नासा का मंगलयान ’इनसाइट ’ मंगल पर उतरा


इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस

इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस

नासा का रोबोटिक मंगलयान (मार्स लैंडर) “इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस” 26 नवंबर 2018 सोमवार रात 1:24 बजे मंगल ग्रह पर सफलता पूर्वक उतर गया। नासा के अनुसार पहली बार प्रायोगिक उपग्रहो ने किसी अंतरिक्ष यान का पीछा करते हुए उस पर नजर रखी। इस पूरे अभियान पर 99.3 करोड़ डॉलर (करीब 7044 करोड़ रुपए) का खर्च आया। ये दोनों उपग्रह मंगल पर पहुंच रहे अंतरिक्ष यान से छह हजार मील पीछे चल रहे थे। नासा ने इसी साल 5 मई को कैलिफोर्निया के वंडेनबर्ग एयरफोर्स स्टेशन से एटलस वी रॉकेट के जरिए मार्स लैंडर लॉन्च किया था।

इनसाइट (InSight या Interior Exploration using Seismic Investigations, Geodesy and Heat Transport) एक रोबोट मंगल ग्रह लैंडर है। जो मूल रूप से मार्च 2016 में प्रक्षेपण के लिए योजना बनाई थी। इसके उपकरण की विफलता के कारण लांच करने से पहले दिसंबर 2015 में नासा ने मिशन स्थगित की घोषणा की। और मार्च 2016 में, लांच 5 मई 2018 के लिए पुनर्निर्धारित किया गया।

मंगल के बारे में विस्तृत अध्ययन के लिए नासा ने क़रीब सात महीने पहले (इसी साल पांच मई को) इस खोजी अभियान को धरती से रवाना किया था।

30 करोड़ मील यानी 45.8 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय कर इनसाइट ने सोमवार को मंगल की ज़मीन पर एलिसियम प्लानिशिया नामक एक सपाट मैदान में लैंडिंग की। ये जगह इस लाल ग्रह की भूमध्य रेखा के नज़दीक है और लावा से बनी चादर के जैसी है।

इनसाइट का उद्देश्य मंगल की ज़मीन के भीतर छिपे राज़ की पड़ताल कर अधिक जानकारी जुटाना है।

मंगल ग्रह से इनसाइट ने धरती पर संकेत भेजा है कि वो काम शुरु करने के लिए तैयार है। उसने सूरज की रोशनी पाने के लिए अपने सोलर पैनल फैला लिए हैं और ख़ुद को चार्ज कर रहा है।

नासा के इनसाइट प्रोजेक्ट मैनेजर टॉम हॉफ़मैन ने कहा है,

“अब इनसाइट आराम से काम कर सकता है, वो अपनी बैटरी रीचार्ज कर रहा है।”

संक्षेप मे

  1. छह महीने पहले लॉन्च किया गया था इनसाइट अंतरिक्ष यान
  2. 7044 करोड़ रुपए अभियान की लागत, इसमेमं 10 देशों के वैज्ञानिक शामिल
  3. इनसाइट अंतरिक्ष यान पता लगाएगा कि 4.5 अरब साल पहले मंगल, धरती और चंद्रमा जैसे पथरीले ग्रह कैसे बने

अभियान

इनसाइट InSight

इनसाइट
InSight

इनसाइट के लिए लैंडिंग में लगने वाला छह से सात मिनट का समय बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान इसका पीछा कर रहे दोनों सैटेलाइट्स के जरिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजरें इनसाइट पर रहीं। डिज़्नी के किरदारों के नाम वाले ये सैटेलाइट्स ‘वॉल-ई’ और ‘ईव’ ने आठ मिनट में इनसाइट के मंगल पर उतरने की जानकारी धरती तक पहुंचा दी। नासा ने इस पूरे अभियान का सीधा प्रसारण किया।

यह ग्रह की सतह पर उतरने के दौरान 19,800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से छह मिनट के भीतर शून्य की रफ्तार पर आ गया। इसके बाद यह पैराशूट से बाहर आया और अपने तीन पैरों पर लैंड किया। नासा ने इस यान को मंगल ग्रह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए और इस ग्रह से जुड़े नए तथ्यों का पता लगाने के लिए तैयार किया है। नासा का यह यान सिस्मोमीटर की मदद से मंगल की आंतरिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगा। नासा के इस यान में 1 बिलियन डॉलर यानी 70 अरब रुपए का खर्च आया है। सौर ऊर्जा और बैटरी से ऊर्जा पाने वाले लैंडर को 26 महीने तक संचालित होने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि नासा को उम्मीद है कि यह इससे अधिक समय तक चलेगा।

