विज्ञान का मिथकीकरण


जालंधर के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का 106वां अधिवेशन 7 जनवरी, 2019 को संपन्न हुआ। इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन की स्थापना दो अंग्रेज़ वैज्ञानिकों जे. एल. सीमोंसन और पी. एस. मैकमोहन की दूरदर्शिता और पहल पर 1914 में हुई थी। 1914 में ही इसका पहला अधिवेशन कोलकाता के एशियाटिक सोसाएटी मे हुआ…

अंधविश्वास के अंधेरों तक कैसे पहुंचे रोशनी


पिछले दिनों झारखंड में लातेहार जिले के सेमरहाट गांव में दो बच्चों की नरबलि देने का मामला सामने आया। इससे पहले असम के उदालगुड़ी जिले के कलाईगांव में एक विज्ञान शिक्षक द्वारा पड़ोस के बच्चे की बलि देने की कोशिश की चौंकाने वाली खबर आई थी। चिंता की बात यह है कि नरबलि की बात…

फिलीपींस में मिली आदि मानव की नई प्रजाति


हम आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) पिछले दस हजार सालों से एकमात्र मानव प्रजाति होने के इस कदर अभ्यस्त हो चुके हैं कि किसी दूसरी मानव प्रजाति के बारे में कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के आरंभ में मानव वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों ने हमारी इस सोच को बदलते हुए बताया कि…

इंसानी करतूतों से जैव प्रजातियों पर मंडराता लुप्त होने का खतरा


हमारा जैव मंडल एक विशाल इमारत की तरह है। हम इंसान इस इमारत के सबसे ऊपरी मंजिल पर बैठे हैं। अगर हम इस इमारत में से जीवों की कुछ प्रजातियों को मिटा भी देते हैं, तो इमारत से सिर्फ कुछ र्इंटें ही गायब होंगी, इमारत तो फिर भी खड़ी रहेगी। परंतु यदि लाखों-लाख की संख्या…

देश की स्वास्थ्य रक्षा के लिए जरूरी है जीनोम मैपिंग


हाल ही में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा एक परियोजना के तहत भारत के एक हजार ग्रामीण युवाओं के जीनोम की सिक्वेंसिंग (अनुक्रमण) किए जाने की योजना तैयार की गई है। दरअसल यह सरकारी नेतृत्व में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए चलाई जा रही एक बड़ी परियोजना का एक हिस्सा होगी, जिसके अंतर्गत लगभग…

ब्लैक होल्स खोजे तो ‘बिग बैंग’ पर उठा सवाल!


महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि मनुष्य स्वभावतः जिज्ञासु प्राणी  है तथा उसकी सबसे बड़ी इच्छा ब्रह्माण्ड की व्याख्या करना है। ब्रह्माण्ड की कई संकल्पनाओं ने मानव मस्तिष्क को हजारों वर्षों से उलझन में डाल रखा है। वर्तमान में वैज्ञानिक ब्रह्माण्ड की सूक्ष्मतम एवं विशालतम सीमाओं तक पहुंच चुके हैं। ब्रह्माण्डीय परिकल्पनाओं एवं…

सूरज को धरती पर उतारने की तैयारी


मानव विकास के लिए अधिकाधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। बिजली पर हमारी बढ़ती निर्भरता के कारण भविष्य में ऊर्जा व्यय और भी बढ़ेगा। तो इतनी ऊर्जा आएगी कहाँ से? सब जानते हैं कि धरती पर कोयले और पेट्रोलियम के भंडार सीमित हैं, ये भंडार ज्यादा दिनों तक हमारी ऊर्जा जरूरतों को पूरी नहीं कर…