परग्रही जीवन भाग 2 : कार्बन – जीवरसायन का आधार क्यों है?


कार्बन

कार्बन

सभी तरह का ज्ञात जीवन कार्बन आधारित है, इसकी हर कोशीका कार्बन और कार्बनिक प्रक्रियाओं का प्रयोग करती है। हमारे सामने प्रश्न है कि

  1. क्या कार्बन अकेला तत्व है जो जैविक अणुओं का आधार बना सकता है ?
  2. क्या जीवन को कार्बन आधारित ही होना चाहिये ?
  3. या पृथ्वी पर जीवन का आधार इसलिये है कि पृथ्वी की परिस्थितियाँ कार्बन आधारित जीवन के लिये अनुकुल है?

इन सभी प्रश्नो का उत्तर देने के लिये कार्बनिक रसायन के प्रमुख गुणधर्मो को देखते है जो पृथ्वी के जीवन की धूरी हैं। यह इस तरह से हमे सिलिकान या बोरान आधारित जीवन के अध्ययन के लिये एक मानक बेंचमार्क प्रदान करेगा।

यह लेख शृंखला का भाग है, आगे बढ़ने से पहले इस लेख को पढ़ें :  परग्रही जीवन भाग 1 : क्या जीवन के लिये कार्बन और जल आवश्यक है ?

समस्त ज्ञात जीवन कार्बन आधारित क्यों है ?

सबसे सूक्ष्म जीवन भी अत्याधिक रूप से जटिल है। हर तरह के जीवन के लिये कुछ मूलभूत कार्य होते है जैसे भोजन और पोषक तत्वो का अवशोषण, भोजन का ऊर्जा मे रूपांतरण, मल निकास, शरीर के अंगो की मरम्मत या परिवर्तन, संतति निर्माण इत्यादि। यह सारी जटिलतायें एक अत्याधिक सूक्ष्म रूप मे समायी हुयी है। किसी एक कोशीका मे समाई यह जटिलता तुलनात्मक रूप से किसी कंप्युटर मदरबोर्ड से भी लाखो गुणा अधिक जटिल है। यह दर्शाता है कि जीवन के लिये ऐसे ढेर सारी आण्विक मशीने होना चाहिये जो सामुदायिक रूप से यह सब कार्य करने मे सक्षम हो। इससे हम यह मानकर चलते हैं कि जैविक रसायन के आधार के लिये एक ऐसा तत्व चाहिये जो पालीमर(Polymer) के जैसे विशाल आण्विक श्रृंखला का निर्माण करने मे सक्षम हो तथा भिन्न तत्वो के साथ भिन्न भिन्न तरह की रासायनिक संरचना बनाने मे सक्षम हो। इन दोनो शर्तो के आधार पर हम ऐसे तत्वो की पहचान कर सकते है जिनमे जैविक रसायन का निर्माण करने की क्षमता हो।

जीवन के निर्माण के लिये पालीमर निर्माण क्षमता के आवश्यक होने के पीछे दो मुख्य कारण है। प्रथम, इनके निर्माण से जटिल बृहद अणुओं(Macromolecules) का निर्माण संभव हो जाता है जो कि साधारण सरल छोटे अणुओ से निर्मित होते है। पालीमर बृहद अणु(मैक्रोमालेक्युल) के विशिष्ट प्रकार होते है जिसे बनाने वाले छोटी आण्विक इकाइयाँ एक ही प्रकार की होती है। जैवरसायन मे बृहद अणु(मैक्रोमालेक्युल) महत्वपूर्ण होते है। कुछ ही भिन्न बृहद अणु(मैक्रोमालेक्युल) के प्रयोग से ढेर सारे प्रकार के जीवन निर्माण की इकाईयाँ निर्मित होना प्रारंभ हो जाती है। सभी जमीनी जीवो मे प्रोटीन नामक पालीमर होता है जोकि 20 भिन्न प्रकार के अमिनो अम्लो(Amino Acid) से निर्मित होता है। प्रोटीन किसी भी कोशीका का इंजन होता है। प्रोटीन को अपना कार्य करने के लिये विशाल आण्विक आकार रखना होता है लेकिन यह भी ध्यान रखना होता है वह अन्य मैक्रोमालेक्युल से कोई हानिकारक प्रतिक्रिया ना करे। द्वितिय लंबी पालीमर श्रृंखला जिनेटीक सूचना के संरक्षण के लिये आवश्यक होती है। पृथ्वी पर समस्त जीवन मे जिनेटीक सूचना DNA के रूप मे संरक्षित होती है जोकि चार आधार, शर्करा और फ़ास्फ़ेट से निर्मित पालीमर है। किसी भी जीव को अपनी संतति के निर्माण के लिये विशालकाय आकार की जिनेटिक सूचना की आवश्यकता होती है। इस सूचना के भंडारण और संरक्षण के लिये अत्याधिक लंबाई की आण्विक श्रृंखला कि आवश्यकता होती है। साराशं मे किसी भी परग्रही जीवन के लिये, चाहे वह दुर्लभ हो या विचित्र हो, उसे ऐसे तत्व की आवश्यकता होगी ही जो पालीमर का निर्माण कर सके, चाहे उस जीवन के निर्माण करने वाली इकाइयाँ पृथ्वी के जीवन से पूर्णत: भिन्न हो।

