संख्याओं से तारों तक : यूनानी विज्ञान की कथा


हम लोग सपरिवार बैंगलोर से निकल कर छुट्टियां बिताने कुर्ग क्षेत्र में घूम रहे थे , कावेरी के किनारे एक ग्रामीण बांस से बना घर किराए पर लिया हुआ था।

कावेरी के तट पर शाम धीरे-धीरे उतर रही थी। सूर्य की अंतिम किरणें जल की सतह पर ऐसे चमक रही थीं जैसे किसी प्राचीन ग्रंथ के स्वर्ण अक्षर। हवा में हल्की ठंडक थी और आकाश में एक-एक करके तारे दिखाई देने लगे थे।

मैं आँगन में बैठा था। सामने मिट्टी की वेदी पर दीपक जल रहा था। मेरी बेटी गार्गी और भतीजी अनुषा, आज फिर अपने प्रश्नों के साथ मेरे पास आ बैठीं।

गार्गी हमेशा की तरह उत्सुक थी। उसकी आँखों में वही चमक थी जो किसी नए रहस्य को जानने से पहले होती है।

“पापा ,” उसने धीरे से पूछा, “आपने हमें मिस्र, सुमेरिया और बेबीलोन के बारे में बताया था। लेकिन स्कूल में हमने सुना कि गणित और विज्ञान को व्यवस्थित रूप देने का काम यूनानियों ने किया था। क्या यह सच है?”

अनुषा भी पास आकर बैठ गई। उसने आकाश की ओर देखा और कहा, “और क्या वही लोग थे जिन्होंने तारों को समझने की कोशिश की?”

मैं मुस्कुराया। यह प्रश्न मुझे प्रसन्न कर देता था।

“हाँ,” मैंने कहा, “यूनान, जिसे हम ग्रीस कहते हैं, मानव इतिहास की उन अद्भुत भूमियों में से एक था जहाँ विचारों ने स्वतंत्र रूप से उड़ान भरी। वहाँ के लोग केवल ज्ञान इकट्ठा नहीं करते थे, बल्कि वे प्रश्न पूछते थे ‘क्यों?’ और ‘कैसे?’”

यूनान : समुद्र, सितारे और विचारों की भूमि

दोनों बेटियाँ ध्यान से सुनने लगीं।

“लेकिन,” अनुषा ने पूछा, “यूनान में ऐसा क्या खास था?”

मैंने आकाश की ओर देखा। दूर समुद्र की दिशा से हल्की हवा आ रही थी।

“यूनान की भूमि पहाड़ों और समुद्रों से घिरी हुई थी,” मैंने कहना शुरू किया। “छोटे-छोटे नगर-राज्य थे , एथेंस, स्पार्टा, मिलेटस, सामोस। ये शहर व्यापार करते थे, यात्रा करते थे और अलग-अलग सभ्यताओं से विचारों का आदान-प्रदान करते थे।”

गार्गी ने तुरंत पूछा, “क्या उन्होंने मिस्र और बेबीलोन से भी सीखा?”

“बिलकुल,” मैंने कहा। “यूनानी विद्वानों ने मिस्र से ज्यामिति सीखी और बेबीलोन से खगोलशास्त्र। लेकिन उन्होंने इन ज्ञानों को केवल उपयोग में नहीं लाया , उन्होंने इनके पीछे छिपे नियम खोजने शुरू किए।”

अनुषा ने मिट्टी पर उंगली से एक वृत्त बनाते हुए पूछा, “जैसे?”

मैंने उसकी बनाई आकृति को देखा।

“जैसे यह वृत्त,” मैंने कहा। “मिस्र के लोग वृत्त का उपयोग भूमि मापने में करते थे। लेकिन यूनानी विद्वानों ने पूछा ‘वृत्त क्या है? इसकी परिभाषा क्या है? इसके गुण क्या हैं?’”

गार्गी मुस्कुराई।

“मतलब वे केवल काम नहीं करते थे , वे सोचते भी थे।”

“हाँ,” मैंने कहा, “और यही विज्ञान की असली शुरुआत है।”

आकाश अब गहरा नीला हो चुका था। कुछ चमकीले तारे दिखाई देने लगे थे।

अनुषा ने ऊपर देखते हुए पूछा, “क्या यूनानी लोग भी तारों को देखते थे?”

मैंने सिर हिलाया। “हाँ। और शायद उन्हीं ने पहली बार यह समझने की कोशिश की कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है।”

गार्गी ने उत्सुकता से पूछा, “सबसे पहले कौन था?”

