अंतिम प्रश्न : आइजैक आसिमोव


आइजैक आसिमोव अब तक के सबसे महान विज्ञान-कथा लेखकों में से एक थे। लगभग पचास वर्षों तक उन्होंने औसतन हर दो सप्ताह में एक नया पत्रिका-लेख, लघुकथा या पुस्तक लिखी, और यह अधिकांश कार्य उन्होंने एक साधारण मैनुअल टाइपराइटर पर किया। असिमोव का मानना था कि “अंतिम प्रश्न(The Last Question)'” उनकी अब तक की सर्वश्रेष्ठ लघुकथा है, जिसे उन्हें 1956 में लिखा था। भले ही पाठक विज्ञान की उन सभी अवधारणाओं से परिचित न हों जो इस कहानी में प्रस्तुत की गई हैं, फिर भी इसका अंत इतना प्रभावशाली है कि वह किसी भी अन्य कहानी के अंत से अधिक गहरा असर छोड़ता है। बस एक बात, कहानी का अंत पहले मत पढ़िए!


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समय 21 मई, 2061 , जब दो मित्रों के मध्य हंसी मजाक में “अंतिम प्रश्न” पूछा गया था, ऐसे समय में जब मानवता पहली बार वास्तव में प्रकाश के युग में प्रवेश कर रही थी। यह प्रश्न दो मित्र द्वारा ‘हाईबॉल*’ पीते हुए पाँच डॉलर की शर्त के दौरान उठा था। अलेक्जेंडर एडेल और बर्ट्राम लुपोव, मल्टीवैक के समर्पित परिचालक थे। ये दोनों वे किसी भी मानव की तुलना में उस विशाल कंप्यूटर मल्टीवैक के उदासीन, तेज प्रतिक्रिया देने वाले चमकीले मीलों लंबे चेहरे के पीछे के राज को बेहतर समझते थे। उन्हें मल्टीवैक के रिले और सर्किट के संयोजन का कम से कम थोड़ा-बहुत अंदाज़ा तो था, जोकि अब इतना विशाल और जटिल हो चुका था कि कोई भी अकेला मानव उसे पूरी तरह से समझ नहीं सकता था। (* एक शराब पेय)

मल्टीवैक खुद को समायोजित करने और उसमे उत्पन्न त्रुटियों को ठीक करने में सक्षम था। मल्टीवैक के सकुशल संचालन के लिए यह अत्यावश्यक था ; क्योंकि कोई भी मानव उसे इतनी तेज़ी से या ठीक से समायोजित या ठीक नहीं कर सकता था। इसलिए एडेल और लुपोव उस विशालकाय मशीन की देखभाल बस हल्के-फुल्के और सतही तौर पर ही करते थे. उनका यह कार्य मानवीय सीमाओं में ही था, उससे अधिक करना किसी भी मानव के लिए संभव नहीं था। वे उसे आँकड़े प्रदान करते थे, उसकी ज़रूरतों के हिसाब से प्रश्न बदलते थे और उससे मिलने वाले उत्तरो का अनुवाद और विश्लेषण करते थे। लेकिन यह एक तथ्य था कि वे और उनके जैसे दूसरे लोग, मल्टीवैक की कामयाबी का श्रेय पाने के पूरी तरह हकदार थे।

कई दशकों तक मल्टीवैक ने चाँद, मंगल और शुक्र तक पहुँच सकने वाले अंतरिक्ष यानो को डिज़ाइन करने और मार्ग निर्धारण में मदद की थी, जिसकी वजह से मानव चाँद, मंगल और शुक्र तक पहुँच पाया था। मंगल से आगे, पृथ्वी के सीमित संसाधन इन मानव यात्रीयों वाले अंतरिक्ष यानो के लिए पर्याप्त नहीं थे; लंबी यात्राओं के लिए बहुत ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत थी। पृथ्वी पर तकनीकी विकास ने ऊर्जा के लिए ईंधन जैसे कोयले और यूरेनियम का प्रयोग तेजी से और बेहतर तरीके से किया था, लेकिन दोनों ही सीमित मात्रा में थे।

धीरे-धीरे मल्टीवैक ने इतना ज्ञान अर्जित कर लिया कि वह अधिक गहरे और मूलभूत प्रश्नों का उत्तर दे सके। और फिर 14 मई 2061 को, जो अब तक केवल सिद्धांत था, वह वास्तविकता बन गया।

मल्टीवैक द्वारा डिजाइन की गई नई ऊर्जा तकनीकों से सूरज की ऊर्जा को संरक्षित किया गया, उसे दूसरे रूप में बदला गया और इस ऊर्जा को पूरे ग्रह के स्तर पर प्रयोग किया जाने लगा था। इस नए ऊर्जास्रोत के कारण धीरे धीरे पूरी पृथ्वी ने जलते हुए कोयले और विखंडन वाले यूरेनियम का इस्तेमाल बंद कर दिया। अब सारी पृथ्वी पर अंतरिक्ष में स्थित एक मील व्यास के उपग्रह से ऊर्जा प्राप्त हो रही थी। यह उपग्रह पृथ्वी से चन्द्रमा की आधी दूरी पर स्थित कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था और सूर्य की अदृश्य किरणों से पृथ्वी की समस्त ऊर्जा आवश्यकता पूरी कर रहा था था।

