ब्रह्मांड मे कितने आयाम ?


ब्रह्मांड की उत्पत्ति सदियो से ही मनुष्य के लिए रहस्य से भरा विषय रहा है हालांकि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति को समझने के लिए कई वैज्ञानिक शोध किये गए कई सिद्धान्तों का जन्म भी हुआ फिर बिग बैंग सिद्धान्त को सर्वमान्य माना गया। हम अपने आसपास ही यदि लोगो से पूछे की ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई तो दो जवाब हमे सुनने को ज्यादा ही मिलते है पहला,ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति ईश्वर के द्वारा की गई है हालांकि यह जवाब धार्मिक है और लोगो की ईश्वर में गहरी आस्था को दर्शाता है दूसरा,ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति बिगबैंग से हुई यह जवाब पूरी तरह विज्ञान और वैज्ञानिक सिद्धान्तों से प्रेरित है।

ब्रह्माण्ड का जन्म ईश्वर के द्वारा की गयी यह धार्मिक और लोगो की ईश्वर आस्था से जुड़ा प्रश्न है इसलिए हम भी इसपर कोई टिप्पणी नही करेगे। अब प्रश्न है क्या वास्तब में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति बिगबैंग से ही हुई ?यह सवाल ही आपने आप में जटिल है। बिग बैंग कैसे हुई ?यह सवाल तो उससे भी ज्यादा जटिल है। हम अंतरिक्ष के तीन आयाम और समय चौथा आयाम है हमसब इन्ही चार आयाम में यहते है। हम तीन आयाम को तो भलीभाँति जानते है समझते है परन्तु चौथे आयाम के बारे में हमारी जानकारी अभी भी अपूर्ण है।

त्री-आयामी

त्री-आयामी

हम अपने संसार को तीन आयामों में देखते और समझते है हैं, जिन्हें हम लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई (गहराई) के नाम से पुकारते है। आधुनिक वैज्ञानिकों ने समय को भी एक आयाम मान लिया है। हम अपने संसार मे देखते और पाते है की कही भी कुछ भी अपने आप नही हो रहा अर्थात किसी भी चीज की उत्पत्ति अपने आप नही हो रही चलिये इसे एक रचनात्मक कार्य द्वारा समझते की कोशिश करते है। मान लीजिये हमे चाय पीनी है तो हमे चाय तो बनानी पड़ेगी इसके लिए पानी,शक्कर,चायपत्ती इन तीनो को मिलकर इसे उबालना होगा फिर जाकर इसमे दूध डालना होगा तब जाकर चाय का निर्माण होगा काफी सरल प्रक्रिया से ही चाय की उत्पत्ति हो गयी लेकिन क्या हममे से किसी ने यह देखा या सोचने की कोशिश की है की चाय के अंदर क्वांटम स्तर पर क्या हो रहा है ? स्टीफेंस हॉकिन्स जैसे महान भौतिकविद् का मानना है की ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति या बिगबैंग को समझने के लिए आपको अंतरिक्ष में वो जगह तलाशने की कोई आवश्यकता नही जहाँ बिगबैंग की घटना हुई हो आप अपने चाय या किसी भी वस्तु के अंदर क्वांटम स्तर देखने पर आपको बिगबैंग के रहस्यों को समझने में काफी मदद मिल सकती है।

चाय के अंदर क्वांटम स्तर पर ढेर सारे वर्महोल आपने आप ही बनते और नष्ट होते रहते है वर्महोल की निर्माण और नष्ट होने की प्रक्रिया कई चरणों और कई आयामों (लगभग 10 आयाम) में होती है ये वर्महोल अपने साथ ढेर सारी ऊर्जा भी प्रस्तुत करती रहती है। वर्महोल आकर मे नगण्य होते है,स्थायी भी नही होते ये सेकंड के खरबवे हिस्से मे बनते रहते है फिर भी ऊर्जा प्रस्तुत करते रहते है और अपने ही फीडबैक (एक प्रकार का विकिरण) से नष्ट हो जाते है। इस प्रकार वर्महोल की बनने और नष्ट होने की सतत प्रक्रिया चलती रहती है। स्टीफेंस हॉकिन्स का मानना है वर्महोल अपने विकिरण से इसलिए नष्ट हो जाते है क्योंकि उनका आकर बहुत ही नगण्य होता है यदि वर्महोल का आकार बड़ा हो तो वे अपने विकिरण से नष्ट नही हो सकते और वे किसी विन्दु पर इतनी ऊर्जा प्रस्तुत कर सकते है की बिगबैंग जैसी परिस्तिथियाँ उत्तपन्न हो जाये। यह भौतिकविज्ञानी स्टीफेंस हॉकिन्स की अपनी अवधारणा है जो उन्होंने 1960-70 के दशक मे अपनी प्रयोग से जुड़े आकड़ो के आधार पर दी गयी है।

