क्या समय यात्रा संभव है?


एच जी वेल्स के उपन्यास “द टाईम मशीन” मे नायक एक विशेष कुर्सी पर बैठता है जिस पर कुछ जलते बुझते बल्ब लगे होते है, कुछ डायल होते है , नायक डायल सेट करता है, कुछ बटन दबाता है और अपने आपको भविष्य के हज़ारों वर्षों बाद में पाता है।

समय यान (Time Machine)- २००२ मे बनी हालीवुड की फिल्म मे दिखाया समय यान

उस समय तक इंग्लैड नष्ट हो चुका होता है और वहां पर मार्लाक और एलोई नामक नये प्राणीयों का निवास होता है। यह विज्ञान फतांसी की एक महान कथा है लेकिन वैज्ञानिकों ने समय यात्रा की कल्पना या अवधारणा पर कभी विश्वास नही किया है। उनके अनुसार यह सनकी,रहस्यवादी और धुर्तो के कार्यक्षेत्र की अवधारणा है , उनके पास ऐसा मानने के लिये ठोस कारण भी है। लेकिन क्वांटम गुरुत्व (Quantum Gravity) मे आश्चर्यजनक रूप से प्रगति इस अवधारणा की चूलो को हिला रही है।

समय यात्रा की अवधारणा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इससे जुड़े पहेलीयों जैसे ढेर सारे विरोधाभास (Paradox) है।

विरोधाभास १:

इस उदाहरण के  अनुसार कोई व्यक्ति बिना माता पिता के भी हो सकता है। क्या होगा जब कोई व्यक्ति भूतकाल में जाकर अपने पैदा होने से पहले अपने माता पिता की हत्या कर दे ? प्रश्न यह है कि यदि उसके माता-पिता उसके जन्म से पहले ही मर गये तो उनकी हत्या करने के लिये वह व्यक्ति पैदा कैसे हुआ ?

विरोधाभास २:

यह ऐसा विरोधाभास है जिसमे एक व्यक्ति का कोई भूतकाल नहीं है। उदाहरण के लिये मान लेते है कि एक युवा आविष्कारक अपने गैराज में बैठ कर समययान मशीन बनाने की कोशिश कर रहा है। अचानक एक वृद्ध व्यक्ति उसके सामने प्रकट होता है और उसे समययान बनाने की विधि देकर अदृश्य हो जाता है। युवा आविष्कारक समय यात्रा से प्राप्त जानकारीयो से शेयर मार्केट, घुड़दौड़, खेलों के सट्टे से काफी सारा पैसा कमाकर अरबपति बन जाता है। जब वह बूढ़ा हो जाता है तब वह समय यात्रा कर भूतकाल में जाकर अपनी ही युवावस्था को समययान बनाने की विधि देकर आता है। प्रश्न यह है कि समययान बनाने की विधि कहां से आयी ?

विरोधाभास ३:

इस विरोधाभास मे एक व्यक्ति अपनी ही माता है। ’जेन’ को एक अनाथालय में एक अजनबी छोड़ गया था। जब जेन युवा होती है उसकी मुलाकात एक अजनबी से होती है, उस अजनबी के संसर्ग से जेन गर्भवती हो जाती है। उस समय एक दुर्घटना घटती है। जेन एक बच्ची को जन्म देते समय मरते मरते बचती है लेकिन बच्ची का रहस्यमय तरीके से अपहरण हो जाता है। जेन की जान बचाते समय डाक्टरो को पता चलता है कि जेन के पुरुष और महिला दोनों जननांग है। डाक्टर जेन को बचाने के लिये उसे पुरुष बना देते है। अब जेन बन जाती है “जिम”।इसके बाद जिम शराबी बन जाता है। एक दिन उसे भटकते हुये एक शराबख़ाने में एक बारटेंडर मिलता है जो कि एक समययात्री होता है। जिम उस समययात्री के साथ भूतकाल मे जाता है वहां उसकी मुलाकात एक लड़की से होती है। वह लड़की जिम के संसर्ग में गर्भवती हो जाती है और एक बच्ची को जन्म देती है। अपराध बोध में जिम उस नवजात बच्ची का अपहरण कर उसे एक अनाथालय मे छोड़ देता है। बाद में जिम समययात्रीयो के दल में शामिल हो जाता है और भटकती जिन्दगी जीता है। कुछ वर्षों बाद उसे एक दिन उसे सपना आता है कि उसे बारटेंडर बनकर भूतकाल में एक जिम नामके शराबी से मिलना है। प्रश्न : जेन की मां, पिता, भाई, बहन, दादा, दादी, बेटा,बेटी, नाती, पोते कौन है?

इन्ही सभी विरोधाभासो के चलते समययात्रा को असंभव माना जाता रहा है। न्युटन ने समय को एक बाण के जैसा माना था, जिसे एक बार छोड़ दिया तब वह एक सीधी रेखा मे चलता जाता है। पृथ्वी पर एक सेकंड, मंगल पर एक सेकंड के बराबर था। ब्रह्मांड मे फैली हुयी घड़ीयां एक गति से चलती थी। आइंसटाईन ने एक नयी क्रांतिकारी अवधारणा को जन्म दिया। उनके अनुसार समय एक नदी के प्रवाह के जैसे है जो सितारो, आकाशगंगाओ के घुमावो से बहता है, इसकी गति इन पिंडो के पास से बहते हुये कम ज्यादा होती रहती है। पृथ्वी पर एक सेकंड मंगल पर एक सेकंड के बराबर नही है। ब्रह्मांड मे फैली हुयी घड़ीयां अपनी अपनी गति से चलती है। आइंस्टाईन की मृत्यु से पहले उन्हे एक समस्या का सामना करना पडा था। आइंस्टाइन के प्रिन्स्टन के पड़ोसी कर्ट गोएडल (जो शायद पिछले ५०० वर्षो के सर्वश्रेष्ठ गणितिय तर्क शास्त्री है) ने आईन्स्टाईन के समीकरणों का एक ऐसा हल निकाला जो समय यात्रा को संभव बनाता था। समय की इस नदी के प्रवाह मे अब कुछ भंवर आ गये थे जहां समय एक वृत्त मे चक्कर लगाता था ! गोयेडल का हल शानदार था, वह हल एक ऐसे ब्रह्मांड की कल्पना करता था जो एक घूर्णन करते हुये द्रव से भरा है। कोई भी इस द्रव के घूर्णन की दिशा मे चलता जायेगा अपने आपको प्रारंभिक बिन्दू पर पायेगा लेकिन भूतकाल मे !

अपने वृत्तांत मे आईन्स्टाईन ने लिखा है कि वे अपने समीकरणों के हल मे समययात्रा की संभावना से परेशान हो गये थे। लेकिन उन्होने बाद मे निष्कर्ष निकाला कि ब्रह्मांड घूर्णन नही करता है, वह अपना विस्तार करता है(महाविस्फोट – Big Bang Theory)। इस कारण गोएडल के हल को माना नही जा सकता। स्वाभाविक है कि यदि ब्रह्मांड घूर्णन करता होता तब समय यात्रा सारे ब्रह्मांड मे संभव होती।

१९६३ मे न्युजीलैंड के एक गणितज्ञ राय केर ने घूर्णन करते हुए ब्लैक होल के लिये आइंसटाईन के समीकरणों का हल निकाला। इस हल के कुछ विचित्र गुणधर्म थे। इसके अनुसार घूर्णन करता हुआ ब्लैक होल एक बिन्दु के रूप मे संकुचित ना होकर एक न्युट्रान के घुमते हुये वलय के रूप मे होगा। यह वलय इतनी तेजी से घुर्णन करेगा कि अपकेन्द्री बल(centrifugal force) इसे एक बिन्दु के रूप मे संकुचित नही होने देगा। यह वलय एक तरह से एलीस के दर्पण के जैसे होगा। इस वलय मे से जानेवाला यात्री मरेगा नही बल्कि एक दूसरे ब्रह्मांड मे चला जायेगा। इसके पश्चात आईन्सटाईन के समीकरणॊ के ऐसे सैंकड़ो हल खोजे जा चूके है जो समय यात्रा या अंतरिक्षीय सूराख़ों (Wormholes) की कल्पना करते है।

अंतरिक्षिय सूराख (Wormhole)

ये अंतरिक्षीय सूराख ना केवल अंतरिक्ष के दो स्थानो को जोड़ते है बल्कि दो समय क्षेत्रो को भी जोड़ते है। तकनीकी रूप से इन्हे समय यात्रा के लिये प्रयोग किया जा सकता है। हाल ही मे क्वांटम सिद्धांत मे गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को जोड़ने के जो प्रयास हुये है उपर दिये गये विरोधाभासो के बारे मे कुछ और जानकारी दी है। क्वांटम भौतिकी मे किसी भी वस्तु की एक से ज्यादा अवस्था हो सकती है। उदाहरण के लिये एक इलेक्ट्रान एक समय मे एक से ज्यादा कक्षा मे हो सकता है(इसी तथ्य पर ही सारे रासायनिक सिद्धांत आधारित है)। क्वांटम भौतिकी के अनुसार स्क्राडीन्गर की बिल्ली एक साथ दो अवस्था मे हो सकती है, जीवित और मृत। इस सिद्धांत के अनुसार भूतकाल मे जाकर उसमे परिवर्तन करने पर जो परिवर्तन होगे उससे एक समानांतर ब्रम्हाण्ड बनेगा। मौलिक ब्रम्हाण्ड वैसा ही रहेगा।

यदि हम भूतकाल मे जाकर महात्मा गांधी को बचाते है तब हम किसी और के भूतकाल को बचा रहे होंगे, हमारे गांधी फिर भी मृत ही रहेंगे। महात्मा गांधी को हत्यारे से बचाने पर  ब्रह्मांड दो हिस्सो मे बंट जायेगा, एक ब्रह्मांड जहां गाधींजी की हत्या नही हुयी होगी, दूसरा हमारा मौलिक ब्रह्मांड जहां गांधीजी की हत्या हुयी है। इसका मतलब यह नही कि हम एच जी वेल्स के समय यान मे प्रवेश कर समय यात्रा कर सकते है! अभी भी कई रोड़े है !

