2020 एबेल पुरस्कार : हिलेल फ़स्टनबर्ग एवं ग्रिगोरी मारग्यूलस्


2020 एबेल पुरस्कार : हिलेल फ़स्टनबर्ग एवं ग्रिगोरी मारग्यूलस्

2020 एबेल पुरस्कार : हिलेल फ़स्टनबर्ग एवं ग्रिगोरी मारग्यूलस्

गणित की अभूतपूर्व खोजों को सम्मानित करने के लिए नोबेल पुरस्कारों के समकक्ष ‘एबेल पुरस्कार’ दिया जाता है। कह सकते हैं कि यह गणित का नोबेल है।

एबेल पुरस्कार की शुरूआत यूरोप महाद्वीप में बसे एक देश नाॅर्वे ने साल 2002 में की थी। इसकी शुरूआत नॉर्वे के गणितज्ञ ‘नील्स हेनरिक एबेल’ के 200 वें जन्मदिन पर की गयी। एबेल प्रारंभिक उन्नीसवीं सदी के महान गणितज्ञों में शुमार हैं।

‘राॅयल कमेटी’ की ही तरह ‘एबेल कमेटी’ के सुझाव पर नॉर्वे सरकार की आधिकारिक संस्था ‘नाॅर्विजन एकेडमी आॅफ़ साइन्स एण्ड लेटर्स’ गणितज्ञों को यह पुरस्कार देती है। पुरस्कार राशि पिचहत्तर लाख नाॅर्विजन क्रोनर है जो 2003 से लगातार दी जा रही है। इस राशि को भारतीय मुद्रा में कहें तो लगभग 5 करोड़ 85 लाख रूपये। ‘एबेल संगोष्ठी’ और ‘नाॅर्विजन गणित ओलंपियाड’ जैसे अन्य नवाचारी कार्यक्रमों के द्वारा एबेल कमेटी समाज में गणित के स्तर और युवाओं की गणित में रूचि को प्रोत्साहित करती है।

पहली बार 2003 में यह पुरस्कार फ्रांस के गणितज्ञ जीन-पियरे सैरी को बीजगणित, टोपोलाॅजी और संख्या सिद्धांत के लिए दिया गया था।

वर्ष 2020 का एबेल पुरस्कार ‘हिलेल फ़स्टनबर्ग’ और ‘ग्रिगोरी मारग्यूलस्’ को संयुक्त रूप दिया गया है। इनके द्वारा किये गये काम को समझने के लिए गणित की मूलभूत जानकारी होना आवश्यक है। आम जन के लिए इस उच्चस्तरीय गणित को समझना दुरूह हो सकता है, पर दुसाध्य नहीं !

● हिलेल फ़स्टनबर्ग {जन्म 1935, बर्लिन} हिब्रू विश्वविद्यालय येरूसलम (इजरायल) से सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर हैं।

● ग्रिगोरी मारग्यूलस् {जन्म 1946, मास्को} येल विश्वविद्यालय अमेरिका से सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर हैं।

दोनों गणितज्ञों को यह पुरस्कार प्रायिकता ( Probability) और गति विज्ञान ( Dynamics) का ग्रुप थ्योरी, नम्बर थ्योरी व संयोजन विज्ञान ( Combinatorics) जैसे गणित के क्षेत्रों में सफल प्रयोग करने के लिए दिया गया है। साधारण शब्दों में कहें तो यह खोज वस्तुओं के किसी समूह में से कुछ वस्तुओं के चयन, नयी आकृति में उन वस्तुओं के समायोजन, वस्तुओं की गणितीय परास या मापन का अध्ययन आदि से सम्बंधित है। ग्रुप सिद्धांत और नम्बर सिद्धांत का इस तरह से उपयोग इन्जीनियरिंग के क्षेत्र में बहुत होता है।

दोनों वैज्ञानिकों ने प्रायिकता के सिद्धांतों द्वारा जटिल गणितीय पहेलियों को सुलझाया। एक उदाहरण देखें। मान लीजिए आप अपने कुत्ते के लिए बगीचे में कुछ खाना छुपा देते हैं। खाने को ढूंढता कुत्ता इधर-उधर घूमना शुरू करेगा और अन्ततः खाने तक पहुंच जायेगा। कुत्ते ने छुपा खाना ढूंढने के लिए जो रास्ता चुना वो पहले से तय नहीं था, कुत्ता इधर-उधर भटकता हुआ अनेक तरीकों से खाने तक पहुँच गया। इसे ही गणित की भाषा में यादृच्छिक चलन ( Random Walk ) कहते हैं। अगर छुपाए गए भोजन के चारों ओर एक गोलाकार घेरा बना दिया जाए तो खाने की कुत्ते से दूरी कम हो जायेगी तथा उस गोलाकार जगह में घूमते कुत्ते को भोजन ढूंढने में और सुविधा होगी। इस प्रकार अनेक अन्य तरीके भी अपनाए जा सकते हैं।

यादृच्छिक चलन की ये घटना गणित की अनेक पहेलियों को सुलझा सकती है, लेकिन गणितज्ञ किसी बगीचे में खाने को नहीं ढूंढते बल्कि ग्राप पेपर में भिन्न-भिन्न प्रकार की आकृतियों का गणितीय विश्लेषण करते हैं। हिलेल और ग्रिगोरी ने भी यही किया।

यादृच्छिक चलन की घटना बहुत-सी अन्य जगहों में भी दिखाई देती है, जैसे- वातावरण में गैस के अणुओं का बिखरना, शेयर बाजार में चीज़ों की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव, तन्त्रिका तन्त्र में न्यूराॅन्स की गतिविधियाँ, पूल या बिलियर्ड गेदों की टेबल में चहलकदमी और अथाह ब्रह्मांड में आकाशीय पिण्डों की गति आदि।

इन दोनों वैज्ञानिकों की खोजों ने कुछ विशिष्ट गणितीय क्षेत्रों में सम्भावनाओं को जन्म दिया है, जैसे- अभाज्य संख्याओं वाली एक लम्बी समान्तर श्रेणी, ग्रुप थ्योरी में क्रिस्टल जालकों की संरचना समझना, इसके अलावा दूरसंचार तकनीकी और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में गणितीय अनुप्रयोग। एबल कमेटी ने पुरस्कार की घोषणा यह कहते हुए की,” गणित के बगीचे में बहुत-सी दावत की चीज़ें छिपी हैं, इस साल का एबेल पुरस्कार इसी बात के लिए है कि दोनों वैज्ञानिकों के काम द्वारा इनमें से कुछ को ढूंढा जा सकता है।”

इन दोनों वैज्ञानिकों ने कभी साथ-साथ काम नहीं किया। मारग्यूलस् ने अपनी इस खोज की दिशा बहुत-सा काम पहले ही कर दिया था, फिर भी दोनों वैज्ञानिक का काम एक दूसरे से बहुत प्रभावित हुआ और दोनों ने गणित में एक समान सम्भावनाओं पर काम किया।

यहाँ दी गयी गणितीय जानकारी एबेल विजयी वैज्ञानिकों की खोज का बस ‘सतही’ विश्लेषण है। गहन चर्चा के लिए उच्च स्तरीय गणित का ज्ञान ज़रूरी है।

साभार : सौरभ पांडेय

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