ऐतिहासिक उपलब्धि : ब्लैक होल (श्याम विवर) का प्रथम चित्र


ब्लैक होल की प्रथम तस्वीर - अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 10 अप्रैल २०१९ को ब्लैकहोल की पहली तस्वीर जारी की। आकाशगंगा एम87 में 53.5 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद इस विशालकाय ब्लैक होल की तस्वीर जारी की गई है। वैज्ञानिकों ने ब्रसल्ज, शंघाई, तोक्यो, वॉशिंगटन, सैंटियागो और ताइपे में एकसाथ प्रेस वार्ता की और जिस दौरान इस तस्वीर को जारी किया गया।

ब्लैक होल की प्रथम तस्वीर – अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 10 अप्रैल २०१९ को ब्लैकहोल की पहली तस्वीर जारी की। आकाशगंगा एम87 में 53.5 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद इस विशालकाय ब्लैक होल की तस्वीर जारी की गई है। वैज्ञानिकों ने ब्रसल्ज, शंघाई, तोक्यो, वॉशिंगटन, सैंटियागो और ताइपे में एकसाथ प्रेस वार्ता की और जिस दौरान इस तस्वीर को जारी किया गया।

1979 मे खगोल भौतिक वैज्ञानिक जीन-पियरे ल्यूमिनेट(Jean-Pierre Luminet) के पास सुपरकंप्युटर नही था लेकिन उन्होने विश्व को दिखाया था कि कोई ब्लैक होल किस तरह दिखाई देगा। उनके पास IBM का कंप्युटर IBM 7040 और कुछ पंच्ड कार्ड्स( punch cards) थे जिनसे वे कंप्यूटर को निर्देश और आंकड़े देते थे। वे सैद्धांतिक रूप से जानते थे कि ब्लैक होल प्रकाश का उत्सर्जन नही करते है। लेकिन ब्लैक होल के आसपास अत्याधिक उष्ण गैस और धुल का विशालकाय बवंडर अत्याधिक चमकदार प्रकाश उत्सर्जित करता है। ल्यूमिनेट ने सोचा कि इस पदार्थ से उत्सर्जित प्रकाश ब्लैक होल के आकार की जानकारी दे सकता है और इस प्रकाश से काल-अंतराल(space-time) मे गुरुत्वाकर्षण द्वारा उत्पन्न की गई वक्रता को भी देखा जा सकता है।

1979 मे खगोल भौतिक वैज्ञानिक जीन-पियरे ल्यूमिनेट(Jean-Pierre Luminet) के द्वारा बनाया गया ब्लैक होल का चित्र

1979 मे खगोल भौतिक वैज्ञानिक जीन-पियरे ल्यूमिनेट(Jean-Pierre Luminet) के द्वारा बनाया गया ब्लैक होल का चित्र

किसी रेफ़्रिजरेटर के आकार के IBM 7040 कंप्यूटर से संसाधित आंकड़ो के आधार पर ल्यूमिनेट ने पेन और कागज की सहायता से अपने हाथो से ब्लैक होल का सर्वप्रथम चित्र बनाया था। इस चित्र मे उन्होने ब्लैक होल का घटना क्षितिज(event horizon) दिखाया था जिसके पार जाने पर ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण से कुछ नही बच सकता है। इसी के साथ उन्होने अक्रिशन डिस्क भी दिखाई थी जो कि ब्लैक होल द्वारा निगले गये तारों के मलबे से बना धुल और गैस का एक विशाल बवंडर होता है। ब्लैक होल के पास एक ही अक्रिशन डिस्क होती है लेकिन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से इसका स्वरूप विकृत दिखाई देता है। किसी विकृत दर्पण मे बनी छवि के जैसे इस अक्रिशन डिस्क की छवि दो लंबवत डिस्क के जैसे दिखाई देती है। ये दोनो ब्लैक होल के समीप अधिक चमकदार दिखाई देती है।

