गिरकर 1 अरब डिग्री सेल्सीयस हो चुका था, तत्व और ब्रह्मांडीय  विकिरण(cosmic radiation) का निर्माण हो चुका था। यह विकिरण आज भी मौजूद है और इसे महसूस किया जा सकता है।

आगे बढ़ने पर 300,000वर्ष के पश्चात, विस्तार करता हुआ ब्रह्मांड अभी भी आज के ब्रह्मांड से मेल नहीं खाता था। तत्व और विकिरण एक दूसरे से अलग होना शुरू हो चुके थे। इसी समय इलेक्ट्रान , केन्द्रक के साथ में मिल कर परमाणु का निर्माण कर रहे थे। परमाणु मिलकर अणु बना रहे थे।

इस के 1 अरब वर्ष पश्चात, ब्रह्मांड का एक निश्चित सा आकार बनना शुरू हुआ था। इसी समय क्वासर, प्रोटोगैलेक्सी(आकाशगंगा का प्रारंभिक रूप), तारों का जन्म होने लगा था। तारे हायड्रोजन जलाकर भारी तत्वों का निर्माण कर रहे थे।

आज महा विस्फोट के लगभग 14 अरब साल पश्चात की स्थिती देखे ! तारों के साथ उनका सौर मंडल बन चुका है। परमाणु मिलकर कठिन अणु बना चुके है। जिसमे कुछ कठिन अणु जीवन( उदा: Amino Acid) के मूलभूत कण है। यही नहीं काफी सारे तारे मर कर श्याम विवर(black hole) बन चुके है।

ब्रह्मांड का अभी भी विस्तार हो रहा है, और विस्तार की गति बढ़ती जा रही है। विस्तार होते हुये ब्रह्मांड की तुलना आप एक गुब्बारे से कर सकते है, जिस तरह गुब्बारे को फुलाने पर उसकी सतह पर स्थित बिन्दु एक दूसरे से दूर होते जाते है उसी तरह आकाशगंगाये एक दूसरे से दूर जा रही है। यह विस्तार कुछ इस तरह से हो रहा है जिसका कोई केन्द्र नहीं है, हर आकाश गंगा दूसरी आकाशगंगा से दूर जा रही है।

वैकल्पिक सिद्धांत(The Alternative Theory)

इस सिद्धांत के अनुसार काल और अंतरिक्ष एक साथ महा विस्फोट के साथ प्रारंभ नहीं हुये थे। इसकी मान्यता है कि काल अनादि है, इसका ना तो आदि है ना अंत। आये इस सिद्धांत को जाने।

आकाशगंगाओ(Galaxy) और आकाशीय पिंडों का समुह अंतरिक्ष में एक में एक दूसरे से दूर जाते रहता है। महा विस्फोट के सिद्धांत के अनुसार आकाशीय पिण्डो की एक दूसरे से दूर जाने की गति महा विस्फोट के बाद के समय और आज के समय की तुलना में कम है। इसे आगे बढाते हुये यह सिद्धांत कहता है कि भविष्य मे आकाशीय पिंडों का गुरुत्वाकर्षण इस विस्तार की गति पर रोक लगाने मे सक्षम हो जायेगा। इसी समय विपरीत प्रक्रिया का प्रारंभ होगा अर्थात संकुचन का। सभी आकाशीय पिंड एक दूसरे के नजदीक और नजदीक आते जायेंगे और अंत में एक बिन्दु के रुप में संकुचित हो जायेंगे। इसी पल एक और महा विस्फोट होगा और एक नया ब्रह्मांड बनेगा, विस्तार की प्रक्रिया एक बार और प्रारंभ होगी।

यह प्रक्रिया अनादि काल से चल रही है, हमारा विश्व इस विस्तार और संकुचन की प्रक्रिया में बने अनेकों विश्व में से एक है। इसके पहले भी अनेकों विश्व बने है और भविष्य में भी बनते रहेंगे। ब्रह्मांड के संकुचित होकर एक बिन्दु में बन जाने की प्रक्रिया को महा संकुचन(The Big Crunch) के नाम से जाना जाता है। हमारा विश्व भी एक ऐसे ही महा संकुचन में नष्ट हो जायेगा, जो एक महा विस्फोट के द्वारा नये ब्रह्मांड को जन्म देगा। यदि यह सिद्धांत सही है तब यह संकुचन की प्रक्रिया आज से 1 खरब 50 अरब वर्ष पश्चात प्रारंभ होगी।

यथास्थिति सिद्धांत (The Quite State Theory)

महा विस्फोट का सिद्धांत सबसे ज्यादा मान्य सिद्धांत है लेकिन सभी वैज्ञानिक इससे सहमत नहीं हैं । वे मानते है कि ब्रह्मांड अनादि है, इसका ना तो आदि है ना अंत। उनके अनुसार ब्रह्मांड का महा विस्फोट से प्रारंभ नहीं हुआ था ना इसका अंत महा संकुचन से होगा।

यह सिद्धांत मानता है कि ब्रह्मांड का आज जैसा है वैसा ये हमेशा से था और हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है।

इस अंक में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में हमने चर्चा की, अगले अंक में हम महा विस्फोट और भौतिकी में मूलभूत सिद्धांतो की विस्तार से चर्चा करेंगे।

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(*) इस विषय पर पूरा एक लेख लिखना है।

(१)कण और प्रति-कण: पदार्थ के हर मूलभूत कण का प्रतिकण भी होता है। जैसे इलेक्ट्रान के लिये एन्टी इलेक्ट्रान(पाजीट्रान), प्रोटान-एन्टी प्रोटान , न्युट्रान -एन्टीन्युट्रान इत्यादि. जब एक कण और उसका प्रतिकण टकराते है दोनों ऊर्जा(फोटान) में बदल जाते है। यदि आपको कभी आपका एन्टी मनुष्य मिले तब आप उससे हाथ मिलाने की गलती ना करें। आप दोनों एक धमाके के रूप में ऊर्जा में बदल जायेंगे।

(२)ये भी एक रहस्य है कि ब्रह्मांड के निर्माण के समय कण और प्रतिकण दोनों बने, लेकिन कणों की मात्रा इतनी ज्यादा क्यों है ? क्या प्रति ब्रह्मांड (Anti Universe) का भी अस्तित्व है ?

(३) न्युट्रीनो का मतलब न्युट्रान नहीं है, ये इलेक्ट्रान के समान द्रव्यमान रखते है लेकिन इन पर आवेश(+/-) नहीं होता है।

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303 विचार “ब्रह्मांड की उत्पत्ति&rdquo पर;

  1. Ashish Ji apka lekh bahut hi gyanbardhak hai iske liye dhanyabad. Lekin apke anusar ishwar ka astitv nahi hai, yah bhi sahi ho sakta hai. lekin kya atma bhi nahi hai ? agar atma bhi nahi hai to phir marne ke bad kaya hota hai ? apne pap aur punya ka hisab chukane ke liye phir janm nahi lena parta hai ! agar punarjanam hota hai to wo kis shakti ke madhyam se hota hai ?