मैंने थोड़ा सोचकर कहा, “अगर हम शुरुआत करें, तो हमें एक ऐसे नगर में जाना होगा जो एशिया माइनर के तट पर था , मिलेटस।”

“वहाँ एक व्यक्ति रहता था, एक व्यापारी, दार्शनिक और गणितज्ञ। उसका नाम था थेल्स।”

दोनों बेटियाँ चुप हो गईं। पढ़ना जारी रखें संख्याओं से तारों तक : यूनानी विज्ञान की कथा

प्रागैतिहासिक काल में गणित और विज्ञान


गार्गी ने आकाश की ओर देखते हुए पूछा, “पापा, क्या हमेशा से लोग इतने ज्ञानवान थे? क्या हमेशा से विज्ञान और गणित था?”

मेरे चहरे पर मुस्कुराहट आ गई , मेरी आँखे नदी के पार देखने लगी, जैसे समय के पार देख रहा हूँ , मैंने कहा, “नहीं, विज्ञान और गणित हमेशा से किताबों में नहीं थे, लेकिन उनके बीज मानव के भीतर हमेशा से थे। चलो, मैं तुम्हें उस समय की कहानी सुनाता हूँ जब मानव ने पहली बार सोचना शुरू किया था।”

दोनों बच्चे उत्सुकता से मेरी ओर झुक गए। मैंने कहना शुरू किया, “बहुत-बहुत पहले, जब न शहर थे, न खेत, न घर , तब मानव जंगलों में रहता था। वह शिकार करता था, फल इकट्ठा करता था, और हर दिन उसके लिए एक नई चुनौती होती थी। यही पाषाण युग था, जब पत्थर उसके सबसे बड़े साथी थे। लेकिन बेटी, उस समय भी मानव केवल जीवित रहने के लिए नहीं जी रहा था, वह प्रकृति को, समय को, और स्वयं को समझने की कोशिश कर रहा था।”

“क्या वह भी हमारी तरह सोचता था?” गार्गी ने पूछा।

“हाँ,” मैंने उत्तर दिया, “शायद और भी अधिक ध्यान से। वह हर चीज़ को देखता था कि सूरज कब उगता है, कब ढलता है, चाँद कैसे बदलता है, और तारे कैसे हर रात एक ही रास्ते पर चलते हैं। उसने देखा कि जब ठंड बढ़ती है, तो कुछ जानवर गायब हो जाते हैं और कुछ नए आ जाते हैं। उसने समझना शुरू किया कि यह सब किसी नियम के अनुसार हो रहा है। यही विज्ञान की शुरुआत थी, प्रकृति के नियमों को समझने की कोशिश।”

अनुषा ने थोड़ी देर सोचकर कहा, “तो विज्ञान का मतलब सिर्फ किताबें नहीं हैं?”

मैंने शाम के लिए अलाव जलाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी, लकडीयो को जलाने के लिए एक ढेरी के रूप में जमा रहा था।

मैंने माचिस की तीली से आग जलाते हुए उत्तर दिया,, “बिल्कुल नहीं। विज्ञान का मतलब है प्रश्न पूछना। और उस समय मानव हर चीज़ पर प्रश्न करता था। जब उसने पहली बार देखा कि दो पत्थरों को टकराने से चिंगारी निकलती है, तो उसने सोचा, क्या इससे कुछ और हो सकता है? उसने कोशिश की, बार-बार की, और एक दिन आग जल उठी। इसी तरह जैसे मैंने तीली को माचिस की इस सतह से रगड़ कर उसे जलाया।” पढ़ना जारी रखें प्रागैतिहासिक काल में गणित और विज्ञान

महिला दिवस विशेष : रोजालिंड फ्रैंकलिन (1920-1958) : डीएनए (DNA) की डबल हेलिक्स संरचना


20वीं शताब्दी की सबसे बड़ी खोज, निर्विवाद रूप से, डीएनए की संरचना की खोज है, जिसने एफएचसी क्रिक, जेडी वॉटसन और मौरिस विल्किंस को 1962 में नोबेल पुरस्कार दिलाया। हालाँकि, इस खोज से जुड़ा एक और नाम है, रोज़ालिंड फ्रैंकलिन, जिसे हमेशा भुला दिया जाता है। फ्रैंकलिन की कहानी, अफसोस की बात है कि 20वीं शताब्दी में विज्ञान में देखा गया सबसे बुरा विश्वासघात है।

