प्रश्न आपके, उत्तर हमारे

प्रश्न आपके, उत्तर हमारेइस चिट्ठे पर पाठक कभी कभी अपनी टिप्पणियों मे लेख सामग्री से भिन्न लेकिन उचित प्रश्न करते रहे हैं। यह मंच पाठकों को प्रश्न पूछने का अवसर प्रदान करता है।

हमारा प्रयत्न रहेगा कि इस मंच के द्वारा पाठकों की जिज्ञासा का समाधान यथासंभव किया जा सके। हम जानते है कि कुछ प्रश्नों के उत्तर हम शायद नही दे पायें लेकिन हम उत्तर देने का भरसक प्रयास अवश्य करेंगे।

कृपया अपने प्रश्न विज्ञान संबंधित ही रखें लेकिन छद्म विज्ञान संबंधित प्रश्नों का भी स्वागत है।

 नोट(20 सितंबर 2013) : इस मंच के लिये कुछ बदलाव किया जा रहा है। अभी तक सभी प्रश्नों का उत्तर टिप्पणी के रूप मे दिया जाता था, आगे से उत्तर हर सप्ताह एक लेख के रूप मे दिये जायेंगे। आप अपने प्रश्न टिप्पणी के रूप मे दे, पूरे सप्ताह के सभी प्रश्नों का उत्तर एक साथ एक लेख मे आयेंगे। 

पुराने प्रश्नों को भी एक लेख के रूप मे समेटा जायेगा। इस मंच पर इसके पूर्व पाठकों ने भी प्रश्नों के उत्तर दिये है, उनका अब भी प्रश्नों के उत्तर देने के लिये स्वागत है। उनके द्वारा दिये गये उत्तर भी लेख मे शामिल होंगे।


प्रश्न आपके, उत्तर हमारे: 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक के प्रश्नों के उत्तर

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2,902 विचार “प्रश्न आपके, उत्तर हमारे&rdquo पर;

    • यदि आपका आशय वायुमंडल की परतो से है तब वे निम्नलिखित है क्षोभमण्डल[संपादित करें]
      क्षोभमण्डल
      क्षोभमण्डल वायुमंडल का सबसे निचली परत है। इसकी ऊँचाई ध्रुवो पर 8 कि.मी. तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 कि.मी. होती है।
      समतापमण्डल
      ओजोन मण्डल
      मध्यमण्डल
      तापमण्डल
      आयनमण्डल
      बाह्यमण्डल

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  1. Sir ji, मेंरे मन में कुछ प्रशन उठते है, जो आपको पुछना का निवेदन करता हुँ
    (1) जब सुर्य का अस्तित्व न होने पर प्राणी जीवित रहेगा?
    (2)हमे पता है की सुर्य से सौर ऊर्जा को विधुत ऊर्जा मे परिवर्तन होता है,लेकिन क्या इसके अलावा हमे कई और तरीके से सौर ऊर्जा को हम विधुत ऊर्जा मे परिवर्तन कर सकते ह
    (3) सौर ऊर्जा की खोज किसने की
    (4)प्रिन्टर मे ऐसी कोनसी सिस्टम है जो प्रिन्ट होती है
    (5) रेडियो ऐक्टिव तत्व क्या है, तथा इसका प्रयोग कहाँ होता है
    (6)प्रथम रोबोट बनाने वाले वैज्ञानिक कोन थे
    (7)क्या ऐसा भी ऐनक(glasses) है जिससे आर-पार दिखाइ दे
    (8) 1kg पर टंगस्टन का क्या दर है
    (9)दुनिया मे सबसे महंगा पदार्थ कोनसा है
    (10)क्या आधुनिक निर्माण से किसी व्यक्ति मरने के पश्चात पुन:जीवित किया जा सकता है।

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    • गुरुत्वाकर्षण बल आपको पृथ्वी से बांधे जो रखता है! पृथ्वी का आकार मानव के आकार से कई गुणा बड़ा है, जिससे मानव को यह घूर्णन गति महसूस नही होती है। उदाहरण के लिये एक फ़ुटबाल पर एक चींटी को रख दें और फुटबाल को घुमायें, चिंटी नही गीरेगी।

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    • विजय : भौतिकी के कुछ अवधारणाओं के अनुसार समांतर ब्रह्माण्ड संभव है, यदि समांतर ब्रह्माण्ड है तब संभव है कि पृथ्वी की घटनायें वहा घटित हो चूकी हों।
      श्याम विवर(ब्लैक होल) के पास सब कुछ रूक जाता है, प्रकाश भी। सापेक्षतावाद के नियमो के अनुसार अत्याधिक गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्रो मे समय धीमा हो जाता है।

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  2. sARE COMMENTS PARE. ASA KOI NIYAM YA GHATNA BATAYA JA SAKTA HAI. JO MOULIK HAI? JO JO HOTA HAI, JAISE YA KAISE HOTA HAI, APNE/SCIENCE NE BATAYA. PARANTU, JO HOTAHAI, USKE PICHE KOI ENERGY TO HOGEE, BOH BHI BILKUL WITHOUT ANY DEVIATION, WITHOUT ANY CONDITION ! HUM TO USE EXPLAIN KAR RAHE HAI, KYA SCIENCE AAB TAK EK GRAM ENERGY CREATE KAR SAKE? JO HOTA HAI , WOH KIEU HOTA AUR KIEU NEHI HOTA YEH SCIENCE BATATI HAI. PAR ………”C” YEH KEYA HAI..?