इस चित्र के बनाये जाने के 4 दशक के पश्चात भी ल्यूमिनेट का पूर्वानुमान अब भी सही माना जाता है। लेकिन उनके द्वारा बनाया गया चित्र और ब्लैक होल के सभी चित्र पेंटींग मात्र है, वास्तविक फोटोग्राफ़ नही है। अब यह बदलने जा रहा है। वैज्ञानिक एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है जिसे इवेंट होरीजान टेलिस्कोप(Event Horizon Telescope) नाम दिया गया है। 10 अप्रैल 2019 को वे M87 आकाशगंगा के केंद्र का ब्लैक होल का चित्र जारी किया है। मूल योजना के अंतर्गत वे हमारी आकाशगंगा के केंद्र के महाकाय ब्लैक होल सेजीटेरीयस A( Sagittarius A , उच्चारण ए स्टार) ब्लैक होल का वास्तविक चित्र भी जारी करने वाले थे लेकिन तकनीकी वजहो से नही कर पाये है। वैकल्पिक रूप से उन्होने  M87 आकाशगंगा मे स्थित एक अन्य ब्लैक होल के आंकड़े जमा किये थे, जिसका चित्र जारी किया गया है। इस चित्र से ब्रह्माण्ड के सबसे रहस्यमय पिंड के रहस्य का आवरण हटाने मे मदद मिलेगी। साथ ही आकाशगंगाओ की निर्माण प्रक्रिया, विकास और आकार के बारे मे भी जानकारी मिलेगी।

इवेंट होरीजान टेलिस्कोप एक अकेली दूरबीन नही है, यह आठ रेडीयो दूरबीनो का नेटवर्क है जोकि हवाई, अरिजोना, स्पेन, मेक्सीको, चीली और अंटार्कटीका मे स्तिथ है।

इवेंट होरीजान टेलिस्कोप एक अकेली दूरबीन नही है, यह आठ रेडीयो दूरबीनो का नेटवर्क है जोकि हवाई, अरिजोना, स्पेन, मेक्सीको, चीली और अंटार्कटीका मे स्तिथ है।

इवेंट होरीजान टेलिस्कोप एक अकेली दूरबीन नही है, यह आठ रेडीयो दूरबीनो का नेटवर्क है जोकि हवाई, अरिजोना, स्पेन, मेक्सीको, चीली और अंटार्कटीका मे स्तिथ है। खगोल वैज्ञानिक इन आठ दूरबीनो का प्रयोग एक समय मे एक ही पिंड के निरीक्षण के लिये करते है। उसके पश्चात वे इन सभी दूरबीनो से प्राप्त आंकड़ो को मिलाकर एक चित्र बनाते है। इन आठ दूरबीनो से इस तरह से एक साथ मे कार्य करने की प्रक्रिया को आप पृथ्वी के आकार की एक दूरबीन के तुल्य मान सकते है।

इस तकनीक को “वेरी लांग बेसलाईन इंटरफ़ेरोमेट्री (very long baseline interferometry, VLBI)” कहते है। इस तकनीक की सफ़लता के लिये आवश्यक है सभी दूरबीनो मे समय मापन के लिये समान और सटीक समय दर्शाने वाली घड़ीयों की उपस्थिति। उन्होने इस कार्य के लिये परमाणु घड़ीयों का प्रयोग किया है।

सब सभी दूरबीने सेजीटेरीयस A* का निरीक्षण करती है तब उनके निरीक्षण के आंकड़ो के साथ परमाणु घड़ी का समय जोड़ देते है। अब जब वैज्ञानिक सभी दूरबीनो के आंकड़ो का मिलान करते है तब वे उन आंकड़ो को परमाणु घड़ी के समय के अनुसार मिलाते है, उदाहरण के लिये किसी एक दूरबीन के 5:13 p.m. GMT के आंकड़ो को अन्य दूरबीनो के 5:13 p.m. GMT के आंकड़ो के साथ ही मिलाया जायेगा।

आठ दूरबीन के आंकड़ो को एक ही स्थान पर मिलाया जाता है। सामान्यत: वैज्ञानिक इन आंकड़ो को इंटरनेट से एक दूसरे से साझा करते है लेकिन चित्र के लिये आंकड़ो के मिलान के लिये सारे आंकड़ो की आवश्यकता होती है और इन आंकड़ो की मात्रा पेटाबाईट मे होती है जोकि इंटरनेट से भेजा नही जा सकता है। इस समस्या को पार पाने के लिये आंकड़ो की हार्ड डिस्क को विमान से भेजा जाता है। वैज्ञानिको ने आंकड़ो को इस तरह भेजे जाने को स्निकरनेट(sneakernet) नाम दिया है।

