अंतिम प्रश्न : आइजैक आसिमोव


समय 21 मई, 2061 , जब दो मित्रों के मध्य हंसी मजाक में “अंतिम प्रश्न” पूछा गया था, ऐसे समय में जब मानवता पहली बार वास्तव में प्रकाश के युग में प्रवेश कर रही थी। यह प्रश्न दो मित्र द्वारा ‘हाईबॉल*’ पीते हुए पाँच डॉलर की शर्त के दौरान उठा था। अलेक्जेंडर एडेल और बर्ट्राम लुपोव, मल्टीवैक के समर्पित परिचालक थे। ये दोनों वे किसी भी मानव की तुलना में उस विशाल कंप्यूटर मल्टीवैक के उदासीन, तेज प्रतिक्रिया देने वाले चमकीले मीलों लंबे चेहरे के पीछे के राज को बेहतर समझते थे। उन्हें मल्टीवैक के रिले और सर्किट के संयोजन का कम से कम थोड़ा-बहुत अंदाज़ा तो था, जोकि अब इतना विशाल और जटिल हो चुका था कि कोई भी अकेला मानव उसे पूरी तरह से समझ नहीं सकता था। (* एक शराब पेय)

मल्टीवैक खुद को समायोजित करने और उसमे उत्पन्न त्रुटियों को ठीक करने में सक्षम था। मल्टीवैक के सकुशल संचालन के लिए यह अत्यावश्यक था ; क्योंकि कोई भी मानव उसे इतनी तेज़ी से या ठीक से समायोजित या ठीक नहीं कर सकता था। इसलिए एडेल और लुपोव उस विशालकाय मशीन की देखभाल बस हल्के-फुल्के और सतही तौर पर ही करते थे. उनका यह कार्य मानवीय सीमाओं में ही था, उससे अधिक करना किसी भी मानव के लिए संभव नहीं था। वे उसे आँकड़े प्रदान करते थे, उसकी ज़रूरतों के हिसाब से प्रश्न बदलते थे और उससे मिलने वाले उत्तरो का अनुवाद और विश्लेषण करते थे। लेकिन यह एक तथ्य था कि वे और उनके जैसे दूसरे लोग, मल्टीवैक की कामयाबी का श्रेय पाने के पूरी तरह हकदार थे।

कई दशकों तक मल्टीवैक ने चाँद, मंगल और शुक्र तक पहुँच सकने वाले अंतरिक्ष यानो को डिज़ाइन करने और मार्ग निर्धारण में मदद की थी, जिसकी वजह से मानव चाँद, मंगल और शुक्र तक पहुँच पाया था। मंगल से आगे, पृथ्वी के सीमित संसाधन इन मानव यात्रीयों वाले अंतरिक्ष यानो के लिए पर्याप्त नहीं थे; लंबी यात्राओं के लिए बहुत ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत थी। पृथ्वी पर तकनीकी विकास ने ऊर्जा के लिए ईंधन जैसे कोयले और यूरेनियम का प्रयोग तेजी से और बेहतर तरीके से किया था, लेकिन दोनों ही सीमित मात्रा में थे।

धीरे-धीरे मल्टीवैक ने इतना ज्ञान अर्जित कर लिया कि वह अधिक गहरे और मूलभूत प्रश्नों का उत्तर दे सके। और फिर 14 मई 2061 को, जो अब तक केवल सिद्धांत था, वह वास्तविकता बन गया।

मल्टीवैक द्वारा डिजाइन की गई नई ऊर्जा तकनीकों से सूरज की ऊर्जा को संरक्षित किया गया, उसे दूसरे रूप में बदला गया और इस ऊर्जा को पूरे ग्रह के स्तर पर प्रयोग किया जाने लगा था। इस नए ऊर्जास्रोत के कारण धीरे धीरे पूरी पृथ्वी ने जलते हुए कोयले और विखंडन वाले यूरेनियम का इस्तेमाल बंद कर दिया। अब सारी पृथ्वी पर अंतरिक्ष में स्थित एक मील व्यास के उपग्रह से ऊर्जा प्राप्त हो रही थी। यह उपग्रह पृथ्वी से चन्द्रमा की आधी दूरी पर स्थित कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था और सूर्य की अदृश्य किरणों से पृथ्वी की समस्त ऊर्जा आवश्यकता पूरी कर रहा था था।