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  3. गुरुजी,जब हम अपना बाल कंघी से झारते हैँ तो कंघी आवेशित होने के कारण कागज के छोटे छोटे टुकरे को आवेशित कर लेती है,लेकिन कुछ समय बाद ऐसा नहीँ होता है ?क्योँ

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    • जब आप बालो मे कंघी फेरते है तब कंघी मे विद्युत आवेश बन जाता है जो कागज के टूकड़ो को आकर्षित करता है। यह आवेश कागज के टूकड़ो या अन्य वस्तु को आकर्षित करने मे समाप्त हो जाता है इसलिये कुछ समय बाद कंघी कागज के टूकड़ो को आकर्षित नही कर पाती है।

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  4. Sir,
    (1) जब सुर्य का अस्तित्व न होने पर प्राणी जीवित रहेगा?
    (2)हमे पता है की सुर्य से सौर ऊर्जा को विधुत ऊर्जा मे परिवर्तन होता है,लेकिन क्या इसके अलावा हमे कई और तरीके से सौर ऊर्जा को हम विधुत ऊर्जा मे परिवर्तन कर सकते ह
    (3) सौर ऊर्जा की खोज किसने की
    (4)प्रिन्टर मे ऐसी कोनसी सिस्टम है जो प्रिन्ट होती है
    (5) रेडियो ऐक्टिव तत्व क्या है, तथा इसका प्रयोग कहाँ होता है
    (6)प्रथम रोबोट बनाने वाले वैज्ञानिक कोन थे
    (7)क्या ऐसा भी ऐनक(glasses) है जिससे आर-पार दिखाइ दे
    (8) 1kg पर टंगस्टन का क्या दर है
    (9)दुनिया मे सबसे महंगा पदार्थ कोनसा है
    (10)क्या आधुनिक निर्माण से किसी व्यक्ति मरने के पश्चात पुन:जीवित किया जा सकता है।

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    • mai bata deta hu vp shingh ji
      1. साधारण सी बात है !सूर्य नहीं होंगा तो ऊष्मा नहीं होंगी और आप भी जानते ह इसके बिना केसे रे बाबा
      २. जी देखिये विज्ञानं अभी विक्सित हो रहा है हम कह नहीं सकते की आगे कोंसी खोज हो जाये
      ३. नि पता
      ४. नो
      .
      .
      .
      १०. अभी तो एसा कुछ संभव नहीं है देखो भविष्य में कोई खोज हो जाये

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  5. Sir ji, मेंरे मन में कुछ प्रशन उठते है, जो आपको पुछना का निवेदन करता हुँ
    (1) जब सुर्य का अस्तित्व न होने पर प्राणी जीवित रहेगा?
    (2)हमे पता है की सुर्य से सौर ऊर्जा को विधुत ऊर्जा मे परिवर्तन होता है,लेकिन क्या इसके अलावा हमे कई और तरीके से सौर ऊर्जा को हम विधुत ऊर्जा मे परिवर्तन कर सकते ह
    (3) सौर ऊर्जा की खोज किसने की
    (4)प्रिन्टर मे ऐसी कोनसी सिस्टम है जो प्रिन्ट होती है
    (5) रेडियो ऐक्टिव तत्व क्या है, तथा इसका प्रयोग कहाँ होता है
    (6)प्रथम रोबोट बनाने वाले वैज्ञानिक कोन थे
    (7)क्या ऐसा भी ऐनक(glasses) है जिससे आर-पार दिखाइ दे
    (8) 1kg पर टंगस्टन का क्या दर है
    (9)दुनिया मे सबसे महंगा पदार्थ कोनसा है
    (10)क्या आधुनिक निर्माण से किसी व्यक्ति मरने के पश्चात पुन:जीवित किया जा सकता है।

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  6. Sir ji, में आपके लिए कुछ प्रश्न हाजिर करता हुं निवेदन है कि आप हमें बताए
    (1)फेवाकोल नामक पदार्थ में क्या क्या मिलाया जाता है
    (2)बल्ब की अपेक्षा में, ट्यूबलाइट में रोशनी क्यो सफेद होती है
    (3)दुनिया का सबसे तेज गति करने वाला कोनसा यान है
    (4)सेंसर(sensor) की खोज किसने की
    (5)हाइड्रोजन, पारा, तथा सोने की खोज किसने की थी
    (6)कोई अन्तरिक्ष यात्री को यात्रा करने के सफर में लगभग कितनी आँक्सीजन की आवश्यकता होती है।
    (8)ऐसा क्यो होता है, जब ग्रीष्म के दिनो में पानी जमीन के नीचे ठण्डा होता है, बल्कि सर्दियों के दिनो में गर्म, इसके पिछे क्या कारण है।
    (9)कुछ लोग कहते है, कि गर्मियो के दिनो में दिन बडा होता है लेकिन क्या समय भी बडा होता है
    (10)

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    • (1)फेवीकोल नामक पदार्थ में क्या क्या मिलाया जाता है?
      एथीलीन विनायल एसीटेट((Ethelene Vinyl Acetate) और गोंद
      (2)बल्ब की अपेक्षा में, ट्यूबलाइट में रोशनी क्यो सफेद होती है
      ट्युब लाईट के प्रकाश का रंग उसमे भरी गैस पर निर्भर करता है। यदि उसमे कार्बन डाय आक्साईड हो तो सफेद रंग, निआन हो तो लाल रंग का प्रकाश देता है। लेकिन बल्ब मे टंगस्टन का फिलामेंट हल्के पीले रंग का प्रकाश देता है।
      (3)दुनिया का सबसे तेज गति करने वाला कोनसा यान है
      लाकहीड SR-71 ब्लैकबर्डLockheed SR-71 Blackbird
      (4)सेंसर(sensor) की खोज किसने की
      आप का प्रश्न अधूरा है, आप किस सेंसर की बात कर रहे है, सेंसर कई तरह के होते है।
      (5)हाइड्रोजन, पारा, तथा सोने की खोज किसने की थी
      हायड्रोजन – राबर्ट बायल, पारा और सोना लंबे समय से ज्ञात धातु हैं, इनका अविष्कारक अज्ञात है।
      (6)कोई अन्तरिक्ष यात्री को यात्रा करने के सफर में लगभग कितनी आँक्सीजन की आवश्यकता होती है।
      यह उसके यात्रा के समय पर निर्भर है, औसतन एक मनुष्य एक दिन मे 550 लिटर आक्सीजन की खपत करता है।
      (8)ऐसा क्यो होता है, जब ग्रीष्म के दिनो में पानी जमीन के नीचे ठण्डा होता है, बल्कि सर्दियों के दिनो में गर्म, इसके पिछे क्या कारण है।
      यह तथ्य गलत है।
      (9)कुछ लोग कहते है, कि गर्मियो के दिनो में दिन बडा होता है लेकिन क्या समय भी बडा होता है
      समय छोटा बड़ा नही होता है। गर्मीयो मे सूर्य जल्दी उगता है और देर से डूबता है, इसलिये दिन बड़ा होता है।