अप्रैल 2017 मे वैज्ञानिको ने इस प्रयोग मे सबसे पहला निरीक्षण चीली की अटाकामा लार्ज मिलीमिटर-सबमिलीमिटर दूरबीन(ALMA) से किया था। यह उपकरण इतना शक्तिशाली है कि उससे EHT द्वार काल-अंतराल मे एक नन्हे से छिद्र के द्वारा देखा जा सकता है। लेकिन इसकी तैयारीयाँ इतनी आसान नही थी। वैज्ञानिको को इसके लिये ALMA की 66 डीश से प्राप्त आंकड़ो को जमा करना पड़ा था। उसके बाद उन आंकड़ो को अन्य आठ दूरबीनो के आंकड़ो से जोड़ा गया।

इसके बाद भी ALMA के द्वारा सभी आंकड़ो के विश्लेषण के लिये एक साल से से अधिक समय के लेने के बाद भी चित्र नही बन पाया। इसके लिये उन्हे अंटार्कटीका और उस पर स्थित दक्षिणी ध्रुव दूरबीन से आंकड़ो वाली हार्ड डिस्क के विमान से आने के लिये अगले वसंत तक इंतजार करना पड़ा। क्योंकि वर्ष मे केवल वसंत और गर्मीयों मे ही दक्षिणी ध्रुव से विमान उड़ान भर सकते है। यह आंकड़े MIT की हेस्टेक वेधशाला(Haystack Observatory) मे दिसंबर 2017 मे पहुंच पाये थे।

फ्रांस के ग्रीनोबल शहर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मिलीमेट्रिक रेडियो एस्ट्रोनॉमी के खगोलविद माइकल ब्रिमर ने कहा,

‘हमने कोई विशाल टेलीस्कोप इसलिए नहीं बनाया क्योंकि वह अपने वजन के चलते ही टूट सकता है। हमने कई सारे रेडियो टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को इस तरह जोड़ा है जैसे वह किसी बड़े से शीशे का टुकड़ा हो।’

ब्लैक होल के एक चित्र के लिये इतनी सारी कवायद की क्या आवश्यकता है ? वैज्ञानिको के अनुसार

“यही तो विज्ञान की विचित्रता है। ब्लैक होल ब्रह्माण्ड के सबसे अधिक रहस्यमय पिंड है। इनसे अधिक रहस्यमय केवल जीवन ही है।”

और जीवन, कमसे कम वह जीवन जिसे हम जानते है, वह नही जानता कि ब्लैक होल कैसे दिखता है, उनके अंदर क्या होता है, ब्लैक होल की आकाशगंगा और उनके विकास मे क्या भूमिका है , ब्लैकहोल के जन्म और उसके विकास मे हमारे जीवन की उत्पत्ति मे क्या भूमिका निभाई है ? जीवन के लिये यह जानना महत्वपूर्ण है।

EHT के निदेशक शेप डोलमेन ( Shep Doeleman) के अनुसार

” ऐसे बहुत कम विषय है जहाँ हम कह सकते है कि हम नही जानते है ब्रह्मांड के इस बिंदु पर क्या हो रहा है ? इनमे से एक है चेतना और दूसरा है ब्लैक होल!” (“There are very few topics where we say we just really have no idea what happens at that point in the universe,” says Doeleman. “One of those may be consciousness. And another one is the black hole.”)

M87 आकाशगंगा के केंद्र का यह ब्लैक होल

आकाशगंगा M87 के केंद्र के ब्लैक होल के चित्र अद्भूत है। मानव ने पहली बार किसी ब्लैक होल के इवेंट हारीजोइन को देखा है। और यह महादानवाकार है।

इसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का 6.5 अरब गुणा है और इसका व्यास 38 अरब किमी है। पहले चित्र मे इसके आकार की तुलना दिखाई गई है। आप चित्र मे इस दानवाकार ब्लैक होल के इवेंट हारीजोइन की तुलना अब तक के ज्ञात सबसे विशाल तारे (VY कैनीस मेजोरीस, बीटलगुज) के आकार तथा नेपच्युन की कक्षा के आकार के साथ देख सकते है।