पहली, मुख्य समस्या है उर्जा ! एक कार के लिये जिस तरह पेट्रोल चाहीये उसी तरह समययान के लिये काफी सारी मात्रा मे ऊर्जा चाहिये! इतनी मात्रा मे ऊर्जा प्राप्त करने के लिये हमे किसी तारे की संपूर्ण ऊर्जा का उपयोग करने के तरीके सीखने होगें या असाधारण पदार्थ जैसे ऋणात्मक पदार्थ(Negative Matter) (ऐसा पदार्थ जो गुरुत्वाकर्षण से उपर जाये, निचे ना गिरे) खोजना होगा या ऋणात्मक ऊर्जा(Negative Energy) का श्रोत खोजना होगा। (ऐसा माना जाता था कि ऋणात्मक ऊर्जा असंभव है लेकिन अल्प मात्रा मे ऋणात्मक ऊर्जा का प्रयोगिक सत्यापन कैसीमीर प्रभाव(Casimir effect) से हो चूका है।) ऋणात्मक ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उत्पादन कम से कम अगली कुछ शताब्दीयो तक संभव नही है। ऋणात्मक पदार्थ अभी तक खोजा नही गया है। ध्यान दे ऋणात्मक पदार्थ प्रतिपदार्थ (Antimatter) या श्याम पदार्थ(Dark Matter) नही है।

इसके अलावा समस्या स्थायित्व की भी है। केर का ब्लैक होल अस्थायी हो सकता है, यह किसी के प्रवेश करने से पहले ही बंद हो सकता है। क्वांटम भौतिकी के अंतिरिक्षिय सूराख भी किसी के प्रवेश करने से पहले बंद हो सकते है। दुःर्भाग्य से हमारी गणित इतनी विकसित नही हुयी है कि वह इन अंतिरिक्षिय सूराखो(Wormholes) के स्थायित्व की गणना कर सके क्योंकि इसके लिये हमे “थ्योरी आफ एवरीथिंग(Theory of Everything)” चाहिये जो गुरुत्व और क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतो का एकीकरण कर सके। अभी तक थ्योरी आफ एवरीथिंग का एक ही पात्र सिद्धांत है सुपरस्ट्रींग थ्योरी(Super String Theory)। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो अच्छी तरह से परिभाषित अवश्य है लेकिन इसका हल अभी तक किसी के पास नही है।

स्याम विवर (Black Hole)

श्याम विवर (Black Hole)

मजेदार बात यह है कि स्टीफन हांकिन्ग ने समय यात्रा की अवधारणा का विरोध किया था। उन्होने यह भी कहा था कि उनके पास इसके अनुभवजन्य प्रमाण है। उनके अनुसार यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षो मे सैधांतिक भौतिकी मे काफी नयी खोज हुयी है ,जिससे प्रभावित होकर हाकिंग ने अपना मत बदल दिया है। अब उनके अनुसार समय यात्रा संभव है लेकिन प्रायोगिक(practical) नही !

हमारे पास भविष्य से यात्री इस कारण नही आते होंगे क्योंकि हम इतने महत्वपूर्ण नही है। समय यात्रा कर सकने में सफल सभ्यता काफी विकसीत होगी, वह किसी तारे की सम्पूर्ण ऊर्जा के दोहन में सक्षम होगी।  जो भी सभ्यता किसी तारे की ऊर्जा पर नियंत्रण कर सकती है उनके लिये हम एक आदिम सभ्यता से बढकर कुछ नही है। क्या आप चिंटीयो को अपना ज्ञान, औषधी या ऊर्जा देते है ? आपके कुछ दोस्तो को तो शायद उनपर पैर रख कर कुचलने की ईच्छा होती होगी।

कल कोई आपके दरवाजे पर दस्तक दे और कहे कि वह भविष्य से आया है और आपके पोते के पोते का पोता है तो दरवाजा बंद मत करिये। हो सकता है कि वह सही हो।

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273 विचार “क्या समय यात्रा संभव है?&rdquo पर;

  1. रैवतक राजा की पुत्री का नाम रेवती था। वह सामान्य कद के पुरुषों से बहुत लंबी थी, राजा उसके विवाह योग्य वर खोजकर थक गये और चिंतित रहने लगे। थक-हारकर वो योगबल के द्वारा पुत्री को लेकर ब्रह्मलोक गए। राजा जब वहां पहुंचे तब गन्धर्वों का गायन समारोह चल रहा था, राजा ने गायन समाप्त होने की प्रतीक्षा की।
    गायन समाप्ति के उपरांत ब्रह्मदेव ने राजा को देखा और पूछा- कहो, कैसे आना हुआ?
    राजा ने कहा- मेरी पुत्री के लिए किसी वर को आपने बनाया अथवा नहीं?
    ब्रह्मा जोर से हंसे और बोले- जब तुम आये तबतक तो नहीं, पर जिस कालावधि में तुमने यहाँ गन्धर्वगान सुना उतनी ही अवधि में पृथ्वी पर २७ चतुर्युग बीत चुके हैं और २८ वां द्वापर समाप्त होने वाला है, अब तुम वहां जाओ और कृष्ण के बड़े भाई बलराम से इसका विवाह कर दो, अच्छा हुआ की तुम रेवती को अपने साथ लाए जिससे इसकी आयु नहीं बढ़ी।
    इस कथा का वैज्ञानिक सन्दर्भ-
    आर्थर सी क्लार्क ने आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी की व्याख्या में एक पुस्तक लिखी है- मैन एंड स्पेस, उसमे गणना है की यदि 10 वर्ष का बालक यदि प्रकाश की गति वाले यान में बैठकर एंड्रोमेडा गैलेक्सी का एक चक्कर लगाये तो वापस आनेपर उसकी आयु ६६ वर्ष की होगी पर धरती पर 40 लाख वर्ष बीत चुके होंगे।
    सर!
    क्या ये बात सच है कि प्राचीन भारत में लोग वैज्ञानिक रूप से इतने विकसित थे कि time dilation जैसी चीजों के विषय में अवधारणा बना सकते थे?
    इस कथा को धार्मिक रूप में ना लेकर वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण किया जाए तो ये बात तो तय है कि वो time dilation के विषय में सोच सकते थे (या जानते थे)।
    इसी प्रकार की अन्य कथाएं भी प्रचलित हैं जिनमें ब्रह्मलोक के एक क्षण को पृथ्वी के कई हजार वर्षों के बराबर बताया गया है।
    कम से कम सिद्धांत तो जरूर रहा होगा उनके पास। -vaibhav singh samrat (vaibhav01)
    https://www.facebook.com/vaibhavsinghsamraat

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    • सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है।

      भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है।

      सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है।

      भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है।

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  2. सर कृप्या ये बताये कि
    Space का time earth के time से कितना तेज चलता है.
    अगर अर्थ पर 100 दिनो मै 8640000 सेकंड होते है तो space मे 100 दिन मे कितने सेकंड होंगे?
    मुझे आप के answer का इन्तजार रहेगा…

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    • विकास, स्बसे पहले आपको सापेक्षता समझना होगा। सापेक्षता का अर्थ है कोई समय की गति किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष मापी जायेगी।
      यदि आपने पृथ्वी से अंतरिक्ष मे तेज यान(मान लो प्रकाश गति के निकट) से यात्रा प्रारंभ की तो पृथ्वी के सापेक्ष यान मे समय गति धीमी हो जायेगी। यान के अंदर आपको समय गति मे कोई परिवर्तन महसूस नही होगा। एक वर्ष मे उतने ही सेकंड होंगे। लेकिन यान के उस एक वर्ष मे पृथ्वी पर कई वर्ष बीत जायेंगे। कितने वर्ष ? यह आपके यान की गति पर निर्भर है। इसे आप इस फ़ार्मुले से ज्ञात कर सकते है
      t’=t * sqrt(1-V^2/c^2)
      t’ परिवर्तित समय
      t निरीक्षक का समय(पृथ्वी पर समय)
      V गति
      c प्रकाश गति

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  3. mahabharat me shri krishan jab arjun ko geeta ka updesh de rahe the to kaha jata hai k samaya ruk gya tha or sbhi log sthir ho gaye the toh mahabharat jisne likhi usko ye kaise pata k geeta ka updesh dete hue shrikrishn ne arjun ko kya batain kahi thi kyo k samaya toh us vakt shrikrishn or arjun ko chhod kar sabhi k liye ruka tha, ye sab baatain bakwas hai. aisa kuchh bhi nahi tha geeta ka updesh dene k liye shri krishn ne bhishm se kuchh samaya manga tha or unka maan rakhne k liye samaya de diya tha us samaya shri krishn ne arjun ko yudh se bahar le ja kar usko updesh diya tha

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  4. yadi koi samaya yaan ban b jaye ya ban chuka ho or usme vagyanic yatra kar bhi rahe ho to vo hum jese sadharan vyaktiyo ko us samaya yaan k bare me kyo batayenge? vo to us time machine me baith k samaya ki sair kar rahe honge or agar vo us machine me baith k future me jaye toh vo apne aap ko dekh ni nahi payenge kyo k vo log to time machine me travell kar rahe honge or agar vo past me chale gaye or vaha jaa k apne aap ko us machine me baitha k yatra karvayenge ye dono hi ek paradox hai jisse ye sabit hota h k time travell is not possible

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    • समययात्री हमारे मध्य है। हर अंतरिक्षयात्री एक समय यात्री होता है, वह कुछ माइक्रोसेकंड ही सही लेकिन जब वह पृथ्वी पर आता है, वह भविष्य मे आता है।
      GPS सीस्टम मे यदि समय की भिन्न स्थान पर भिन्न रफ़्तार को ध्यान नही रखा जाये तो उसके नतीजे गलत होंगे। GPS सीस्टम मे गणना के लिये समय की गति मे भिन्नता को ध्यान रखा जाता है।
      समय यात्रा अफ़वाह नही एक सच्चाई है। बस हमारी तकनीक ऐसी नही है कि हम मनचाही समय यात्रा कर सकें।

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      • haa sir meine iske bare mein suna hai per aap ye jante hai ki NASA ne do atomic clock mein se ek ko space suttle mein aur dusri earth per rakhi thi aur space suttle wali clock slow ho gayi thi is liye unhone maan liya ki time travel ho sakta jo gravity se relative ho ye manker hum sab ye jante hai ki time travel possible hai
        but is theory mein jo paresaani hai wo mein batata hu sabse pahle ki atomic clock mein time ko electron ki speed per depand kerta hai aur hum ye jante hai electron proton ke gravity ki vajah se uske charo aur orbit mein gumte hai per wo gravity ki vajah se orbit karte hai per space mein gravity nahi hone ki vajah se electron per koi external force nahi lagti hai isliye proton ki gravity bad jati hai aur electron freely ho jate hai aur wo proton ki gravity se slow orbit karta hai isliye electron slow ho jata hai aur time mein change hota hai sirf aur sirf clock mein not in reaility

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      • हितेंद्र, समय की भिन्न रफ़्तार को और भी बहुत से तरिकों से प्रमाणित किया गया है। सबसे बड़ा उदाहरण GPS है। GPS की सटिकता के पीछे समय की भिन्न रफ़्तार को ध्यान मे रखना भी एक महत्वपूर्ण कारक है।

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  5. It means there is triplicate copy of each incident, each moment ? one is in Present (in which we are discussing) one was in past (it has been discussed earlier) one will be in future (this may discuss later) ? it means do u think my comment and your answer is also triplicate ? Now also we can travel faster than time e.g one can celebrate new year party in India at 31st night and same can celebrate in US as well due to time difference due to different geographical conditions and the countries locations. We can not forget that, our Sun is steady and our earth is moving around sun it creates time change, day, night, date change etc.