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  7. Sir ji, मेरे मन में कुछ सवाल है जो आपसे पुछने की आज्ञा करता हुँ।
    (1) हमने देखा की सिंटी(ant) कभी सोती नही, लेकिन क्या है, जो कभी थकती भी नही
    (2)हमारे मंगलयान में रोबोट(Robot) का नाम क्या है।
    (3)अगर हम प्रथ्वी के अधिक गहराई में देखे तो अनन्त मे क्या हमे, पानी ही मिलेगा या कोई और पदार्थ
    (4)दोपहर के एक बजने पर प्रथ्वी कितने थीटो पर घूमती है
    (5)एक सिलिण्डर आँक्सीजन का कितने समय तक मनुष्य श्वास ले सकता है।
    (6)आज हम देख रहे है, कि हमारे वैज्ञानिक सबसे पहले किसी ग्रह की खोज मे प्रथम रोबोट को अनरिक्ष में भेज रहे है, क्या, वो रोबोट किसके कारण किसी यान को कंट्रोल कर पाता है।
    (7)किस देश मे सबसे पहले सुर्य की किरणे पडती है।
    (8)मधुमक्खी के छत्ते मे देखने पर हमे एक समान छोटे छिद्र दिखते है, ऐसा क्यो है, जो हमे एक समान छिद्र दिखने को मिलते है बल्कि असमान नही होते ऐसा क्यो
    (9) क्या वर्तमान में कोई नया तत्व ज्ञात हुआ है।
    (10)भारत मे शोध कार्य कहा पर स्थित है।
    (11)श्यानता, निर्वात, निरपेक्ष इन शब्दो को में नही समझ पा रहा हु क्रपया निवेदन है की इन शब्दो को हमे विस्तार से समझाईये।
    (12)सबसे पहले किस डाँक्टर ने शल्य किया।

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    • (1) हमने देखा की सिंटी(ant) कभी सोती नही, लेकिन क्या है, जो कभी थकती भी नही
      चिंटीयाँ आराम करती हैं!
      (2)हमारे मंगलयान में रोबोट(Robot) का नाम क्या है।
      भारत के मंगलयान अभियान में रोबोट नहीं है!
      (3)अगर हम प्रथ्वी के अधिक गहराई में देखे तो अनन्त मे क्या हमे, पानी ही मिलेगा या कोई और पदार्थ
      पृथ्वी के केंद्र में पिघला लोहा है।
      (4)दोपहर के एक बजने पर प्रथ्वी कितने थीटो पर घूमती है
      आपका प्रश्न अस्पष्ट है।
      (5)एक सिलिण्डर आँक्सीजन का कितने समय तक मनुष्य श्वास ले सकता है।
      लगभग १ घंटे!
      (6)आज हम देख रहे है, कि हमारे वैज्ञानिक सबसे पहले किसी ग्रह की खोज मे प्रथम रोबोट को अनरिक्ष में भेज रहे है, क्या, वो रोबोट किसके कारण किसी यान को कंट्रोल कर पाता है।
      अंतरिक्ष योजनों में कंप्यूटर होते है, उन्हें उनके अभियानों के लिंये प्रोग्राम किया जाता है। साथ ही उन्हें पृथ्वी से निर्देश रेडियो संकेत के रूप में भेजें जाते है। इन अंतरिक्षयानो मे हमेशा रोबोट नहीं होते है।
      (7)किस देश मे सबसे पहले सुर्य की किरणे पडती है।
      पृथ्वी गोल है, इसमें हर समय कहीं ना कहीं सूर्योदय या सूर्यास्त होते रहता है। इस प्रश्न का कोई अर्थ नहीं है।
      (8)मधुमक्खी के छत्ते मे देखने पर हमे एक समान छोटे छिद्र दिखते है, ऐसा क्यो है, जो हमे एक समान छिद्र दिखने को मिलते है बल्कि असमान नही होते ऐसा क्यो
      मधुमक्खियों एक जैसे कक्ष बनाने में सक्षम होती है, यह क्षमता उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी वंशानुगत रूप से मिलीहै।
      (9) क्या वर्तमान में कोई नया तत्व ज्ञात हुआ है।
      प्रयोगशाला में नये तत्व बनाये जाते रहते है, हाल में परमाणु संख्या 115 खोजा गया है।
      (10)भारत मे शोध कार्य कहा पर स्थित है।
      कई सारी जगह, मुँबई, दिल्ली, बैंगलोर, कलकत्ता , त्रिवेन्द्रम और भी जगहों पर।
      (11)श्यानता, निर्वात, निरपेक्ष इन शब्दो को में नही समझ पा रहा हु क्रपया निवेदन है की इन शब्दो को हमे विस्तार से समझाईये।
      इस ब्लाग में इन विषयों पर लेख है उन्हें पढीये।
      (12)सबसे पहले किस डाँक्टर ने शल्य किया।
      यह श्रेय भारतीय चिकित्सक सुश्रत को जाता है!

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  8. Sir, ट्यूबलाइट में प्रकाश का रंग हमे सफेद क्यो दिखाई देता है, लेकिन बल्ब में तो प्रकाश पीला दिखाई देता है।

    फेवीकोल नामक पदार्थ किससे बनाया जाता है?

    जुगनू रात में चमकते है, और ये प्रकाश कैसे उत्सर्जित करते है

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    • इआन डोनाल्ड (Ian Donald) ने सोनोग्राफी का आविष्कार किया है।
      इंटरनेट का अविष्कार किसी एक व्यक्ति ने नही किया है, ये सं रां अमरीका के डीपार्टमेंट आफ डीफेंस के ARPANET और DARPANET का विस्तार है। वैसे इसका श्रेय Robert E. Kahn और
      Vint Cerf को दिया जाता है। वर्तमान मे प्रचलित www (World Wide Web) के अविष्कार का श्रेय CERN के टिम बर्नेस ली को दिया जाता है।