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  2. sir me bhahmand ke bare me jyada nahi janta lekin muje kyu esa lagta he ki sabhi grah or pruthvi suraj ki taraf khiche ja rahe he muje lagta he jab pruthvi suraj ki najdik jayegi tab jobhi agla grah pruthvi ki jagah yani jitni abhi pruthvi suraj se dur hai utni duri par agla grah aayega vo grah pruthvi ki jagah le lega or us par jivan hoga please answer me

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    • ब्र्ह्मांड का विस्तार आकाशगंगाओ के मध्य हो रहा है। लेकिन गुरुत्वाकर्षण से बंधी संरचनाये जैसे आकाशगंगा, सौर मंडल मे गुरुत्वाकर्षण प्रभावी है, इनमे विस्तार नही हो रहा है।

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      • pr ek time aysa ayega ki gravity of gallxy bhut km ho jaygi koe bhi wastu ya jich jb apne kendra se dur jati hai to uske gavity p prbhaw pdta hai or ek time o ata hai ki gavity 0 ho jati hai or jb aysa hoga tb puri apni milkiwe ek ek kn or kn k electon protan sb alg ho jayge or es trh se hmara ant ho jayga

        pura univers apni kendra se dur ja rha hai or or gavity of gallexy km ho
        rhi h

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  3. sabse pahle mai batana chahuga ki muze padhana bilkul pasand nahi. lekin meri wife muze boli ki apne bache ko NASA bhejna chahti hu use scientist banaungi. tabhi maine NASA ki jankari lene ke liye site kholi aur aapka itana soondar aur prabhavit karne wala article padha..aapne sbhi ke question ka khoop saral, sankshipt aur purn roop se answer diya hai.muze aapki vajah se bhut si jankari hasil hui jiski kabhi ummid bhi nai thi..
    sabhi dosto ko dhanyawad..

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    • जब आप चलते है तो आप पैर से पृथ्वी पर बल लगाते है, पृथ्वी उतना ही बल आप पर लगा कर धकेलती है जिससे आप आगे बढते है। यदि घर्षण ना हो तो आप पैर से पृथ्वी पर बल नही लगा पायेंगे, आपका पैर पृथ्वी पर फ़िसलेगा जिससे बल नही लगेगा और आप चल नही पायेंगे।
      इसी तरह कोई पहिया भी उसी समय आगे बढ़ पायेगा जब घर्षण हो, अन्यथा वह अपने स्थान पर ही घूमते रह जायेगा।

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      • आशीष जी हम पृथ्वी पर बल लगाते है चलो ये बात सही है। लेकिन पृथ्वी पर हम पर कैसे बल लगाती है ये कुछ समझ में नहीं आया । जरा ठीक से समझाइये

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      • सुभम , न्युटन के तीसरे नियम के अनुसार हर क्रिया की विपरीत प्रतिक्रिया होती है। आप पृथ्वी पर जितना बल लगायेंगे उतना बल पुथ्वी भी लगायेगी। आप जब कुदते है तब ध्यान दें कि आप पृथ्वी पर अधिक बल लगा रहे है, फ़लस्वरूप आप अधिक कुद पा रहे है। ऐसा ही दौड़ते समय भी होता है।

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      • एक खडी दिवार पर भी अगर हम बल लगायेंगे तो क्या वो भी प्रतिक्रिया करेगी ऐसा क्यू होता है।

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    • गुरुत्वाकर्षण बल सौर मंडल, तारो, आकाशगंगाओ, ब्रह्मांड हो बांधे रखती है लेकिन यह बल सबसे कमजोर बल भी है। हमारे शरीर मे कार्य कर रहे अन्य बल इसकी तुलना मे अधिक शक्तिशाली है वे गुरुत्वाकर्षण बल पर भारी पड़ते है।

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      • आशीष जी मेरा एक प्रश्न है आपसे, गुरूत्वाकर्षण बल बादलो में जमा बर्फ पर कार्य क्यू नहीं करता है, बह बर्फ धरती पर क्यू नहीं गिरती है।

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      • बादलो में भाप होती है, बर्फ नहीं। जब बादलो की ऊंचाई पर तापमान कम हो जाता है तब तापमान के अनुसार वह जल या हिम् में परिवर्तित होकर बरसने लगता है।

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    • सभी ग्रह एक दूसरे पर गुरुत्वाकर्ष्ण प्रभाव डालते है। बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव भी पृथ्वी पर पड़ता है लेकिन अत्याधिक दूरी के कारण वह नगण्य होता है।

      गुरुत्वाकर्षण बल की गणना के लिये आप इस सूत्र का प्रयोग कर सकते है
      F=G(m1m2)/(r*r)
      F =गुरुत्वाकर्षण बल
      m1 = पहले पिंड का द्रव्यमान
      m2 = दूसरे पिंड का द्रव्यमान
      r = दोनो पिंड के मध्य की दूरी

      यदि आप ध्यान दे तो पता चलेगा कि दूरी के साथ गुरुत्वाकर्षण कम होते जा रहा है।

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    • मानव ही नही, पशु पक्षी भी आत्महत्या करते है। मानव या प्राणी आत्महत्या अवसाद के कारण करते है जो हमारे मस्तिष्क मे हार्मोनो के असंतुलन से उत्पन्न होता है। हार्मोनो के असंतुलन के पीछे एकाधिक कारण हो सकते है जिसमे प्रमुख है दुखद घटनाये, असफ़लता, बिमारीयाँ इत्यादि।
      लेकिन अवसाद की चिकित्सा संभव है।

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  4. thanks sir ….. aapne jo information di h wo sach me kaafi achhi h …. par mera ek sawal h …. jaisa aapne kaha ki brahmand ki utpatti ki sirf kalpana hi ki gayi h … koi pukhta proof nahi h … toh phir aapne ek bomment me kaha h ki 5 arab warsh baad suraj lal daanav ban jayega … kya yeh bhi ek kalpana hi h … i mean galaxy me ho rahe changes ko lekar shayad yeh kalpana ki gayi h shayad …. par kya aisa jaruri h ki jo changes galaxy me hue h or ho rahe h same waise hi changes future me ho … kya yeh chages me b changes ni ho skte

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    • बिग बैंग थ्योरी कल्पना नही है, इसके समर्थन मे ढेरो प्रमाण है। जिसमे से एक है कास्मिक बैक्ग्राउंड रेडियेशन, जब आप टीवी आन करते है और सिगनल नही आता है तो आपको काले सफ़ेद बिंदु दिखायी देते है, ये काले सफ़ेद बिंदु बिग बैंग के बाद की बची हुयी ऊर्जा कास्मिक बैक्ग्राउंड रेडियेशन है।

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    • भूतकाल मे देखना संभव है। उदाहरण के लिये चंद्रमा से प्रकाश आने मे 14 सेकंड लगते है, हम चंद्रमा की 14 सेकंड पुरानी छवि देखते है। उसी तरह सूर्य की 8 मिनट पुरानी छवि देखते है। यदि आप को पृथ्वी की वर्ष पुरानी छवि देखनी है तो आपको पृथ्वी से एक प्रकाशवर्ष दूर जाना होगा और बहाँ से पृथ्वी को किसी शक्तिशाली दूरबीन से देखने पर एक वर्ष पुरानी छवि दिखायी देगी।