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  6. हम सब लोक एक कंप्यूटर गेम का कैरेक्टर हे ये पूरा बिस्व ब्रह्मांड एक कंप्यूटर गेम का हिस्सा हे जो कोई घर में बैठ के हमारे साथ खेल रहा है और पूरी दुनिया को चला रहा है . हमारे आस पास यह जो दुनिया हम लोग देख रहे है यह असल में हमारे नजरो का धोका है यह सब वर्चुअल रियालिटी है. ऐसा मुझे लगता है. हमें अगर टाइम ट्रेवल करना है तो हमें यानि हमारे बैज्ञानिको को सपने के बारे में समजना चाहिए क्यों की हम सपना क्यों देखते हे इसका रहस्य अभी तक नहीं सुलझी
    अगर हम ये सपने का रहस्य सुलझा लेंगे तो शायेद हम लोग टाइम ट्रेवल कर ले

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  7. सर, क्या ऐसा भी हो सकता की महँ वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी भविस्य से आये हो और यहाँ ऐसे ऐसे नियम बता गए हो इसी प्रकार कई व्यक्ति टाइम मशीन से आये होंगे हमारी धरती पर

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  8. समय यात्रा मुझे भी करनी है। में अपने पुराने समय में एक ट्रैन स्टेशन पर खो चुका हूँ। मुझे सपने में बार बार वो जगह दिखाई देती है। कभी कभी महसूस होता है । किसी नयी जगह पर जैसे में वह जगह घूम चूका हूँ।

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  9. हम टाईम मशीन बना लेते है तो बहुत खतरा है लेकिन किसी देश से लड़ाई हुआ तो टाईम मशीन का गलत युज करेगा जिससे हमें परेंशानियो का सामना करना परेगा ।

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  10. इन्सान कि आत्मा ही समय यान ह यही सच ह
    उदाहरण के लिए कभी कभी हम कोई काम कर रहे होते ह तो एकदम से हमारे दिमाग में आता ह की हमने ये काम पहले किया ह इसी प्रकार आत्मा भी शरीर बदलती ह और भूतकाल और भविष्य काल मे फिर से प्रवेश करती ह
    अगर यह कथन सत्य ह तो हो सकता हे की भगवान भी ह इस दुनिया में

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  11. आशीष सर जी,
    आपका ये समय यात्रा वाला लेख पढ़ा, इसमे आपने लिखा है कि वैज्ञानिक स्टिफन हाकिंस जी ने कहा कि ”यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है।” पर मुझेे लगता है कि वाेे भविष्‍य यात्री हम जिसे परग्रही समझ रहे होंं, वे हो । और शायद इस डर से सामने न आ रहे हो कि हम उनका टाइम मशिन उनसेे छिन ले । या वे हम पर नजर रख रहे हो कि परमााणुु यु्द्ध न छिड़ जाए ।

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  12. Iranian time machine Edit

    In April 2013, the Iranian news agency Fars carried a story claiming a 27-year-old Iranian scientist had invented a time machine that allowed people to see into the future. A few days later, the story was removed, and replaced with a story quoting an Iranian government official that no such device had been registered.[21][22][23]

    Philadelphia Experiment and Montauk Project

    Billy Meier’s Meeting with Jmmanuel Edit

    One of Meier’s photographs of a beamship floating beside a tree
    Main article: Billy Meier
    “Billy” Eduard Albert Meier (February 3, 1937) is a citizen of Switzerland who claims to be a UFO contactee and prophet. He is also the source of many controversial UFO photographs, which he states are evidence of his encounters. Meier reports regular contact with extraterrestrials he calls the Plejaren (aliens from beyond the Pleiades) describing them as humanoid Nordic aliens.

    As recounted in the unabridged version of Message from the Pleiades, Vol. 2, Meier was taken back in time by the extraterrestrial Asket where he met personally with Jmmanuel, alleged to be the real Jesus, and who told Meier that Meier’s evolution was higher than that of Jmmanuel himself, saying, “Truly, your evolution has proceeded for 2000 years further, which fact I have not considered.” (page 512). The contact with Jmmanuel lasted for four days after which Meier was returned to the present time.[30]

    Moberly–Jourdain incident Edit

    The Petit Trianon in 2005, where the incident purportedly took place.
    Main article: Moberly–Jourdain incident
    The Moberly–Jourdain incident, or the Ghosts of Petit Trianon or Versailles (French: les fantômes du Trianon / les fantômes de Versailles) refers to claims of time travel and hauntings made by Charlotte Anne Moberly (1846–1937) and Eleanor Jourdain (1863–1924). In 1911, Moberly and Jourdain published a book entitled An Adventure, under the names of “Elizabeth Morison” and “Frances Lamont”. Their book describes a visit they made to the Petit Trianon, a small château in the grounds of the Palace of Versailles where they claimed they saw ghosts including Marie Antoinette and others. Their story caused a sensation, and was subject to much ridicule.

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  13. Agar kisi sciencetist ne time machine bana bhi lee.
    To wo kabhi past me ni ja sakta.
    Kabhi ni …..
    Jaiga hamesha future me.
    Q ki earth ka time aakash ganga me tej hai…
    Man liya ek aise machine ban gayi jiska time black hole se tej hai…
    Jo ispar bethe ga wo iski speed kese sahen karega ( heart beat, ears, mind.) Par bhaut pressor
    Padega jaha tak uski deth ho jaigi..
    Wo hamesha future me jaiga…
    Aur kabhi wapas past me ni a paiyega ….

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  14. अब तो मुझे लगता है की सबकुछ संभव है ,
    मनुष्य तो अभी कुछ भी नहीं जानता है , मनुष्य अभी तक गर्भ से बाहर भी नहीं आया है या शायद आ भी चूका हो लेकिन अभी तक आंखें तो नहीं खुली है ये निश्चित है , हम आइंस्टाइन के सिद्धान्त को जानते है मानते हैं , जो की हमारी आज तक की जानकारी के अनुसार सही भी है , किन्तु क्या भौतिक विज्ञान समाप्त हो गया है। .?क्या आइंस्टाइन सम्पूर्ण भौतिक विज्ञान को जान गए थे। .? नहीं बिलकुल भी नहीं। .
    अभी मनुष्य जाति को बहोत दूर तक बहोत लंबी यात्रा करनी है , अभी बहोत से समीकरण और सिद्धान्त बदलेंगे , मैंने सुना है आइंस्टाइन तो श्याम विवर के अस्तित्व को भी नहीं मानते थे , तो क्या उनके नहीं मानने श्याम विवर नहीं है , इसी प्रकार आइंस्टाइन ने अंतरिक्ष में गुरुत्वीय तरंगो के अस्तित्व को पहचान लिया था और इसके होने का दावा भी किया था जो इतने वर्ष पश्चात् जाकर बिलकुल सटीक और सत्य साबित हुई , किन्तु उन्होंने यह भी दावा किया था की मनुष्य अंतरिक्ष की इन गुरुत्वीय तरंगो को कभी देख या पकड़ नहीं पायेगा , किन्तु हमारे आज के वैज्ञानिको यह करके दिखाया , इसी प्रकार हो सकता है बहोत से समीकरण एवम सिद्धान्त ऐसे हो जिनकी अभी हमे पूर्ण जानकारी न हो , इसका ये मतलब नहीं की भविष्य में भी नहीं हो सकती ,
    यदि हम कुछ हज़ार वर्ष और खुद को बचा ले गए तो शायद ही फिर हमसे कोई रहस्य छुपा रह सके। संभवत: आज हर असंभव लगने वाली बात संभव हो सके , आशा तो हम मनुष्यों का एक परम गुण है , बस इसे जीवित रखना है।

    आपके क्या विचार है आशीष जी …?

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  15. अगर समय यात्रा संभव है तो कोई बैज्ञानिक उसे बनाने की कोशिस क्यों नहीं करता अगर हमारे भारत के पास एक टाइम मशीन होता तो हमारा भारत सबसे आगे होता

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    • इंसान भविष्य काल में तो जा सकता है पर भूतकाल में नहीं भविष्य काल में जाने के लिए आपको समय से तेज गति से चलना होगा जैसे कोई यान जो प्रकाश की गति जितना तेज चलता है यदि आप उसमे बैठ कर यात्रा करें तो उसमे बिताए गए कुछ मिनट लोगों के कई वर्षों के बराबर होंगे
      जब आप विमान से उतरेंगे तो आप देखेंगे की आप अपने भविष्य में आ गए वह समय उस समय से कई साल बाद का होगा
      यही कार्य यदि अन्य लोग करेंगे तो वे लोग आपके भविष्य काल में होंगे और आप उनके भूतकाल में होंगे

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  16. Agar koi light ki speed ke barabar ki speed wali train me jaye .train ke driver ko 7 days means 168 ghanta ke bad train rokne ko kaha jaye . Ainsteen ke hisab se train ke andar samay dhima ho jayega. To train driver 7 din ke bad jab train rokega to usme train ke rukne per yatri bahar aane per train ke bahar ki dunia 75 sal aage ho jayegi. To it means yatri 75 sal bad future me kadam rakhenge. Aur past me return nhi ho payenge. Kya asa hi hoga.? Aur secend question .kya is gati se yatra karne wale yatrio ki age kya sirf 7 din hi plus hogi ya phir 75 sal. I mean samay gati dhimi hone per kya unki age ki badhne ki raftar bhi usi prakar dhimi ho jayegi ?. Answer please sir..

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      • 1 more ? Sir. Kya insan light speed ke brabar chalnewali train ya or koi bhi objects me yatra ko itni speed sahan kar payenge. Ya unhe yatra ke dauran iska aabhash normal train me yatra jasa hi hoga?

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      • प्रकाशगति या उसके समीप (मान लेते है प्रकाशगति का 80%) गति तक किसी मानव को पहुंचने पर उसका जीवित बचना त्वरण(acceleration) पर निर्भर करेगा। कुछ ही घंटो मे इस गति तक पहुंचने का प्रयास करने मानव का ही नही अंतरिक्षयान का ही जड़त्व से पापड़ बन जायेगा।
        ये गति प्राप्त करने के लिये त्वरण इतना होना चाहिये कि यान और मानव दोनो उसे सहन कर पाये, इसमे दस वर्ष से अधिक लग सकते है। उसके पश्चात यान की गति भी धीमे करने मे दस वर्ष लगेंगे!

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      • Prakash gati ki barabar gati pa lene per samay yatra sambhav hai..but koi bhi vastu jo apna dravyaman rakhti hai prakash ki gati ko nahi prapt kar sakti. To phir samay yatra kori kalpana hi to hai. Means time travel impossible. Hame ise accept ksr lena chahiye..

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  17. समय यात्रा संभव है !! मेरे पास कुछ तथ्य हैं !! एक मुख्य तथ्य दे रहा आपकी रिसर्च में सुविधा होगी !!

    अगर हम प्रकाश से तेज गति में चलते है तो एक स्थान से दूसरे स्थान के बीतने पर शायद हमें सेकेंड भर लगे !! पर साधरण लोगों के लिये वो कई घंटे या दिनो का होगा !!
    मान ले हम मंगल तक घूम कर आ जाये, पर तब तक पृथ्वी अपने कई चक्कर पूर्ण कर चुकी होगी !!

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  18. मेरे खयाल से समय यात्रा हो सकती है पर शारीरिक तरीके से नहीं मानसिक तरीके से। जीसे हम देख सकते है अनुभव कर सकते है पर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

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  19. namaste sie,
    main janna chahta hu ki pruthvi ko gurutv bal usake ghurnan ki vajah se hai ya koi aur karan hai ?
    aur ghurnan ki vajah se guratv bal nahi hai to kya pruthvi ka ghurnan band hone pr bhi gurutv bal rahega ?
    main janta hun ki pruthi ekdm rukh jane se hum sub bramhand main fail jayenge lekin agar pruthvi dhire dhire rukh jayegi to bhi kya hum bramhand fail jayenge aur gurutviy bal samapt ho jayega ?
    plz reply ……!

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    • गुरुत्वाकर्षण द्रव्यमान से उत्पन्न होता है, घूर्णन से नही। आपका द्रव्यमान है इसका अर्थ है कि आपमे भी गुरुत्वाकर्षण है। अधिक द्रव्यमान अधिक गुरुत्वाकर्षण। लेकिन गुरुत्वाकर्षण अत्यंत कमजोर बल है जिससे इसके प्रभावी होने के लिये द्रव्यमान अत्याधिक चाहीये, जैसे पृथ्वी का द्रव्यमान! आपका या मेरा द्रव्यमान इतना कम है कि इससे उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण को महसूस नही कर सकते है।

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  20. time travel is possible….light ki gati itni jyada hai ki hum keh sakte hai ke light zero time may har jagah majood hai….surya ki kirne dharti par 8 min may nahi pahuchti keo ki light means surya ki kirno ka time zero hai…hamari dharti surya ke chakkar lagati hai surya sirf ek jagah par khada hai sun is immortal…agar surya ki kirno ka samay aap kehte hai ki 8 min may dharti par pahuchti hai to surya ka bhi samay hona jaruri hai but surya ka koi samay nahi hai uska bhi zero time hai…crore salo say surya apni jagah par hai or kirne roshni deti hai dharti ghumti hai to raat or din hota hai…….time travel karna sambhav hai agar aap ek aisha yantra bana le jiska fuel light ho or time zero yani light ki gati ke barabar ho…….time travel may bhootkal may bhe jana sambhav hai but u can not change your past keo ki past may tumhara future nahi hai aap past may time travel karke pahuch gaye to bhe aap waha hote hoye nahi ho ..keo ki aap kisi ko dikhai nai do gay keo ke aap future ho past dekh sakte ho….ha future may aap jaa kar apne aaj ko badal sakte ho…future may aap sab say mil bhe sakte ho…..future may hone wali galti dekh kar aap aaj may wapis aakar badal sakte ho…..but today we have no technology ..but few years you see we make….

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  21. 3 dimension ke alawa 4th dimension TIME hi hai.. real life mein 3d ko hum experience karte hi hai to ye 100% sach hai ki 4th dimension TIME ko bhi experience kiya ja sakta hai par kese ye sawal jaroor unsolved hai practically. But Einstein ki time frame parikalpana proof karne ke liye us end tak jane ka experiment karna hoga jo abhi to impossible hai pr hoga jaroor.

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  22. सर अगर हम अन्तरिक्ष में जाकर कोई पंखा चलाये और उसके आगे खड़े हो जाए तो क्या हमें हवा लगेगा. कृपया सम्पूर्ण उत्तर दीजिये आपकी महान कृपा होगी
    धन्यवाद

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  23. Jo log ye khte he ki unhone spna dekha aur vo reality me convert ho gya to kya vo spne me virtual way se time travel krte he . ha game theory ke hisab se esa possible he ki world me itne sare log spna dekhte he to probability se hm kh skte he ki kisi person ke jeevan me ek do bar esa ho skta he pr kuch log jinke spne aksr sch hote he to kya us kes me vo spne me time travel krte he
    Pls reply
    Thanks

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  24. ham smy ki yatra ke liye nhi ja skte he pr future time dekh skte he pr question he kese ? kisi bhi discovery ke liye hme system ki jrurt hoti he ab ye system kesa ho hm pure universe ki bat kr rhe he n ki apne room ki .isliye hme apne system ki limit decide krni hogi aur sara experiment usi system ke andr krna hoga hme ye janane ki jrurt nhi he ki universe kese bna ya jeevan ka aarmb kese huaa kyoki isse hmare system ki limit bdegi aur uska maintance utna hi complex hoga.thanks

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  25. agr time travel possible he to future ka vykti hmse milne aata vo kha he hmare aas pas koi nhi he jo ye kahe ki vo future se aaya he .iska mtlb time travel machine future me kbhi smbhv nhi he . ha ek smbhavna he ki hm future dekhne ki machine ya koi source bna de iski bhi do smbhavna he 1.universe ke pas sirf ek dimension ho time ki 2. universe ke pas multi dimension ho time ki.
    phli condition me hm future dekh skte he pr use bdl nhi skte he kyoki universe ke pas koi alternate way nhi hoga.second condition me hm future dekh bhi skte he aur bdl bhi skte he umid he second condition truth ho taki hme time pr research ka koi fayda ho.interesting bat to ye he ki time chahega to hi hm future dekh skte he kyo ki time ek entity he aur hm sb us entity ke undr aate he hm time se independent hokr koi descion nhi le skte he. pr universe ki bdi invention isi entity ke andr hui he umid he ye bhi ho jae
    thanks

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  26. Time travel sambav hai knue ki 5000 sal pahle jake Koi soche television ke bare me to asambav lagta hai par aaj wo sambav hai. Ye se hi nothing is impossible. Lekin me Yeh kahunga Agar time travel hoga to insan prakti ke nirdharit apne aayu kal ke andar time travel karega. Knue ki atma to ek hai jab wo past me jayega to uska age kam ho sakta hai par use Koi apna dusra nahi milega. Aur bhavisya me jake Agar us time uska umar sampat ho gaya hoga to wo mar bhi sakta hai. Aur past ko badla ja sakta hai uski upar uska future nirvar karega.

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  27. yah is topic par bahut hi gazab ka lekh hai sirji padhkar bahut sa gyan mila so tanks very much…

    is vishay me mera manna hai ki yadi samay yatra sambhav hui to past me jakar kiye gaye changes ke hisab se hi present change ho jaega na ki koi samanantar brah mand banega.
    matlab yadi koi past me jakar kisi ke dada ya pita ki hatya kar de to present me wo turant gayab hokar samapt ho jaega kyuki ab uska astitva sambhav hi nahi, or ye ghatna hamare molik brahmand me hi ghategi koi samanantar brahmand nahi banega.
    sir bataiye kya aisa sahi hai.
    sath hi me chahunga ki aap please samay ke topic par or lekh likhe ya phir aeinstene ke bridge and worholes par bhi koi lekh likhe.

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  28. अगर हम कोई एसी मशीन का निर्माण कर सके जो समय की गति को धीमा य तेज कर सके तो उसककी सहायता से हम प्रकाश से भी तिव्र चल सकते है। क्या ये सम्भव है?

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    • समय का ही तो मुख्य मसला है … और एसा समय कभी नहीं होने देगा क्यों कि दुनिया ही Every Power समय कि गुलाम है ! समय के सिधान्तो में सच्चाई ही सकती है पर हम इसके लिए अभी बच्चे हैं|

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    • Maine sabko read kiya aur kai logo ki baat se sehmat hoon ha sabse power full insaan ka dimag hai aaj tak jo bhi creat hooa bde se bdi train ho ya airplain bnayea insan ne hi mere dimag ki soch hi share kr rha hoon mere ko lgta hai jis point pe hum log baat kr re ho time travel ja time mchine ke bare ho skta hai ki time machine bngi ho aur jo kuj log ka mnna hai elian jo hai hum hi haye mera yeh mnna hai ke nassa me yeh awishkar bht phle hi kr liya hai mgar isey dunia ke sahmne nhi rkha gea nassa ki suna hai scurity bht hai aam.insaan bhi wha nhi ja skta aur jo wha jata hai toh apne priwar mein wapis bhi bht kum ata hai ho skta hai future dekhne wali mchine bn gyi ho jo aaj hum ek tuch screen mobile ek mnorajan ke liye tv dekhte hai airplain se jate hai ho skta hai ke yeh sab future mai hi dekha gya ho toh jake humne yeh sab creat kiye mnorajan ke liye gajuts kiu ke agar hum.bhoot kaal ki baat kre toh humare dada ke dada ke bhi dada ne yeh nhi kha ho ga ke ek airplain hai jo bht bda hai aur bhari bhi hai osme kai log baithte hai aur hwai yatra krte hai ja fer kisi ne yeh nhi socha tha ke ayea phn hai jisse hum kisi door rhte insaan se bat krte ho humare bhoot kaal ke kai yodda itne blwaan bhi they woh ayesa kiu nhi soch ske pr mere dimag ki yeh soch kehti hai ke hum tecnology ko nhi chla rhey balki hum tecnology ko chlaye iska path koi future se hi ayea ho ga jiss se aaj hum chl re hai so mera khna hai nassa ke paas time mchine hai pr iska dunia ko btayea nhi gea aur ho skta hai jo elians ho woh bhi help krte ho but iska kbhi bhi hum tak baat na phuche iska koi na koi conection hai sochna chayie sabko ke yeh har roj nyi se nyi tecnology kha se aa rhi hai agar kisi ne future ko dekha hai tbhi hi ayesa hooa baaki dimag ki shakti hi sabse bdi shkti hai mera mnna hai dunia mai time mchine hai

