सप्तॠषि तारामंडल का सुपरनोवा अपनी चरम दीप्ती पर
कुछ सप्ताह पहले खगोलविज्ञानीयों ने M101 आकाशगंगा मे एक सुपरनोवा विस्फोट देखा था। यह एक वर्ग Ia का सुपरनोवा है, जो कि खगोलीय दूरीयों की … पढ़ना जारी रखें सप्तॠषि तारामंडल का सुपरनोवा अपनी चरम दीप्ती पर
कुछ सप्ताह पहले खगोलविज्ञानीयों ने M101 आकाशगंगा मे एक सुपरनोवा विस्फोट देखा था। यह एक वर्ग Ia का सुपरनोवा है, जो कि खगोलीय दूरीयों की … पढ़ना जारी रखें सप्तॠषि तारामंडल का सुपरनोवा अपनी चरम दीप्ती पर
सौर मंडल के सबसे बड़े गैस महाकाय ग्रह बृहस्पति की यात्रा पर निकले अंतरिक्ष यान जुनो(Juno)ने मुड़कर अपने घर पृथ्वी की ओर देखा और यह चित्र लिया। … पढ़ना जारी रखें अनंत समुद्र मे एक छोटे से द्विप पर असहाय से हम : पृथ्वी और चंद्रमा
पृथ्वी के काफी समीप लगभग 210 लाख प्रकाश वर्ष दूर एक नये सुपरनोवा विस्फोट को देखा गया है। 25 अगस्त 2011 को देखे गये इस सुपरनोवा … पढ़ना जारी रखें एक नया सुपरनोवा PTF 11kly: सप्तऋषि तारामंडल के पास एक तारे की मृत्यु
ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन

ठोस ईंधन वाले राकेट इंजन मानव द्वार निर्मित प्रथम इंजन है। ये सैकड़ो वर्ष पूर्व चीन मे बनाये गये थे और तब से उपयोग मे है। युद्ध मे प्रक्षेपास्त्र के रूप मे इनका प्रयोग भारत मे टीपू सुल्तान ने किया था।
ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन की कार्यप्रणाली जटिल नही है। इसे बनाने के लिए आपको कुछ ऐसा करना है कि ईंधन तीव्रता से जले लेकिन उसमे विस्फोट ना हो। बारूद मे विस्फोट होता है, जो कि 75% नाइट्रेट, 15% कार्बन तथा 10% गंधक(सल्फर) से बना होता है। राकेट इंजिन मे विस्फोट नही होना चाहिये इसलिये बारूद मे यदि 72% नाइट्रेट, 24% कार्बन तथा 4% गंधक का प्रयोग हो तो विस्फोट नही होता है बल्कि ऊर्जा सतत रूप से लम्बे समय तक प्राप्त होती है। अब यह मिश्रण बारूद ना होकर राकेट ईंधन के रूप मे प्रयुक्त हो सकता है। यह मिश्रण तिव्रता से जलेगा लेकिन विस्फोट नही होगा।
साथ मे दिये गये चित्र मे आप बायें प्रज्वलन से पहले तथा पश्चात राकेट को देख सकते है। ठोस ईंधन को पीले रंग मे दिखाया गया है। यह ईंधन के मध्य एक सीलेंडर के आकार मे सुरंग बनायी गयी है। जब ईंधन का प्रज्वलन होता है तब वह इस सुरंग की दिवारो के साथ जलता है। जलते हुये ईंधन की दिशा इस सुरंग की ओर से राकेट की बाह्य दिवारो की दिशा ओर होती है। एक छोटे राकेट प्रतिकृति मे ईंधन कुछ सेकंड जलता है लेकिन अंतरिक्ष शटल के सहायक बुस्टर राकेट मे यह लाखों किग्रा ईंधन 2 मिनिट तक जलता है।
पढ़ना जारी रखें “द्रव, ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन:राकेट कैसे कार्य करते हैं ? : भाग 2”
उत्तरी गोलार्ध मे सबसे आसानी से पहचाने जाना वाला तारामंडल – सप्तऋषि। इसे ग्रामीण क्षेत्रो मे ’बुढिया की खाट और तीन चोर’ भी कहा जाता है। … पढ़ना जारी रखें सप्तऋषि तारा मंडल
अंतरिक्ष यात्रा मानव इतिहास के सबसे अद्भूत प्रयासो मे एक है। इस प्रयास मे सबसे अद्भूत इसकी जटिलता है। अंतरिक्ष यात्रा को सुगम और सरल बनाने के लिये ढेर सारी समस्या को हल करना पडा़ है, कई बाधाओं को पार करना पड़ा है। इन समस्याओं और बाधाओं मे प्रमुख है:
लेकिन सबसे बड़ी कठीनाई अंतरिक्ष यान को धरती से उठाकर अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिये ऊर्जा का निर्माण है। राकेट इंजीन यही कार्य करता है।
पढ़ना जारी रखें “न्युटन का तीसरा नियम : राकेट कैसे कार्य करते हैं ?: भाग 1”