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    • दिन मे सूर्य की रोशनी इतनी तेज होती है कि तारे उस चमक मे दब जाते है और दिखाई नही देते है। तारों के उपर/आकाश के उपर कुछ नही है, केवल अंतरिक्ष(रिक्त स्थान) है। तारे एक साथ नही है, वे अंतरिक्ष मे अलग अलग स्थान पर, अलग अलग दूरियों पर है।

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    • सागर मे जाने वाला पानी सतह पर से बहकर जाता है, इस प्रक्रिया मे उसमे लवण घूलते जाते है। जबकी भूजल सतह की परतो से छन छन कर नीचे जाता है। वर्षा से प्राप्त जल को सागर तक पहुंचने मे कुछ ही दिन लगते है जबकि भूजल तक पहुंचने मे महिनो लगते है।

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    • सामान्यत: हमारी दोनो आंखे मस्तिष्क को संकेत भेजती है, मस्तिष्क दोनो आंखो से प्राप्त संकेतो से छवि बनाता है। जब आप अपनी उंगीली से आंख् को दबाते तब दोनो आंखो के संकेत मे संतुलन बिगड़ जाता है और मस्तिष्क दोनो संकेतो से एक छवि नही बना पाता और आप दो छवि देखते है।

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    • अंतरिक्षयानो के चालन के लिये मानव का उसमे होना आवश्यक नही है, ऐसे कई यान है जो अंतरिक्ष मे बिना मानव के गये है। भारत का मंगल यान मंगल तक जा चूका है, चंद्रयान भी चंद्रमा तक गया है लेकिन उसमे मानव नही है।
      अभी तक मानव चंद्रमा के अतिरिक्त किसी अन्य ग्रह पर नही गया है क्योंकि इन ग्रहो पर जाने के लिये कई महिने लगते है, वापिस आने मे उतने ही महिने लंगेंगे। मानव को इतने लंबे तक अंतरिक्ष यान मे रहना आसान नही है। तथा ऐसे यानो का निर्माण के लिये पैसा भी चाहिये। अंतरिक्ष अनुसंधान बिना मानव को भेजे भी किये जा सकते है। मंगल पर ऐसे कई वाहन भेजे गये है जो मंगल पर घूम घूम कर पृथ्वी तक फोटो और अन्य जानकारी भेजते है, इन वाहनो का नियंत्रण पृथ्वी से होता है।

      हम अपनी आकाशगंगा से बाहर नही गये है लेकिन आकाशगंगा के बाहर देख सकते है। जैसे आप चंद्रमा पर नही गये हो लेकिन उसे देख सकते हो।

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  5. ब्रह्माण्ड बड़ा नही है। समय और गति छोटे बड़े को निश्चित करती है। कैसे
    चींटी की नजर में मक्खी बहुत बड़ी है। विषाणु हवा के कणो पर जीवन बिता देते है उनके लिए वो कण धरती सामान है।
    एक एटम के अंदर वो हो प्रक्रिया होती है जो सौरमंडल में। जिसमे सूरज नाभिक का काम करता है।
    जिस तरह भ्रूण का विकास जननी के पेट में होता है वो ही क्रिया ब्रह्माण्ड में हो रही है।
    बहुत से भुर्णो में एक का ही निषेचन होता है। निषेचन के बाद में उसका विकास होता है। अलग अलग तरह की कोशिकाओ का निर्माण होता है उसी तरह पृथ्वी पर अलग अलग तरह के जीव पैदा होते है।
    ये भी हो सकता है की ये पूरा भूमंडल किसी का भूर्ण हो।
    ये भी हो सकता है की किसी इलेक्ट्रान पर सभ्यता हो। क्योकि नाभिक से इलेक्ट्रान को heat मिलती है ये साबित हो चूका है। परमाणु बम इसका उद्धरण है
    हम बहुत धीमी गति से चलते है इसलिए ब्रह्माण्ड बड़ा है
    आगा हमारी स्पीड लाइट के बराबर होती तो शायद ब्रह्माण्ड काफी छोटा होता

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  6. Mai hamesha yahi sochta rehta hu ki brahmand akhir kitna bada hai ?
    kya iska koi chhor bhi hai, ye brahamand kaha per jakar samapt hoga?
    kya is brahamand mai galaxy aur stars ke alawa aur kuch nahi hai?
    pura brahamand jo ki shunya hai usme ye tare, graha ,anu,parmanu,kan kaha se aaye?
    kya hamare is brahamand jise sirf ham jaante hai isse bhi badi koi aur sanrachna hogi jiske ghere mai hamara pura brahamand aata ho?
    kya manusya ke alawa kisi aur sabhyata ka bhi brahamand mai astitva hai aur agar hai bhi to uske liye is bramand ki kya ehmiyat hogi?
    manushya ki utapatti akhir kisliye hui aur wah itna buddhiman akhir kyu hogaya koi aur prajati kyu nahi ho payi?
    mrityu ke paschat kya manushya ka is brahamand mai koi bhi astitva nahi rehta?
    ham hally’s comet (halley’s tale) ko sambhav hua to jeevan mai sirf ek baar he dekh sakte hai,
    lekin hamse pichle yug ke manushyo ka jeevan hamse jyada tha aur wo sayad apne jeevan mai ise 2-3 ya isse jyada baar bhi dekh lete honge.
    akhir aisi kya baat hai ki science ki itni tarakki ke baad bhi hamne apni cells ke degenration ko nahi rok paya?

    Mai Alternative Theory ko jyada sahi manta hu kyuki agar bramnd ka vistar isi tarah hota rha to sabhi galaxies ek dusre se itne door ho jayege ki koi bhi sabhyata kisi dusri sabhyata se samparka tak nahi kar payegi aur ho sakta hai ki is brahamand ke chhor pe jakar lage, aur waha se bahar nikal jaye (agar koi dusri brahamandiy sanrachna exist karti hogi to).
    agar kisi cheej ki suruat hoti hai to uska ant bhi sambhav hai ye hame hamare daily life mai exist karne wali sabhi cheejo se pata chalata hai.
    to ye jahir si baat hai agr brahamand ki utpatti hui hai to iska ant bhi hoga, aur alternative theory ise kuch support karti hai.