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  29. हम लगातार समय यात्रा ही कर रहे है। लेकिन सिर्फ भविष्य कि ओर गुरूत्वाकर्षण कम या ज्यादा होने पर ये भी धीमी या तेज हो सकती है पर समय कभी विपरीत दिशा मे नही चल सकता मतलब भूतकाल मे जाना असम्भव है। क्या मेरा सोचना सही है

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  30. टाइम और स्पेस आपस मे गुथे हैं जो दो आयाम मे जुड़े हैं समय को अलग विस्तार करने पर समय अलग व्यवहार करता है और स्पेस का अलग विस्तार करने पर अलग व्यवहार करता है
    टाइम के विस्तार से ब्रह्मांड फैल रहा है जिसे आजकल हम डार्क एनर्जी कहते हैं जो ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा है जिसे कोई समझ नहीं पाया है और स्पेस के विस्तार से ब्रह्मांड में गतिशील द्रव्यमान को समेट सकता है जो गुरुत्वाकर्षण जैसा व्यवहार करता है जिसे आजकल हम डार्क मैटर कहते हैं

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  31. यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है।
    मै ईस प्रश्न के बारे में कुछ कहना चाहता हूँ,
    भविष्य से आने वाले यात्री हो सकता है की यही हमारे बीच हो,परंतु उनका रुप हमसे अलग हो जैसे कीसी कीटक,कीटाणु, और जीव….या ऐसे कण(रोबोटीक्स,नैनो,या अलग टेक्नालॉजी) ईसकी संभावना यह भी हो सकती है की जब टाईम मशीन की खोज भविष्य में की गई तब सायन्स के खोजो की कोई सीमा ही ना रही हो। और अभी जो बने सिद्धांत है उस वक्त गलत साबीत हो,और सब थेयरीज बदल कर नई रुप मे बने हो,और कुछ गलत कदम ईन्सान ना ले ईसके वजह से वहा टाईम मशीन के बारे में नियम कायदे हो, जो ईन्सान भलेही टाईम मशीन में ट्रावल करे पर उन नियम कायदो के वजह से ऊसके भविष्य या भुत को सीर्फ देख सखेगा महसुस कर सखेगा,पर उसमें ईटरफेअर नहीं कर सखेगा।

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      • मुझे कुछ स्टडी करणे के पाश्चात लगा की मेरी यह टीपन्नी बिलकुल गलत है।…….) ;
        हम ईन्सान भविष्य में कितने भी क्यों ना प्रगती कर ले। हमने प्रकाश की गती भी हासील कर ली फीर भी हम टाईम मशीन जैसी कोई चीज नहीं बना सकते।
        हा मगर टाईम ट्रैवल करना हमारे लीय पांसीबल है। बस फरक ईतना होगा की हम सीर्फ पृथ्वी के भविष्य में जा सकेंगे। जब प्रकाश गती यानो से सफर करेंगे, भविष्य की ईन्सानो की प्रगती या विनाश भी देख सकेंगे। और यह जब प्रकाश गती प्राप्त होगी तब ही होगा।….
        पर कुछ लोगोंके मन में टाईमट्रेवल की गलत ही प्रतीमा हो गई है। वह 4thडाईमेशन के प्रसिद्ध ,और एजी व्हेल्स जैसे लेखकों के लीखानों से।

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      • क्षमा कीजिए पर मै आप के विचारों से सहमत नहीं हूँ।
        मान लेते है कि भविष्य मे समय यात्रा सम्भव हो जाए और इसके दूरूपयोग होने की सम्भावना के कारण इसे ग़ैरक़ानूनी घोषित कर दिया गया हो फिर भी क़ानून तो अक्सर तोड़े ही जाते रहे है । अगर एसा होता तो कोई ना कोई अबतक लक्ष्ण दिखे होते।
        फिर भी मै समय यात्रा को सिरे से ख़ारिज नहीं करता हूँ।
        Stephense howkings के अनुसार समय यात्रा हो सकती है मगर एकतरफ़ा यानी केवल भविष्य की तरफ़ भूत काल कि तरफ़ नहीं

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  32. Sir Albert ke mutabik jab ham 300000 km/s ki raftar se gati karege
    Tab ham apni teeno dimentions kho denge or fir hum samay ke kisibhi
    Mod par jaa sakte he but mera manana he ki hum past ko kabhi badal nahi sakte or nahi hame bhavisya ke bare me sochna chahiye kyuki agar hum bhavisya ke bare me jaan gaye or use badal ne ki kosis ki to pura brmhand nust ho sakta he..

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    • विज्ञानं प्रयोगिक अवधारणा हैं,,जब अध्यात्म विज्ञानं से जोड़ते हैं,,तब सभव
      दिखाई देता हैं सभी धर्मो में साधना का महत्व हैं ,,,साधना से ही हमारे ऋषि
      गूढ़तम विषयों का हल खोजते आये हैं,,जिसके द्वारा अति प्राचीनकाल की घटना को वे
      दर्शन द्वारा देखने के पश्चात लिपि वध्द करते गए ,,समय यात्रा को आत्म दर्शन
      ही मन गया हैं,,

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  33. nature k viprit change lana…sayad sabke liye anarthkari ho sakta hai….sayad agar time travel sambhav bhi ho jaye to agar koi samay yatri past me jakar koi change le aaye to kya uske sath hone wale sbhi chijo me bablav nhi hoga….or sayad anarthkari bhi ho…bahut se risi muni aise the jo trikal drasi the…kya unhe hamara present or future nhi pta hoga..agar pta hoga.to us time aisa hota jaisa is time hai…sare privartan usi vaqt ho chuke hote…sayad wo jante the ki nature k khilaf jana anarth kari ho sakta hai….dekha jaye to sambhav kya nhi hai…par kuchh bate aisi hai..jinhe na hi chheda jaye to achchha hai….

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  34. nothing is impossible. past me to iron ko hava me urara impossible tha. ek jagah se dusri jagah dekhana and bate karna bhi impossible tha. lekin vo sab aj ho rha h. physics me kuch bhi karna impossible nhi hai. time machine abhi nhi to future me jaroor banega . ye mera bisvash hai. aur hum bhagvan ko chunauti de sakenge. ha hum past me ja sakte hai par use kevel dekh sakte hai, koi badlav nhikar sakte. muje to enstein ke formula hi roung lahata hai ki humari velocity light ki velocity se jyada nhi ho sakati.

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    • यह एक ऐसा प्रश्न है कि जिसके उत्तर मे भानुमति का पिटारा खूल जायेगा. इस स्थिति मे गांधीजी की हत्या भी नही होगी, इतिहास किस दिशा मे करवट लेगा कहा नही जा सकता है।

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      • मेरे विचार से भुत काल की यात्रा कुछ ऐसी होगी जैसे वीडियो कैसेट की रील,जिसे रिवर्स कर दोबारा देखा जा सकता है पर उस में प्रिंट चित्र को बदला नहीं जा सकता।अगर हम भुत काल में जा भी पाये तो उस समय के घटना क्रम को सिर्फ देख सकेंगे बदल नहीं सकेंगे।

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  35. मेरे विचार से समय यात्रा संभव है किंतु भूतकाल में जाकर परिवर्तन नही कर सकता है जो कि प्रक्रति रचित नियमों के विपरित हो सकता है। चंकी आत्मा अमर है जो कभी नष्ट नही होती है तथा उस प्राणी के पिछले समय में जाने पर तत्कालिन समय मेँ उस प्राणी की आत्मा जिस योनी मेँ है वह उसी योनी में पहुंच कर साक्षी बन सकता है

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  36. काश समय यात्रा संभव होती तो, उसकी सहायता से में इतिहास की कुछ अनसुलझी पहेलिया सुलझाता। आशा करता हूँ कभी न कभी तो समय यात्रा संभव होगी, और में भूत भविष्या की यात्राये कर सकूँगा हाहाहा ^_- ।
    इतना उच्चकोटि का लेख लिखने के लिए बधाई हो।

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  37. १. यदि भविष्य का कोई यात्री हमारे बिच आता है तो वह हमें देख तो सकता है किन्तु जैसे ही वह किसी घटना को परिवर्तित करेगा ; एक नए ब्रह्मांड का निर्माण हो जायेगा और वह समय यात्री नए सामानांतर ब्रह्मांड में होगा . ऐसी

    स्थिति में वह हमसे मिल नहीं सकता.

    २. सामानांतर ब्रह्मांड के लिए पदार्थ [Mass] कहाँ से आएगा?

