पेगासस : स्पाइवेयर क्या है ?


स्पाइवेयर मालवेयर का एक प्रकार है जो कंप्यूटर पर इंस्टॉल किया जाता है और उपयोगकर्ताओं की गैर-जानकारी में उनके बारे में सूचनाएं एकत्र किया करता है। स्पाइवेयर की उपस्थिति आमतौर पर उपयोगकर्ताओं से छिपी होती है। विशिष्ट रूप से, स्पाइवेयर चुपके से उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत कंप्यूटर पर इंस्टॉल किया जाता है। हालांकि, कभी कभी, कीलॉगर्स जैसे स्पाइवेयर साझा, कॉर्पोरेट, या सार्वजनिक कंप्यूटर के मालिक द्वारा भी इंस्टॉल किये जाते हैं ताकि गुप्त रूप से अन्य उपयोगकर्ताओं की निगरानी की जा सके।
स्पाइवेयर शब्द से पता चलता है कि यह एक सॉफ्टवेयर है जो उपयोगकर्ता के कंप्यूटर पर गुप्त रूप से निगरानी रखता है, जबकि स्पाइवेयर का काम महज निगरानी से भी कहीं ज्यादा है। स्पाइवेयर विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करता है, जैसे कि इंटरनेट सर्फिंग की आदतें और जिन साइटों पर जाया जाता है वह जानकारी। मगर, स्पाइवेयर अतिरिक्त सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करके और वेब ब्राउज़र को पुनःनिर्देशित करने जैसे अन्य तरीकों से उपयोगकर्ता के कंप्यूटर के नियंत्रण में भी हस्तक्षेप कर सकता है। कुछ स्पाइवेयर को कंप्यूटर सेटिंग्स को बदलने के लिए जाना जाता है, जिससे कनेक्शन की गति, अलग-अलग होमपेज की गति और/या इंटरनेट और/या अन्य प्रोग्रामों की कार्यक्षमता धीमी हो जाती है।
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चंद्रमा : सुपर मून, ब्लड मून, ब्ल्यू मून और चंद्र ग्रहण


26 मई 2021 को चंद्र ग्रहण है, इस चंद्र ग्रहण को क्यों कहा जा रहा है सुपर ब्लड मून ?

26 मई को चंद्र ग्रहण के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में सुपर ब्लड मून दिखाई देगा। ये एक अनोखी घटना होती है जब चंद्र ग्रहण लगेगा और हमें ब्लड मून यानी लाल रंग का चांद दिखाई देगा। 26 मई को पूरा चांद पृथ्वी की छाया में चला जाएगा। और जब वो हमारे ग्रह की छाया में नहीं होगा, वो पहले से बड़ा और चमकदार दिखेगा।

ये साल 2021 का दूसरा सुपर मून है। पहला सुपर मून 26 अप्रैल को देखा गया था। आंशिक चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर शुरू होकर 6 बजकर 22 मिनट तक चलेगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण पश्चिमी उत्तर अमेरिका, पश्चिमी दक्षिण अमेरिका और पूर्वी एशिया में देखा जा सकेगा। इसी दौरान 14 से 15 मिनट के लिए ब्लड मून नज़र आएगा। पढ़ना जारी रखें चंद्रमा : सुपर मून, ब्लड मून, ब्ल्यू मून और चंद्र ग्रहण

अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन


अपोलो 11 मिशन के क्रू सदस्य रहे अंतरिक्षयात्री माइकल कोलिंस का निधन हो गया है। उन्होंने 28 अप्रैल को आख़िरी सांस ली। 90 वर्षीय कोलिंस के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कोलिंस के परिवार ने बताया, “वो लंबे समय से कैंसर से बड़ी बहादुरी से लड़ रहे थे लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने आख़िरी दिन शांति से अपने परिवार के साथ बिताए।”

अपोलो मिशन के दौरान कोलिंस चंद्रमा की कक्षा में ही रुके थे जबकि उनके सहयोगी नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे थे। पढ़ना जारी रखें अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन

पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल पर चहलकदमी प्रारंभ की


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्षयान पर्सिवियरेंस मंगल ग्रह की सतह पर 19 फरवरी 2021 को उतर चुका है। 8 मार्च 2021 पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर चलना यानी खोज करना शुरू कर दिया है। पढ़ना जारी रखें पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल पर चहलकदमी प्रारंभ की

कोरोना वायरस वैक्सीन: महत्वपूर्ण तथ्य


कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए दुनिया के कई देशों में टीकाकरण अभियान शुरू हो चुके हैं। इससे जुड़ी सूचनाएं और सुझाव कई बार आपको पेचीदा लग सकती हैं, लेकिन कुछ बुनियादी तथ्य हैं जो आपकी यह समझने में मदद … पढ़ना जारी रखें कोरोना वायरस वैक्सीन: महत्वपूर्ण तथ्य

इंसुलिन का वह पहला इंजैक्शन


लेखक : देवेंन मेवाड़ी आज के ही दिन 11 जनवरी, 1922 को इंसुलिन हार्मोन के खोजकर्त्ता सर फ्रेडरिक ग्रांट बैंटिंग और चार्ल्स बेस्ट ने दुनिया में पहली बार डायबिटीज से गंभीर रूप से पीड़ित 14-वर्षीय बालक लियोनार्ड थॉम्पसन को कनाडा … पढ़ना जारी रखें इंसुलिन का वह पहला इंजैक्शन