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    • Arunji yaa brahmand ka vistaran ho raha hai agar dusri jaati or jiv hai brahmand mai to may be brahmand itani jaldi badh raha hai usse lag raha hai ki duari jati yaa jiv itni dur ho jaa rahe hai ki uska koi surag bhi nahi milta
      Ha lekin ham Apne Hindu puaran ki baate samje to dev danav & manushya hai to ye bhi ho sakta hai ki dev or danav jaisi prajati Jo mansuya se kafi super power hai vo ek alag hi Galexy me nikal gaye ho …
      Ek aisa bhi mind me aata hai kabhi kabhi ki hum manusya ek machine hai aur hame koi chala raha hai like jaise hamne robot ka Nirman kiya vaise hi hamare jaise manusya ka kisi ne Apne kaam ke liye Nirman kar raha ho & vo hamko chala raha ho
      Agar hum Apne ko hamare banaye robot ki jagah par rakhe aur soche to uska hamko answer mil jayega jaise robot ek machine hai jise hamne hi banaya hai fir bhi puri tarah ham uspe kuch niyantran nahi kar sakte like robot ka koi sparts ya koi machine bigad jata hai yaa usme kuch ghasara lagta hai vaise hi manusya ka hai
      Hame kya karna hai vo hamra upar Jo bhi hai vo decide karega lekin hamare sharir ko kya hoga vo koi decide nahi kar sakta like karm ke upar sab depands hai yahi bhi theory hai ki karma jaisa visa hame fal mile
      Yaani ek simple si baat ke kuch to hai Jo hamara upar niyantran kar raha hai

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  7. आशिष जी एक प्रश्न पूछना है कि आप ये मानते है की हमारे यहाँ की सभ्यता दूसरे नम्बर की सबसे पुरानी सभ्यता है |अगर मानते है तो ये भी मानेंगे की उस बीच जो लेख लिखे गये वो सब हैं और आपने लिखा भी है की आपने ग्रंथ भी पढा है |तो उसमें आपने जो भी पढा हो वो हिंदी में थोडा सा लिख दीजिये|फिर इस चर्चा को आगे ले जाएगे|

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    • नही मै यह नही मानता कि हमारी सभ्यता सबसे पुरानी है। हमारी सभ्यता जितनी प्राचीन है उतनी प्राचीन सभ्यताओं मे , माया, बेबीलोन, मेसोपोटामिया, ग्रीक, रोमन , चीनी सभ्यतायें भी रही है। कोई भी सभ्यता किसी अन्य सभ्यता से उन्नत या पीछड़ी नही थी। सब सभ्यतायें एक जैसी सम्मान योग्य है।

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  8. मैं असद हूँ । मेरा मानना है की गरुत्व नही होता तथा कोई भी चीज़ केंद्र पर नही गिरती तब किया है जो निचे गिरता है मेरे अनुसार वह है हमपर लगा वेग जो हमें नीचे धकेलता है । मैं इसको प्रूफ कर सकता हूँ पर मेरे पास कोई प्लेटफॉर्म नही है ।काश मेरी मदद कोई करता।

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      • Kintu sr hm aapki bat se shmt hain..lekin log dur baithe kuchh mantron ka uchhard krke ye kaise bta dete hai ki ye chij yahan hai ya wo hai ta nhi hai.bina kisi upkard ke.mere samne ki ek ghatna hai ki ek ldke ki cucle kho gyi wo ek dur k riletion me baba ke yahan guya aur unhone btaya ki ye cycle yahan hai aur ao whin mili.
        Qst. To uchit nhi hai sr mai janana chahta hun.

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      • आप अपनी स्वतन्त्र विचार धारा रख सकते है। विज्ञान के अनुसार अभी तक मन्त्र शक्ति प्रमाणित नही हुयी है ना ही इसे प्रमाणित करने कोई सामने आया है।
        मंत्र शक्ति सिद्ध करने पर जेम्स रांडी ने 20 लाख डॉलर , अब्राहम कोवूर ने एक करोड़ रुपये, तर्कशील सोसायटी ने एक करोड़ का इनाम रखा है। 20 – 40 साल हो गए कोई नहीं जीत है।

        आपके उदाहरण में उस बाबा ने तुक्का मारा और वह निशाने पर लग गया बस।

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    • रात के आकाश मे दिखने वाला हर तारा सूर्य के जैसा है. सूर्य की भी मृत्यु होती है, उसकी मृत्यु के बाद उसके अवशेषो से नया तारा बन सकता है लेकिन यह हमेशा नही होता है। नया सूर्य या तारा भी बनता है, उसके लिये विशालकाय गैस और धुल के बादल चाहिये होते है, उसमे नये तारे बनते है. गूगल मे Pillor of creation खोज कर देखे, आपको तारो की जन्मस्थलीयो मे से एक का चित्र दिखेगा.

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  9. आषीश सर । मुझे आपके लेख बहुत पसंद है ।
    पर मुझे आपका नजरिया जानना है ।
    क्या आप ईश्वर में विश्वास करते है ? क्या आप मानते है की ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति में किसी ईश्वर का हाथ था ?
    मैं इसे किसी धर्म से जोड़कर नहीं पूछ रहा हूँ और ना ही मैं धर्मो को मानता हूँ ।

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    • जी, मै ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नही करता हुँ! ना ही सोचता हुँ कि ब्रह्मांड के संचालन के लिये किसी पारलौकिक शक्ति की आवश्यकता है, मेरे अनुसार उसके लिये भौतिकी के नियम पर्याप्त है!

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      • Haa sahi hai bhai ki भोतिक niyam kafi hai lekin itan to confim hai ki koi hai Jo sab regulation kar raha hai jivan ko aur jiv ko agar ham Apne hi banaye robot aur machine ko rakhe to machine agar soch raha hai to usse naho malum ki vo machine Jo bhi kar raha hai vo hame follow kar raha hai vaise hi koi bhi manusya ko nahi smaja paa raha hai ki koi ham par hai Jo hamko chala raha hai ….
        Me koi kalpanik baate ya andhviswas ki bate nahi kar raha hu lekin sab aise hi regulation nahi hota
        Ye bhi ho sakta ho ki koi super power ho like machine ke samne hum Jo usko regulation kar rahe hai vise hi koi super powr hai Jo ye kar raha hai ….

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      • हमारी सारी भौतिक मान्यताएं बस एक घटना से परिभाषित होती हैं बिग बैंग। बिग बैंग एक जोरदार धमाका है, जिससे ब्रह्मांड का जन्म हुआ था। बिग बैंग थ्योरी के अनुसार लगभग 12 से 14 अरब वर्ष पहले संपूर्ण ब्रह्मांड एक परमाण्विक इकाई के रूप में था। यह वह समय था जब मानवीय समय और स्थान जैसी कोई चीज अस्तित्व में नहीं थी। बिग बैंग मॉडल के अनुसार इस धमाके में इतनी अधिक ऊर्जा का उत्सजर्न हुआ जिसके प्रभाव से आज तक हमारा ब्रह्मांड फैल रहा है।

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      • किसी भी वस्तु कण के हजारो व्यवहार होने की संभावना होती है। इन हजारो संभावनाओं मे हजारो ब्रह्माण्ड बन सकते है। हमारा ब्रह्माण्ड इन हजारो ब्रह्माडीय संभावना मे से एक है। व्यवहार की यही संभावना इस ब्रह्मांड के लिये भौतिकी के नियम है जिसे इस ब्रह्मांड को पालन करना ही होगा। अन्य ब्रह्मांडो के लिये अलग नियम होंगे।