अधिकतर लोग नही जानते है कि इन अणुओं का आकार कितना होता है, इसे दर्शाने के लिये हम कुछ उदाहरण लेंगे। औसत आकार के खमीर(Yeast) प्रोटीन मे 466 अमिनो अम्ल होते है, जिसमे लगभग 8000 परमाणु होते है। सबसे बड़े ज्ञात प्रोटीन मे 27,000 अमीनो अम्ल हो सकते है जिसमे 500,000 परमाणु हो सकते है। जैव वैज्ञानिको ने गणना की है कि किसी जीव के DNA कार्य करने के लिये कम से कम 200-500 जीन चाहिये और हर जीन मे 1000 न्युक्लिओटाइड आधार चाहिये। इसका अर्थ है कि एक DNA मे कम से कम 80-200 लाख परमाणु चाहिये। अधिकतर जीवों मे इससे अधिक जीन चाहिये होते है। उदाहरण के लिये किसी स्वयं पर आधारित(जो परजीवी ना हो) जीव के DNA मे 1,300-2,300 जीन चाहिये जिसका अर्थ है 5.2 – 9.2 करोड़़ परमाणु। यह आंकड़े पृथ्वी के जीवन को ध्यान मे रख गणना किये गये है लेकिन किसी अन्य ग्रह पर उनके किसी अन्य जैव-रसायन के प्रयोग करने के बावजूद अणूओं का आकार इसी के तुल्य होगा।

कार्बन तथा आवर्त सारणी(Carbon and the Periodic Table)

कार्बन को अच्छी तरह समझने तथा यह जानने कि वह अन्य तत्वों से किस तरह भिन्न है, हमे आवर्त सारणी को देखना होगा। आवर्त सारणी मे तत्वो को उनके विशिष्ट व्यवहार के अनुसार जमाया जाता है जिससे उनके मध्य संबधो का पता चलता है। आवर्त सारणी से प्रारंभ कर, हमारे रसायन विज्ञान के ज्ञान के आधार पर हम उन तत्वो को आसानी से अलग कर सकते है जो जैव रसायन के अनुकुल नही है। इस से हम जैव-रसायन के अयोग्य अधिकतर तत्वो को अलग कर शेष बचे कुछ ही विकल्पो पर ध्यान दे सकते है।

मुख्य समूह तत्व(लाल रंग), संक्रमण धातु(हरा रंग) तथा आंतरिक संक्रमण धातुयें(नीला रंग)

मुख्य समूह तत्व(लाल रंग), संक्रमण धातु(हरा रंग) तथा आंतरिक संक्रमण धातुयें(नीला रंग)

आवर्त सारणी के तत्वो को तीन मुख्य वर्गो मे बांटा गया है, मुख्य तत्व(main group), संक्रमण धातुये(transition metals) तथा आंतरिक संक्रमण धातुये(inner transition metals)। मुख्य समूह जिसे चित्र मे लाल रंग से दर्शाया गया है, मे अधिकतर सामान्य तथा परिचित तत्वों का समावेश होता है। इनमे से केवल छह तत्व (कार्बन, आक्सीजन, हायड्रोजन, नाइट्रोजन, कैल्शीयम और फास्फोरस) से ही मानव शरीर का 99% भाग बनता है। इसके विपरित संक्रमण धातुये(हरे रंग मे) तथा आंतरिक संक्रमण धातुये(नीले रंग मे) का उद्योगो मे महत्व है लेकिन जीवीत शरीर मे इनकी भूमीका कम है। इसके पीछे कारण यह है कि ये तत्व दुर्लभ परिस्थितियों मे ही जुड़कर बड़े और जटिल आण्विक संरचना बनाते है। इनमे से कोई भी धातु जैव रसायन का आधार नही बन सकती है। इन्हे अलग करने पर केवल मुख्य समूह के तत्व ही बचते है।

अधातु (Non-Metal)-हरें रंग मे , धातु(Metal)- संतरे रंग मे , धातु सदृश(metalloid) -नीले रंग मे तथा नोबेल गैस - गुलाबी रंग मे।

अधातु (Non-Metal)-हरें रंग मे , धातु(Metal)- संतरे रंग मे , धातु सदृश(metalloid) -नीले रंग मे तथा नोबेल गैस – गुलाबी रंग मे।

मूख्य समूह के तत्वों को चार वर्गो मे बांटा जा सकता है, अधातु (Non-Metal), धातु(Metal), धातु सदृश(metalloid) तथा नोबेल गैस। इनमे से अधातु तत्व जिनमे कार्बन, नाईट्रोजन, आक्सीजन, हायड्रोजन, सल्फ़र और फ़ास्फोरस है (चित्र मे हरे रंग मे) हमारे इस लेख के नायक है और वे सभी ज्ञात जीवन के प्रमुख भाग है। मुख्य समूह की धातुओं की (हल्के नीले रंग मे) जटिल बृहद अणु के निर्माण मे भूमिका नही होती है जिससे वे वैकल्पिक जैवरसायन के लिये आधार नही हो सकते है, यह अलग बात है कि जीवों मे कुछ विशिष्ट कार्यों के लिये इन धातुओं की भूमिका होती है। उदाहरण के लिये सोडीयम तथा पोटेशियम के आयनो के आवेश से तंत्रिकाओं मे संकेतो का प्रवाह होता है, कैल्शियम हमारी हड्डीयों और दांतो का प्रमुख भाग है। धातु सदृश तत्व(संतरे के रंग मे) धातु और अधातु तत्वो की सीमा पर होते है। पृथ्वी के जीवन मे इन धातु सदृश तत्वो की भूमिका सीमीत लेकिन महत्वपूर्ण होती है। इनमे से दो तत्व सिलिकान और बोरान आवर्त सारणी मे कार्बन के पड़ोसी है और इन्हे जैवरसायन मे कार्बन के विकल्प के रूप मे माना जाता है। लेख मे इन तत्वो पर हम चर्चा करेंगे। अंतिम चौथा समूह नोबेल गैसों(गुलाबी रंग) का है, ये तत्व दुर्लभ से दुर्लभ स्थितियों मे ही बहुत सरल से यौगिक बनाते है। इन तत्वो की हम चर्चा नही करेंगे। सारांश यह है कि केवल मुख्य समूह के अधातु(हरे रंग) मे तथा कुछ धातु सदृश तत्व ही जीवन के लिये आधारभूत रसायनो का निर्माण कर सकते है।

आवर्त सारणी मे महत्वपूर्ण प्रवृत्तियाँ

हमने आवर्त सारणी मे जीवन के आधार की संभावना वाले तत्वो का चयन कर लिया है, अब हम आवर्त सारणी के उपरी दायें कोने के तत्वो पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते है। यहाँ से हम कार्बन की तुलना उसके सभी पड़ोसी तत्वो के साथ प्रभावी तरह से कर सकते है। यह तुलना हमारे आवर्त सारणी मे तत्वो के व्यवहार के प्रवृत्ति के दो महत्वपूर्ण कारको के ज्ञान पर आधारित होगी। इनमे से पहली प्रवृत्ति है कि आवर्त सारणी मे खड़ी पंक्ति के तत्वो को समूह कहते है और वे समान रासायनिक व्यवहार को दर्शाते है। उदाहरण के लिये एक समूह के तत्व समान संख्या मे हायड्रोजन परमाणु के साथ बंधन निर्मित करते है, जैसे कार्बन परिवार चार , नाइट्रोजन परिवार तीन तथा आक्सीजन परिवार दो इत्यादि। दूसरी महत्वपूर्ण प्रवृत्ति है आड़ी पंक्ति या आवृत है जिसमे तत्व उपस्थित होता है। तत्वो का रसायनिक व्यवहार उनके समूह पर निर्भर करता है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण गुणधर्म उनके आवृत पर निर्भर करते है जैसे एकाधिक बंधन( दोहरे, तीहरे) बंधन का निर्माण। इन दोनो प्रवृत्तियों के समुच्चय से किसी भी तत्व के रासायनिक व्यवहार को समझा जा सकता है।