यह ऊर्जा सप्ताह के सातों दिनों निर्बाध रूप से उपलब्ध थी। आखिरकार एक दिन एडेल और लुपोव ने  सार्वजनिक कार्यक्रमों से बचकर एक शांत जगह पर छुट्टी मनाने की सोची। एक ऐसी जगह जहाँ कोई उन्हें ढूंढने के बारे में सोच भी नहीं सकता था, वे ज़मीन के नीचे बने सुनसान कमरों में से एक ऐसे कमरे में पहुंचे जहाँ वे मल्टीवैक के विशाल जमीन के नीचे दबे हुये शरीर को देख सकते थे। इस समय तक मल्टीवैक भी इतना आत्मनिर्भर हो गया था कि वह भी बिना किसी देखभाल के, आराम से, डेटा को इत्मीनान से और सुस्ती भरी आवाज़ के साथ विश्लेषण कर सकता था। मल्टीवैक भी अब इतना कार्यकुशल हो गया था कि वह भी छुट्टी मना सकता था और वे एडेल और लुपोव यह बात समझते थे। शुरू में उनका मल्टीवैक को नए प्रश्नो द्वारा परेशान करने का कोई इरादा नहीं था।

वे अपने साथ एक शराब की बोतल और बर्फ लाए थे और उस समय उनका एकमात्र इरादा एक-दूसरे के साथ आराम से समय बिताना था।

एडेल ने कहा, “अब हम इस ऊर्जा मशीन के बारे में सोचते हैं तो यह बहुत अद्भुत मशीन लगती है।” उसके चौड़े चेहरे पर थकान की लकीरें थीं और वह धीरे-धीरे एक चम्मच से अपनी ड्रिंक हिला रहा था, और ग्लास में बर्फ के टुकड़ों को बेढंगे ढंग से इधर-उधर घूमते हुए देख रहा था।

“हमारे पास इतनी ऊर्जा उपलब्ध है कि हम उसे कभी भी मुफ्त में इस्तेमाल कर सकते हैं। इतनी ऊर्जा कि अगर हम चाहें, तो पूरी पृथ्वी को पिघला कर एक लोहे की एक बड़ी बूंद में बदल सकते सकते हैं, और फिर भी हमें ऊर्जा की कोई कमी महसूस नहीं होगी। इतनी सारी ऊर्जा जिसे हम हमेशा, हमेशा और हमेशा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।”

लुपोव ने अपना सिर एक तरफ झुकाया। जब वह किसी बात से सहमत नहीं होता तो वह अपना सर एक और झुका देता था। वह एडेल से सहमत नही था क्योंकि अब भी उसे कुछ कार्य मानवीय श्रम के रूप में करने पड़ते थे जैसे वह इस पार्टी के लिए ग्लास और बर्फ लाड कर लाया था। उसने कहा, “नहीं, हमेशा के लिए ऊर्जा उपलब्ध नहीं है ।” पढ़ना जारी रखें अंतिम प्रश्न : आइजैक आसिमोव

3I/ATLAS: अंतरखगोलीय धूमकेतु  या एलियन अंतरिक्ष यान?


3I/ATLAS  एक प्राकृतिक अंतरखगोलीय धूमकेतु है। नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य संस्थानों के खगोलविद बताते हैं कि इसके दृश्यमान कोमा, धूल की पूंछ और गैस उत्सर्जन धूमकेतु के व्यवहार के अनुरूप हैं, भले ही इसकी रासायनिक संरचना असामान्य हो। इसमें कृत्रिम प्रणोदन, संचार संकेतों या संरचनात्मक विशेषताओं का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

अधिकांश वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि हालाँकि इसकी विसंगतियाँ अध्ययन के योग्य हैं, लेकिन असाधारण दावों के लिए असाधारण प्रमाण की आवश्यकता होती है , और वर्तमान अवलोकनों को अंतरखगोलीय धूमकेतुओं की संरचना और उत्पत्ति में प्राकृतिक विविधताओं के माध्यम से समझाया जा सकता है।
असामान्य उत्पत्ति के बावजूद 3I/ATLAS ब्रह्माण्ड के अध्ययन के एक असाधारण वैज्ञानिक अवसर का प्रतिनिधित्व करता है। यह शोधकर्ताओं को किसी अन्य तारे के चारों ओर निर्मित पदार्थ का विश्लेषण करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे ग्रह प्रणालियों की विविधता और उन्हें आकार देने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं के बारे में सुराग मिलते हैं। चाहे अंततः यह एक एलियन कलाकृति साबित हो या अंतरखगोलीय निर्माण का एक प्राकृतिक अवशेष हो, यह पिंड 3I/ATLAS ब्रह्मांड के बारे में मानवता की समझ को विस्तार देता  है और हमें याद दिलाता है कि हम अपने सौर मंडल से परे के विशाल ब्रह्मांड के बारे में वास्तव में कितना कम जानते हैं।
3I/ATLAS पर बहस पृथ्वी से परे जीवन के बारे में मानव की निरंतर जिज्ञासा और वैज्ञानिक संशयवाद तथा कल्पनाशील अन्वेषण के बीच की महीन रेखा को दर्शाती है। हालाँकि वर्तमान साक्ष्य एक प्राकृतिक पिंड की अवधारणा का दृढ़ता से समर्थन करते हैं, ऐसे अंतरखगोलीय मेहमानों का खुले दिमाग से किया गया अध्ययन यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई एलियन यान कभी हमारे सौर मंडल में प्रवेश करता है, तो हम उसे पहचानने के लिए तैयार रहेंगे। इस अर्थ में, 3I/ATLAS न केवल एक अंतरखगोलीय यात्री है, बल्कि ब्रह्मांड और उसमें हमारे स्थान के बारे में ज्ञान की हमारी अपनी खोज को प्रतिबिंबित करने वाला एक दर्पण भी है। पढ़ना जारी रखें 3I/ATLAS: अंतरखगोलीय धूमकेतु  या एलियन अंतरिक्ष यान?

चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अपने महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान के तहत 14 जुलाई को चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण करने जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसे 14 जुलाई 2023 दोपहर 2:35 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा।

शुरुआती दो अभियान – चंद्रयान 1 और चंद्रयान- 2 के बाद यह तीसरी बार है, जब भारत इस दिशा में कोशिश कर रहा है।

इससे पहले ज़ाहिर है, साल 2019 में चंद्रयान-2 अभियान के दौरान लैंडर के सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफलता नहीं मिल पाई थी। यही कारण है कि चंद्रयान-3 मिशन को भारत के लिए अहम माना जा रहा है और इससे काफ़ी उम्मीदें भी जुड़ी हैं।

भारत का तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन, LVM3 चंद्रयान-3, प्रक्षेपण यान के चौथे परिचालन मिशन (M4) में उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस अभियान में इसरो सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन कर नई सीमाएं पार करने का प्रयास कर रहा है

इस अभियान का एक उद्देश्य इसके चंद्र मॉड्यूल द्वारा चंद्रमा की सतह और चंद्र भूभाग पर घूमना प्रहै। इसके इसरो के भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए सहायक होने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त रोवर की तैनाती और इन-सीटू(in-सीटू) वैज्ञानिक प्रयोग से चंद्र अभियानों में नई ऊंचाइयों को छुएंगे। जी हां, इसरो चंद्रमा को हमारे करीब ला रहा है। पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान

2022 की सबसे खूबसूरत तस्वीर : जेम्स वेब अंतरिक्ष वेधशाला(James Webb Space Telescope – JWST)


जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope – JWST) द्वारा ली गई इस चमकते तारे की तस्वीर को लेकर नासा (NASA) ने कहा कि दूरबीन के 18 षट्कोणीय दर्पण अब संरेखित(align) हो चुके हैं। वो एकसाथ काम कर रहे हैं, यानी वो अब 18 दर्पण मिल कर एक दर्पण बन चुके हैं। हमें जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं ज्यादा बेहतर तस्वीरें मिल रही हैं। यह हैरान करने वाला और खुशी देने वाला है।

JWST की टीम ने कहा कि हमारी आकाशगंगा के दूसरे छोर पर मौजूद जिस नारंगी तारे (Orange Star) की तस्वीर जेम्स वेब टेलिस्कोप ने ली है, वह धरती से करीब 2000 प्रकाश वर्ष दूर है। इस तारे का नाम 2MASS J17554042+6551277है। इसकी दृश्य चित्र को बेहतर बनाने के लिए लाल फिल्टर का उपयोग किया गया था। ताकि तारे की चमक और अंतरिक्ष का अंधेरा आपस में ना मिलें। इस चमकते तारे के पीछे कई आकाशगंगाएं और तारे भी दिख रहे हैं। पढ़ना जारी रखें 2022 की सबसे खूबसूरत तस्वीर : जेम्स वेब अंतरिक्ष वेधशाला(James Webb Space Telescope – JWST)

अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन


अपोलो 11 मिशन के क्रू सदस्य रहे अंतरिक्षयात्री माइकल कोलिंस का निधन हो गया है। उन्होंने 28 अप्रैल को आख़िरी सांस ली। 90 वर्षीय कोलिंस के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कोलिंस के परिवार ने बताया, “वो लंबे समय से कैंसर से बड़ी बहादुरी से लड़ रहे थे लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने आख़िरी दिन शांति से अपने परिवार के साथ बिताए।”

अपोलो मिशन के दौरान कोलिंस चंद्रमा की कक्षा में ही रुके थे जबकि उनके सहयोगी नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे थे। पढ़ना जारी रखें अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन

विक्रम लैंडर साफ़्ट लैंडीग

चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता


भारत शनिवार 7 सितंबर 2019 की सुबह इतिहास रचने से दो क़दम दूर रह गया। अगर सब कुछ ठीक रहता तो भारत विश्व का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के क़रीब उतरता। 978 … पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता