नाभिकिय संलयन : भविष्य की ऊर्जा


NuclearFusion-1 नाभिकिय संलयन प्रक्रिया ब्रह्मांड मे सूर्य तथा अन्य सभी तारो की ऊर्जा का मूल है। इस प्रक्रिया को पृथ्वी पर एक लघु पैमाने पर भी अपनाने पर एक साफ़सुथरी, सस्ती तथा अनंत ऊर्जा का स्रोत मिल जायेगा। प्रस्तुत है एक अवलोकन नाभिकिय संलयन से जुड़ी आशाओं ,चुनौतियों तथा इस दिशा मे चल रहे उन प्रयोगों पर जो इस सपने को धरातल पर लाने का कार्य कर रहे है।

विखंडन तथा संलयन

विखंडन

इस प्रक्रिया मे एक न्युट्रान को तेज गति से किसी रेडीयो सक्रिय नाभिक सामान्यत: युरेनियम 235 से टकराया जाता है। इसमे लक्षित नाभिक छोटे नाभिको मे टूट जाता है और अत्यंत अधिक मात्रा मे ऊर्जा मुक्त होती है। परमाणू बम इसी सिद्धांत पर कार्य करता है, विश्व के सभी 440 नाभिकिय ऊर्जा संयंत्र विखंडन आधारित है।

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संलयन

हायड्रोजन के समस्थानिक सामान्यत: ड्युटेरियम तथा ट्रिटियम अत्याधिक दबाव और तापमान पर एक न्युट्रान तथा हिलियम का समस्थानिक बनाते है। इस प्रक्रिया मे अत्यंत उच्च मात्रा मे ऊर्जा मुक्त होती है जो कि विखंडन से उत्पन्न ऊर्जा से कई गुना अधिक होती है। हायड्रोजन बम जोकि परमाणू बम से 3000 गुना शक्तिशाली होते है, इसी नाभिकिय संलयन पर आधारित होते है।

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नाभिकिय संलयन ऊर्जा किसलिये ?

  • इसका प्राथमिक इंधन ड्युटेरियम है जिसे जल से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
  • ड्युटेरियम-ट्रिटियम द्वारा समान मात्रा मे जीवाश्म इंधन से एक करोड़ गुणा अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

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  • नाभिकिय संलयन से लंबे समय के लिये ऊर्जा प्राप्त कर सकते है जिससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित नही होती है। केवल हिलियम ही अपशिष्ट के रूप मे उत्सर्जित होती है जोकि हानिकारक नही है।
  • सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा के विपरित संलयन मौसम पर निर्भर नही है और अबाध ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

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  • अंतरिक्ष यात्राओं के लिये नाभिकिय संलयन से अबाध ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है जहाँ पर सौर ऊर्जा उपलब्ध नही है।

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संलयन ऊर्जा कैसे निर्मित होती है।

  • उष्मा : संलयन इंधन को 100,000,000 °C तापमान तक गर्म किया जाता है।
  • दबाव : इंधन पर इतना दबाव चाहीये कि इंधन के केंद्रक आपस मे जुड़ जाये।
  • ज्वलन : ज्वलन उस समय होता है जब संलयन प्रक्रियाओं से इतनी ऊर्जा निर्माण होना प्रारंभ हो जाये कि उसे बाह्य ऊर्जा की बिना जारी रखा जा सके।
  • निर्माण : एक बार ज्वलन प्रारंभ होने पर कुल उत्पादित ऊर्जा नाभिकिय विखंडन ऊर्जा के चार गुणा अधिक होती है।

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संलयन ऊर्जा सपने को साकार करना

वैज्ञानिको ने संलयन से ऊर्जा प्राप्य करने के तीन उपाय सोचे है।

चुंबकीय परिरोध

इस विधी मे प्लाजमा को चुंबकीय क्षेत्र की सहायता से नियंत्रित तथा बंधन मे रखा जाता है। सबसे प्रभावी चुंबकीय परिरोध प्रणाली टारस के आकार की होती है जो किसी डोनट के जैसे है। इसमे चुंबकीय क्षेत्र को एक वृत्त के रूप मे मोड़ा जाता है। इसमे सबसे ज्यादा आशाये टोकामाक डिजाइन पर टीकी हुयी है।