कार्बन का जीवन के लिये आवश्यक गुणधर्म

अब हम देखेंगे कि कार्बन मे ऐसा कौनसा गुणधर्म है जो इसे इतना अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। रसायन वैज्ञानिको ने कार्बन के ऐसे पांच गुण खोज निकाले है जो प्रमाणित करते है कि यह अकेला तत्व जैव रसायन के लिये आधारभूत क्यों है। इनमे से तीन गुणो को आवर्त सारणी मे दर्शाया गया है।

  1. चार एकल बंधन निर्माण करने की क्षमता: यह एक सामान्य नियम है कि कार्बन परिवार के सदस्य चार एकल बंधन बनाते है, जबकी उसके पड़ोसी बोरान और नाइट्रोजन परिवार केवल तीन एकल बंधन बना सकते है। अन्य समूह केवल एक या दो ही एकल बंधन बना पाते है। अत्याधिक संयोजकता वाले कुछ अणुओं को छोडकर एकल बंधन बनाने की यह अधिकतम क्षमता है। इसका अर्थ यह है कि कार्बन की विभिन्न तरह के अणु निर्माण करने क्षमता अन्य समूहो की तुलना मे कहीं ज्यादा है।
  2. स्थिर दोहरे और तिहरे बंधन : कार्बन का परमाणु कार्बन, आक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फ़र और फास्फोरस के साथ मजबूत एकाधिक बंधन बना सकता है। इससे कार्बन के द्वारा निर्मित अणुओं मे विविधता कई गुणा बढ़ जती है। इसके विपरीत कार्बन के नीचे वाली पंक्ति के तत्व जैसे सिलीकान सामान्यत: एकाधिक बंधन नही बनाते है।
  3. अरोमेटीक(वलयाकार) यौगिको का निर्माण : अरोमेटीक अणुओं मे परमाणूओं के मध्य एक वलय(रिंग) के आकार मे एकाधिक बंधन होते है और ये यौगिक आश्चर्यजनकरूप से स्थाई होते है। रसायनशास्त्र मे अरोमेटीक का अर्थ सुगंध से नही होता है। इन यौगिको सबसे प्रसिद्ध उदाहरण बेंजीन है। अरोमेटीक अणुओं के विशिष्ट गुणधर्मो के कारण वे कई जैविक अणुओं मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। बीस मुख्य अमिनो अम्ल मे चार, सभी पांच न्युक्लिक अमल तथा हिमोग्लोबिन, क्लोरोफ़िल मे अरोमेटिक अणुओं की भूमिका है।
  4. मजबूत कार्बन – कार्बन बंधन : कार्बन-कार्बन एकल बंधन अधातुओं मे H-H के पश्चात दूसरा सबसे मजबूत समान तत्व बंधन है। इसके जीवन पर दो महत्वपूर्ण प्रभाव होते है। प्रथम कार्बन आधारित जैवअणु अत्याधिक स्थिर होते है तथा लंबे समय तक टिके रहते है। दूसरा स्थिर स्वतत्वबंधन(कार्बन-कार्बन बंधन) वलयाकार, लंबी श्रृंखला, शाखाओं वाली आण्विक संरचना बनाने मे मदद करता है जो कि भिन्न यौगिको के लिये आधारभूत संरचना बन जाती है।
  5. अनंत रूप से लंबी श्रृंखला : जीवन को परिभाषित करने वाले मुख्य गुणधर्मो मे से एक संतती उत्पादन है अर्थात स्वयं की प्रतिकृति का निर्माण। इस क्षमता के लिये ऐसे अणुओं की आवश्यकता होती है जिसमे जटिल स्वरूप मे सूचना को भंडारीत कर रखा जा सके। पृथ्वी पर यह कार्य DNA तथा RNA करते है। जितनी लंबी आण्विक श्रृंखला होगी उतनी अधिक सूचना का भंडारण संभव होगा। सभी तत्वो के केवल कार्बन तथा एक सीमा तक सिलीकान ही लंबे जटिल अणुओं के निर्माण की क्षमता रखते है।