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    • हम वर्तमान मे कभी नही रहते है, जो भी कुछ हम देखते है और समझते है उसे हमारी इंद्रियो द्वारा मस्तिष्क तक पहुंचाने मे कुछ समय लगता है। साथ ही किसी भी वस्तु को देखने मे भी उस वस्तु से हमारी आंखो तक आने वाले प्रकाश को भी कुछ समय लगता है।
      हम यह कभी सिद्ध नही कर सकते की हम वर्तमान मे ही है।

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    • असंभव नही है लेकिन कठिन अवश्य है। कृष्ण जी की ध्वनि अभी भी उपस्थित होगी लेकिन वह अब तक बहुत कमजोर हो गयी होगी। सबसे पहले उसे पकड़कर सही आवृत्ति जानकर उसे अत्याधिक प्रवर्धन (amplification) करना होगा। उस ध्वनि को पकडना इसलिये भी कठिन है क्योंकि हमे सही कालक्रम भी ज्ञात नही है।

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      • चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र ही नही धरती पर भी प्रभाव पड़ता है। उससे धरती भी चपटी होती है लेकिन धरती ठोस होती है और प्रभाव कम होता है। समुद्र द्रव अवस्था मे होता है इसलिये प्रभाव ज्यादा होता है। अब आते हैं नदियो पर, नदीयाँ बहुत छोटी होती है, उनके पानी पर भी चंद्रमा का प्रभाव होता है लेकिन आकार के कम होने से प्रभाव भी कम होता है और हम उसे महसूस नही कर पाते। आप समुद्र के पानी और नदीयों के पानी की तुलना नही कर सकते हैं। इस प्रभाव का मीठे पानी और नमकीन पानी से कोई संबध नही है।
        दिनेश जी, आप अपने प्रश्न इसी ब्लाग पर “प्रश्न आपके- उत्तर हमारे” पर पूछे तो मुझे उत्तर देने मे आसानी होगी।

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  38. आपको बताना चाहूँगा कि समय यात्रा संभव है और रही बात किसी के भूतकाल में आने कि तो आये होंगे पर हमारे पास कुछ विशेष नहीं है वह भविष्य से आये हैं तो हमसे तेज होंगे ही तो हमारी उन्हें क्या जरुरत

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  39. पिगबैक: विज्ञान विश्व को चुनौती देते 20 प्रश्न | विज्ञान विश्व

  40. Mujhe science bahot accha lagta hai likin main jyada pad nahi paya @ agar hum aisa jacket (kapda) banate hai jis par dono taraf bhot chote chote display lage ho aur us se bhi chote camera aur jacket k forntside k camera se jacket k backside k display pe aur jacket ke backside ke camera se jacket ke forntside ke display pe picture dikhai jaye to insan ko gayab kiya ja sakta hai?

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  41. Samaye ki yatra karne ko main assambhav to nahi kahuga agar asp samaye ki yatra karte bhi ho to aap apne bhoot kaal mehi jaa Paoge Q ki Agar future hota hai to humane future me timemachine bana li hogi to phir future se hame Milne koi Q nahi aaya © is ka matlb insane ka ya is dharti ka koi future nahi hai hum apna future khud Baja rahe hai Ye mera sawal hai ?

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  42. बास्तविक्ता के बहुत सारे रूप हो सकते है, और ए सब अनंत ब्रह्माण्ड के जाल मात्र है और हम सब एक दुसरे से हमेशा दूर जा रहे है, यदि किसी तरह अति गुरुत्व वल पैदा कीया जा सके जिससे आसपास के सारे अंतरिख्स को सिकुड़ा जा सके तो यह मुमकिन है की हम भूतकाल में पहुच सकते हैं | पर कालयात्रा के वस्ताबिक रूप को खुद काल ने ही भविष्य के गर्भ मे छुपा रखा है और समय आने पर मनुष्य को पता चल जायगा | शायद वर्तमान समय में मानव का दिमाग काल यात्रा को समझने में असमर्थ हो | आशीष श्रीवास्तव जि का कथन सत्य है (समय यात्रा का रहस्य भविष्य के गर्भ मे है) |

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  43. समय यात्रा सम्भव है यदि आइन्सटाईन ने कहा कि दिक काल मे सूर्य एक झोल पैदा करता है जिस्से समय की चाल कम हो जाती है अगर कोईब्लैक हॉल ईतना ताकत भर हो जिसका गुरूत्कवार्षण दिक काल को झोल की तरह पूरा वृत्ताकार झोल उत्पन्न कर देता है जिस्से ये पता चलता है कि जो झोल जिस बिन्दु से शुरू हुआ वही पर पुनः आ जाता है तो ईस तरह से हम शुरू मे जिस बिन्दु से यात्रा की वही पर पुनः आ जाते हैं जिस्से हम भूतकाल में पंहुच सकते हैं ईस पर अवश्य टिप्पणी करे

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    • अजय,
      भूतकाल मे समययात्रा कर परिवर्तन हो सकता है या नही ? यह एक अनसुलझा प्रश्न है।

      यदि परिवर्तन संभव है तो वह कई विरोधाभास उत्पन्न करता है जिनकी इस लेख मे चर्चा हुयी है।
      दूसरी संभावना यह है कि यदि परिवर्तन संभव हो तो वह हमारे मूल ब्रह्माण्ड मे ना हो कर समानांतर ब्रह्माण्ड मे होंगे। मूल ब्रह्माण्ड जैसे का वैसा ही रहेगा।

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  44. mai bus yeh kahna chahata ho bedo me jo kaha gaya hai sari baat galat nahi hai par iska matlab ye nahi bed hi sab kuch hai.bed likhne wale hrisi bhi baiganik the par unka khoj purane samay ke hisab se tha jo purna nahi the unhone jo kiya apne samay ke hisab se thik tha par ajj ke bigyaan ko yadi yeh kah diya jaye ye to bedo me likha hai to yeh murkhata hogi bed ek apurna shastra hai jo bigyaan ki sahi sahi privasa nahi kar sakta abhi to bahut si khoj hona baki hai maut par vijay dusre graho par manav sabhyata naye barhamaand kaa nirmaan time machine ko safal banana aur najaane kya bedo me yaadi sab likha hota tab koi bed padhkar aids,tb, ki dawa keon nahi bana deta kyoun manav in sab jaan kaari ke hote huyen paisa khach kar praog kar rahe hai yadi vedo me hi sab likha hota to hume kisi tarah ka praog nahi karna padhta yad rahe jo log bed ki rachna kiya hai un logo bijli kai jaankari nahi thi nahi motor banane ki o log rath par yuddha ke liye teer dhanus is tarah ke chijo ka istemaal kiya karte the.iska shidha matlab ye hai unki jaankari aaj ke muqale kafi pidcra aur purani thi dosto sari chijo ko bed puran se ya purane grantho se naa jod kaar adhunik baiganik abishkaar ko samarthan kare. dharm srif insaan ko kamjore bana sakti hai samasya hal nahi de sakti
    hai.kya kahi bedo me ye likha hai ki swarg ka location kya hai,maan ke gati prati seccond kya hai,puspak vimaan me kish traha ka injan laga tha? isliye Ashish ji ka saath dijiye aur vigyaan ke prachar ka unka prayash ko safal banaye taki hindustaan kaa har baccha baiganik bane aur ek eaisi duniya bana sake jisme sab inshan khus aur sukhi ho sake!
    aur yeh bigyan hi nahi sakta………………

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  45. Aaj bhee Insaan ko Prikriti Ke Bahut Se Rehsya Nahin Maloom, I am 100% sure a day came when we people can travel past and future but can not change it due certain laws/rules of nature, even If we can change it then Nature will adjust its effect and creates changes in new Universe. many thing we can not see. See How can we see past happening/phenomena –
    When we see object / happening, We see it with speed of light. Means light falls on object and reflected back and when it reach to our eyes, We see it.
    Similarly space telescopes (Hubbal etc. ) see any object/happening with a distance of 10 light years, then such happening occurs 10 years back and We see its past happened 10 years before.
    But if something travel faster than light (say double speed) then We see past of such happening 5 years before. Therefore relatively one is past and one is future.

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      • सुजीत, बरमूडा त्रिकोण कोई रहस्य नहीं है, एक अपवाह मात्र है। इस क्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या अन्य क्षेत्र से ज़्यादा नहीं है। ज़्यादा जानकारी के लिये वीकीपिडीया देखे।

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  46. यदि भूतकाल में जाकर गाँधी जी को बचाने पर एक नया ब्रह्मांड बन जायगा जिसमे गाँधी जी जीवीत होंगे ! तब तो वह कालयात्री उस ब्रह्मांड का रचियेता होगा ! तो क्या हम जिस ब्रह्मांड में रह रहे है वो किसी काल यात्री के द्वारा तो नहीं रचा गया है ? हम लोग मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में इसका क्या कोई प्रमाण है ?
    मान लेते है की सन ०१/०१/२०३० में टाइम मशीन बन कर समय यात्रा के लिए तैयार हो जाता है ! और तब के काल यात्री टाइम मशीन बनने के पीछे के समय में आ सकेंगे मतलब ३१/१२/२०२९ के समय में ? इस तारीख में तो टाइम मशीन पूरी तरह से तैयार ही नहीं हुआ था !यदि ऐसा हो
    सकता है तो भविष्य के यात्रिओ को हमारे बिच होना चाहिए !

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    • तो क्या हम जिस ब्रह्मांड में रह रहे है वो किसी काल यात्री के द्वारा तो नहीं रचा गया है ? संभव है !
      हम लोग मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में इसका क्या कोई प्रमाण है ? दो समान्तर रेखाओ में असली का पता कैसे चले!

      संभव है कि कालयात्री हमारे मध्य हो लेकिन हमारे जीवन में हस्तक्षेप न कर पा रहे हो या हस्तक्षेप ना करना चाहते हो! स्टार ट्रेक में फेडरेशन का प्राइम डाइरेक्टिव है कि किसी भी नए खोजी सभ्यता के विकास में कोई हस्तक्षेप ना किया जाए, कोई तकनीकी सहायता भी नहीं, उसे स्वयं विकसीत ओने दिया जाए. भौतिकी के नियम भूतकाल में यात्रा से संभव है लेकिन शायद ये प्रायोगिक रूप से संभव ना हो.

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      • आपके जवाब के लिए धन्यवाद
        (तो क्या हम जिस ब्रह्मांड में रह रहे है वो किसी काल यात्री के द्वारा तो नहीं रचा गया है ? संभव है !)
        (हम लोग मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में इसका क्या कोई प्रमाण है ? दो समान्तर रेखाओ में असली का पता कैसे चले! )
        तब तो बिगबैंग के बारे में हमारे सोच पर एक प्रकार से प्रश्न चिन्ह लग जाता है ! जब तक यह पता न चले हम कहा है तब तक !
        क्युकी हमें खुद ही पता नहीं है की हम मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में ?
        यदि भविष्य के काल यात्री हमारे मध्य में है तो उनके दवरा हमारे जीवन में किसी प्रकार के परिवर्तन न कर पाने की सबसे प्रमुख बाधा भौतिकी के नियम हो सकता है
        या यह भी हो सकता है की जैसे ही कोई काल यान हमारे काल खंड में प्रवेश करता है तो उनका अस्तित्व हमारे भुत काल और वर्त्तमान काल से जुड़ जाता हो जिसके
        चलते वे हमारे किसी भी काल से छेड़खानी करने में असमर्थ हो जाते होंगे और खुद के अस्तित्व के मिट जाने की डर भी हो सकता है !या फिर यह भी हो सकता है की
        भविष्य के काल यात्री होता ही नहीं ! होता भी है तो अस्थिर अनिश्चित जो हमारे सोच के साथ हमेसा बदल जाती है और उस दुनिया में पदार्थ नहीं बन पाते है जिसके कारण भविष्य के काल यात्री थोड़े समय के लिए बनते है और फिर अस्तित्व हिन् हो जाते है और यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है निरंतर ! एक बात मैंने ध्यान से देखा है की इन्सान का मन भी एक काल यान जैसा ही है जिसमे भुत काल और भविष्य काल दोनों में यात्रा करना सम्वाभ है ! भूतकाल में जा तो सकते है पर कुछ
        बदलाव न करने के शर्त पर ! और भविष्य काल में जाकर जैसे बर्तमान में आते है तो ही भविष्य एक नए रूप में अपने आप को बनाने को आमादा पाते है!
        आपके जवाब पाने के इन्तेजार में हु !