M87 आकाशगंगा के केंद्र के ब्लैक होल के आकार की सौर मंडल, महाकाय तारे VY कैनीस मेजोरीस और लाल महादानव तारे बीटलगुज से तुलना

यह महाकाय ब्लैक होल इतना विशाल है कि यदि इसे पृथ्वी से एक प्रकाशवर्ष की दूरी पर रखे तो आकाश मे इसका इवेंट हारीजोइन चंद्रमा के आकार का आधा दिखेगा। जानकारी के लिये बता दें कि एक प्रकाशवर्ष की दूरी पर सूर्य एक नन्हे बिंदु या सूई की नोक के आकार का दिखेगा।

यदि इसे पृथ्वी से एक प्रकाशवर्ष की दूरी पर रखे तो आकाश मे इसका इवेंट हारीजोइन चंद्रमा के आकार का आधा दिखेगा।

 

आखिर ब्लैकहोल क्या है ?

श्याम विवर (Black Hole) एक अत्याधिक घनत्व वाला पिंड है जिसके गुरुत्वाकर्षण से प्रकाश किरणो का भी बच पाना असंभव है। श्याम विवर मे अत्याधिक कम क्षेत्र मे इतना ज्यादा द्रव्यमान होता है कि उससे उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण किसी भी अन्य बल से शक्तिशाली हो जाता है और उसके प्रभाव से प्रकाश भी नही बच पाता है।

श्याम विवर की उपस्थिति का प्रस्ताव 18 वी शताब्दी मे उस समय ज्ञात गुरुत्वाकर्षण के नियमो के आधार पर किया गया था। इसके अनुसार किसी पिंड का जितना ज्यादा द्रव्यमान होगा या उसका आकार जितना छोटा होगा, उस पिंड की सतह पर उतना ही ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल महसूस होगा। जान मीशेल तथा पीयरे सायमन लाप्लास दोनो ने स्वतंत्र रूप से कहा था कि अत्याधिक द्रव्यमान या अत्याधिक लघु पिंड के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से किसी का भी बचना असंभव है, प्रकाश भी इससे बच नही पायेगा।

इन पिंडो को ’श्याम विवर(Black Hole)’ नाम जान व्हीलर ने 1967 मे दिया था। भौतिक विज्ञानीयों तथा गणितज्ञों ने यह पाया है कि श्याम विवर के पास काल और अंतराल(Space and Time) के विचित्र गुणधर्म होते हैं। इन विचित्र गुणधर्मो की वजह से श्याम विवर विज्ञान फतांसी लेखको का पसंदीदा रहा है। लेकिन श्याम विवर फतांसी नही है। श्याम विवर का आस्तित्व है और जब भी एक महाकाय तारे की मृत्यु होती है एक श्याम विवर का जन्म होता है। यह महाकाय तारे अपनी मृत्यु के पश्चात श्याम विवर बन जाते है। हम श्याम विवर को नही देख सकते है लेकिन उसमे गुरुत्वाकर्षण के फलस्वरूप उसमे गिरते द्रव्यमान को देख सकते है। इस विधि से खगोल वैज्ञानिको ने अब तक ब्रह्माण्ड का निरीक्षण कर सैकड़ो श्याम विवरो की खोज की है। अब हम जानते है कि हमारा ब्रह्माण्ड श्याम विवरो से भरा पड़ा है और उन्होने ब्रह्माण्ड को आकार देने मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

सिंगुलरैटी : ब्लैक होल का केंद्र जिस स्थान पर पदार्थ संपिड़ित होकर अत्याधिक(अनंत) घनत्व मे होता है।

रिलेटीविस्टीक जेट : जब कोई ब्लैक होल किसी तारे को निगल लेता है जब परमाण्विक कणो और विकिरण की एक तेज धारा(jet)प्रकाशगति की गति के समीप वाली गति(लेकिन कम) से निकलती है।

फोटान गोला (Photon Sphere) : ब्लैक होल के निकट के उष्ण प्लाज्मा से उत्सर्जित फोटान जो गुरुत्वाकर्षण से मुड़कर एक चमकीला वलय बनाते है।

घटना क्षितिज(Event Horizon) :सिंगुलरैटी के पास की वह सीमा जिसे पार करने के बाद पदार्थ और ऊर्जा ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण से बच नही सकते। वह बिंदु जिससे वापसी संभव नही।

अक्रिशन डिस्क(Accretion Disc) : ब्लैक होल के पास अत्याधिक उष्ण गैस और धुल की तश्तरी जो अत्याधिक गति से घूर्णन करती है और विद्युत चुंबकीय विकिरण(X रे) उत्पन्न करती है।

ब्लैक होल(श्याम विवर)

ब्लैक होल(श्याम विवर)

ब्लैक होल के बारे मे विस्तार से :

https://vigyanvishwa.in/2011/06/27/black-hole/
https://vigyanvishwa.in/2011/07/04/blackhole1/
https://vigyanvishwa.in/2011/07/11/bithofblackhole/
https://vigyanvishwa.in/2015/10/26/wierdbh/
https://vigyanvishwa.in/2016/11/14/bh/

9 विचार “ऐतिहासिक उपलब्धि : ब्लैक होल (श्याम विवर) का प्रथम चित्र&rdquo पर;

  1. सर, आपसे काफी प्रश्न पूछ चुका हूं, अभी तक एक का भी उत्तर प्राप्त नही हुआ है। उम्मीद है इसका उत्तर प्राप्त होगा।
    गुरूत्वाकर्षण बल गुरूत्वीय तरंग से प्राप्त होता है, लेकिन BLACK HOLE से केवल वही चीजें बाहर आ सकतीं हैंं जिनकी गति प्रकाश गति से ज्यादा हो, (जो संभव नही है) । BLACK HOLE का गुरूत्वाकर्षण बल कार्य करने के लिए गुरूत्वीय तंरगों का बाहर आना आवश्यक है। तो इसका गुरूत्वाकर्षण बल कैसे समीप से गुजरते हुए प्रकाश को वक्र कर सकते कता है।

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    • हमारे पास बहुत से प्रश्न आते है, प्रयास रहता है कि सभी का उत्तर दे। लेकिन हमेशा उत्तर देना संभव नही हो पाता है।
      अब आपके प्रश्न पर, ब्लैक होल स्पेस टाइम को ही मोड़ देता है। गुरुत्वाकर्षण तरंगे इसी प्रभाव से स्पेस टाइम में उतपन्न विकृति है। प्रकाश स्पेस टाइम में यात्रा करता है जो कि ब्लैक होल ने मोड़ दिया है, बस ब्लैक होल में समा जाएगा।
      एक चादर को स्पेस टाइम मानो, बीच मे एक भारी गेंद डाल दो, ये गेंद चादर में एक झोल बनाएगी, उसे गुरुत्वाकर्षण मानो। अब इस चादर पर कंचे फेंको, वे झोल से होते हुए गेंद जाएंगे। बस ब्लैक होल इसी तरह प्रकाश या पदार्थ को खींच रहा है।

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  2. जैसा कि ज्ञात है, प्रकाश की चाल लगभग 3 लाख किमी/सेकेंड होती है….और एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहतें हैं।
    जो भी ऑब्जेक्ट को हम देखते है तो प्रकाश उस ऑब्जेक्ट से हमारी आंखों तक आता है तभी हम उस वस्तु को देख पाते हैं। जो 10 अप्रेल को जो ब्लेक होल की तस्वीर जारी की गई वह हम से करीब 53.5 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित है है।
    इस तरह तस्वीर में जैसा हमको ब्लैक होल दिख रहा है वह 53.5 मिलियन वर्ष पुराना जैसा दिखता होगा वैसा है।

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  3. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति 125वां जन्म दिवस – घनश्याम दास बिड़ला और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर … अभिनन्दन।।

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  4. बहुत अच्छा लगता है जब भी विश्व विज्ञान को पढता हूँ क्यूंकि यहाँ वो जानकारी मिलती है जो मुझे पूरे इन्टरनेट पर कहीं और नहीं मिलती| अब तो सब्सक्राइब भी किया हुआ है तो मेल पर आपकी पोस्ट प्राप्त कर लेता हूँ| धन्यवाद

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