यह ऊर्जा सप्ताह के सातों दिनों निर्बाध रूप से उपलब्ध थी। आखिरकार एक दिन एडेल और लुपोव ने  सार्वजनिक कार्यक्रमों से बचकर एक शांत जगह पर छुट्टी मनाने की सोची। एक ऐसी जगह जहाँ कोई उन्हें ढूंढने के बारे में सोच भी नहीं सकता था, वे ज़मीन के नीचे बने सुनसान कमरों में से एक ऐसे कमरे में पहुंचे जहाँ वे मल्टीवैक के विशाल जमीन के नीचे दबे हुये शरीर को देख सकते थे। इस समय तक मल्टीवैक भी इतना आत्मनिर्भर हो गया था कि वह भी बिना किसी देखभाल के, आराम से, डेटा को इत्मीनान से और सुस्ती भरी आवाज़ के साथ विश्लेषण कर सकता था। मल्टीवैक भी अब इतना कार्यकुशल हो गया था कि वह भी छुट्टी मना सकता था और वे एडेल और लुपोव यह बात समझते थे। शुरू में उनका मल्टीवैक को नए प्रश्नो द्वारा परेशान करने का कोई इरादा नहीं था।

वे अपने साथ एक शराब की बोतल और बर्फ लाए थे और उस समय उनका एकमात्र इरादा एक-दूसरे के साथ आराम से समय बिताना था।

एडेल ने कहा, “अब हम इस ऊर्जा मशीन के बारे में सोचते हैं तो यह बहुत अद्भुत मशीन लगती है।” उसके चौड़े चेहरे पर थकान की लकीरें थीं और वह धीरे-धीरे एक चम्मच से अपनी ड्रिंक हिला रहा था, और ग्लास में बर्फ के टुकड़ों को बेढंगे ढंग से इधर-उधर घूमते हुए देख रहा था।

“हमारे पास इतनी ऊर्जा उपलब्ध है कि हम उसे कभी भी मुफ्त में इस्तेमाल कर सकते हैं। इतनी ऊर्जा कि अगर हम चाहें, तो पूरी पृथ्वी को पिघला कर एक लोहे की एक बड़ी बूंद में बदल सकते सकते हैं, और फिर भी हमें ऊर्जा की कोई कमी महसूस नहीं होगी। इतनी सारी ऊर्जा जिसे हम हमेशा, हमेशा और हमेशा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।”

लुपोव ने अपना सिर एक तरफ झुकाया। जब वह किसी बात से सहमत नहीं होता तो वह अपना सर एक और झुका देता था। वह एडेल से सहमत नही था क्योंकि अब भी उसे कुछ कार्य मानवीय श्रम के रूप में करने पड़ते थे जैसे वह इस पार्टी के लिए ग्लास और बर्फ लाड कर लाया था। उसने कहा, “नहीं, हमेशा के लिए ऊर्जा उपलब्ध नहीं है ।”

एडेल ने उत्तर दिया “अरे यार, लगभग हमेशा के लिए। जब ​​तक सूरज खत्म नहीं हो जाता, बर्ट।”

“सूर्य भी हमेशा के लिए नहीं है।”

“ठीक है, फिर। अरबों-खरबों साल तक। शायद बीस अरब साल तक। अब तो तुम संतुष्ट हो?”

लुपोव ने अपनी उंगलियां अपने कम होते बालों में फेरीं, जैसे खुद को यकीन दिला रहा हो कि उसके सर पर कुछ बाल अभी भी बचे हैं, और धीरे से अपनी ड्रिंक का घूंट भरा।

“लेकिन बीस अरब साल भी हमेशा के लिए नहीं होते।”

“खैर, यह हमारे समय तक तो चलेगा ही, है ना?”

“कोयला और यूरेनियम भी तो उतना ही चलेगा।”

“ठीक है, लेकिन अब हम हर एक अंतरिक्ष यान को इस सोलर स्टेशन से जोड़ सकते हैं और वह बिना ईंधन की चिंता किए दस लाख बार प्लूटो जाकर वापस आ सकता है। कोयले और यूरेनियम के प्रयोग से आप ऐसा नहीं कर सकते। अगर तुम्हें मुझ पर यकीन नहीं है तो मल्टीवैक से पूछ लो।”

“मुझे मल्टीवैक से पूछने की ज़रूरत नहीं है; मैं यह जानता हूँ।”

“तो फिर मल्टीवैक ने हमारे लिए जो किया है, उसकी बुराई करना बंद करो,” एडेल ने गुस्से में कहा, “उसने ये बेहतरीन कार्य किया है।”

“किसने कहा कि उसने ठीक नहीं किया? मैं तो बस यह कह रहा हूँ कि सूरज हमेशा के लिए नहीं रहेगा। बस यही कह रहा हूँ कि हम बीस अरब साल तक तो सुरक्षित हैं, लेकिन उसके बाद क्या?” लुपोव ने नशे से कांपती हुई उंगली एडेल की ओर उठाई। “और यह मत कहना कि हम किसी दूसरे सूरज पर चले जाएँगे।”

कुछ देर खामोशी रही। एडेल ने अपना गिलास होंठों से लगाया, और लुपोव की आँखें धीरे-धीरे बंद हो गईं। वे आराम करने लगे।

फिर लुपोव की आँखें झटके से खुलीं। “तुम सोच रहे हो कि जब हमारा सूरज खत्म हो जाएगा तो हम किसी दूसरे सूरज पर चले जाएँगे, है ना?”