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      • Sir main bhi aap ki tarah vigyaan premi hoo aapke saare tathyo se me agree hoo n aapke jawabo ki sateekta se mai bahut prabhavit hu mera ek sawal hai jaise vigyaan mai kaha gya hai har kriya ke prati ek prati kriya hoti hai to shaayad aapne bachpan mai mahabharat dekha hoga jaha shri krishna arjun ko vigyaan hi samjha rahe hote hai ki jaisa karm kiya jaayega vaisa hi fal milega ye samaan baate hai…jin vigyaan ke tarko ko kai sadiyo se deviya avtaar kahe jaane vaale mahapurush
        Bharat varsh mai batate aa rahe hai ve hi sab aaj ki mordern physics mai hai mai ye nahi jaanta ki ishwar hai ya nahi par mai ye jaanta hoo jitni shaktiyo ka swami bhagwaan ko bataya gya hai ve shaktiya keval gyaan mai hi hai aur vah gyan aashish shrivaastav ji aapke mere aur sampoorn jagat k kan kan mai hai jise energy ya oorjaa kaha gya hai aatma ko maante nahi honge aap vo to energy hi hoti hai par power full aatma sahi advaancd shareer ya mashtishk na milne par bekaar hai kahne ka taatparya ye hai ki bhagwaan ka asli swaroop gyaan swaroop hai vah har manushya ke aatma swaroopi softwere mai sthit hai vahi kaal bhi hai jise samay kahte hai aur ek din vah samay bhi aayega mitro jab samay aapko saare swalo ke jawab de dega kyoki samay se bada”sikshak”koi nahi hota….

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    • ब्रह्माण्ड से सूर्य के कई गुणा बड़े तारे है लेकिन वे बहुत दूर है। दूरी के साथ तारो की दीप्ती(चमक) कम होते जाती है। सूर्य हमारे काफी निकट है , जिससे उसकी दीप्ती अत्याधिक है, इस दीप्ती के कारण अन्य सभी तारो की दीप्ती दब जाने से वे दिन की रोशनी मे दिखायी नही देते है।

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  10. ब्रह्मांड के उत्पत्ति के विषय में अच्छा लेख है। ब्रह्मांड महाविष्फोट से उत्पन्न नहीं हुआ है बल्कि यह सदैव से ऐसा ही है,इस बात से मैं सहमत हूँ। ब्रह्मांड को सदैव से ऐसा ही होना चाहिये और आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा। नये -नये ग्रह,नक्षत्र,तारे का जन्म होता रहता है और ये बाहर की ओर आकर्षित होते हैं तथा बाहर की ओर भागने लगते हैं तथा अन्त में व्रिहद ब्रह्मांड (क्रिष्ण सागर)में समा जाते हैं तथा उसमें विलिन हो जाते हैं।

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      • अब तक के प्रमाण बिग-बैंग को केंद्र में रखकर इकट्ठे किए जा रहे हैं। ब्रह्मांड को फैलने की वजह सिर्फ बिग-बैग ही नहीं बल्कि अन्य कारण भी हो सकते हैं। ब्रह्मांड का बार-बार फैलाना -सिकुड़ना यानी बार-बार बिग-बैंग की घटना होगा,ऐसा कहना थोड़ा अविश्वसनीय लगता है।

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  11. good morning sir hamara ek question hai or sir hum jinko bhi apna question puchate hain wo hume satisfied nhi kar paate so sir aap agar hume satisfied kar sake to apki hum par bahut kripa hogi

    question hamare pas 2 alag -2 mass ke patthar hain jaise ki ek 2 kg ka dusra 4 kg ka to earth ka gravational force bhi dono par barabar hai or accelaration bhi agar hum dono ko samaan hight se niche giraye jabki niche plain hai to dono me se kon sa pathhar pahle girega or kyu?

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    • यदि आप एक हथौड़े और एक पंख को कुछ ऊंचाई से एक साथ छोड़े तो सबसे पहले ज़मीन पर कौन पहुंचेगा ? पृथ्वी पर निश्चय ही हथौड़ा पहुंचेगा लेकिन पंख पर वायु के अधिक प्रतिरोध के कारण। चंद्रमा के जैसी वायुरहित स्थिति मे दोनो एक साथ जमीन पर पहुचेंगे। गैलीलीयो के पूर्व वैज्ञानिक इस प्रयोग के परिणामो पर चकित थे, उन्होने पाया था कि वायु के प्रतिरोध की अनुपस्थिति मे सभी पिंड एक ही गति से नीचे गिरेंगे। गैलीलीयो ने भिन्न द्रव्यमान के धातु के गोलो को ऊंचाई से गिरा कर यह प्रयोग किया था और पाया था कि वे समान गति से गिरते है। लोककथाओं के अनुसार गैलीलीयो ने यह प्रयोग पीसा की झुकी मीनार से किया था लेकिन इस कथा की प्रामाणिकता पर संदेह है।
      इस तरह के प्रयोग के लिए सर्वोत्तम स्थान चंद्रमा है ,जहां पर वायु प्रतिरोध नही है। 1971 मे अपोलो 15 के अंतरिक्ष यात्री डेवीड स्काट ने एक हथौड़ा और पंख चंद्रमा की सतह पर कुछ ऊंचाई से छोड़ा था, यह विडीयो उसी प्रयोग का है। गैलीलीयो और आइंस्टाइन के जैसे वैज्ञानिको के अनुमान के अनुसार दोनो पंख और हथौड़ा चंद्रमा की सतह पर एक साथ पहुंचे थे। इस प्रयोग ने सिद्ध किया था कि समानता सिद्धांत(equivalence principle) के अनुसार गुरुत्वाकर्षण द्वारा उत्पन्न त्वरण पिंड के द्रव्यमान, घनत्व, संरचना, रंग आकार या किसी अन्य गुण पर निर्भर नही है। समानता सिद्धांत(equivalence principle) आधुनिक भौतिकी मे इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर वर्तमान मे भी बहस और प्रयोग होते हैं।

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  12. ये विश्व भी किसी पदार्थ से विकसित होकर यहाँ तक पहुँचा है जैसे कि आज का मानव का उक्रांत होकर यहाँ तक पहुँचा है..और ब्रम्हांड का विकास एक लाट कि तरह हो रहा है जैसे कि बिग बँग होकर प्रसरण हो रहा है और आकुंचन भी हो रहा है ..तो फिर प्रश्न उठेगा कि पहला पदार्थ कहा से आया तो मै मानता हुँ वो तो जरुर सनातन होगा…

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  13. Aashish ji baat manyata ki nahi hai me aapako actuality bata raha hoo aur me prashanshya ke liye bahas nahi kar raha hoo.
    Aap bahas karane ki bajay mere baat pe gaur kijiye aur research kare. Hamare Ved Puranome me likhe huye aise karodo raaz hai jo science dhire dhire khoj raha hai aur wo Vedome varnit raazonse mel khate hai.
    Ek visphot se duniya kaise ban sakati hai, sochane vali baat hai.