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जडत्विय परिरोध

इस विधि मे लेजर बीमो को ड्युटेरियम-ट्रिटियम पैलेट पर केंद्रित किया जाता है, जो उसकी बाह्य परतो को गर्म करता है जिसके प्रभाव से आंतरिक परतो पर दबाव बढ़ते जाता है। इंधन की परतो पर इतना अधिक दबाव आ जाता है कि संलयन प्रारंभ हो जाता है। इस विधि को तीव्र प्रज्वलन(fast ignition) भी कहते है जिसे सबसे ज्यादा प्रायोगिक विधि माना जा रहा है। नये शोध इस विधि पर हो रहे है।

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मिश्रित संलयन

इस तकनीक मे विखंडन और संलयन प्रक्रिया के मिश्रण से ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। इस रिएक्टर मे इंधर कोर को लपेटे हुये विखंडन पदार्थ की परत होती है। संलयन प्रक्रिया से न्युट्रान उत्पन्न होते है और हर न्युट्रान बाह्य परत मे नाभिकिय विखंडन करता है। इस विधि से संलयन प्रक्रिया की ऊर्जा को कई गुणा बढ़ाया जा सकता है।

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संलयन प्रक्रिया के समक्ष चुनौतियां

संलयन प्रक्रिया के लिये स्थिति निर्मित करना

सूर्य के केंद्रक मे उष्मा और गुरुत्विय दबाव हायड्रोजन नाभिको संपिडित कर भारी नाभिक बनाता है जिससे ऊर्जा मुक्त होती है। मानव निर्मित रिएक्टरो मे इस तरह की स्थितियों का निर्माण असंभव है, लेकिन वे सूर्य के तापमान का 10 गुणा अधिक तापमान निर्मित कर सकते है।

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संलयन प्रक्रिया नियंत्रण

मानव ने अनियंत्रित संलयन प्रक्रिया के द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने मे सफ़लता पायी है, लेकिन यह प्रक्रिया हायड्रोजन बम है। एक नियंत्रित संलयन प्रक्रिया का निर्माण इससे कई गुणा चुनौतिपूर्ण है। संलयन शोधकर्ता चुंबकीय क्षेत्र के निर्माण से प्लाज्मा के नियंत्रण का प्रयास कर रहे है लेकिन इसमे अभी भी कई चुनौतियाँ आ रही है।

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संलयन प्रक्रिया थामना

इस प्रक्रिया मे जो तापमान, ऊर्जा और विकिरण उत्पन्न होते है उसे धारण करने के लिये पदार्थ का निर्माण करना एक बड़ी चुनौति है। संलयन प्रक्रिया मे उत्सर्जित तीव्र गति के न्युट्रान किसी भी इमारत को एक छोटे अरसे मे ध्वस्त कर सकते है जिससे पर्यावरण मे रेडियो सक्रिय धुल फ़ैल सकती है।

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वर्तमान मे कार्यरत प्रोजेक्ट

ITER

ITER -(अंतराष्ट्रीय थर्मोन्युक्लीअर प्रायोगिक रिएक्टर) यह अमरीका, युरोपीय संघ, रूस. चीन, द कोरिया तथा भारत की संयुक्त शोध परियोजना है। यह फ़्रांस मे निर्माणाधीन है। इसमे टोकामाक चुंबकिय परिरोध के प्रयोग से 500 मेगावाट संलयन ऊर्जा निर्मित होगी।

जनरल फ़्युजन

जनरल फ्युजन यह एक नीजी कंपनी का प्रयास है, इस कंपनी की स्थापना 2002 मे ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा मे हुयी थी। इस प्रस्तावित संयत्र मे 4 मिटर व्यास का रिएक्टर होगा और यह चुंबकिय क्षेत्र द्वारा नियंत्रित संलयन प्रक्रिया का प्रयोग होगा जो प्लाज्मा के तथा तापमान बढ़ायेगा जिससे संलयन प्रक्रिया प्रारंभ हो सके।

ट्राई अल्फ़ा एनर्जी

ट्राई अल्फ़ा एनर्जी की स्थापना 1988 मे आरेंज काउंटी कैलिफोर्निया मे हुयी थी। यह कंपनी एक ऐसे रिएक्टर पर कार्य कर रही है जिसमे चुंबकीय परिरोध के प्रयोग संलयन ऊर्जा उत्पन्न होगी। यह टोकामाक से सरल डिजाइन है लेकिन पूर्णत विकसीत नही है।

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2 विचार “नाभिकिय संलयन : भविष्य की ऊर्जा&rdquo पर;

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