अंतिम प्रश्न : आइजैक आसिमोव


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मानव ने खुद से सोचा, क्योंकि एक तरह से सारे मानव मानसिक रूप से एक ही थे, सारे मानवो की चेतना एक दूसरे से जुड़कर एक महामानव बन चुकी थी। वह खरबों-खरबों-खरबों अमर शरीरों से बना था, हर शरीर अपनी जगह पर था, शांति से और बिना किसी खराबी के आराम कर रहा था, और हर शरीर की देखभाल बेहतरीन ऑटोमेटन (स्वचालित मशीनें) कर रहे थे, जो खुद भी कभी खराब नहीं होते थे; साथ ही, सभी शरीरों के दिमाग़ या चेतना आपस में इस तरह घुल-मिल गए थे कि उनमें कोई फ़र्क नहीं किया जा सकता था।

मानव ने कहा, “ब्रह्मांड खत्म हो रहा है।”

मनुष्य ने मंद पड़ती हुई आकाशगंगाओं की ओर देखा। विशाल तारे, जो अपनी ऊर्जा को अपार उदारता से खर्च करते थे, बहुत पहले ही अत्यंत दूर और धुंधले अतीत में समाप्त हो चुके थे। अब लगभग सभी तारे श्वेत बौने (White Dwarfs) बन चुके थे और धीरे-धीरे अपने अंतिम क्षणों की ओर बढ़ रहे थे।

तारों के बीच फैली धूल से नए तारों का निर्माण किया गया था इनमे से कुछ प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बने थे, तो कुछ खुद मानव द्वारा निर्मित थे। किंतु वे भी समाप्त हो रहे थे। श्वेत बौनों को आपस में टकराकर उनसे मुक्त होने वाली विशाल ऊर्जा के बल पर नए तारे बनाए जा सकते थे, परंतु प्रत्येक हजार नष्ट किए गए श्वेत बौनों के बदले केवल एक नया तारा ही बन पाता था, और अंततः उनका भी अंत निश्चित था।

मानव ने कहा, “कॉस्मिक AC के निर्देशानुसार अगर ऊर्जा को सावधानी से इस्तेमाल किया जाए, तो पूरे ब्रह्मांड में बची हुई ऊर्जा अरबों सालों तक चलेगी।”

“लेकिन फिर भी,” मानव ने कहा, “आखिरकार, सब कुछ खत्म हो जाएगा। चाहे इसे कितनी भी सावधानी से इस्तेमाल किया जाए या कितना भी लंबा खींचा जाए, एक बार खर्च हो चुकी ऊर्जा वापस नहीं मिल सकती। एंट्रॉपी (ऊर्जा की अव्यवस्था) को हमेशा अधिकतम स्तर तक बढ़ना ही है।”

मानव ने कहा, “क्या एंट्रॉपी को उलटा नहीं जा सकता? चलो कॉस्मिक AC से पूछते हैं।”

कॉस्मिक AC उन्हें चारों ओर से घेरे हुए था, परंतु वह अंतरिक्ष में नहीं था। उसका एक भी अंश अंतरिक्ष में स्थित नहीं था। वह हाइपरस्पेस में था और ऐसी किसी वस्तु से बना था जो न पदार्थ थी और न ऊर्जा। उसके आकार और स्वरूप के प्रश्न का अब उन शब्दों में कोई अर्थ नहीं रह गया था जिन्हें मनुष्य समझ सकता था।

“कॉस्मिक AC,” मानव ने कहा, “एंट्रॉपी को कैसे उलटा जा सकता है?”

कॉस्मिक AC ने कहा,

“THERE IS AS YET INSUFFICIENT DATA FOR A MEANINGFUL ANSWER.(“सार्थक उत्तर देने के लिए अभी पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।”)”

मानव ने कहा, “तो अतिरिक्त आँकड़े एकत्र करो।।”

कॉस्मिक AC ने कहा, “मैं ऐसा करूँगा। मैं पिछले एक सौ अरब वर्षों से यही कर रहा हूँ। मेरे पूर्ववर्ती और मुझसे यह प्रश्न अनेक बार पूछा जा चुका है। मेरे पास जो भी आँकड़े हैं, वे अभी भी अपर्याप्त हैं।”

मानव ने पूछा, “क्या कभी ऐसा समय आएगा जब आँकड़े पर्याप्त होंगे, या यह समस्या सभी कल्पनीय परिस्थितियों में हल न हो पाने वाली है?”

कॉस्मिक AC ने कहा, “कोई भी समस्या ऐसी नहीं है जिसे हर हाल में हल न किया जा सके।”

मानव ने कहा, “तुम्हारे पास इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए पर्याप्त आँकड़े कब होंगे?”

कॉस्मिक AC ने कहा,

“THERE IS AS YET INSUFFICIENT DATA FOR A MEANINGFUL ANSWER. (सार्थक उत्तर देने के लिए अभी पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।)”

मानव ने पूछा, “क्या आप इस पर काम करते रहेंगे?”

कॉस्मिक AC ने कहा, “हाँ, मैं करूँगा।”

मानव ने कहा, “तब हम प्रतीक्षा करेंगे।”

आगे …

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