अंतिम प्रश्न : आइजैक आसिमोव


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पदार्थ और ऊर्जा समाप्त हो चुके थे, और उनके साथ ही अंतरिक्ष तथा समय भी। यहाँ तक कि एसी (AC) का अस्तित्व भी केवल उस अंतिम प्रश्न के कारण बना हुआ था, जिसका उत्तर वह कभी नहीं दे पाया था। यह वही प्रश्न था जो दस खरब (ट्रिलियन) वर्ष पहले एक नशे में धुत कंप्यूटर तकनीशियन ने एक ऐसे कंप्यूटर से पूछा था, जो AC की तुलना में उतना ही तुच्छ था जितना मनुष्य, मानवता (Man) की तुलना में।

बाकी सभी प्रश्नों के जवाब मिल चुके थे; जब तक इस अंतिम प्रश्न का जवाब नहीं मिल जाता, AC अपनी चेतना को मुक्त नहीं कर सकता था।

सारा इकट्ठा किया गया डेटा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका था। अब और कुछ इकट्ठा करने को नहीं बचा था।

हालाँकि, एकत्रित की गई सारी जानकारी को अभी तक पूरी तरह जोड़कर और उनके बीच मौजूद सभी संभावित संबंधों को समझते हुए एक समग्र रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया था।

उसे पूरा करने में ऐसा अंतराल बीता जिसे समय की किसी भी इकाई में नहीं मापा जा सकता था।

और ऐसा हुआ कि AC ने एंट्रॉपी की दिशा को उलटने का तरीका सीख लिया।

किन्तु अब कोई मानव शेष नहीं था जिसे AC उस अंतिम प्रश्न का उत्तर दे सकता। परंतु इससे कोई अंतर नहीं पड़ता था। क्योंकि उत्तर अपने प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से उस समस्या का भी समाधान कर देता।

फिर एक और कालातीत अंतराल तक AC यह विचार करता रहा कि इसे सबसे उत्तम ढंग से कैसे किया जाए। अत्यंत सावधानी से उसने अपनी योजना को व्यवस्थित किया।

AC की चेतना उस समस्त अस्तित्व को अपने भीतर समेटे हुए थी जो कभी ब्रह्माण्ड हुआ करता था, और वह उस अव्यवस्था (Chaos) पर चिंतन कर रही थी जो अब शेष रह गई थी। यह कार्य चरण-दर-चरण करना आवश्यक था।

और AC ने कहा,

Let there be light (प्रकाश हो!)

और प्रकाश हो गया

यह एक नई शुरुआत थी।

एक नए ब्रह्माण्ड का जन्म

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