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  9. sir ji , मेंरे मन में कुछ सवाल उठते है, जो में आपकी आज्ञा से पुछना चाहता हुँ
    (1) गणिन की कुल कितनी शाखाए है, और वह कौन कौनसी है।
    (2)ऐसी कौनसी हिन्दी पुस्तक है, जो “प्रकाश ऊर्जा” के बारे में पुरी जानकारी मिलती है।
    (3) विटामीन A B C D के अभाव में होने वाले रोगों के नाम बताए
    (4) दुनिया का सबसे लंबा साँप कोन है।
    (5) ऐसी कौनसी पेन है, जो लिखने पर रिकार्डं भी होती है।
    (6) अन्तरिक्ष में कुल मानव-निर्मित उपग्रहो की संख्या कितनी है।
    (7) क्या ऐसा भी क्षेत्र है, जहाँ मानव, जो पूरी आयु होने पर भी 10 साल के बच्चो जैसे दिखते है।
    (8) सुर्य के प्रकाश के छोटे कण फोटोन जो, एक सौर पेनल पर टकराने पर इलेक्ट्रोन कैसे उत्पन्न होते है। चित्र सहित
    (9) प्रथ्वी से ऊपर कितने किलामीटर ओक्सीजन उपस्थित है।
    (10) माना कि एक उदाहरण के रुप में, एक व्यक्ति मोटा है और वह किसी रोग के कारण पतला होता जाता है यानि की उसका शरीर घटता जाता है और वह बिल्कुल पतला हो जाता है। निम्मलिखित मे से क्या कमियाँ हो सकती है- 1,रक्त का घटना 2, कोशिकाओ की मरम्त 3, उत्तको की मरम्त।

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    • (1) गणित की कुल कितनी शाखाए है, और वह कौन कौनसी है।
      गणित की प्रमुख शाखायें : अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित, कलन इत्यादि! ये सूची संपूर्ण नही है।
      (2)ऐसी कौनसी हिन्दी पुस्तक है, जो “प्रकाश ऊर्जा” के बारे में पुरी जानकारी मिलती है।
      मेरी जानकारी मे ऐसी कोई पुस्तक नही है।
      (3) विटामीन A B C D के अभाव में होने वाले रोगों के नाम बताए
      (4) दुनिया का सबसे लंबा साँप कोन है।
      बोआ प्रजाति का टाईटनबोवा जिसकी लंबाई 13 मीटर है।
      (5) ऐसी कौनसी पेन है, जो लिखने पर रिकार्डं भी होती है।
      विज्ञान से असंबधित प्रशन , उत्तर मुझे ज्ञात नही है।
      (6) अन्तरिक्ष में कुल मानव-निर्मित उपग्रहो की संख्या कितनी है।
      अक्टूबर 2013 मे मानव-निर्मित उपग्रहो की संख्या 1071 थी।
      (7) क्या ऐसा भी क्षेत्र है, जहाँ मानव, जो पूरी आयु होने पर भी 10 साल के बच्चो जैसे दिखते है।
      नहीं। ऐसा कोई क्षेत्र नही है।
      (8) सुर्य के प्रकाश के छोटे कण फोटोन जो, एक सौर पेनल पर टकराने पर इलेक्ट्रोन कैसे उत्पन्न होते है।
      सौर पैनल पर फोटान के टकराने से इलेक्ट्रान उत्पन्न नही होते है। वे उपस्थित इलेक्ट्रान को उच्च ऊर्जा वाली कक्षा मे ले जाते है। इससे इलेक्ट्रानो का प्रवाह प्रारंभ होता है।
      (9) प्रथ्वी से ऊपर कितने किलामीटर ओक्सीजन उपस्थित है।
      लगभग 100 किमी तक लेकिन ऊंचाई बढने के साथ घनत्व कम होते जाता है।
      (10) माना कि एक उदाहरण के रुप में, एक व्यक्ति मोटा है और वह किसी रोग के कारण पतला होता जाता है यानि की उसका शरीर घटता जाता है और वह बिल्कुल पतला हो जाता है। निम्मलिखित मे से क्या कमियाँ हो सकती है- 1,रक्त का घटना 2, कोशिकाओ की मरम्त 3, उत्तको की मरम्त।
      उत्तर : तीनो संभावनायें है।

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  10. गुरुजी मेरे मन में कुछ सवाल उठते है, जो मे आपसे पुछना चाहता हुं..

    . (1) एक दिन मे मनुष्य कितनी बार श्वास लेता है
    (2) प्रशांत महासागर कि गहराई कितनी है
    (3) दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक कोन है
    (4) लगभग एक दिन में सुर्य कितनी ऊर्जा उत्सर्जित करता है
    (5) वैज्ञानिको कि सुची में सबसे आगे कौनसा देश है
    (6) क्या सर, हमारा मंगलयान मंगल की खोज में पहुंच गया होगा/ कितना समय लेगा
    (7) अल्बर्ट आइंस्टाइन का सापेक्षता के सिद्धांत क्या है
    (8) 100 वाट का एक बल्ब 400nm.वाली तरंग-दैघर्य का एकवर्णी प्रकाश उत्सर्जित करता है। बल्ब द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटोनो की संख्या की गणना कीजिए।
    (9)हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत उदाहरण देकर समझाईये।

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    • (1) एक दिन मे मनुष्य कितनी बार श्वास लेता है?
      सामान्यत: एक व्यक्ति एक मिनट मे 8-14 श्वास लेता है। एक दिन मे 1440 मिनट होते है। यदि औसतन 12 श्वास प्रतिमिनट के औसत से 12 * 1,440 = 17,280 श्वास प्रति दिन।
      (2) प्रशांत महासागर कि गहराई कितनी है.
      अधिकतम गहराई 10,911 मीटर
      (3) दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक कोन है
      किसी एक वैज्ञानिक का नाम नही लिया जा सकता।
      (4) लगभग एक दिन में सुर्य कितनी ऊर्जा उत्सर्जित करता है
      3.3×10^31 J
      (5) वैज्ञानिको कि सुची में सबसे आगे कौनसा देश है
      स. राज्य अमरीका के वैज्ञानिको ने सबसे ज्यादा नोबेल जीते है।
      (6) क्या सर, हमारा मंगलयान मंगल की खोज में पहुंच गया होगा/ कितना समय लेगा
      मंगलयान सितंबर 2014 तक मंगल तक पंहुचेगा।
      (7) अल्बर्ट आइंस्टाइन का सापेक्षता के सिद्धांत क्या है
      इस ब्लाग पर इस विषय पर कुछ लेख है उन्हे देखें।
      (8) 100 वाट का एक बल्ब 400nm.वाली तरंग-दैघर्य का एकवर्णी प्रकाश उत्सर्जित करता है। बल्ब द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटोनो की संख्या की गणना कीजिए।
      400nm.वाली तरंग-दैघर्य का एकवर्णी प्रकाश के फोटानो की ऊर्जा
      Ephoton = h c / lambda
      = (6.63 x 10‍^-34 J s) x (3.00 x 10‍^8 m/s)/ 400 x 10^-9 m
      अब 100 watt के बल्ब द्वारा एक सेकंड मे 100 J ऊर्जा का उत्सर्जन होगा, मान लेते है इस ऊर्जा के लिये N फोटान चाहीये होंगे
      100 J=N * (6.63 x 10‍^-34 J s) x (3.00 x 10‍^8 m/s)/ 400 x 10^-9 m
      N= 100 J * 400 x 10^-9 m/((6.63 x 10‍^-34 J s) x (3.00 x 10‍^8 m/s))
      (9)हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत उदाहरण देकर समझाईये।
      इस ब्लाग पर इस विषय पर कुछ लेख है उन्हे देखे।