इन सभी गुणधर्मो के कारण कार्बन किसी भी अन्य तत्व की तुलना मे अधिक तरह के , जटिल, विशाल यौगिको का निर्माण कर सकता है। एक दृष्टिकोण के अनुसार कार्बन 1 करोड़ भिन्न यौगिको का निर्माण कर सकता है, इसके अतिरिक्त अनंत संख्या सैद्धांतिक रूप से संभावित अणु भी बन सकते है। यह भी एक तथ्य है कि कार्बनिक रसायन शास्त्र जिसका एक भिन्न विषय के रूप मे अध्ययन किया जाता है, वह अन्य सभी तत्वो के रसायनशास्त्र को एक साथ मिला कर बने विज्ञान से भी विस्तृत और जटिल होगा।

कार्बन आधारित अणुंओ का स्थाईत्व

इसके पहले हमने देखा है कि मुख्य समूह के तत्व चार बंधनो से अधिक बंधन नही बना सकते है लेकिन इसका एक अपवाद है। आवर्त सारणी मे तृतिय पंक्ति तथा नीचे के तत्व जिसमे सिलीकान का समावेश है, कुछ विशेष परिस्थितियों मे अतिसंयोजकता का प्रदर्शन करते है और पांच/छ: बंधन भी बना लेते है। कार्बन तथा द्वितिय पंक्ति के तत्वो मे यह क्षमता नही होती है और वे अधिक से अधिक चार ही बंधन बना पाते है। यह गुण कार्बन के विशेष तत्व होने की हमारी अवधारणा के विपरीत प्रतित होता है लेकिन क्या वास्तव मे ऐसा है?

मिथेन और सिलेन की आण्विक संरचना

मिथेन और सिलेन की आण्विक संरचना

कार्बन मे अतिसंयोजकता के गुण ना होने का एक दूसरा पहलू है जोकि उसकी विशेषता को बढ़ा देता है। इस अक्षमता के कारण उसके संभावित यौगिको की संख्या मे कमी आती है लेकिन इससे कार्बनिक पदार्थो के स्थाइत्व मे वृद्धि होती है। इसका कारण यह है कि यदि किसी कार्बन परमाणु के चार बंधन है तो उसे नयें बंधन बनाने से पहले एक उपस्थित बंधन हो तोड़ना होगा। इस प्रक्रिया के लिये पहले उपस्थित बंधन को तोड़ने के लिये ऊर्जा आवश्यक होगी। इसका कुल परिणाम यह होता है कि ऐसे अणु जिनमे चार बंधन है समुचित ऊर्जा के होने पर भी अमन्य पदार्थो से प्रतिक्रिया मे धीमे होते है। इसके विपरित कार्बन के विकल्प सिलिकान मे यह नही होगा, वह अतिसंयोजकता का प्रदर्शन करते हुये पांचवा बंधन बना लेगा। उदाहरण के लिये मिथेन CH4 वायु मे( चिंगारी या लपटो की अनुपस्थिति) मे स्थाई होती है, जबकि सिलेन(SiH4) वायु मे आक्सीजन से त्वरित प्रतिक्रिया करती है।

पृथ्वी पर सभी जैविक अणुओं का आधार कार्बन है, यदि कार्बन सिलीकान जैसे व्यवहार करता तो ये सभी जीवन के लिये कारणीभूत अणु आसानी से बिखर जाते या वे पृथ्वी के तापमान पर तेज प्रतिक्रिया कर नये यौगिको का र्निमाण करते रहते जिससे जीवन असंभव हो जाता। रसायनज्ञ माइकल डेवर और एअमोन हीली के अनुसार कार्बन मे अतिसंयोजकता ना होने से और स्थाइत्व होने से ही जीवन संभव है।

