टेलीपोर्टेशन : विज्ञान फंतासी कथाओं मे विज्ञान


स्टार ट्रेक मे टेलीपोर्टेशन

स्टार ट्रेक मे टेलीपोर्टेशन

स्टार ट्रेक की कहानी एक अंतरिक्षयान यु एस एस एन्टरप्रायज के यात्राओं पर आधारित होती है। यह अंतरिक्षयान ब्रह्माण्ड की अनंत गहराईयों मे जीवन की खोज मे घूमता रहता है। जब इस की कहानी लिखी जा रही थी, तब अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाने और वापिस आने के तरिको पर विचार किया जा रहा था। सबसे आसान उपाय राकेटो का था लेकिन राकेट के लांच होने और “एन्टरप्रायज” तक पहुंचने या “एन्टरप्रायज” से राकेट/शटल यान के निकलने और ग्रह तक पहुंचने के फिल्मांकन की परेशानीयाँ थी। यह फिल्मांकन तकनीकी रूप से संभव था लेकिन महंगा था। इस धारावाहिक मे लगभग हर एपिसोड मे इस तरह की राकेट/शटल यात्रा दिखाना बजट की रीढ़ तोड़े जा रहा था।

एंटरप्रायज अंतरिक्ष यान से इन छोटी यात्राओं के विकल्प के रूप मे टेलीपोर्टेशन को प्रस्तुत किया गया। टेलीपोर्टेशन का फिल्मांकन आसान था, कैप्टन किर्क एक बटन दबाते ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाते।

टेलीपोर्टेशन के कुछ उदाहरण धार्मिक कथाओं मे भी मीलते है। इन कथाओ मे कई ऐसे प्रसंग है जिसमे देवता एक स्थान पर अंतर्धान हो कर दूसरे स्थान पर प्रकट होते है। थीयासोफीकल सोसायटी के मानने वालो के अनुसार कुछ सिद्ध पुरुष जिन्हे वे ’महात्मा’ कहते है, ’टेलीपोर्टेशन’ की क्षमता रखते है। परमहंस योगानंद की पुस्तक आटोबायोग्राफी आफ़ ए योगी मे भी कुछ स्थानो पर टेलीपोर्टेशन का वर्णन है।

टेलीपोर्टेशन कैसे कार्य करता है ?

स्टार ट्रेक का ट्रांसपोर्टर

स्टार ट्रेक का ट्रांसपोर्टर

मान लीजिए आपने एक बड़ी लकड़ी की आलमारी खरीदी है। समस्या यह है कि आप उसे घर कैसे ले जायें क्योकि वह आपकी कार मे नही समा रही है। आलमारी की दुकान का मालिक आपको सलाह देता है कि उसका मजदूर आलमारी के सभी नटबोल्ट को खोलकर उसे आपकी कार मे पूर्जो के रूप मे रख देगा और आपके घर मे उसे वापिस पहले जैसा जोड़ देगा। हो गया आलमारी का टेलीपोर्टेशन !

सैद्धांतिक रूप से स्टार ट्रेक (या भविष्य का) का टेलीपोर्टेशन ऐसे ही काम करता है। अंतर इतना है कि इसमे पूर्जे-पूर्जे अलग नही किये जाते, बल्कि उससे भी आगे जाते हुये एक एक परमाणु को अलग किया जाता है और दूसरी ओर इन परमाणुओं को वापिस पूर्वावस्था मे जोड़ा जाता है।

स्टार ट्रेक का ट्रांसपोर्टर
स्टार ट्रेक का ट्रांसपोर्टर एक बहुत ही जटिल प्रणाली है क्योंकि इसमे हर चीज को बार बार जांचना होता है जिससे एक सुरक्षित यात्रा हो। कोई नही चाहेगा कि किसी यात्रा मे उसकी एक बांह या एक आंख खो जाये।

इस सारी प्रणाली के ढेर सारे हिस्से है, हम सारी प्रणाली का अध्ययन नही करेंगे क्योंकि वह उबाउ होगा। हम सारी प्रणाली को सतही तौर पर समझने का प्रयास करेंगे और देखेंगे कि स्टार ट्रेक का ट्रांसपोर्टर क्या कर सकता है और क्या नही ?