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  11. (श्रीमान कृपया ये बताएं कि यदि हमें ग्रहों सितारों का प्रत्यक्ष दर्शन करना हो तो दिल्ली में कौन सी जगह पर जाएँ जो ऑब्जर्वेटरी के जैसे दिखातें हैं )

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    • परमाणु (एटम) किसी तत्व का सबसे छोटा भाग है, जिसमें उस तत्व के रासायनिक गुण निहित होते हैं। परमाणु के केन्द्र में नाभिक (न्यूक्लिअस) होता है जिसका घनत्व बहुत अधिक होता है। नाभिक के चारो ओर ऋणात्मक आवेश वाले इलेक्ट्रान चक्कर लगाते रहते हैं जिसको इलेक्ट्रान घन (एलेक्ट्रान क्लाउड) कहते हैं। नाभिक, धनात्मक आवेश वाले प्रोटानों एवं अनावेशित (न्यूट्रल) न्यूट्रानों से बना होता है। जब किसी परमाणु में इलेक्ट्रानों की संख्या उसके नाभिक में स्थित प्रोटानों की संख्या के समान होती है तब परमाणु विद्युत दृष्टि से अनावेशित होता है; अन्यथा परमाणु धनावेशित या ऋणावेशित ऑयन के रूप में होता है।

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    • ABS – Anti-lock Braking System : यह कार चलाते समय ब्रेक लगाने पर कार को रपटने से बचाने के लिये होता है। इसमे कार के पहीये एक साथ अचानक स्थिर नही होते है।
      ASTC- Active Skid and Traction Control : यह भी ABS जैसा ही है लेकिन इसमे नियंत्रण कंप्युटर द्वारा किया जाता है।

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    • कोई भी आकाशीय पिंड स्थिर नही रहता है। हर पिंड अपनी दूरी पर घूर्णन करता है, उसके घूर्णन की दिशा मे उसके निर्माण के बाद परिवर्तन नही होता है। पृथ्वी के घूर्णन की दिशा उसके निर्माण के समय की परिस्थितियों के कारण निर्धारित हुयी है और उसमे कोई परिवर्तन नही आया है। यह दिशा पश्चिम से पूर्व है।
      यही नियम पृथ्वी की सूर्य की परिक्रमा दिशा पर भी लागू होता है।

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  12. hum jante hai ki kisi v do vectors a aur b ka cross product c =a×b =|a||b|sin(thita) = ek vector quantity hota hai aur
    dot product d = a.b= |a||b|cos(thita) = ek scalar quantity hota hai
    eska mtlb ki c ek aisi vector quantity hai jo a ke b ke sath parallel component ko b se multiply krne se prapt hoti hai aur d ek aisi scalar quantity hai jo a ke b ke sath perpendicular component ko b se multiply krne se prapt hota hai.pr aisa ku hai ki ek hi vector a ke alag alag direction ke components ko ek hi vector b ke sath multiply krne pr 1 smy vector to 1 smy scalar quantity prapt hota hai?

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  13. सर अगर कोइ अत्यन्त साधारण (साधारण से बहुत नीचे) स्तर कैलेज से ज्ञान प्राप्त व्यक्ति आइन्सटीन के theory of relatively कि तरह कोइ महान theory खोज लेता है(सोच लेता है) तो दुनिया के सामने इसको प्रस्तुत करने के लिये क्या कोइ रास्ता है?
    अगर उसकी theory पुरी तरह सही है तो आपको क्या लगता है दुनिया इस theory को स्वीकर करेगी?

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    • यदि आप कोई सिधांत प्ररित करते है तो उसे आप कोई भी विश्वविद्यालयों में प्रस्तुत कर सकते है , हा पहले उस सिधांत का कॉपीराइट प्राप्त कर लेना
      और दुनिया के स्वीकार करने की बात ५०-५०% है कुछ स्वीकारेंगे और कुछ नहीं . यदि सिधांत सही हो तो अन्यथा कोई भी नहीं स्विकरेंगा .

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    • आकाश में संध्या समय पूर्व दिशा में तथा प्रात:काल पश्चिम दिशा में, वर्षा के पश्चात् लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला, तथा बैंगनी वर्णो का एक विशालकाय वृत्ताकार वक्र कभी-कभी दिखाई देता है। यह इंद्रधनुष कहलाता है। वर्षा अथवा बादल में पानी की सूक्ष्म बूँदों अथवा कणों पर पड़नेवाली सूर्य किरणों का विक्षेपण (डिस्पर्शन) ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगों का कारण है। इंद्रधनुष सदा दर्शक की पीठ के पीछे सूर्य होने पर ही दिखाई पड़ता है। पानी के फुहारे पर दर्शक के पीछे से सूर्य किरणों के पड़ने पर भी इंद्रधनुष देखा जा सकता है।

