सूरज को धरती पर उतारने की तैयारी


मानव विकास के लिए अधिकाधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। बिजली पर हमारी बढ़ती निर्भरता के कारण भविष्य में ऊर्जा व्यय और भी बढ़ेगा। तो इतनी ऊर्जा आएगी कहाँ से? सब जानते हैं कि धरती पर कोयले और पेट्रोलियम के भंडार सीमित हैं, ये भंडार ज्यादा दिनों तक हमारी ऊर्जा जरूरतों को पूरी नहीं कर…

नाभिकिय संलयन : भविष्य की ऊर्जा


नाभिकिय संलयन प्रक्रिया ब्रह्मांड मे सूर्य तथा अन्य सभी तारो की ऊर्जा का मूल है। इस प्रक्रिया को पृथ्वी पर एक लघु पैमाने पर भी अपनाने पर एक साफ़सुथरी, सस्ती तथा अनंत ऊर्जा का स्रोत मिल जायेगा। प्रस्तुत है एक अवलोकन नाभिकिय संलयन से जुड़ी आशाओं ,चुनौतियों तथा इस दिशा मे चल रहे उन प्रयोगों…

भविष्य की ऊर्जा : नाभिकिय संलयन(nuclear fusion) से पूरी होगी ऊर्जा की आवश्यकतायें


मानव को विकास चाहिए। विकास के लिए आवश्यक है ऊर्जा। ऊर्जा हमें ईंधन से मिलती है। आज दुनिया में कई तरह के ईंधन काम में लाए जा रहे हैं। सबसे ज़्यादा जिनका इस्तेमाल हो रहा है वो है कोयला और तेल। दोनों ईंधन ज़मीन के अंदर से निकालकर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। मगर समस्या…

तापमान : ब्रह्माण्ड मे उष्णतम से लेकर शीतलतम तक


उष्ण होने पर परमाणु और परमाण्विक कण तरंगीत तथा गतिमान होते है। वे जितने ज्यादा उष्ण रहेंगे उतनी ज्यादा गति से गतिमान रहेंगे। वे जितने शीतल रहेंगे उनकी गति उतनी कम होगी। परम शून्य तापमान पर उनकी गति शून्य हो जाती है। इस तापमान से कम तापमान संभव नही है। यह कुछ ऐसा है कि…

सूर्य और उसके ग्रह(आकार की तुलना)

सूर्य अपना द्रव्यमान खो रहा है , लेकिन कैसे ?


सूर्य काफी विशाल है, बहुत ही विशाल। वह चौड़ाई मे पृथ्वी से सौ से भी ज्यादा गुणा है, उसके अंदर 10 लाख से ज्यादा पृथ्वीयाँ समा सकती है। यदि आप पृथ्वी और सूर्य को किसी ब्रह्माण्डीय तराजु पर तौले तो पायेंगे कि सूर्य पृथ्वी से 300,000 गुणा ज्यादा द्रव्यमान रखता है। लेकिन सूर्य का द्रव्यमान…

सूर्य की ऊर्जा नाभिकिय संलयन से प्राप्त होती है!सूर्य की ऊर्जा नाभिकिय संलयन से प्राप्त होती है!

प्रयोगशाला मे सूर्य का निर्माण : नाभिकिय संलयन(nuclear fusion) मे एक बड़ी सफलता


प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन के समय से ही नियंत्रित नाभिकिय संलयन(nuclear fusion) द्वारा अनंत ऊर्जा का निर्माण वैज्ञानिको का एक सपना रहा है। यह ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया जो कि किसी भी तरह के प्रदुषण से मुक्त है। लेकिन बहुत से वैज्ञानिक इसे विज्ञान फतांशी की प्रक्रिया मानकर नकार चूके है। अभी भी लक्ष्य दूर…