मिथक: सूर्य आग का गोला है!


हम बचपन से सुनते आये है कि सूर्य आग का गोला है। लेकिन यह असत्य है।

पहले देखते है कि ज्वलन/जलना क्या होता है!

जलना अर्थात किसी पदार्थ की आक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया। यह एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिसमे ऊर्जा मुक्त होती है। उदाहरण के लिये कोयला(कार्बन) अपने ज्वलन मे आक्सीजन के साथ मिलकर CO2(कार्बन डाय आक्साईड) बनाता है। हायड्रोजन अपने अपने ज्वलन मे आक्सीजन के साथ मिलकर H2O(जल) बनाता है। लोहे मे जो लाल रंग का जंग लगता है वह भी लोहे का ज्वलन है, इसमे लोहा आक्सीजन के साथ क्रिया कर फ़ेरस आक्साईड अर्थात लाल रंग की जंग बनाता है।

कार्बन का ज्वलन
कार्बन का ज्वलन

अब आते है सूर्य पर! सूर्य पर आग नही जल रही है, उस पर किसी पदार्थ का ज्वलन नही हो रहा है। लेकिन सूर्य मे ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है और वह उसी ऊर्जा से दीप्तिमान है।

सूर्य की दीप्ति उसकॆ केंद्र मे चल रही नाभिकिय संलयन की प्रक्रिया से उत्पन्न भीषण ऊर्जा से है। इस प्रक्रिया मे दो हायड्रोजन के परमाणु आपस मे विलिन होकर एक हिलियम परमाणु बनाते है। इस प्रक्रिया मे भीषण ऊर्जा उत्पन्न होती है। सूर्य ही नही सभी तारो मे ऊर्जा उत्पादन इसी प्रक्रिया से होता है। हायड्रोजन बम भी इसी प्रक्रिया से विनाश करता है।

हायड्रोजन संलयन से हिलियम तथा ऊर्जा का निर्माण
हायड्रोजन संलयन से हिलियम तथा ऊर्जा का निर्माण

नाभिकिय संलयन प्रक्रिया हायड्रोजन की ज्वलन प्रक्रिया से भिन्न है जिसमे हायड्रोजन आक्सीजन से रासायनिक प्रक्रिया कर यौगिक “जल” बनाती है।

 

SunMyth

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