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    • प्रतिलिप्यधिकार या कॉपीराइट बौद्धिक संपदा का एक रूप है. जॊ एक मूल कृति के लेखक कॊ प्रकाशन, वितरण और अनुकूलन का निश्चित समय अवधि के लिए , विशेष अधिकार देता है।
      प्रतिलिप्यधिकार या कॉपीराइट किसी चीज के वर्णन में हैं। यदि आप कोई अच्छी कहानी लिखें, या कोई गाना संगीत-बद्ध करें, या पेन्टिंग करे तो यह किसी चीज़ का वर्णन होगा। उसमें आपका प्रतिलिप्यधिकार होगा। यदि उसे प्रकाशित करें तो कोई और उसे आपकी अनुमति के बिना प्रयोग नही कर सकता है।
      वैज्ञानिक खोजो और आविष्कारो के लिये पेटेंट होता है। यह कापीराईट से भिन्न है। हर देश मे कापीराईट और पेटेंट की प्रक्रिया भिन्न है।
      पेटेण्ट या एकस्व किसी देश द्वारा किसी अन्वेषणकर्ता को या उसके द्वारा नामित व्यक्ति को उसके अनुसन्धान को सार्वजनिक करने के बदले दिए जाने वाले अनन्य अधिकारों का समूह को कहते है। यह एक निश्चित अवधि के लिये दिया जाता है।
      पेटेण्ट प्रदान करने की प्रक्रिया, पेटेण्टार्थी द्वारा पूरा की जाने वाली शर्तें तथा उक्त अधिकारों का प्रभावक्षेत्र एक देश से दूसरे देश में अलग होते हैं। पेटेण्ट कानून के अन्तर्गत, पेटेन्ट-धारक को निश्चित एक मात्र अधिकार उत्पादन, विक्रय एवं प्रयोग के सम्बन्ध में कुछ निर्धारित वर्षों के लिए प्राप्त होता है: वैधानिक रूप से, एक पेटेण्ट-प्राप्ति यह अधिकार प्रदान नहीं करती कि किसी खोज का प्रयोग अथवा विक्रय किया जाए, परन्तु यह दूसरे को ऐसा करने से रोकती है। एक व्यक्ति अथवा कम्पनी पेटेण्ट भंग के लिये दोषी होंगे यदि वे इसका प्रयोग करते हैं, यदि वह इसे अपने प्रयोग हेतु चिन्हित करता है; यदि वह एक भाग क्रय करता है तथा दूसरे में मिश्रित कर लेता है जिससे यह भंग होती है।

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    • हमें पृथ्वी का घुमना महसूस नहीं होता क्योंकि
      १.पृथ्वी अपने साथ सारे वायुमंडल और हम सभी को साथ लेकर घुमती है!
      २.पृथ्वी का आकार हमारे आकार से बहत अधिक है।

      लेकिन पृथ्वी का घूमने के प्रभाव को हम सूर्य, चंद्रमा और तारों का पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होने से पता कर सकते है क्योंकि पृथ्वी के घुमने की दिशा पश्चिमे पूर्व है!

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  14. सर,
    मुझे आपकी website बहुत पसंद आई है। और इसमें सबसे अच्छी बात ये है कि, कोई भी विज्ञान के topic पर किसी भी तरह का कोई पृश्न पूछ सकता है। और आप लगभग सभी पृश्नो के उत्तर देते हों। यह अमुल्य ज्ञान देने के लिए मैं अपका अभार व्याकत करता हूं। और इस विषय पर मैं भी आपसे १ पृश्न पूछना चाहता हूं।

    पृश्न – जब कोई वैज्ञानिक कोई theoretical खोज करता है जैसे Big Bang, तो वह अपनी उस खोज को लिखकर proof करता है और इसका कोई प्रायोगिक प्रमाण नहीं होता और मुझे MPCOST bhopal में ये बताया गया है की, जिसका कोई प्रायोगिक प्रमाण ना हो उसे हम patent नहीं करा सकते, तो वैज्ञानिक आपनी इस खोज patent जैसी मान्यता प्राप्त कैसे कराते है? और उस मान्यता को हम क्या बोलते हैं? कृपया कर मुझे detail में बतायें यह मेरे लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    Mahesh bhadoriya
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    • पेटेंट किसी आइडीये का भी कराया जा सकता है!
      पेटेंट आविष्कारों के लिए दिया जाता है। ‘आविष्कार’ का अर्थ उस प्रक्रिया या उत्पाद से है, जो कि औद्योगिक उपयोजन (Industrial application) के योग्य है। अविष्कार नवीन एवं उपयोगी होना चाहिये तथा इसको उस समय की तकनीक की जानकारी में अगला कदम होना चाहिए। यह आविष्कार उस कला में कुशल व्यक्ति के लिए स्पष्ट (Obvious) भी नहीं होना चाहिये।
      आविष्कार को पेटेंट अधिनियम की धारा 3 के प्रकाश में भी देखा जाना चाहिये । यह धारा परिभाषित करती है कि क्या आविष्कार नहीं होते हैं । किसी बात को आविष्कार तब तक नहीं कहा जा सकता है जब तक वह नवीन न हो । यदि किसी बात का पूर्वानुमान किसी प्रकाशित दस्तावेज के द्वारा किया जा सकता था या पेटेंट आवेदन के प्रस्तुत करने के पूर्व विश्व में और कहीं प्रयोग किया जा सकता था तो इसे नवीन नहीं कहा जा सकता। यदि कोई बात सार्वजनिक क्षेत्र में है या पूर्व कला के भाग की तरह उपलब्ध है तो उसे भी आविष्कार नहीं कहा जा सकता।

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    • आपको सबसे पहले एक बड़े से पंखे की आवश्यकता होगी जो पवन द्वारा घूम सके। इस पंखे के लिये जगह भी ऐसी चाहीय जहाँ हवा निर्बाध रूप से बह सके।
      इस पंखे से किसी विद्युत जनरेटर की मोटर को घूमाया जाये तो विद्युत उत्पन्न की जा सकती है। इसी तरह से जल प्रवाह से भी विद्युत बनायी जा सकती है।

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    • पवन ऊर्जा बहती वायु से उत्पन्न कि गई उर्जा को कहते है| वायु एक नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत है| पवन ऊर्जा बनाने के लिये हवादार जगहो पर पवन चक्कियो को लगाया जाता है, जिनके द्वारा वायु की गतिज उर्जा यान्त्रिक उर्जा मे परिवर्तित हो जाती है| इस यन्त्रिक ऊर्जा को जनरेटर की मदद से विद्युत ऊर्जा मे परिवर्तित किया जा सकता है|
      पवन ऊर्जा ( wind energy ) का आशय वायु से गतिज ऊर्जा को लेकर उसे उपयोगी यांत्रिकी अथवा विद्युत ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करना है|

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    • सौर पैनल फोटोवोल्टिक प्रभाव (यह प्रकाश-विद्युत् प्रभाव है) के माध्यम से विद्युत् उत्पादन करने के लिए सूर्य से प्राप्त प्रकाश ऊर्जा (फोटॉन) का उपयोग करते हैं. एक मॉड्यूल का संरचनात्मक (भार वहन करने वाले) सदस्य या तो शीर्ष परत (अधिस्तर) या पिछला स्तर (अधःस्तर) हो सकता है. अधिकांश मॉड्यूल वेफ़र-आधारित क्रिस्टलीय सिलिकॉन सेल या कैडमियम टेल्युराइड या सिलिकॉन आधारित एक पतली-झिल्ली वाली सेल का प्रयोग करती हैं. क्रिस्टलीय सिलिकॉन, जिसे आमतौर पर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्युलों में वेफ़र के रूप में प्रयोग किया जाता, सिलिकॉन से प्राप्त होता है, जो आम तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला अर्द्ध-चालक होता है.