स्टार ट्रेक के ट्रांसपोर्टर मे दो तरह के वस्तु विश्लेषण की क्षमता है। जीवीत वस्तुओं के लिए क्वांटम विश्लेषण(Quantum Analysis) तथा अन्य वस्तुओं के लिए आण्विक विश्लेषण (Molecular Analysis)। यु एस एस एंटरप्रायज मे क्वांटम विश्लेषण वाले 6 तथा आण्विक विश्लेषण वाले 8 ट्रांसपोर्टर है। लेकिन यह सभी ट्रांसपोर्टर दोनो तरह के विश्लेषण मे सक्षम है। इन 14 ट्रांसपोर्टर के अतिरिक्त एंटरप्रायज मे 6 आपातकालीन ट्रांसपोर्टर भी है जिनकी क्षमता सीमीत है। ये आपातकालीन ट्रांसपोर्टर विशेष है क्योंकि यह कम ऊर्जा मे भी कार्य कर सकते है।

किसी भी वस्तु के ट्रांसपोर्ट चक्र मे चार चरण है।

परमाण्विक कणो की धारा भेजने वाला यंत्र

परमाण्विक कणो की धारा भेजने वाला यंत्र

प्रथम चरण : इस चरण मे कम्प्युटर को गंतव्य स्थान के निर्देशांक दिये जाते है। कम्प्युटर गंतव्य स्थान के वातावरण और दूरी की जांच करता है साथ ही स्वयं की जांच करता है। यह जांच आवश्यक है क्योंकि स्थानांतरण की प्रक्रिया के दौरान किसी कर्मी का लापता होना शर्म की बात होगी।
द्वितीय चरण: इस चरण मे स्थानांतरण के लिए तैयार वस्तु/व्यक्ति का आण्विक/क्वांटम चित्र बनाया जाता है। वस्तु के लिए आण्विक स्तर पर विश्लेषण होता है जबकि जीवित व्यक्ति/प्राणी के क्वांटम स्तर पर।  इस चित्र मे उस व्यक्ति के शरीर के एक एक क्वार्क की स्थिति तथा अवस्था(ऊर्जा) की जानकारी होती है। इसके पश्चात उस व्यक्ति/वस्तु को परमाण्विक कणो के रूप मे तोड़ा जाता है।

तृतीय चरण: इस चरण मे परमाण्विक कणो की धारा को “डाप्लर प्रभाव क्षतिपूरक यंत्र” मे रखा जाता है। यह यंत्र परमाण्विक कणो पर होने वाले डाप्लर प्रभाव को निस्प्रभावी करता है।

अंतिम चरण : इस चरण मे परमाण्विक कणो की धारा को गंतव्य स्थान तक भेजा जाता है। वहाँ पर इन परमाण्विक कणो को चित्र के अनुसार फिर से जोड़ा जाता है।

स्टार ट्रेक के ट्रांसपोर्टर मे कुछ और विशेषतायें भी है। जैसे इसकी ए सी बी इकाई(annular confinement beam) स्थांतरित की जाने वाली वस्तु को परमाण्विक कणो मे तोड़ती तथा परमाण्विक कणो पूर्वावस्था मे जोड़ती है। ए सी बी हानीकारक पैटर्न जैसे विस्फोटक सामग्री या वायरस के स्थानांतरण मे रोकने मे समर्थ है।

क्या कारण है कि वर्तमान मे टेलीपोर्टेशन संभव नही है?
स्टार ट्रेक का ट्रांसपोर्टर आसान लगता है लेकिन वर्तमान मे ट्रांसपोर्टर बनाना आसान नही है। इसके कई कारण है।