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  14. 1) Ashish Ji mene already mere pehale reply me aapako dharmik granth me vigyan ka roop dikhya hai phir se me wo daurata hoo “Bramhand ka koi ant nahi hai, is bramhand me karodo aakashgangaye hai this sentence already write in our ved puranas before 6 to 7 thousands years ago by maharshi vyas & the same thing explain by our vigyan”.

    2) Jis Big bang therory ki aap baat kar rahe hai wo Bramha Puran me Varnit hai.

    3) Rahi baat khoj karane ki to jarur kijiye aap apane aap samajh jayenge ki ham koi dhindhora nahi pit rahe hai.

    4) Ek Baat to science bhi manata hai ki koi bhi chij apane aap nahi banati use koi na koi to banata hai to ye bramhand apane aap kaise ban sakata hai, sidha udaharan bola jaye to banjar jamin pe khet koi visphot hone se nahi ugata koi usape koi mehanat kare to hi ugata hai.

    5) Ek baat science bhi manata hai ki koi to aisi Power hai jo is bramhand ko Energy supply karati hai.

    6) Me Science ke Khilaf nahi hoo, lekin me aapako ek Ray deta hoo aap Bramha Puran Padhiye aapaki soch badal jayegi. ye Internet pe bhi Upalabdh hai.

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    • सचिन जी, आप ब्रह्म पुराणँ पढ़कर बता दिजीये कि बिग बैंग के बाद 0 से लेकर 1 -43 तक क्या हुआ था? बिग बैंग में ऐसा क्या विचित्र हुआ था कि पदार्थ और प्रति पदार्थ की मात्रा भिन्न थी ! मै ऐसे प्रश्नों की झड़ी लगा सकता हुँ।
      क्षमा किजीये मै धर्मग्रंथो में विज्ञान नहीं खोजता,धर्म और विज्ञान देनों को अलग रखता हुँ!

      यह मान के मत चलें कि मैने वेद, उपनिषद या पुराण नही पढ़ें है या वे मेरे पास नहीं है, इसी लिये मैंने आप से ग्रंथ का नाम , श्लोक,श्रुति या मंत्र का संदर्भ माँगा था। http://vedahindi.blogspot.in ये ब्लाग भी मेरा है जिस पर मै आजकल समय नहीं दे पा रहाँ हुँ।

      मेरा उद्देश्य आपकी आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं है लेकिन मै कार्ल सागन का एक कथन दोहराऊँगा “असाधारण दावों की पुष्टी के लिये असाधारण प्रमाण चाहिये होते हैं!”।

      किसी भी दावे को प्रमाणित करना दावा करनेवाली की ज़िम्मेदारी होती है आप धर्मग्रंथो में विज्ञान मानते हैं तो प्रमाण दिजीये।

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      • Boss mene praman diya hai, aapane koi dharma granth nahi padha hai ye aapaki batonse pata chalata hai
        Please request you to padhiye phir baat karenge
        Rahi baat astha ki to me mandir bhi kabhi kabar jata hoo, aur upavas to mene kabhi pakada hi nahi hai ye me isaliye bata raha hoo ki me koi upadesh dene wala bramhan nahi hoo me ek modern jamaneka aadami hoo, jo ek baat se santust nahi hota jaise court me judge dono bate suneke baat faisala leta hai vaisehi me hoo jo puran, dharmik aur vigyan ye sabaki baate sunata hoo aur apani baat age rakhata hoo aur faisala leta hoo aapaki tarah ek baat nahi soonata
        aur me bramhapuran aapako padhane ke liye bol raha hoo mene padha hai
        Aap jab padhenge tab baat karenge

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      • सचिन जी, आप अपनी मान्यताओं पर कायम रहें, आपके विचार है, उनपर मै कोई टिप्पणी नही कर सकता। आप यह भी मानने के लिये स्वतंत्र हैं कि मैने कोई धर्मग्रंथ नही पढ़ा है, मै इसे प्रमाणित भी नही करना चाहता हूं। इस बहस का कोई परिणाम नही निकलेगा। वैसे मै आपकी प्रशंसा करता हुं कि आपने अपने विचार संयत रूप से रखे, आम तौर पर ऐसा होता नही है।

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  15. bhut acha hai jo maine read kra…mujh universal ke bare mai jaanna bhut psnd hai mai bilkul kho gye thi prte prte mujh esa mhsus ho rha jese mai vhe galaxy mai pauch gye hu kyi ki mai vo sb mhsus kr rhi thi imagin kr rhi thi…
    mujh universal baaten sunne mai janne mai bhut intrest hai…
    yh black hole kya hai…earth kese bni…hm is earth pr kese aye..hmko pta h insaan jnm kese leta h bt vo ese kun se do jne thy ldka ldki jisse agai ki pedi bni ur vo do ldka ldki kese aye unko kun laya…moon kese bna..kya alian hote hai……..sun kese bna…kya log mrne ke baad star bn jate hai…kya tare gato krte hai…..log mrne ke baad kha jate hai….yh suarg nrk jesi koi jgh hote hai…bhagwan sch mai hote hai agr hote h to hmse kitne dur unka ghr hai….chitrgupt ji ke pas sb jate h to chitrgupt ji njr kyu nhi ate….hmare death kyu hote hai….jb jivn diya hai to death kyu…yh death hai kya kha jata hai insaan death ke baad………..ndd eetccccccc bhut kuc h mere mn mai…kya mujh koi in questions ka answer de skta hai….
    agr ans ho to pllllzzzz mujh jrur btana…..

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  16. 1.
    ब्रह्मांड का यह बिन्दु रूप अपने अत्यधिक घनत्व के कारण अत्यंत गर्म(infinitely hot) रहा होगा। इस स्थिती में भौतिकी, गणित या विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है। यह वह स्थिती है जब मनुष्य किसी भी प्रकार अनुमान या विश्लेषण करने में असमर्थ है। काल या समय भी इस स्थिती में रुक जाता है, दूसरे शब्दों में काल और समय के कोई मायने नहीं रहते है।

    2.
    महा विस्फोट के 10^43 सेकंड के बाद, 10^34 सेकंड के पश्चात, 10^10 सेकंड के पश्चात

    दोनों बिंदु विरोधाभासी लगते है, Bing Bang कि स्थिति में ब्रह्मांड इतना सकुचित था कि काल या समय का कोई अस्तित्व ही नहीं था, तो जिसे हम कह रहे है “जब महा विस्फोट के बाद तीन मिनट बीत चुके थे” वो आज के समय के सापेक्ष बहुत लम्बा अरसा हो, हज़ारो या लाखो साल के बराबर (आज के समय के सापेक्ष)…
    और यदि हम इस बात पे सहमत होते है, तो यह भी संभव है कि जेसे-जेसे ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है वेसे-वेसे समय कि गति तेज़ हो रही है, तो जैसा हम अनुभव कर रहे है कि अंतरिक्ष के पिंड ज्यादा तेज़ गति से एक दूसरे से दूर जा रहे है, हो सकता है वो समान गति से ही (constant) एक दूसरे से दूर जा रहे है, पर क्युकी समय कि गति तेज़ हो रही है इसलिए हमे लग रहा कि वो जयादा तर्वित गति से एक दूसरे से दूर जा रहे है…