उनकी यह अवधारणा इस बात का प्रबल समर्थन करता है की ब्रह्माण्ड का जन्म बिगबैंग की घटना से ही हुई। वैसे आधुनिक शोध तो निरंतर जारी है लेकिन शोधकर्ताओं के पास इस अवधारणा को मानने या न मानने का कोई ठोस कारण नही है।

वर्महोल

वर्महोल

वर्महोल (Wormhole): वर्महोल इस ब्रह्माण्ड के वो महीन छिद्र या सुराख है जहाँ पर समय और अंतरिक्ष की सारी ज्यामितियाँ एक हो जाती है अर्थात यहाँ पर समय और आकाश(Space) का परस्पर एक दूसरे मे रूपांतरण संभव है। समय और अंतरिक्ष की सारी ज्यामितियाँ एक हो जाने की वजह से इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मे जितनी भी आयाम है वे सब उस विन्दु पर समाहित हो जाती है। मौलिक वर्महोल बहुत ही सूक्ष्म आकार के होते है माइक्रोस्कोपिक स्तर पर इनका आकार 10-35 मीटर के लगभग माना जाता है। शोधकर्ताओ का मानना है चूँकि ब्रह्माण्ड फैलता है इसलिए वर्महोल के आकार को भी बढ़ाया जा सकता है। कई भौतिकविद् का मानना है की यदि बड़ा वर्महोल बना लिया जाय तो समय यात्रा संभव है।

आयाम (Dimensions): लम्बाई, चौड़ाई,ऊँचाई और समय ये सभी आयामों का अस्तित्व हमारे समक्ष है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या अन्य आयामों के अस्तित्व को समझना और परिभाषित करना शोधकर्ताओ का भी मानना है चार आयामो से ज्यादा किसी भी अन्य आयाम की कल्पना करना अंसभव है। हालांकि स्ट्रींग सिद्धान्त 11 आयाम से लेकर 26 आयामो के अस्तित्व की कल्पना करता है। कालुजा केलिन का सिद्धान्त यह बताता है की अंतरिक्ष के तीन साधारण आयामों के अतिरिक्त भी अन्य आयामों का अस्तित्व है।

इसी का समर्थन करते हुए प्रसिद्ध वैज्ञानिक रिचर्ड एच. ब्रायण्ट अपनी कृति “अदर वर्ल्डस” में लिखते हैं कि भौतिक आयामों से परे अपने ही जैसे किसी अन्य विश्व-ब्रह्माण्ड के लिए यह जरूरी है कि व्यक्त चार आयामों के अतिरिक्त और अन्य आयाम हों। यह आयाम प्रत्यक्ष आयामों को ढकेंगे नहीं,वरन् हर नया आयाम प्रत्येक दूसरे से समकोण पर स्थित होगा। वे कहते हैं कि यद्यपि इस प्रकार की विचारधारा सिद्धाँत रूप में संभव नहीं है,फिर भी गणितीय रूप से इसे दर्शाया जा सकता है। उनके अनुसार यदि भौतिक विज्ञान की पहुँच से बाहर दृश्य आयामों से परे कोई अदृश्य संसार या ब्रह्माण्ड वास्तव में है,तो इसे पाँचवें, छठवें, सातवें और आठवें या उससे भी अधिक आयामों से बना होना चाहिए। इस प्रकार यदि हम कोई अदृश्य ब्रह्माण्ड की कल्पना करते है तो वास्तव में हम अन्य आयाम की कल्पना कर रहे है।

