अंतिम प्रश्न : आइजैक आसिमोव


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जेरॉड, जेरोडीन, और जेरोडेट प्रथम तथा द्वितीय ने स्क्रीन( विज़िप्लेट ) पर दिखाई दे रहे तारों के चित्र को बदलते हुए देखा, क्योंकि हाइपरस्पेस की यात्रा अपने समयहीन अंतराल में पूरी हो चुकी थी। तुरंत ही तारों की समान रूप से बिखरी हुई चमक गायब हो गई और उसकी जगह एक अकेली, अत्यंत चमकीली डिस्क ने ले ली, जो देखने वाली स्क्रीन के मध्य में कंचे के आकार की दिखाई दे रही थी।

“वह X-23 है,” जेरॉड ने आत्मविश्वास से कहा। उसके पतले हाथ पीठ के पीछे कसकर बँधे हुए थे और उँगलियों के जोड़ सफेद पड़ गए थे।

छोटी जेरोडेट्स, दोनों लड़कियाँ, अपने जीवन में पहली बार हाइपरस्पेस यात्रा का अनुभव कर रही थीं और उस क्षणिक “अंदर-बाहर हो जाने” जैसी अनुभूति से अभी भी संकोच में थीं। वे अपनी खिलखिलाहट दबाते हुए माँ के चारों ओर दौड़ने लगीं और चिल्लाईं,

“हम X-23 पहुँच गए! हम X-23 पहुँच गए! हम…”

“शांत रहो, बच्चो,” जेरोडीन ने तीखे स्वर में कहा। फिर उसने पूछा, “क्या तुम्हें पूरा विश्वास है, जेरॉड?”

“विश्वास न होने का कारण ही क्या है?” जेरॉड ने उत्तर दिया और छत के नीचे उभरी हुई धातु की चिकनी संरचना की ओर देखा। वह पूरे कमरे की लंबाई में फैली हुई थी और दोनों सिरों से दीवारों के भीतर गायब हो जाती थी। उसकी लंबाई लगभग पूरे अंतरिक्षयान जितनी थी।

जेरॉड उस मोटी धातु की छड़ के बारे में बहुत कम जानता था। वह केवल इतना जानता था कि उसे माइक्रोवैक (Microvac) कहा जाता है; यदि कोई चाहे तो उससे प्रश्न पूछ सकता है; और यदि कोई प्रश्न न भी पूछे, तब भी उसका अपना कार्य था, यान को पूर्वनिर्धारित गंतव्य तक पहुँचाना, विभिन्न उप-आकाशगंगीय ऊर्जा केंद्रों से ऊर्जा ग्रहण करना, तथा हाइपरस्पेस छलाँगों की गणनाएँ करना।

जेरॉड और उसके परिवार को केवल जहाज़ के आरामदायक आवासीय भाग में रहना और प्रतीक्षा करनी थी। किसी ने कभी उसे बताया था कि “माइक्रोवैक” के अंत में आने वाला “AC” प्राचीन अंग्रेज़ी के शब्द “ऑटोमैटिक कंप्यूटर” का संक्षिप्त रूप था, लेकिन अब वह यह बात भी लगभग भूल चुका था।

स्क्रीन( विज़िप्लेट )को देखते हुए जेरोडीन की आँखें नम हो गईं।

“मैं क्या करूँ? पृथ्वी छोड़ते समय मुझे अजीब-सा लग रहा है।”

“अरे, आखिर क्यों?” जेरॉड ने कहा। “वहाँ हमारा क्या था? X-23 पर हमारे पास सब कुछ होगा। तुम अकेली नहीं रहोगी। तुम कोई पहली मानव नहीं होगी। वहाँ पहले से ही दस लाख से अधिक लोग रहते हैं। भगवान की कसम, हमारे परपोते नए संसारों की तलाश कर रहे होंगे, क्योंकि तब तक X-23 भी भीड़भाड़ वाला हो जाएगा।”

फिर कुछ सोचकर वह बोला,

“मैं कहता हूँ, यह बहुत सौभाग्य की बात है कि कंप्यूटरों ने अंतरतारकीय यात्रा का तरीका खोज लिया, नहीं तो बढ़ती हुई मानव जाति का क्या होता!”