    या हो सकता है यह भी आभासी हो, कही कुछ नहीं बदल रहा, बस समय कि गति कम जयादा हो रही है, इसलिए हमे लगता है कि Bing Bang तो 10^43 में ही गठ गया, उसकी अपेक्षा प्रथवी कि आयु, या सूर्य या गैलेक्सी कि आयु बहुत जयादा है, हो सकता है किसी अनय आयाम (समय,काल,स्पेस) के सापेक्ष सब कुछ स्थिर हो…

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    • Hi amit mishra ji I m with u, just now I read your comments
      Main ek reader hoo. Main dharmik aur vigyan ki books padhata hoo.
      Compare kiya jay to jo hamare dharmik granthome likha ha vahi to scientist hamare samane lakar rakh rahe hai.
      E. G. Bramhand ka koi ant nahi hai, is bramhand me karodo aakashgangaye hai this sentence already write in our ved puranas before 6 to 7 thousands years ago by maharshi vyas & the same thing explain by our vigyan.
      One more thing kisi bhi chij ko chalane ke liye energy chahiye like hame energy khane se milati hai, khane ko jamin se means in farming jamin ko pani aur dhup se ye to chota sa cycle hai.
      But itane bade bramhand ke planets like earth, mangal, etc ko chalane ke liye energy kaha se aati hai that should be think about this. Ye koi mastermind hi chala sakata hai means god

      As per Bhagavat Puran this energy generate from Lord Vishnu as a Palanhar & Srujankarta

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  17. यही सम्पूर्ण प्रक्रिया …ऋग्वेद में वर्णित की गयी है…..जो ईषत इच्छा से प्रारम्भ होकर… सृष्टि…लय….सृष्टि …के अनवरत चक्र को वर्णित करती है…..सम्पूर्ण प्री-एटोमिक..सब-एटोमिक कणों के सहित……पढ़ें महाकाव्य “सृष्टि…ईषत इच्छा या बिग-बेंग…एक अनुत्तरित उत्तर “…..

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  18. पिगबैक: प्रश्न आपके, उत्तर हमारे: 1 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक के प्रश्नों के उत्तर | विज्ञान विश्व

    • आप सही हैं! सूर्य पृथ्वी को अपनी ओर खींच रहा है, पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते साथ उसके समीप जा रही है। लेकिन यह गति धीमी है, इस गति से कुछ समय अर्थात लगभग 5 अरब पश्चात पृथ्वी सूर्य मे समा जायेगी।

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      • मेरे विचार में दुसरा तारा हमें सपोर्ट कररहा होगा / नही तोह सुरज कबको हमें अपने पास मिला चुका होता / मेरे खियाल में येह शक्ति सन्तुलन हमेशा रहेगा ..

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  19. लेकिन “हम महान, हमारा धर्म महान, हमारे धर्म ग्रंथ महान” वाली विचारधारा से मैं सहमत नही रहता।

    ज्ञान जहां से भी मिले ग्रहण करना चाहिये, चाहे वह पश्चिम से मिले या पूर्व से। aaj aap jaise bhartiyo ki sakth aavaskyata hai jo apne gyan ka ghahrai se swadhaya kare sacchai ko vishwa patal par rakhe, kyoki paschim ka har gyana sahi hai yah manna logical bhartiyo ko manya nahi hai.

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  20. श्रीमान आप बहुत अच्छे होगें जो कि बिना किसी लालच के इतने गुणवत्ता भरपुर और ज्ञानवर्धक लेख लिखते हैं. जहां अधिकाश हिन्दी ब्लॉगर बेकार विषयों पर लेख लिख के अपना समय तो बेकार करते ही है और हिन्दी ब्लॉगजगत की छवि भी बिगड़ती है.

    इस लेख से संम्बंधित कुछ प्रश्न

    आप ने लिखा है कि
    १०-१० सेकंड के पश्चात, एन्टी क्वार्क क्वार्क से टकरा कर पूर्ण रूप से खत्म हो चुके थे, इस टकराव से फोटान का निर्माण हो रहा था। साथ में इसी समय प्रोटान और न्युट्रान का भी निर्माण हुआ।

    परन्तु प्रोटान और न्युट्रान का निर्माण किस से हो रहा था

    एक और निवेदन मैं इन दिनो कुछ ऐसे हिन्दी ब्लॉगस की लिस्ट बना रहा हुँ जो कि एक छात्र के लिए उपयोगी हों अगर आपकी दृष्टि में कुछ ऐसे ब्लॉगस है तो कृप्या मेरी ईमेल पर भेजे
    साहिल कुमार
    inhindigyan@gmail.com

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    • ध्यान दिजीये कि मैंने लिखा है “एन्टी क्वार्क क्वार्क से टकरा कर पूर्ण रूप से खत्म हो चुके थे” अर्थात एन्टी क्वार्क ख़त्म हुये थे लेकिन क्वार्क नहीं। किसी अज्ञात कारण से क्वार्क की संख्या एंटी क्वार्क से ज़्यादा थी, इस विसंगति को parity violation कहते है।

      Sent from my iPad

      >

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  21. आपके इस लेख में ब्रह्माण्ड के प्रारंभिक दौर को बताने में शब्दों की कसावट और रचना का जिस तरीके का प्रयोग हुआ है। वह तारीफ के काबिल है। अक्सर बताते समय गलतियें की जाती हैं। कि अत्याधिक ताप और दाब के कारण आतिसूक्ष्म बिंदु में विस्फोट हुआ। जिसके फलस्वरूप ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ। जबकि किसी भी घटना का कारण उसके तह में अर्थात अवस्था में छुपा होता है। ताप और दाब स्वयं निर्मित इकाईएँ थी। जिसे ब्रह्माण्ड के विस्तार के लिए कारण ठहराया जा सकता है। परन्तु उसके निर्माण के लिए कतय नहीं..। बहुत सुन्दर लेख है..

