इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस

नासा का मंगलयान ’इनसाइट ’ मंगल पर उतरा


नासा का रोबोटिक मंगलयान (मार्स लैंडर) “इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस” 26 नवंबर 2018 सोमवार रात 1:24 बजे मंगल ग्रह पर सफलता पूर्वक उतर गया। नासा के अनुसार पहली बार प्रायोगिक उपग्रहो ने किसी अंतरिक्ष यान का पीछा करते हुए … पढ़ना जारी रखें नासा का मंगलयान ’इनसाइट ’ मंगल पर उतरा

अंतरखगोलीय यात्राओं के लिये विशाल यान

पृथ्वी के बाहर किसी अन्य ग्रह पर बसने की बेताबी


“हमारी पृथ्वी ही वह ज्ञात विश्व है जहाँ जीवन है। आनेवाले समय में भी कहीं ऐसा कुछ नहीं दिखता जहाँ हम प्रस्थान कर सकें। जा भी सकें तो बस न सकेंगे। मानें या न मानें, इस क्षण तो पृथ्वी ही … पढ़ना जारी रखें पृथ्वी के बाहर किसी अन्य ग्रह पर बसने की बेताबी

मंगलयान : मंगल की कक्षा मे स्थापित


Mars_Orbiter_Mission_-_India_-_ArtistsConceptअंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की अंतरिक्ष संस्था भारतीय अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने नायाब उपलब्धि हासिल की है। पहली ही कोशिश में भारतीय अनुसंधान संस्थान (इसरो) का मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन) 24 सितंबर सुबह लगभग 8 बजे मंगल की कक्षा में प्रवेश कर गया। पहले प्रयास में मंगल पर पहुंचने वाला भारत विश्व का पहला देश बन गया है। एशिया से कोई भी देश यह सफलता हासिल नहीं कर सका है। चीन और जापान अब तक मंगल पर नहीं पहुंच पाए हैं। अमेरिका की मंगल तक पहुंचने की पहली 6 कोशिशें विफल रही थीं। सुबह साढ़े सात बजे करीब इंजन को प्रज्वलित किया गया। इसके बाद यान की गति को कम करने के लिये उसे 24 मिनट तक प्रज्वलित रखा गया। इसकी गति 4.3 किमी प्रति सेकंड होने पर इसे मंगल की कक्षा में स्थापित करने के लिए निर्देश दिया गया। इसरो यान पर लगे कैमरे से बुधवार दोपहर से मंगल ग्रह की तस्वीरें मिलने लगेंगी। पृथ्वी से मंगल की औसत दूरी करीब 22 करोड़ 50 लाख किलोमीटर है। इस दूरी को मंगलयान ने करीब 80 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तय किया। बाद में मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए इसकी गति को लगातार कम किया गया।

मंगलयान का योजनामूलक चित्र : A सौर पैनेल, B नोदक टंकी (प्रोपेलेण्ट टैंक), C माध्य एण्टेना लब्धि (गेन), D अधिकतम एण्टेना लब्धि, E कैमरा MCC, F फोटोमीटर लीमान अल्फा LAP, G मेंका (Menca) द्रव्यमान स्पेक्ट्रममापी, H अल्प लब्धि एण्टेना । चित्र में अदृष्य उपकरण : MSN और TIS आदि
मंगलयान का योजनामूलक चित्र : A सौर पैनेल, B नोदक टंकी (प्रोपेलेण्ट टैंक), C माध्य एण्टेना लब्धि (गेन), D अधिकतम एण्टेना लब्धि, E कैमरा MCC, F फोटोमीटर लीमान अल्फा LAP, G मेंका (Menca) द्रव्यमान स्पेक्ट्रममापी, H अल्प लब्धि एण्टेना । चित्र में अदृष्य उपकरण : MSN और TIS आदि

मंगलयान के मुख्य तरल इंजन का सोमवार 22 सितंबर को सफल परीक्षण किया गया था। मंगल की कक्षा में पहुंचने से पहले इस इंजन की जांच बहुत जरूरी और चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि यान का मुख्य इंजन पिछले 300 दिन (लगभग 10 महीने) से निष्क्रिय अवस्था में था। इसरो के मुताबिक, इंजन ने तय योजना के तहत 4 सेकंड तक ठीक काम किया था। सोमवार की सफलता के साथ ही भारत मंगल ग्रह के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में अपना उपग्रह पहुंचाने वाला एशिया का पहला देश बन गया था। इस समय मंगल के राज जानने के लिए सात अभियान काम कर रहे हैं। ये सभी अमेरिकी अभियान हैं। उसका सबसे ताजा प्रयास मावेन के रूप में सामने आया है। इसके अलावा मार्स ओडिसी, मार्स एक्सप्रेस और मार्स ऑर्बिटर मंगल की परिक्रमा कर रहे हैं। दो रोवर्स- स्पिरिट और अपॉर्च्युनिटी भी मंगल पर मौजूद हैं। इसके साथ ही लैंडर- फीनिक्स भी वहां तैनात हैं। पढ़ना जारी रखें “मंगलयान : मंगल की कक्षा मे स्थापित”

मंगलयान की यात्रा

मंगलयान : भारत की बड़ी छलांग!


मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन) भारत  की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। 2008 में चंद्र अभियान की सफलता से ख़ासे उत्साहित भारतीय वैज्ञानिक अब गहरे अंतरिक्ष में अपनी पैठ बनाना चाहते हैं।

मंगलयान की यात्रा
मंगलयान की यात्रा

भारत का मानवरहित चंद्रयान दुनिया के सामने चाँद पर पानी की मौजूदगी के पुख़्ता सबूत लेकर आया था। इसरो की सबसे बड़ी परियोजना चंद्रयान थी। इसरो के वैज्ञानिक बुलंद हौसले के साथ मंगल मिशन की तैयारी में जुट गए। लेकिन मंगल की यात्रा के लिए रवानगी और चाँद की यात्रा में ज़मीन आसमान का अंतर है। चंद्रयान को अपने मिशन तक पहुंचने के लिए सिर्फ़ चार लाख किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी जबकि मंगलयान को चालीस करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करनी है।  मंगलयान परियोजना के ज़रिए भारत वास्तविकता में गहरे अंतरिक्ष में क़दम बढ़ाने की शुरुआत कर रहा है।

यह यान अपने साथ 15 किलो के पाँच प्रयोग उपकरण  ले जायेगा 

  1. LAP (लाइमन अल्फा फोटोमीटर) :लाइमन अल्पा फोटोमीटर एक खास तरह का फोटोमीटर है। यह मंगल ग्रह के वायुमंडल में मौजूद ड्यूटेरियम और हाइड्रोजन का पता लगाएगा। इसकी मदद से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे की इस ग्रह से पानी कैसे गायब हुआ।
  2. मिथेन सेंसर मार्स (MSM) :यह सेंसर हवा में मौजूद मिथेन की जांच करेगा।
  3. मार्स इक्सोस्फेरिक न्यूटरल कम्पोजिशन एनालाइडर (MENCA) :यह मंगल ग्रह के वातावरण में मौजूद न्यूट्रल कम्पोजिशन की जांच करेगा।
  4. मार्स कलर कैमरा (MCC): यह कैमरा मंगल ग्रह के सतह की तस्वीरें लेगा। इस कैमरे की तस्वीरों से वैज्ञानिक मंगल ग्रह के मौसम को भी समझ सकेंगे।
  5. थर्मल इंफ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर (TIS) : यह कैमरा मंगल ग्रह ने निकलने वाली गर्मी की तस्वीरें लेगा। इसे दिन और रात दोनों समय इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन कहते हैं,

“जब हम मंगल की बात करते हैं तो मंगल पर जीवन संभव है या नहीं इस बारे में खोज करना चाहते हैं, इसके साथ साथ हम यह भी जानना चाहेंगे कि मंगल पर मीथेन है या नहीं और अगर मीथेन है तो यह जैविक है या भूगर्भीय। हम मंगल पर कैसा वातावरण है, इसकी भी खोज करेंगे।”

अभियान

  • 5 नवंबर को 2:38 बजे दिन में श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित पीएसएलवी 25 ।
  • 40 मिनट से ज्यादा समय लगे इसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने ने ।
  • 20 से 25 दिन अर्थात 30 नवंबर तक पृथ्वी की परिक्रमा कर हर परिक्रमा मे पृथ्वी से अपनी दूरी बढायी।
  • 1 दिसंबर को मंगल के लिए मंगलयान ने अपनी यात्रा शुरू की ।
  • 22 सितंबर 2014 को मंगल के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव मे पहुंचा।
  • 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंच गया। 

लागत

इस मिशन की लागत 450 करोड़ रुपये (करीब छह करोड़ 90 लाख डॉलर) है।  पढ़ना जारी रखें “मंगलयान : भारत की बड़ी छलांग!”

मंगल की यात्रा पर मानव उत्सुकता (मंगल शोध वाहन ’क्यूरियोसिटी ’)


अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार 26, नवंबर 2011 को मंगल ग्रह पर अब तक का अपना सबसे उत्कृष्ट रोबोटिक रोवर को भेज दिया है। … पढ़ना जारी रखें मंगल की यात्रा पर मानव उत्सुकता (मंगल शोध वाहन ’क्यूरियोसिटी ’)

मंगल पर जल की उपस्थिति के नये प्रमाण


मंगल ग्रह पर गहरे रंग की ये धारीयाँ कैसे बन रही हैं? सबसे मुख्य अवधारणाओं मे से एक बहते हुये लेकिन तेजी से बाष्पित होने वाले … पढ़ना जारी रखें मंगल पर जल की उपस्थिति के नये प्रमाण