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      • भैया, अब सब्र का बाँध और नहीं सम्भाला जा रहा। एक बात बतलाएँ लोगों द्वारा ज्योतिष शास्त्र को ज्योतिष विज्ञान, वास्तु शास्त्र को वास्तु विज्ञान और सामाजिक शास्त्र को सामाजिक विज्ञान कहना गलत है क्या ?

        हम जानते भी हैं और मानते भी हैं कि कुछ कारणों से भौतिकी की व्यापकता सबसे अधिक है या यूँ कहें जो भी है। वह भौतिकी का हिस्सा है। परन्तु कृपया कर भौतिक विज्ञान को ही विज्ञान न समझे।

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      • वास्तु , ज्योतिष दोनो विज्ञान नहीं है! किसी भी विषय को विज्ञान होने के लिये वैज्ञानिक विधी का पालन करना चाहिये!
        विज्ञान, प्रकृति का विशेष ज्ञान है। यद्यपि मनुष्य प्राचीन समय से ही प्रकृति संबंधी ज्ञान प्राप्त करता रहा है, फिर भी विज्ञान अर्वाचीन काल की ही देन है। इसी युग में इसका आरंभ हुआ और थोड़े समय के भीतर ही इसने बड़ी उन्नति कर ली है। इस प्रकार संसार में एक बहुत बड़ी क्रांति हुई और एक नई सभ्यता का, जो विज्ञान पर आधारित है, निर्माण हुआ।
        ब्रह्माण्ड के परीक्षण का सम्यक् तरीका भी धीरे-धीरे विकसित हुआ। किसी भी चीज के बारे में यों ही कुछ बोलने व तर्क-वितर्क करने के बजाय बेहतर है कि उस पर कुछ प्रयोग किये जांय और उसका सावधानी पूर्वक निरीक्षण किया जाय। इस विधि के परिणाम इस अर्थ में सार्वत्रिक हैं कि कोई भी उन प्रयोगों को पुनः दोहरा कर प्राप्त आंकडों की जांच कर सकता है।
        सत्य को असत्य व भ्रम से अलग करने के लिये अब तक आविष्कृत तरीकों में वैज्ञानिक विधि सर्वश्रेष्ठ है। संक्षेप में वैज्ञानिक विधि निम्न प्रकार से कार्य करती है:
        (१) ब्रह्माण्ड/भौतिक जगत के किसी घटक या घटना का निरीक्षण करिए।
        (२) एक संभावित परिकल्पना (hypothesis) सुझाइए जो प्राप्त आकडों से मेल खाती हो।
        (३) इस परिकल्पना के आधार पर कुछ भविष्यवाणी (prediction) करिये।
        (४) अब प्रयोग करके भी देखिये कि उक्त भविष्यवाणियां प्रयोग से प्राप्त आंकडों से सत्य सिद्ध होती हैं या नहीं। यदि आकडे और प्राक्कथन में कुछ असहमति (discrepancy) दिखती है तो परिकल्पना को तदनुसार परिवर्तित करिये।
        (५) उपरोक्त चरण (३) व (४) को तब तक दोहराइये जब तक सिद्धान्त और प्रयोग से प्राप्त आंकडों में पूरी सहमति (consistency) न हो जाय।
        कोई भी परिकल्पना (hypothesis) इस वैज्ञानिक जाँच पर खरी नहीं उतरे उसे विज्ञान नहीं कह सकते!
        किसी वैज्ञानिक सिद्धान्त या परिकल्पना की सबसे बडी विशेषता यह है कि उसे असत्य सिद्ध करने की गुंजाइश (scope) होनी चाहिये। जबकी धार्मिक/क्षद्म-विज्ञान की मान्यताएं ऐसी होतीं हैं जिन्हे असत्य सिद्ध करने की कोई गुंजाइश नहीं होती।

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      • भैया, आपने जो बात कही है उसे वास्तु / ज्योतिष शास्त्र पूरा करता है या नहीं….! इस विषय पर क्या आपने निष्पक्ष विचार किया हैं ? हम आपकी सिर्फ इस बात से दुखी हैं कि आप कहते भी हैं कि यह छद्म विज्ञान है। और दूसरी तरफ कहते हैं कि इसका विज्ञान से कोई सम्बन्ध नहीं है। यह कैसे सम्भव हो सकता है। गुरुत्वाकर्षण बल भी छद्म बल है और वह भौतिकी का हिस्सा है। तो क्या हम गुरुत्वाकर्षण बल को बल की श्रेणी से हटा देते हैं ? नहीं न

        विज्ञान केवल वैज्ञानिक पद्धति है। समझने और स्वीकार करने की। आपने तो केवल एक ही पद्धति (अरस्तु द्वारा प्रयोग में लाइ जाने वाली पद्धति) को समझाया है। विज्ञान आज कई तरह की विधियों का अनुसरण कर रहा है। आपने जो विधि बतलाई है उस विधि का भी वास्तु शास्त्र अनुपालन करता है। वास्तु शास्त्र में प्रकाश, वायु और जल तीनों ऊर्जाओं का अध्ययन किया जाता है। और दूसरा घटक है वह स्थान / स्थिति जहाँ पर मकान या महल बनाना है। और ऐसा कदापि मत सोचियेगा कि हमने शब्दों द्वारा वास्तु को विज्ञान का चोला पहना दिया है।

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      • मैने जो विज्ञान की परिभाषा दी है वह मेरी नही है, यह वैज्ञानिको द्वारा मानी हुयी है।
        ज्योतिष या वास्तु इस परिभाषा को पूरा नही करता है। पूर्ण विराम!
        क्षद्म विज्ञान अर्थात झूठा विज्ञान! “क्षद्म विज्ञान” का अर्थ है कि इन सभी ने विज्ञान का भेष ओड़ने का प्रयास किया है लेकिन वे विज्ञान नही है।