    सर, मुझे लेख में आगे चलकर कुछ कमियें महसूस हुईं। जहाँ आप उस सर्वस्व की जानकारी देते-देते अपने ब्रह्माण्ड की जानकारी देने लगे। अर्थात आप ब्रह्माण्ड के समूह की जानकारी दे सकते थे। इसी दौरान आपने विस्तार की गति को बढता हुआ बता दिया है। जबकि विस्तार की गति में कमी हुई है।

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  22. मुझे ऐसा लगता है कि कई वैज्ञानिक हमारे वेद को ही पढ़कर ही कुछ विषयों को प्रयोगों के माध्यम से सिद्धांत प्रतिपादित कर दिया है. वृह्मांण्ड के बारे में भी जो महाविष्फोट का सिद्धांत है वह भी वेदों में वर्णित सिद्धांत से मिलता जुलता है। मैं आइन्सटाइन के एक सिद्धांत सापेक्षता के सिद्धांत के बारे में भी कुछ कहना चाहता हूं। एक धार्मिक टीवी सीरियल(कृष्णा) देखा था जिसमें एक राजा को अपनी पुत्री के विवाह के योग्य वर नही मिला तो उन्होंने वृह्मलोक जाकर वृह्मा से पूछा कि इसकी शादी कहां करूं तो वृह्मा जी ने कहा की वृह्मलोक का एक क्षण धरती के युगों के बराबर है इस समय वहां पर द्वापर युग है आप वहां जाकर श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम से विवाह करें। तब राजा वहां से धरती आजाते हैं तो धरती में द्वापर युग चल रहा था । इस कहानी को बताने का मतलब था कि आइन्सटाइन ने भी यही कहा था कि अगर कोई प्रकाश की गति से सफर करता है तो उसके लिये समय शून्य हो जाता है और वह भविष्य में पहुंच जाता है यह कहानी इस वात का सबूत है कि हमें वैज्ञानिक सोच के साथ वेदों तथा अन्य धार्मिक ग्रंथो जो वैज्ञानिक हों (किसी भी धर्म के हों) अध्ययन करना चाहिए क्योंकि अभी भी बहुत सारे रहश्य इनमें छिपे हैं.
    (किसी भी त्रुटि के लिए माफ करें)

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    • अमित जी,
      आप महाभारत मे वर्णित राजा रैवत तथा उसकी पुत्री की कथा का उल्लेख कर रहे हैं। ब्रह्माण्ड मे भिन्न स्थानों पर समय के भिन्न गति से चलने का यह सबसे प्रथम उल्लेख है।

      वेदो, पुराणो तथा अन्य धर्मग्रंथो मे वैज्ञानिक सिद्धांत छुपे हो सकते हैं, सहमत हूं। उनका अध्ययन होना चाहीये, कोई दो राय नही। लेकिन “हम महान, हमारा धर्म महान, हमारे धर्म ग्रंथ महान” वाली विचारधारा से मैं सहमत नही रहता।

      ज्ञान जहां से भी मिले ग्रहण करना चाहिये, चाहे वह पश्चिम से मिले या पूर्व से।

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  23. महा विस्फोट सिद्धान्त मे यह जो आपने कहा – “यह विस्तार कुछ इस तरह से हो रहा है जिसका कोई केन्द्र नहीं है” नहीं समझ में आ रहा है कि जब एक बिन्दुका महाविस्फोट हो कर ब्रह्माणका प्रसारण (विस्तार) शुरु हुआ और अन्त्य मे सञ्चुकन होते हुये केन्द्रित हो कर पुनः पूर्व स्थिति को ही प्राप्त हो रहा हैं तो विस्तार को कैसे अकेन्द्रित कह सकते ?

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  24. Priy Vigyani ji,
    humne aaj pahli baar apki ye site kholi, jise padhkar hum bahut hi jyada prabhavit huve hain. aur humein ish baat ka dukh bhi hai ki mujhe pahle iski jankari kyun nahi hui.
    Aaj dopahar e hi main aapki is site per baitha hoon. aur ab raat ke 11 bajne ko aaye hain to soncha ki kuchh aabhar to prakat hi kar du.

    Ji bahut Bahut Dhanyawad, itni achchhi achchhi post dene ke liye. aapke sabhi lekh jankariprad hain. aur aaj ke baad mujhe aapki is site ki jankari aur logo ko deni hai.

    Mahodaya ji,
    Main Einstein se bahut adhik prabhavit hoon. main unki sabhi theory ko, unke vicharo ko janna chahta hoon. E=mc2 aur theory of relativity(samanya aur vishisht siddhant) ki vyakhya yadi aap kar sake to main aapka sadaiv aabhari rahoonga.
    E=mc2 mein main ye janna chahta hoon ki einstein ke man mein kya bhav aaye honge?
    Ishke alava main ye bhi janna chahta hoon ki eak safal vigyanik ke kya lakchhad hote hain?
    Darasal main eak vigyanik banna chahta hoon. abhi main 10th ka student hoon. main eak aisa bhautik vigyanik banna chahta hoon jaise ke einstein the. main ye janta hoon ki unke jaisa koi oosra nahi ho sakta. per phir bhi main prayash karna cahta hoon. aur aaj pata nahi kyun jaie mujhe laga ki aap mera maargdarshan karne se na nahi karenge.
    anmol.kumar@live.in meri email id hai.

    Aasha hai ki aap apni site mein mere bataye topic mein likhenge aur mujhe nirash nahi karenge.

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  25. ye aapka ehshan hai jo aap is vishay me jankariya hame de rahe hai. isase pahle mai pagalo ki tarah idhar udhar bhatakta raha aur mujhe ab ja kar sahi jagah mujhe mila. par ye vigyan ki pyass bahut badi hoti hai. jab aapne laga di hai to aapko hi ise bujhana hai aur mujhe yakin hai aap aisa kar sakte hai.
    dhanyabaad

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  26. Dear Friends
    i like reading in space story writing in hindi

    Aak bat mujhe bahut bar likhne ko majbur karti hai ki thi big bang ho ya the big crunch ho lakin unme jo aak amat tatva (kan) parmanu hai wah hi astitva ka parval
    parman hai jise ap energy bolo ya god vahi sanchalit karta hai viswa ko.
    agar kisi vi parmanu se use hata de to kuch bhi nahi
    uska kya formula hai yah ham nahi pakkad sakte lakin jis din ham waha pahuch jayange to god mil jaiga tab hame kuch bhi janne ki ichha nahi hogi

    That is True

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  27. विज्ञान विषय पर वैसे भीलिखने वाले कम हैं – उम्मीद है आप इस विवर को भर पाने में कामयाब होंगे.

    बेहतरीन शैली में ज्ञानवर्धक लेख है यह.

    शुभकामनाएँ.

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  28. आपने मेरे दिल के करीब विषय पर लेख लिख है। इस वैश्विक रहस्य के बारे मे जितना जानो कम है और जितना सोचो कम। रोज ही रात में आकाश पे आँखे गड़ाये घंटॊ सोच सकता हूँ। आपका पन्ना बुकमार्क कर रहा हूँ, अपनी मम्मी को पढ़ाऊँगा :)। कुछ मेने भी लिखा था पहले (http://meri-awaaz-suno.blogspot.com/2006/07/blog-post_26.html)

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  29. बहुत सुन्दर लेख, एक इसी विषय पर चिट्ठे की कमी थी सो आपने पूरी कर दी है। आशा है रोज नये नये और रोचक विषयों पर लेख पढ़ने को मिलेंगे।
    श्याम वीवर ( Black hole) समय और प्रकाश की गति पर लेख लिखें, उत्सुकता रहेगी।

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  30. मजा आ गया पढकर। बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।

    इस तरह की वैज्ञानिक विषयों पर सेरीज बहुत उपयोगी रहेगी। इससे हिन्दी चिट्ठाजगत की समृद्धि काफी बढ जायेगी।

    आपका बहुत-बहुत स्वागत !!

    Liked by 1 व्यक्ति

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