“मैं ऐसा नहीं सोच रहा हूँ।”

“बिल्कुल सोच रहे हो। तुम तर्क के मामले में कमज़ोर हो; यही तो तुम्हारे साथ दिक्कत है। तुम उस आदमी की तरह हो जो एक कहानी में अचानक बारिश में फँस गया था, और बारिश से बचने पेड़ों के झुंड की तरफ़ भागा और एक पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। उसे कोई चिंता नहीं थी। उसने सोचा कि जब एक पेड़ पूरी तरह भीग जाएगा, तो वह बस दूसरे पेड़ के नीचे चला जाएगा।”

“मैं समझ गया,” एडेल ने कहा। “चिल्लाओ मत। जब सूरज खत्म हो जाएगा, तो दूसरे तारे भी खत्म हो जाएँगे।”

“बिल्कुल सही कहा,” लुपोव बुदबुदाया। “इस सबका आरम्भ बिग बैंग से हुआ था, वह आरंभिक बिग बैंग कुछ भी रहा हो; लेकिन जब सारे तारे समाप्त हो जाएँगे तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा। कुछ तारे दूसरों की तुलना में तेज़ी से समाप्त होते हैं। अरे, बड़े तारे तो दस करोड़ साल भी नहीं टिकेंगे। सूरज बीस अरब साल तक टिकेगा, और शायद छोटे तारे जिनसे कोई ख़ास लाभ नहीं है,सौ अरब साल तक टिकेंगे। लेकिन बस एक ट्रिलियन साल गुज़रने दो और सब कुछ अंधेरे में डूब जाएगा। एंट्रॉपी बढ़कर अपने उच्चतम स्तर तक पहुँच कर रहेगी, बस।”

एडेल ने अपनी शान दिखाते हुए कहा, “मैं एंट्रॉपी के बारे में जानता हूँ।”

“बकवास करते हो।”

“मैं उतना ही जानता हूँ जितना तुम जानते हो।”

“तो तुम्हें पता होगा कि एक दिन सब कुछ खत्म हो जाएगा।”

“ठीक है। कौन कहता है कि ऐसा नहीं होगा?”

“तुमने कहा था, बेवकूफ; तुमने कहा था कि हमारे पास हमेशा के लिए ज़रूरत भर की ऊर्जा है। तुमने ‘हमेशा’ कहा था।”

अब एडेल के जवाब देने की बारी थी। “शायद हम किसी दिन चीज़ों को फिर से बना सकें।”

“कभी नहीं।”

“क्यों नहीं? कभी तो।”

“कभी नहीं।”

“मल्टीवैक से पूछो।”

“तुम मल्टीवैक से पूछो; हिम्मत है तो पूछो। पाँच डॉलर की शर्त लगाता हूँ कि ऐसा नहीं हो सकता।”

एडेल नशे में था कि लेकिन इतना होश में भी था कि वह मल्टीवैक से से प्रश्न पूछ सके,यह प्रश्न ऐसा हो सकता था कि क्या मानव कभी सूरज को उसकी जवानी लौटा पाएगा? यहाँ तक कि उसकी आयु पूरी होकर मरने के बाद भी उसे जीवित कर पायेगा? वह भी बिना ऊर्जा खर्च किए?

या शायद इसे और आसान तरीके से ऐसे कहा जा सकता है: ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी को कैसे कम किया जा सकता है?

उन्होंने मल्टीवैक से प्रश्न पूछा , थोड़ी देर बाद मल्टीवैक कुछ कार्य करता रहा और उसके बाद एकदम शांत और बेजान हो गया था। लाइटों का धीरे-धीरे जलना-बुझना बंद हो गया, दूर से आती मशीनी क्लिकिंग रिले की आवाज़ें भी थम गईं थी।

फिर, जब डरे हुए दोनों टेक्नीशियन को लगा कि वे अब और साँस नहीं रोक सकते, तभी मल्टीवैक के उस हिस्से से जुड़ा टेलीटाइप अचानक चालू हो गया। उसके टेलीटाइप से पाँच शब्द छपे:

INSUFFICIENT DATA FOR MEANINGFUL ANSWER. (सार्थक उत्तर देने के लिए पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।)

“मैंने शर्त नहीं लगाईं थी!,” लुपोव ने धीरे से कहा। वे दोनों उठकर तेजी से वहाँ से चले गए।

अगली सुबह तक, हैंगओवर के सिरदर्द की तकलीफ़ से जूझते हुए, वे दोनों रात की बहस और उस प्रश्न की घटना को भूल चुके थे।

आगे …

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