        बदलाव न करने के शर्त पर ! और भविष्य काल में जाकर जैसे बर्तमान में आते है तो ही भविष्य एक नए रूप में अपने आप को बनाने को आमादा पाते है!
        आपके जवाब पाने के इन्तेजार में हु !

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      • समांतर ब्रह्मांड के निवासियों के लिये हमारा ब्रह्मांड समांतर होगा और उनका मूल! ये तो अपना अपना दृष्टिकोण होगा। बिग बैंग कहाँ हुआ महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि अंतरिक्ष सपाट नहीं है, इसमें कोई भी दो बिंदु के मध्य दूरी शून्य से लेकर कुछ भी हो सकती है। अंतरिक्ष में गुरुतवाकर्षण से वक्रता से दूरी कम हो सकती है।
        समय यात्रा के बारे एक मान्यता यह भी है कि वह पहली टाइम मशीन बनने के पश्चात ही संभव होगी। लेकिन यह अभी सभी अवधारणाये है, तथ्य तो भविष्य के गर्भ में है।

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      • मित्र , मेरा प्रयास आपको एक परिकल्पना के माध्यम से ये एहसास करवाना था की यदि प्रकृति ने हमें अर्थात हमारी चेतना को किसी घटना को याद रखने की शक्ति \गुण नहीं दिया होता . ये इस तरह से है की जैसा हम गंणित में करते है की माना की पेड़ की ऊंचाई x है ” – तो मेरे मित्र इस अवस्था में जब की हम किसी घटना को याद नहीं रख पाएंगे तो हमारे लिए भूतकाल का अस्तित्व ही नहीं होगा . हम सिर्फ वर्तमान को ही महसूस कर पाएंगे .तो मेरे कहने का मतलब है की क्या उस परिकल्पित अवस्था में हमारे सिधांत जो हमने समय ,सापेक्षता व अन्तराल के लिए बनाये है जरुर कुछ अलग होते उसमे भूतकाल जैसी कोई अवधारणा ही नहीं होती तो क्या भोतिकी के सारे सिधांत मूलतः हमारी चेतना पर ही सीधे निर्भर करते है ? अर्थात जो समय की आभासी नकारात्मक दिशा जो भूतकाल को प्रदर्शित करती है वो वास्तव में केवल हमारे मस्तिस्क और चेतना का बुना जाल है यथार्त नहीं |और इसीलिए जब हम समय से सम्बंधित किसी भी शोध के अंत में जाते है तो यही पाते है की भूतकाल में जाना संभव नहीं , यदि है तो केवल आभासी उपस्थिति मात्र घटनाओ को प्रभावित किये बिना |ये तो यही सिद्ध करती है की हम घूम कर वापस चेतना ,मस्तिष्क एवं एहसास पर ही आ गए .

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  47. दोस्तो मैने एक सबूत पाया है इसमें सच्चाई कितनी है कुछ नही कह सकते है पर आप सभी इस लिंक को देखें। इसमें किसी 400 साल के गुंबद में बंद किसी सौ साल पुरानी स्विस घड़ी के बारे में है अर्थात 400 साल पुराने गुंबद में 100 साल पुरानी घड़ी कैसे पहुंची कुछ तो है।

    http://www.dailymail.co.uk/sciencetech/article-1096959/Mystery-century-old-Swiss-watch-discovered-ancient-tomb-sealed-400-years.html

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  48. ha ab inme se sirf ek baat samajh mein aati hai jo sahi lagti hai. Wo ye hai ki agar bhootkaal ki yatra sambhav hai to shayad bhavishya se aane wale jeev yaha per ho, per wo apna astitva chhipaye huve ho…
    Ha per aisa bhi ho sakta hai ki koi cheej ya kuchh aur unhe aisa karne se rokta ho, ki wo sirf bhootkaal mein aakar use sirf dekh sakte ho, per usme koi parivartan na kar sakte ho.
    Kyunki agar aisa na ho to koi na koi bhavishya se aane wala jeev raaz to khol hi sakta hai. Bhavishya ke Sabhi jeevo ki sonch ek jaisi to nahi ho sakti. Koi na koi to aisa karne ki koshish karega hi!
    Aur agar koi aisa karta to hume pata chal chuka hota ki such kya hai. Per aisa nahi hai. Aur agar hum bhavishya ke jeevo ki baat bhi karte hain to wo kitne bhavishya ke honge?
    Jab abhi bhootkaal ki yatra ke siddhant ki khoj ho chuki hai to prayogik taur per ise siddha karne me jyada se jyada 2-3 sau saal lagenge. Aur kuchh hi saalo me yatra bhi sambhav ho jayegi. Phir jab wo bhootkaal mein aayeinge, to jyada anraal to hoga nahi. To ab tak koi na koi baat to pata chal hi jani chahiye thi.

    Aur agar unhe koi shakti nahi rokti hai, to koi na koi apne bhoot ko badalne ka prayas bhi karega. Fir samantar brahmaand! Aur jo sirf kalpna hi lagti hai.

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  49. Ji,
    ye bhi theek hai, ki saiddhantik bhautiki aur prayogik bhautiki ke beech shatabdiyo ka antar ho sakta hai. Magar yadi kai shatabdiyo baad to aisa sambhav hota na! Aur agar aisa hota to yaha per kam se kam ek to kaal yatri zaroor aata. Bhale hum unke liye mahatvpoorn na ho, per wah kaalyaatri einstein ke pass to zaroor hi jata. Chahe aaj se hazaro saal baad hi aisi takneek viksit ho sake. Per aaj tak aisi koi bhi ghatna ki soochna nahi mili hai.
    Aur yadi aisi yatra sambhav hoti to manav uski taktneek zaroor hi khoj leta, bhale hi usme hazaro saalo ka samay lag jaaye.
    Discovery channel per hawking ka ek show time travell dekha tha. Usme hawking khud hi bata rahe the ki bhoot kaal me jaana sambhav nahi hai, na aaj aur na kabhi.
    Unhone bhavishya me jane ki takneek batayi, ki yadi hum aisa yaan bana sake jiski gati prakash ki gati ke kareeb ho, to hum bhavishya ki yatra kar sakte hain. Per itne adhik veg ka yaan banane mein bahut oorja ki zaroorat hogi jiske liye pahle negativ matter ka dohan karna seekhna hoga.

    Aur aap ebook bhej deejiye. Aur relativity pe jo kaam humne kiya hai kya use aapne dekha aur samjha hai?

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    • अनमोल,

      तुम्हारे इस तर्क मे दम है लेकिन…. भविष्य के समययात्री हमारे कालखंड को इतना महत्वपूर्ण ना समझते हो कि इस कालखंड की यात्रा करें। यह भी हो सकता है कि वे हमारे आसपास हो लेकिन हमारे कार्यो मे कोई दखल ना देते हो।
      स्टार ट्रेक मे जब एन्टरप्राइज यान जब भी किसी भी नयी सभ्यता की खोज करता था,किसी आदिम सभ्यता को कोई तकनीकी सहायता नही देता था , यहां तक कि यदि वहां पर कोई युद्ध हो रहा हो तब भी किसी का पक्ष नही लेता था। ऐसा इसलिये कि वे चाहते थे कि हर सभ्यता अपने आप विकास करे, किसी छोटे रास्ते से नही।

      तुम्हारे काम को अभी देखा नही है, सप्ताहांत मे देखुंगा।

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      • dear ashish ji ,is there anything like “important” / useless in the terms of theory science if it is then how newton could found out gravitation from the normal thing ” apple” . why we are spending trillions of dollars on lhc to find a most “nano” particle “hings -boson” if any time travel in past would be possible then they will not think that weather we r important or not for them to come in this era and visit the earth.i have one more mine basic hypothesis that, think if nature would not have given us the process and power of memory in our mind \cautious . then we would not be able to understand or know about the past every thing that happen at that time would be the spontaneous . in that case what would we have thought about the direction of time.surely the things we talk about time are highly related to our sensory perception and working of our cautious [chetana].so does it means that if we can memories so can feel past and think to go there as well as can think so we can feel future and tends to go there.please share your views.my cell nos are 09828043365 .

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  50. Ji,
    Aise siddhanto ka kya arth hai, jo sirf siddhant hi ho, wastvikta se unka koi sambandh na ho. Aur fir koi bhi siddhant, agar wo sahi hai to bhale hi use aaj siddh na kiya ja sake, per bhavishya mein to unka prayogik satyapan sambhav hi hai. Aur agar nahi sambhav hota hai to iska arth hai ki wo siddhant sahi nahi hai. Agar hum use sahi maan bhi lete hain, to fir vigyan aur darshan me kya antar rah jayega? Jabki vigyan se ye apeksha ki jati hai ki wo kisi bhi galat siddhant ko sweekar nahi karta!

    Aur agar siddhanto me bhootkaal ki yatra sambhav hai, to iska seedha sa arth hai ki wo siddhant galat hai. Kyunki jab bhootkaal ki yatra sambhav hi nahi hai to fir use siddhant kaise siddh kar sakte hain? Wo siddh kar rahe hain, iska arth hai ki unke siddhant galat hain…
    .
    Aur kya apko pata hai ki ve kaun se siddhant hain jo ise sambhav mante hain? Aur kaise?
    .
    Aapne jo tark diya hai ki mahatma gandhi ko agar koi bacha leta hai, to uske liye ek alag samantar brahmand ban jayega jisme gandhi ji zinda honge. Aur apna ye mool brahmand rahega jisme gandhi ji mar chuke honge. To kya aapko aisa nahi lagta ki ye baate mahej ek kalpna hi hain!
    Is hisab se to anant brahmand hi ban jayenge? Jab ki hum abhi apne isi brahmand ke bare me jyada kuchh nahi jante!