इसका परिणाम है कि कार्बन विशेष है।

1961 मे भौतिक वैज्ञानिक राबर्ट डिके(Robert Dicke) ने कहा था कि ” यह ज्ञात है कि भौतिक वैज्ञानिक बनने के लिये कार्बन आवश्यक है।” स्पष्ट रूप से कोई भी अन्य तत्व कार्बन के रासायनिक गुणो और विशेषताओं के समीप भी नही आ पाता है। इसके आधार पर जैवरसायन वैज्ञानिक नार्मन पेस(Norman Pace) ने कहा था कि कहीं पर भी जीवन की उपस्थिति हो वह सार्वभौमिक रूप से एक ही प्रकृति के जैव रसायन नियमों का पालन करेगी। इसी की दूसरे सरल शब्दो मे कह सकते हैं कि ब्रह्मांड मे कहीं पर भी जीवन हो वह कार्बन आधारित ही होगा वह पृथ्वी के जैसा ही होगा, यह बात और है कि वह पृथ्वी की प्रतिकृति नही होगा।

क्या यह अंध कार्बन समर्थन(Carbon Chauvinism) है ?

carl-sagan

कार्ल सागन

सभी वैज्ञानिक इसबात पर सहमत नही हैं कि जीवन के लिये कार्बन अनिवार्य है। कार्बन पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन के लिये आदर्श हो सकता है लेकिन कुछ वैज्ञानिको के अनुसार अन्य ग्रहों पर दुर्लभ तरह का जीवन भी संभव है। 1973 मे कार्ल सागन ने पृथ्वी पर के जीवन समस्त ब्रह्मांड के जीवन के लिये आदर्श मानने वालों को अंधभक्त(chauvinism) शब्द का प्रयोग किया था। उदाहरण के लिये उन्होने कहा था कि सभी तरह के जीवन के लिये पृथ्वी के तापमान को आदर्श मानने वालो को उन्होने तापमान अंधभक्त(temperature chauvinism), आक्सीजन को जीवन के लिये अनिवार्य मानने वालो को आक्सीजन अंधभक्त(oxygen chauvinism) की संज्ञा दी थी। इस मामले मे यह कार्बन अंधभक्ति है जिसके अनुसार हम मानते हैं कि जीवन को कार्बन आधारित होना चाहिये क्योंकि हमारे ज्ञान के अनुसार सभी जीवन कार्बन आधारित है। क्या कार्बन वास्तविकता मे जीवन का आधार है या हम ने अन्य विकल्पो पर समुचित अध्ययन नही किया है।

कार्ल सागन के तर्क का आधार है कि हमारे पास अध्ययन के लिये एक ही तरह का जीवन है, पृथ्वी का जीवन। इसलिये जीवन की संभावना के अन्य विकल्पों को समुचित अध्ययन के बिना खारीज करना अपरिपक्वता होगी। एक दूसरे तर्क के अनुसार रसायनशास्त्रीयों ने कार्बनिक रसायन का जितना अध्ययन किया है उतना अध्ययन सिलिकान रसायन का नही किया है, यह चयन पक्षधारिता(Selection Bias) है। सरल शब्दो मे यह संभव है कि रसायनशास्त्रीयों ने सिलिकान आधारित जीवन को सिलीकान रसायन और सिलिकान से बनने वाले संभावित अणुओं के समुचित अध्ययन के बिना ही खारीज कर दिया हो। कार्ल सागन की चिंता जायज है।

कुछ वैज्ञानिक कार्ल सागन से आगे जाते है और वे इस तर्क को सीधे सीधे मानने से इंकार करते हैं कि समस्त ब्रह्मांड मे जीवन कार्बन आधारित होना चाहिये। क्या हम कार्बन अंधभक्ति से पिड़ित है कि हमने यह निर्णय ले लिया है कि कार्बन ही इकलौता तत्व है जो जैव रसायन का आधार है और कोई अन्य तत्व कार्बन के समीप भी नही आता है। ऐसा नही है! केवल कार्बन आधारित जीवन का निष्कर्ष गलत हो सकता है लेकिन यह कार्बन अंधभक्ति आधारित नही है। इसे उपेक्षा या पक्षधारिता नही कहा जा सकता है। कार्ल सागन ने भी अनिच्छा से स्वयं को कार्बन अंधभक्त माना था क्योंकि वे भी कार्बन के दूसरे तत्वो से अलग विशेष गुणधर्मो को जानते और मानते थे। इस लेख मे अब हम कार्बन के वैकल्पिक रसायन की चर्चा करेंगे। हम इस चर्चा की शुरुवात सिलीकान आधारित रसायनो से करेंगे जोकि कार्बन का सबसे चर्चित विकल्प माना जाता रहा है। इसके पश्चात केवल दूसरे बचे गंभीर विकल्प बोरान की चर्चा होगी।

अगले भाग मे सिलीकान आधारित जीवन..