पांच मई को लांच किया गया मार्स ‘इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सीस्मिक इंवेस्टिगेशंस, जियोडेसी एंड हीट ट्रांसपोर्ट’ (इनसाइट) लेंडर 2012 में ‘क्यूरियोसिटी रोवर’ के बाद मंगल पर उतरने वाला नासा का पहला अंतरिक्ष यान है।

दो साल का मिशन

यान के मंगल की धरती पर उतरते ही दो वर्षीय मिशन शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही इनसाइट पहला अंतरिक्ष यान हो जाएगा जो मंगल की गहरी आंतरिक संरचना का अध्ययन करेगा। इससे वैज्ञानिकों को हमारी अपनी पृथ्वी सहित पत्थर से बने सभी ग्रहों के निर्माण को समझने में मदद मिलेगी।

इनसाईट मंगल ग्रह के बारे में ऐसी जानकारियां दे सकता है, जो अरबों सालों से नहीं मिली हैं।

अपने अभियान के दौरान यह यान मंगल पर एक साइज़्मोमीटर रखेगा जो इसके अंदर की हलचलें रिकॉर्ड कर सकेगा। यह पता लगाएगा कि मंगल के अंदर कोई भूकंप जैसी हलचल होती भी है या नहीं।

यह पहला यान है जो मंगल की खुदाई करके उसकी रहस्यमय जानकारियां जुटाएगा। साथ ही एक जर्मन उपकरण भी मंगल की ज़मीन के पांच मीटर नीचे जाकर उसके तापमान का पता लगाएगा।

ग्रह के इस तापमान से यह पता चल सकेगा कि मंगल ग्रह अभी भी कितना सक्रिय है।

इसके तीसरे प्रयोग में रेडियो ट्रांसमिशन का इस्तेमाल होगा जिससे यह बता चलेगा कि यह ग्रह अपनी धुरी पर डगमगाते हुए कैसे घूमता है।

इस अभियान से जुड़ी एक वैज्ञानिक सुज़ैन स्म्रेकर कहती हैं,

“आप एक कच्चा अंडा लें और एक पक्का अंडा, दोनों को घुमाने पर वह अलग-अलग तरीक़े से घूमेगा क्योंकि उसके अंदर तरल पदार्थ अलग-अलग है। आज हम यह नहीं जानते हैं कि मंगल के अंदर तरल चीज़ है या ठोस चीज़। साथ ही इसका भीतरी भाग कितना बड़ा है यह नहीं मालूम। इनसाईट हमें इसकी जानकारियां देगा।”

इनसाइट से जुड़ी खास बातें

  1. इनसाइट द्वारा लिया प्रथम चित्र

    इनसाइट द्वारा लिया प्रथम चित्र

    358 किलो के इनसाइट का पूरा नाम ‘इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस’ है। सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाला यह यान 26 महीने तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

  2. 7000 करोड़ के इस अभियान में यूएस, जर्मनी, फ्रांस और यूरोप समेत 10 से ज्यादा देशों के वैज्ञानिक शामिल हैं।
  3. इनसाइट प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रूस बैनर्ट ने कहा कि यह एक टाइम मशीन है, जो यह पता लगाएगी कि 4.5 अरब साल पहले मंगल, धरती और चंद्रमा जैसे पथरीले ग्रह कैसे बने।
  4. इसका मुख्य उपकरण सिस्मोमीटर (भूकंपमापी) है, जिसे फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है। लैंडिंग के बाद ‘रोबोटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर लगाएगा। दूसरा मुख्य टूल ‘सेल्फ हैमरिंग’ है जो ग्रह की सतह में ऊष्मा के प्रवाह को दर्ज करेगा।
  5. नासा ने इनसाइट को लैंड कराने के लिए इलीशियम प्लैनिशिया नाम की लैंडिंग साइट चुनी। इस जगह सतह सपाट थी। इससे सीस्मोमीटर लगाने और सतह को ड्रिल करना आसान हुआ।
  6. इनसाइट की मंगल के वातावरण में प्रवेश के दौरान अनुमानित गति 12 हजार 300 मील प्रति घंटा रही।
  7. भूकंप से पैदा होने वाली सिस्मिक वेव से बनाया जाएगा मंगल का आंतरिक नक्शा
  8. मंगल पर भूकंप से पैदा होने वाली सिस्मिक वेव से मंगल के आंतरिक नक्शे बनेंगे। पहले भेजे गए क्यूरोसिटी अंतरिक्ष यान का लक्ष्य पानी पर था, लेकिन यह यान मंगल की संरचना का अध्ययन करेगा।
  9. मंगल ग्रह कई मामलों में पृथ्वी के समान है। दोनों ग्रहों पर पहाड़ हैं। हालांकि, पृथ्वी की तुलना में इसकी चौड़ाई आधी, भार एक तिहाई और घनत्व 30% से कम है।