  • 1.क्या स्थानांतरित करे? :जब किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना हो तो वास्तविक परमाण्विक कणो को भेजा जाये या उस वस्तु को निर्मित करने के लिए आवश्यक सूचना भेजी जाये ? किसी भी वस्तु के निर्माण के लिए उसके निर्माण मे लगने वाली सामग्री और स्थान की सूचना ही पर्याप्त होना चाहीये।
    • क.यदि आवश्यक सूचना को भेजा जाता है तब दूसरे स्थान पर बनने वाली वस्तु प्रतिलिपी होगी। वस्तुओ के लिए यह ठीक है लेकिन जीवित वस्तुओं के लिए ? यदि आत्मा का आस्तित्व है तो क्या प्रतिलिपी मे दूसरी आत्मा होगी ?
    • ख.यदि सूचना ही स्थानांतरित की जाये, तो वास्तविक परमाण्विक पदार्थ का क्या होगा? उसे नष्ट किया जाये या उसे ऊर्जा मे परिवर्तित कर दिया जाये ?
    • ग.यदि वास्तविक पदार्थ को स्थानांतरित किया जाये तब वस्तु स्थानांतरण की प्रक्रिया पूर्णतः सुरक्षित होना चाहीये। इस स्थानांतरण की प्रक्रिया मे किसी भी पदार्थ के क्षय के परिणाम भयावह होंगे। कोई व्यक्ति अपनी बांह या कोई और अंग खो सकता है।
  • स्थानांतरण कैसे करें 
    • यदि केवल सूचना का स्थानांतरण करना हो तो यह आसान है। इसमे स्थांतरित की जा रही वस्तु का क्वांटम/आण्विक चित्र ही भेजना है। गंतव्य स्थान पर ट्रांसपोर्टर इस चित्र के आधार पर उस वस्तु/व्यक्ति की प्रतिलिपी बना लेगा। यह फैक्स की प्रणाली के जैसे ही कार्य करेगी। इसकी गति भी प्रकाशगति के तुल्य होगी।
    • यदि सूचना के साथ पदार्थ का भी स्थानांतरण करना हो तो प्रकाशगति से स्थानांतरण नही किया जा सकता।  आइंस्टाइन के ‘सामान्य सापेक्षतावाद(Theory of General Relativity)’ के नियमों के अनुसार पदार्थ प्रकाशगति के तुल्य गति प्राप्त नही कर सकता।  गति के अतिरिक्त  गंतव्य स्थान तक पदार्थ की धारा के निर्माण मे लगने वाली तकनीक भी एक चुनौती होगी।
  • 2.हीजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत (Heisenberg’s Principle of Uncertainty):

“God does not play the dice!(भगवान पांसे नही खेलता !)”

आइंस्टाइन द्वारा हीजेनबर्ग के अनिश्चितता के सिद्धांत पर की उपरोक्त टिप्पणी तो आप जानते ही होंगे। इस सिद्धांत के अनुसार आप किसी भी परमाण्विक कण की वास्तविक स्थिति तथा अवस्था(ऊर्जा) एक साथ नही जान सकते है। जितनी अचूक आप स्थिति की गणना करेंगें, उतना ही उसकी अवस्था मे परिवर्तन आयेगा। इसके विपरीत जितनी अचूक आप अवस्था ज्ञात करेंगे, उतना ही उस कण की स्थिति मे परिवर्तन होगा। सरल शब्दो मे यदि आप कण की अचूक स्थिति की गणना करते है तो आप उसकी गति नही जान सकते। यदि आप अचूक गति की गणना करते है तो आप कण की स्थिति नही जान सकते। यदि कण की वास्तविक स्थिति और गति(ऊर्जा) ज्ञात नही हो तो उस वस्तु का क्वांटम/आण्विक चित्र लेना असंभव है। टेलीपोर्टेशन की राह मे सबसे बड़ा रोड़ा है हीजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत !

स्टार ट्रेक मे लेखको के पास इस समस्या का हल है, वे इसे हीजेनबर्ग क्षतिपूरक यंत्र (Heisenberg Compensator) कहते है। लेकिन यह यंत्र क्या है, कैसे कार्य करता है, इस बारे मे वे भी मौन है।

टेलीपोर्टेशन की राह मे समस्याएं तो है लेकिन निकट भविष्य मे कोई हल निकल आयेगा। अठाहरवी सदी मे लार्ड केल्विन ने 1855 ने कहा था

“Heavier-than-air flying machines are impossible.!(हवा से भारी कोई भी उड़न मशीन बनाना असंभव है!)”

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12 विचार “टेलीपोर्टेशन : विज्ञान फंतासी कथाओं मे विज्ञान&rdquo पर;

  1. आशीष श्रीवास्तव जी,
    आपके द्वारा प्रस्तुत लेख बहुत ही रोचक है। फिर भी टेलीपोर्टेशन (पदार्थ अंतरण /पारण) का हिन्दी भाषा में रूपान्तरण ज्यादा प्रभावी नहीं प्रतीत होता है।

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  2. पदार्थ अंतरण /पारण पर खूबसूरत विज्ञान कहानियाँ लिखी गयी हैं -एक मैंने ही लिखी थी ….अंतिम दृश्य …बहुत पढी गयी थी ..
    बहुत अच्छी तरह लिखा है आपने ………

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  3. टेलीपोर्टेशन की मैकेनिज्‍म एवं उसकी सीमाओं को गहराई से समझाती पोस्‍ट। आभार।

    ——
    कभी देखा है ऐसा साँप?
    उन्‍मुक्‍त चला जाता है ज्ञान पथिक कोई..

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