परिशिष्ट

प्रश्न 1 : हम आवर्तसारणी के तत्वो पर ही क्यों ध्यान दे रहे है ? क्या जीवन इन तत्वों के अतिरिक्त किसी अन्य ऐसे तत्व से निर्मित नही हो सकता जो हमे ज्ञात ना हो ? क्या जीवन एंटीमैटर से निर्मित नही हो सकता ?

उत्तर :  समस्त ब्रह्माण्ड मे भौतिकी नियम समान है। इसका अर्थ है कि जो नियम पृथ्वी या सौर मंडल मे लागु होते है वही नियम सारे ब्रह्मांड मे लागु होंगे। पृथ्वी या सौर मंडल विशेष नही है।

ब्रह्मांड मे हम जो भी पदार्थ देखते है वह तत्वो से निर्मित है। तत्वो का निर्धारण उसके परमाणु नाभिक मे प्रोटानों की संख्या पर होता है। नाभिक मे प्रोटानो की संख्या बदलने से तत्व बदल जाता है।

उदाहरण के  लिये नाभिक मे 1 प्रोटान अर्थात हायड्रोजन, 2 प्रोटान अर्थात हिलियम, 3 प्रोटान – लिथियम, 4 प्रोटान – बेरियम, 5 प्रोटान – बोरान, 6 प्रोटान -कार्बन , 7  प्रोटान – नाइट्रोजन, 8 प्रोटान – आक्सीजन ….. 82 प्रोटान लेड।

82 प्रोटान के पश्चात के तत्व रेडीयो सक्रिय होते है, अर्थात कुछ समय पश्चात छोटे तत्वो मे टूट जाते है। ये जीवन के लिये हानिकारक भी होते है।

इसका अर्थ यह है कि ब्रह्मांड मे  केवल 82 तत्व ही उपलब्ध है,जीवन के लिये  जैव रसायन इन्ही 82 तत्वो का प्रयोग करेगा।

प्रश्न 2 : क्या जीवन एंटीमैटर से निर्मित नही हो सकता ?

उत्तर : जीवन एंटी मैटर से निर्मित हो सकता है। लेकिन भौतिकी के नियम एंटीमैटर के लिये भी साधारण पदार्थ के जैसे है। एंटी मैटर मे प्रोटान एंटी-प्रोटान, इलेक्टान -पाजीट्रान, न्युट्रान -एंटीन्युट्रान से बदल जाते है। परमाणु की जगह एंटीपरमाणु है। बाकि सब समान है।

यदि साधारण पदार्थ मे जीवन कार्बन आधारित है तो एंटीमैटर मे एंटीकार्बन आधारित होगा। जल की जगह एंटी-हायड्रोजन, एंटीआक्सीजन से बना एंटीजल होगा। ये जीवन एंटीमैटर से बने ग्रह, तारों पर होगा।

लेकिन इसमे दो समस्या है : 1: पदार्थ के मध्य एंटीमैटर रह नही सकता है, क्योंकि वह पदार्थ से टकराकर दोनो को नष्ट कर देता है और ऊर्जा मे बदल जाता है। एंटीमैटर जीवन के लिये एंटीमैटर से बना ग्रह, तारा और आकाशगंगा चाहिये। तक के निरीक्षणो मे बड़ी मात्रा एंटीमैटर की उपस्थिति के कोई प्रमाण नही है। इतना एंटीमैटर दिखाई नही दिया है कि उससे कोई आकाशगंगा तो छोडीये कोई तारा या ग्रह बना हो।

2: एंटीमैटर से बने जीवन से शायद हम कभी संपर्क ना कर पाये। यदि हम किसी एंटीमानव से हाथ मिलायें तो दोनो नष्ट हो जायेंगे।

प्रश्न 3 : क्या जीवन डार्कमैटर(श्याम पदार्थ) से निर्मित नही हो सकता ?