मंगल ग्रह के बारे में 10 तथ्य

1- सौर मंडल  मंगल सूरज से 227,900,000 कि.मी. की दूरी पर है। सौर मंडल में धरती तीसरे क्रमांक पर है जिसके बाद चौथे क्रमांक पर मंगल है। धरती सूरज से 149,600,000 कि.मी. की दूरी पर है।

2- धरती की तुलना में मंगल ग्रह लगभग इसका आधा है। जहां धरती का व्यास 12,742 कि.मी. है, मंगल का व्यास 6,779 कि.मी. है। लेकिन वजन की बात की जाए को मंगल धरती के दसवें हिस्से के बराबर है।

3- मंगल सूरज का पूरा चक्कर 687 दिनों में लगाता है। इस आधार पर धरती की तुलना में मंगल सूरज का चक्कर लगाने में दोगुना वक़्त लेता है और यहां एक साल 687 दिनों का होता है।

4- मंगल पर एक दिन (जिसे सौर दिवस कहा जाता है) 24 घंटे 37 मिनट का होता है।

5- कँपकँपा देने वाली ठंड, धूल भरी आँधी का ग़ुबार और फिर बवंडर-पृथ्वी के मुक़ाबले ये सब मंगल पर कहीं ज़्यादा है। माना जाता है कि जीवन के लिए मंगल की भौगोलिक स्थिति काफ़ी अच्छी है।

गर्मियों में यहाँ सबसे ज़्यादा तापमान होता है 30 डिग्री सेल्सियस और जाड़े में यह शून्य से घटकर 140 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।

6- धरती की तरह मंगल में भी साल में चार मौसम आते हैं- पतझड़, ग्रीष्म, शरद और शीत। धरती की तुलना में मंगल में हर मौसम लगभग दोगुना वक्त तक रहता है।

7- धरती और मंगल पर गुरुत्वाकर्षण शक्ति अलग होने के कारण धरती पर 100 किग्रा वज़न वाला व्यक्ति मंगल पर 38 किग्रा वज़न का होगा।

8- मंगल के पास दो चांद हैं- फ़ोबोस जिसका व्यास 23 कि. मी. है और डेमियोस जिसका व्यास 12 कि.मी. है।

9- मंगल और धरती दोनों ही चार परतों से बने हैं। पहली पर्पटी यानी क्रस्ट जो लौह वाले बसाल्टिक पत्थरों से बना है। दूसरा मैंटल जो सिलिकेट पत्थरों से बना है।

तीसरे और चौथे हैं बाहरी कोर और आंतरिक कोर। माना जाता है कि ये धरती के कोर की तरह लोहे और निकल से बने हो सकते हैं। लेकिन ये कोर ठोस धातु की शक्ल में है या फिर ये तरल पदार्थ से भरा है अभी इसके बारे में पुख़्ता जानकारी मौजूद नहीं है।

10- मंगल के वातारण में 96 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड है, 1.93 प्रतिशत आर्गन, 0.14 प्रतिशत ऑक्सीजन और 2 प्रतिशत नाइट्रोजन है।

साथ ही यहां के वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड के निशान भी पाए गए हैं।

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4 विचार “नासा का मंगलयान ’इनसाइट ’ मंगल पर उतरा&rdquo पर;

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