25 जुलाई, 1920 को लंदन में जन्मी, रोसालिंड एल्सी फ्रैंकलिन बुद्धिजीवियों, नेताओं और मानवतावादियों के एक प्रसिद्ध एंग्लो-यहूदी परिवार से थीं, जो शिक्षा और सेवा को महत्व देते थे। उसकी माँ के अनुसार, फ्रैंकलिन एक होनहार युवा थी, जो सोलह साल की उम्र में, “अपने पूरे जीवन में जानती थी कि वह कहाँ जा रही थी और अपने विषय के लिए विज्ञान ले रही थी।” फ्रैंकलिन तर्क और निष्पक्षता के साथ-साथ भाषाई योग्यता की मजबूत भावना के साथ एक मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र भी थी । अपने पूरे जीवन में, उन्होंने बौद्धिक तर्क को सीखने, पढ़ाने और अपनी समझ को स्पष्ट करने के साधन के रूप में अपनाया। फ्रैंकलिन लोगों को उनके विश्वासों की रक्षा करने के लिए चुनौती देने में कामयाब रही। पढ़ना जारी रखें महिला दिवस विशेष : रोजालिंड फ्रैंकलिन (1920-1958) : डीएनए (DNA) की डबल हेलिक्स संरचना

2025 रसायन नोबेल पुरस्कार :सुसुमु कितागावा(Susumu Kitagawa), रिचर्ड रॉबसन (Richard Robson)और उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी को “धातु-कार्बनिक ढांचे के विकास के लिए” रसायन विज्ञान में 2025 का #नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है। पढ़ना जारी रखें 2025 रसायन नोबेल पुरस्कार :सुसुमु कितागावा(Susumu Kitagawa), रिचर्ड रॉबसन (Richard Robson)और उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi)

2025 भौतिकी नोबेल पुरस्कार: जॉन क्लार्क(John Clarke), मिशेल एच. डेवोरेट (Michel H. Devoret) और जॉन एम. मार्टिनिस(John M. Martinis)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को “इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइजेशन की खोज के लिए” 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है। पढ़ना जारी रखें 2025 भौतिकी नोबेल पुरस्कार: जॉन क्लार्क(John Clarke), मिशेल एच. डेवोरेट (Michel H. Devoret) और जॉन एम. मार्टिनिस(John M. Martinis)

2024 भौतिकी नोबेल पुरस्कार: जॉन जे. हॉपफील्ड(John J. Hopfield) और जेफ्री ई. हिंटन (Geoffrey E. Hinton)


रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने जॉन जे. हॉपफील्ड(John J. Hopfield) और जेफ्री ई. हिंटन (Geoffrey E. Hinton) को “कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क के साथ मशीन लर्निंग को सक्षम करने वाली मूलभूत खोजों और आविष्कारों के लिए” 2024 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है।
इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं ने भौतिकी के उपकरणों का उपयोग करके ऐसे तरीके बनाए जो आज की शक्तिशाली मशीन लर्निंग की नींव रखने में सहायक रहे। जॉन हॉपफील्ड ने एक ऐसी संरचना बनाई जो सूचना को संग्रहीत और पुनर्निर्माण कर सकती है। जेफ्री हिंटन ने एक ऐसी विधि का आविष्कार किया जो डेटा में स्वतंत्र रूप से गुणों की खोज कर सकती है और जो अब उपयोग में आने वाले बड़े कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने सूचना में पैटर्न खोजने के लिए भौतिकी का उपयोग किया

हम लोगो के पास अनुभव कि कंप्यूटर भाषाओं के बीच अनुवाद कर सकते हैं, छवियों की व्याख्या कर सकते हैं और यहां तक वे हमसे उचित बातचीत भी कर सकते हैं। शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस तरह की तकनीक लंबे समय से शोध के लिए महत्वपूर्ण रही है, इस तकनीक में बड़ी मात्रा में डेटा को पहचानना और उसका विश्लेषण करना होता है। पिछले पंद्रह से बीस वर्षों में मशीन लर्निंग का विकास बहुत तेज़ी से हुआ है और इसमें आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क नामक संरचना का उपयोग किया जाता है। आजकल, जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा मतलब इसी तरह की तकनीक से होता है। पढ़ना जारी रखें 2024 भौतिकी नोबेल पुरस्कार: जॉन जे. हॉपफील्ड(John J. Hopfield) और जेफ्री ई. हिंटन (Geoffrey E. Hinton)