उत्तर : श्याम पदार्थ हमारे लिये एक रहस्य है। यह साधारण पदार्थ से कोई प्रतिक्रिया नही करता है। हम केवल उसके गुरुत्वाकर्षण को महसूस कर सकते है। मोटे तौर पर हम यह जानते हैं कि यह ब्रह्मांड आकाशगंगाओं की संरचना को आकार/आधार देता है। लेकिन इसके द्वारा किसी अन्य भौतिक या रासायनिक गतिविधियों के कोई प्रमाण नही है। इससे जीवन के निर्माण की संभावनायें नगण्य है, यदि हों तो भी साधारण पदार्थ जिससे हम बने है उससे किसी भी प्रतिक्रिया के अभाव मे हम उसे कभी देख नही पायेंगे।

प्रश्न 3 : क्या समानांतर ब्रह्मांड मे जीवन किसी अज्ञात पदार्थ से निर्मित नही हो सकता है ?

उत्तर : 1. समानांतर ब्रह्मांड मे भौतिकी के जीवन अलग नही होंगे, इस स्थिति मे वहाँ भी जीवन हमारे ब्रह्मांड के जैसे ही होगा।

2. यदि समानांतर ब्रह्मांड मे भौतिकी के नियम भिन्न है तो हम उसे कभी नही खोज पायेंगे। क्योंकि उन ब्रह्मांडो से संपर्क का कोई माध्यम हमारे पास नही होगा। हम, हमारे उपकरण, यान, संचार माध्यम हमारे ब्रह्मांड के नियमो से संचालित है वे समानांतर ब्रह्मांड के भिन्न नियमो से चालित होने पर कार्य ही नही कर पायेंगे।

3. समानांतर ब्रह्मांड का अर्थ है समान अंतर पर ब्रह्मांड, यह शब्द ही इन ब्रह्मांडो को हमारी पहुंच की सीमा से बाहर रख देता है।

प्रश्न 4 : क्या जीवन किसी अन्य आयाम मे  किसी अज्ञात पदार्थ से निर्मित नही हो सकता है ?

उत्तर : वर्तमान मे अंतरिक्ष के तीन आयाम तथा समय के रूप मे चौथे आयाम के अतिरिक्त अन्य आयाम की उपस्थिति के कोई प्रमाण नही मिले है। स्ट्रिंग थ्योरी के अनुसार 11 से लेकर 25 आयाम संभव है। लेकिन यह केवल अवधारणा है, इसकी प्रायोगिक या निरीक्षणो से कोई पुष्टि अब तक नही हुयी है।

1.स्ट्रिंग थोरी के कुछ वैज्ञानिको के अनुसार ये आयाम केवल क्वांटम स्तर पर ही होते है, पदार्थ के स्तर इन आयामों का अस्तित्व नही होता है।

2.यदि इन आयामो का अस्तित्व है तब भी इन आयामो मे जीवन इन 82 तत्वो से ही होगा क्योंकि भौतिकी के नियम उन अज्ञात आयामो मे भिन्न नही होंगे।

 

 

 

 

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8 विचार “परग्रही जीवन भाग 2 : कार्बन – जीवरसायन का आधार क्यों है?&rdquo पर;

    • किसी भी पदार्थ की पारदर्शिता/रंग उसकी आण्विक संरचना और उसके कारण उसके इल्केट्रानों के व्यवहार पर निर्भर करती है।
      हीरे के अणु मे कार्बन के परमाणु एक दूसरे से सिग्मा कोवेलेंट बांड(sigma covalent bonds) से बंधे होते है। हीरे के सारे इलेक्ट्रान इन कार्बन-कार्बन बंधन मे प्रयुक्त होते है जो केवल अवरक्त प्रकाश को अवशोषित करते लेकिन हमारी आंखो द्वारा देखे जाने वाले दृश्य प्रकाश को पार होने देते है।
      ग्रेफ़ाइट की संरचना मे बेंजीन रिंग की तरह के कार्बन-कार्बन बांड की तहे होती है। इस तरह के बांड मे इलेक्ट्रान अधिक मात्रा मे मुक्त होते है जो दृश्य प्रकाश को अवशोषित कर लेते है। यह वजह है कि ग्रेफ़ाइट अच्छा सूचालक भी होता है। हीरा कुचालक है।

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  1. पिगबैक: परग्रही जीवन भाग 1 : क्या जीवन के लिये कार्बन और जल आवश्यक है ? | विज्ञान विश्व

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