टिप्पणी

फीडबैक(Radiation:एक प्रकार का विकिरण) : जब वर्महोल बनता है तब उसके आसपास विकिरण भी उत्तपन्न होता है। ये विकिरण पुनः वर्महोल मे प्रवेश करने लगते है और एक लूप बना देते है और ये लूप वर्महोल के नष्ट होने का कारण बनते है। सच तो ये है की हमारे आसपास भी विकिरण मौजूद है। आपने अपने जीवन मे भी इस प्रकार के विकिरण को अवश्य महसूस किया होगा परन्तु आपने ज्यादा ध्यान नही दिया होगा। आपने किसी स्टेज शो मे बड़े-बड़े लाउडस्पीकर या साउंड वूफर से ची…ची..ची.. जैसे कर्कश ध्वनि(शोर:Noise) निकलती जरूर सुनी होगी। क्या आपको पता है यह कर्कश आवाज,ध्वनि से उत्तपन्न फीडबैक और आसपास मौजूद विकिरण के कारण ही सुनाई पड़ती है ? जब स्टेज पर वक्ता अपने माइक्रोफोन मे बोलता है तो उसकी ध्वनि माइक्रोफोन से होकर एम्पलीफायर मे जाती है वहाँ से ध्वनि लाउडस्पीकर या बड़े वूफर से होकर निकलती है। माइक्रोफोन-एम्पलीफायर-लाउडस्पीकर यह क्रिया निरंतर दोहराई जाती है इस क्रिया से उस पुरे सर्वर मे ध्वनि का एक लूप बन जाता है जब माइक्रोफोन मे ध्वनि का विकिरण और आसपास का विकिरण प्रवेश करता है तब आपको ची…ची..ची.. का शोर सुनाई पड़ता है। यदि इस शोर को कम न किया जाय तो आपके साउंड सिस्टम को खराब कर सकता है। इस कर्कश शोर को कम करने के लिए Amplifier noise filter circuit और Noise reduction circuit लगे होते है। यह अवांछित कम या ज्यादा आवृत्ति की ध्वनि तरंगो को फ़िल्टर करके कम या लगभग नगण्य कर देते है वैसे फ़िल्म प्रोडक्शन और संगीत रेकॉर्डिंग् मे Subsonic noise filter circuit का इस्तेमाल किया जाता है।

लेख : पल्लवी कुमारी

लेखिका परिचय

पलल्वी  कुमारी, बी एस सी प्रथम वर्ष की छात्रा है। वर्तमान  मे राम रतन सिंह कालेज मोकामा पटना मे अध्यनरत है।

पल्लवी कुमारी

पल्लवी कुमारी

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21 विचार “ब्रह्मांड मे कितने आयाम ?&rdquo पर;

  1. ब्रह्माण्ड के चारों आयम और व्हर्महोल के बारे में लिखे गए आपके लेख से हमारा काफी ज्ञानवर्धन हुआ है। खासकर चाय बनाने वाले सोदाहरण से!!

    आशीष सर, मेरा आपसे एक आग्रह है कि कृपया एक विस्तृत आलेख व्हर्महोल और उससे संभव होने वाली (अभी तो संभव नहीं!) समययात्रा (Time Travel) के बारे में लिखे। सादर।।

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  2. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति विश्व जल दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर … अभिनन्दन।।

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  3. श्रीमान
    मेरे कमरे मे पश्चिम दिशा में दायें कोने में एक 10 या 20 mm का छिद्र है तथा छिद्र की लम्बवत दिशा में एक मोबाइल टावर है। जब सूर्य अस्त होने को होता है और छिद्र से प्रकाश कमरे में आना प्रारंभ होता है तो प्रकाश के कारण कमरे में उस मोबाइल टावर का उल्टा व छिद्र के व्यास से लगभग 20 या 30 गुना बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है
    इतना तो में समझता हूं कि वो छिद्र एक लेंस की भांति व्यवहार करता है परंतु किस कारण से ऐसा होता है कृपया बताने की कृपा करें।

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  4. शानदार लेख,
    तो क्या चाय बनते हुए उस सापेक्ष time dilation होता है???
    और quntum स्तर पर और big bang के समय में क्या समानताएं हैं ?? कैसे हम big bang को बस घर पर बैठ कर जान सकते हैं।

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  5. योगवाशिष्ठ रामायण में सामानांतर ब्रह्माण्ड की तरह एक कहानी है जिसमे मंडप आख्यान में लीला और राजा पद्म एक ही समय में अलग अलग ब्रह्माण्ड में होने का उल्लेख है तथापि दोनों में समय की गति अलग है।

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