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    • अनमोल,

      हमारी भौतिकी अभी विकास मे है। कोई भी सिद्धांत यदि गणितीय रूप से गलत ना हो, तब उसे संभव माना जाता है। यह हो सकता है कि वह प्रायोगिक न हो। “अप्रायोगिक सिद्धांत” का अर्थ है वर्तमान उपलब्ध तकनीक द्वारा असंभव। यह भी ध्यान रहे कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रायोगिक भौतिकी से हमेशा आगे रहती है, यह फासला कुछ वर्षो से लेकर शताब्दियों तक का हो सकता है।

      इसलिये हर सिद्धांत महत्वपूर्ण होता है।

      गणितिय माडेल कहते हैं कि भूतकाल की यात्रा संभव है लेकिन हमारे पास उसकी तकनीक नही है। इसके लिये एक तरीका ऋणात्मक ऊर्जा(Negative Energy) के प्रयोग का है। ऋणात्मक ऊर्जा का अस्तित्व होता है, हम उसे प्रमाणित कर चुके है लेकिन हमारे पास उसे बड़े पैमाने पर बनाने की तकनीक नही है। दूसरा तरीका ऋणात्मक पदार्थ है जोकि प्रति-पदार्थ (antimatter),श्याम पदार्थ (Dark Matter) से भिन्न है। ऋणात्मक पदार्थ पर गुरुत्व बल का विपरीत प्रभाव होता है, उसके लिये यह बल प्रतिकर्षण करता है, लेकिन इसे अभी तक हम खोज नही पाये हैं। मेरे पास एक अंग्रेजी पुस्तक है, मिचीयो काकू की Physics of the Impossible , पढना चाहो तो उसकी इबुक भेज सकता हूं।

      भूतकाल मे जाकर महात्मा गांधी की हत्या से बचाने के उदाहरण मे मैने समांतर ब्रह्माण्ड के सिद्धांत का उदाहरण दिया है। क्वांटम भौतिकी मे कुछ भी निश्चित नही है, हर घटना की एक संभावना होती है। हर संभावित घटना से जुड़ा एक समांतर ब्रह्माण्ड होता है। इस उदाहरण मे हम अपने ब्रह्माण्ड के इतिहास को नही बदल सकते है, यदि हम उसे बदलने का प्रयास करें तो वह घटना किसी समांतर ब्रह्माण्ड मे होगी। इसे अच्छे से समझने के लिये अंग्रेजी फिल्म “बैक टू द फ्युचर” के तीनो भाग देखो। समय यात्रा पर एक बेहतरीन फिल्म है, इसमे दिखायी गयी घटनायें किसी भी विज्ञान के नियम का उल्लंघन नही करती है, केवल तकनीक कल्पित है।

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  51. “कल कोई आपके दरवाजे पर दस्तक दे और कहे कि वह भविष्य से आया है और आपके पोते के पोते का पोता है तो दरवाजा बंद मत करिये। हो सकता है कि वह सही हो।”

    जी, यहाँ पर शायद आपसे त्रुटी हो रही है! उसका कारण ये है कि भविष्य में जाना तो संभव है पर भूतकाल में नहीं!
    भूतकाल मे जाना क्यूँ संभव नहीं है, इसके लिए तो आपके विरोधाभास ही काफी हैं.
    1. जब कोई व्यक्ति भूतकाल में जाकर अपने पैदा होने से पहले अपने माता पिता की हत्या कर दे ? प्रश्न यह है कि यदि उसके मातापिता उसके जन्म से पहले मर गये तो उनकी हत्या करने के लिये वह व्यक्ति पैदा कैसे हुआ ?
    2. यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है।

    सैद्धांतिक दृष्टि से भी भूतकाल में जाना संभव नहीं है, पर भविष्य में जाना संभव है. अगर हम प्रकाश कि गति से भी अधिक तेज गति प्राप्त कर सकें तो संभव है कि हम भूतकाल कि भी यात्रा कर सकें. परन्तु प्रकाश कि गति से तेज यात्रा संभव नहीं है, इसलिए भूतकाल कि यात्रा भी संभव नहीं है. आइन्स्टीन का एक सूत्र है, t’ = t √1-v^2/c^2 . इस सूत्र में v का मान अगर प्रकाश कि गति से अधिक रखते हैं, तो t’ यानि हमारे यान के अंदर का समय √-x यानि एक काल्पनिक मान प्राप्त होता है. यानि ये सूत्र भी भूतकाल कि कालयात्रा को रोंकता है.
    परन्तु यदि हम इसमें प्रकाश कि गति से कुछ कम वेग रखते हैं, तो t’ का मान t से कम प्राप्त होता है. जो कि इस बात का संकेत देते हैं कि भविष्य में जाना संभव है.

    ये तो रही सैद्धांतिक बात. पर अगर सामान्य दृष्टि से देखें तो भविष्य कि यात्रा करने में कोई विरोधाभाष भी नहीं होता. अतः भविष्य में भविष्य कि काल यात्रा संभव हो सकेगी. मगर ये सिर्फ एक तरफ़ा यात्रा होगी. हम भविष्य में जाकर पुनः वापस नहीं आ सकेंगे.

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    • अनमोल,

      भूतकाल की यात्रा मे कुछ विरोधाभास जरूर है लेकिन सैद्धांतिक भौतिकी के वर्तमान मे ज्ञात नियमो के अनुसार यह संभव है। ध्यान रहे की काल-अंतराल (space -time) सपाट नही है, इसमे वर्क्रता होती है, जिससे कुछ ऐसे शार्ट कट संभव है जैसे श्वेत विवर (Wormhole) जो दो भिन्न कालखंडो को जोड़ सकते है।

      एक बात और, संभव और प्रायोगिक मे एक बड़ी दूरी होती है। हर संभव घटना का प्रायोगिक सत्यापन असंभव है। जो नियमो के अनुसार संभव हो जरूरी नही कि उसे प्रायोगिक तौर पर किया जा सके।

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  52. my friends, each person can experience upto his thought so i am agree with you all. human lives 60 to 100 year or some 120 year in his life. and our universe is of million year old. so in this very small time we can’t know the secrete of whole universe.

    i have some special knowledge about it i can’t say that all in this small comment , if you want to know you can mail me -shivshankarsonwani@gmail.com

    believe me you will be socked but feel divine…………….

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  53. मै कहना चाहूंगा कि बहुत सारी चीजें जो आज बन रही है वो पहले ही पौराणिक कथाओं में वर्णित है. जैसे हम आज फोन करते हैं पौराणिक कथाओं में मुनि-महात्मा मन से किसी से भी बात कर सकते थे. आज हवाई जहाज बन गया पहले भी रामायण में पुश्पक विमान के बारे में जानकारी मिलती है इसी तरह पौराणिक कथाओं के ऋषि महात्मा त्रिकाल दर्शी होते थे वह भी अब सफल होने वाला है चाहे हम समय यात्रा कर पायें या नहीं पर भूत भविष्य देखने का कोई यंत्र जरूर बनेगा.

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    • अमित जी,
      क्षमा किजीये मै पौराणिक कथाओ में विज्ञान खोजने का प्रयास नहीं करता! क्योंकि मुझे विज्ञान या ज्ञान के लुप्त होने का कोई कारण समझा में नहीं आता. जब कोई सिद्धांत ज्ञात था, वह लुफ्त कैसे हो गया ? पौराणिक कथाओं में यदि विज्ञान है तो क्यों नहीं कोई उन्हें पढ़कर कोई नया सिद्धांत प्रस्तावित करता है ? किसी भी नव ज्ञात तथ्य को किसी पौराणिक कथा में फिट करना आसान है, लेकिन किसी पौराणिक कथा को पढ़कर नया सिद्धांत या नयी खोज क्यों नहीं की जाती है ?
      क्षमा किजीये, मेरे विचार आपसे भिन्न है.

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      • प्रिय आशीष जी , भारतीय पूरा ज्ञान एवं आध्यात्म आज के विज्ञान का मूल आधार है , यह भावनात्मक नहीं सिद्ध है . राजा मुचुकंद जब देवताओ की तरफ से असुरो से लड़ने स्वर्ग गए तो उस लड़ाई में विजय के बाद वे जब धरती पर वापस जाने लगे तो देवराज इन्द्र ने उन्हें बताया की यहाँ युद्ध के कुछ दिनों में वहा पृथ्वी पे कई युग बीत चुके है ,अपने परिजनों के वियोग से दुखी एवं शेष आयु पूरी करने के लिए मुच्कंद ने इन्द्र से दीर्घनिद्रा का वर माँगा ओर सो गए , फिर उन्ही की नीद को तोड़ने वाले काल यवन नामक दुष्ट आक्रमणकारी को भगवन कृष्ण ने मुचुकंद की प्रथम दृष्टी से मरवाया . मतलब ये की समय गति में फर्क की अवधारणा पूर्व में ही घ्यात थी .आशीष जी नासा के वैज्ञानिको की ९०% खोजे उन्ही पोरानिक एवं दुर्लभ हिन्दू ग्रन्थ एवं पांडुलिपियों से प्रेरित है .आर्यभट , चरक , वराहमिहिर ,सुश्रुत , मयासुर,जेमिनी ,……………… अनगिनत .ये आपसे कोई तर्क नहीं है जानकारी है .दुनिया का सबसे बड़ा एवं युनिवेर्सल सिधांत है ” सरल आवृत गति ” हर सिधांत , जीवन , खोजे ,सभ्यता , सृष्टी सभी एक निश्चित समय के अन्तराल पे पुनः बार बार प्रकट -विकसित-अदृश्य होते रहते है. हम सभी पुराणी ही खोजो को पुनः नवीनीकृत कर रहे है . ” ऐसा मेरा मत है . धन्यवाद .

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  54. जैसे भावना में भगवान बसते हैं और समय समय पर अवतार लेते हैं वैसे ही यह संभव है वैसे इतना आसान भी नहीं क्योंकि यह गूढ़ रहस्य है और वेद करते हैं कि योगी अपने स्थूल शरीर से निकलकर सूक्ष्म शरीर के साथ कहीं भी यात्रा कर सकता है पर आज हम अपने मन की गति की दिशा भौतिक जगत में ही केन्द्रित कर रखते हैं और यह भविष्य में संभव हो सकता है कि हम समय यात्रा करें अंकुर पांडेय

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  55. about 50 years ago people cant believe tat they can make vedio call from india to america but now a days it is possible. similerly we can also travel in past and future by inventing the technology for this porpuse. because on the basis of Einsteens relativety theory in three dimention and with the help of higher mathmatics we can easily observe that shape, length and time of a moving body are changed with increase in speed.

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