“मुझे पता है, मुझे पता है,” जेरोडीन ने उदास स्वर में कहा।

जेरोडेट प्रथम ने तुरंत कहा, “हमारा माइक्रोवैक दुनिया का सबसे अच्छा माइक्रोवैक है।”

“मुझे भी ऐसा ही लगता है,” जेरॉड ने उसके बाल बिखेरते हुए कहा।

अपने निजी माइक्रोवैक का होना वास्तव में सुखद अनुभव था, और जेरॉड को खुशी थी कि वह इसी पीढ़ी का हिस्सा था। उसके पिता के युवाकाल में कंप्यूटर विशाल मशीनें हुआ करते थे, जो सैकड़ों वर्ग मील भूमि घेर लेती थीं। प्रत्येक ग्रह पर केवल एक ही कंप्यूटर होता था। उन्हें प्लैनेटरी AC कहा जाता था।

एक हज़ार वर्षों तक वे लगातार आकार में बढ़ते रहे, और फिर अचानक तकनीकी परिष्कार का युग आया। ट्रांजिस्टरों का स्थान आणविक वाल्वों ने ले लिया और परिणामस्वरूप सबसे बड़ा प्लैनेटरी AC भी अब अंतरिक्षयान के आधे आयतन में समा सकता था।

जेरॉड को हमेशा गर्व का अनुभव होता था जब वह सोचता था कि उसका निजी माइक्रोवैक उस प्राचीन और आदिम मल्टीवैक (Multivac) से कई गुना अधिक जटिल था जिसने पहली बार सूर्य की शक्ति को नियंत्रित किया था। वह लगभग पृथ्वी के विशाल प्लैनेटरी AC जितना जटिल था, जिसने हाइपरस्पेस यात्रा की समस्या का समाधान किया और तारों तक यात्रा संभव बनाई।

जेरोडीन अपने विचारों में खोई हुई बोली,

“इतने सारे तारे, इतने सारे ग्रह। शायद परिवार हमेशा इसी तरह नए ग्रहों पर जाते रहेंगे, जैसे हम जा रहे हैं।”

“हमेशा नहीं,” जेरॉड मुस्कराकर बोला। “किसी दिन यह सब रुक जाएगा, लेकिन अरबों वर्षों तक नहीं। बहुत-बहुत अरबों वर्षों बाद। आखिर तारे भी एक दिन समाप्त हो जाते हैं। एंट्रॉपी बढ़ती ही रहती है।”

“एंट्रॉपी क्या होती है, पापा?” जेरोडेट द्वितीय ने ऊँची आवाज़ में पूछा।

“एंट्रॉपी, मेरी प्यारी बच्ची, एक ऐसा शब्द है जिसका अर्थ है, ब्रह्माण्ड का धीरे-धीरे क्षीण होना। हर चीज़ धीरे-धीरे समाप्त होती है। जैसे तुम्हारा छोटा चलने वाला रोबोट, याद है?”

“तो फिर उसमें नया पावर-यूनिट लगा दो, जैसे मेरे रोबोट में लगाते हैं।”

“तारे ही तो पावर-यूनिट हैं, बेटी। एक बार वे समाप्त हो गए, तो फिर कोई नया पावर-यूनिट नहीं बचेगा।”

यह सुनते ही जेरोडेट प्रथम रोने लगी। “उन्हें ऐसा मत करने दो, पापा। तारों को समाप्त मत होने दो!”

जेरोडीन ने झुँझलाकर फुसफुसाया, “देखो, तुमने क्या कर दिया!”

जेरॉड ने भी धीमे स्वर में कहा, “मुझे कैसे पता चलता कि वे डर जाएँगी?”

जेरोडेट प्रथम रोते हुए बोली, “माइक्रोवैक से पूछो! उससे पूछो कि तारों को फिर से कैसे जलाया जाए!”

“पूछ लो,” जेरोडीन ने कहा। “इससे वे शांत हो जाएँगी।”

(अब जेरोडेट द्वितीय भी रोने लगी थी।)

जेरॉड ने कंधे उचकाए। “अच्छा-अच्छा, मेरी प्यारी बच्चियों। मैं माइक्रोवैक से पूछता हूँ। चिंता मत करो, वह हमें बता देगा।”

उसने माइक्रोवैक से प्रश्न पूछा और जल्दी से जोड़ दिया, “उत्तर छापकर दो।”

जेरॉड ने पतली सेलोफिल्म की पट्टी हाथ में लेकर प्रसन्नता से कहा, “देखो, माइक्रोवैक कहता है कि समय आने पर वह सब संभाल लेगा, इसलिए चिंता मत करो।”

जेरोडीन बोली, “और अब, बच्चो, सोने का समय हो गया है। हम शीघ्र ही अपने नए घर पहुँचने वाले हैं।”

सेलोफिल्म को नष्ट करने से पहले जेरॉड ने उस पर लिखे शब्दों को एक बार फिर पढ़ा:

INSUFFICIENT DATA FOR MEANINGFUL ANSWER. (सार्थक उत्तर देने के लिए पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।)

उसने कंधे उचकाए और स्क्रीन(विसीप्लेट) की ओर देखा। X-23 ठीक सामने था।

आगे …

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