        आपने कैसे मान लिया कि गुरुत्वाकर्षण एक क्षद्म बल है ? क्या उसके प्रभाव को मापा नही जा सकता है, क्या उसके प्रभावो की भविष्यवाणी नही की जा सकती है? गुरुत्वाकर्षण बल की गणना या उसके सिद्धांत से भविष्यवाणी संभव नही होती तो मंगलयान पृथ्वी से बाहर ही नही जा पाता।

        आप अपनी मान्यता बनाये रखने स्वतंत्र है लेकिन मै हमेशा विज्ञान के द्वारा प्रमाणित और मान्य तथ्य ही सामने रखुंगा।

        “Extraordinary claims require extraordinary evidence” – Carl Sagan

        यदि आप मानते है कि ज्योतिष और वास्तु विज्ञान है तो विज्ञान की कसौटी पर सिद्ध किजीये! मैने वैज्ञानिक सिद्धांत होने के लिये आवश्यक शर्ते पहले ही बता दी है। उनका प्रायोगिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापन आवश्यक होता है। स्ट्रींग थ्योरी को भी विज्ञान नही माना जाता है क्योंकि उसे प्रायोगिक रूप से सत्यापित नही किया जा सकता और उसके द्वारा भविष्यवाणी संभव नही है।
        हिग्स बोसान की खोज होने से पहले उसे भी उस समय तक एक कल्पना ही माना जाता था जब तक उसे प्रायोगिक रूप से खोज नही लिया गया!

        इसे पढें
        http://rationalwiki.org/wiki/Astrology
        http://rationalwiki.org/wiki/Pseudoscience

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      • भैया, BSc. की पुस्तक से : आभासी बल = वास्तविक बल + छद्म बल
        छद्म बल को बल की श्रेणी में रखा जाता है। चूँकि इस परिस्थिति में न्य़ूटन के गति के नियम लागू नहीं होते हैं। और यह अजड़त्वीय निर्देशित तंत्र में लगता है। इसलिए इसे ज्ञात करने के कोई मायने नहीं रह जाते। कक्षा-१२ वी. की पुस्तकों को पड़ने से लगता है कि गुरुवाकर्षण बल ही छद्म बल है। क्योंकि जब लिफ्ट नीचे की ओर जाती है तब दोनों (गुरुत्वाकर्षण और छद्म) बल एक ही दिशा में लगते हैं। यही मेरे भ्रम का कारण बना था। और हमने १२ वी. तक ही भौतिकी पढ़ी है।

        “लेकिन मै हमेशा विज्ञान के द्वारा प्रमाणित और मान्य तथ्य ही सामने रखुंगा।” इस कथन पर आपको मेरे सलाह है कि
        1. आपको मान्यता को मान्यता की तरह लिखना और समझाना चाहिए। ताकि लोगों को यह स्पष्ट हो जाए कि यह अपूर्ण कार्य है और इस विषय पर आगें कार्य किया जा सकता है।
        2. यदि आप सच में मानते हैं कि उक्त परिभाषाएँ, तथ्य, सिद्धांत और नियम वैज्ञानिकों द्वारा मान्य हैं तब आपको चर्चा से अपना पल्ला नहीं झाड़ना चाहिए। यह अविश्वास की निशानी है।

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      • १.मान्यता और तथ्य मे अंतर होता है। गुरुत्वाकर्षण बल एक तथ्य है, क्योंकि वह विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरता है। उसे प्रयोगो से प्रमाणित किया जा चूका है और सिद्धांतो के आधार पर सटिक गणना द्वारा पूर्वानुमान लगाते जा सकते है। कोई भी सिद्धांत वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरे मै उसे विज्ञान मानता हूं!
        २. चर्चा से मै कभी पीछे नही हटता लेकिन धार्मिक/सांस्कृतिक मान्यताये सोच पर हावी हो जाये तो मै चर्चा नही करता क्योंकि ये मान्यताये आंखो पर एक ऐसी पट्टी बांध देती है जिसके आगे कुछ भी देख पाना मुश्किल हो जाता है।
        ज्योतिष और वास्तु दोनो पर प्रश्न उठाते हुये इतनी सारी सामग्री दे सकता हुं जिन्हे पढने मे हफ्तो महीने लग जाये लेकिन जो इन पर विश्वास करता है, इस सारी सामग्री को किसी ना किसी कुतर्क से दरकिनार कर देगा। मेरे साथ कई बार हो चुका है।

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      • विद्युत जनित्र ( एलेक्ट्रिक जनरेटर ) एक ऐसी युक्ति है जो यांत्रिक उर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने के काम आती है। इसके लिये यह प्रायः विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (electromagnetic induction) के सिद्धान्त का प्रयोग करती है। विद्युत मोटर इसके विपरीत विद्युत उर्जा को यांत्रिक उर्जा में बदलने का कार्य करती है । विद्युत मोटर एवं विद्युत जनित्र में बौत कुछ समान होता है और कई बार एक ही मशीन बिना किसी परिवर्तन के दोनो की तरह कार्य कर सकती है।
        विद्युत जनित्र, विद्युत आवेश को एक वाह्य परिपथ से होकर प्रवाहित होने के लिये वाध्य करता है। लेकिन यह आवेश का सृजन नहीं करता। यह जल-पम्प की तरह है जो केवल जल-को प्रवाहित करने का कार्य करती है, जल पैदा नहीं करती।
        विद्युत जनित्र द्वारा विद्युत उत्पादन के लिये आवश्यक है कि जनित्र के रोटर को किसी बाहरी शक्ति-स्रित की सहायता से घुमाया जाय। इसके लिये रेसिप्रोकेटिंग इंजन, टर्बाइन, वाष्प इंजन, किसी टर्बाइन या जल-चक्र (वाटर्-ह्वील) पर गिरते हुए जल , किसी अन्तर्दहन इंजन , पवन टर्बाइन या आदमी या जानवर की शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।
        किसी भी स्रोत से की गई यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करना संभव है। यह ऊर्जा, जलप्रपात के गिरते हुए पानी से अथवा कोयला जलाकर उत्पन्न की गई ऊष्मा द्वारा भाव से, या किसी पेट्रोल अथवा डीज़ल इंजन से प्राप्त की जा सकती है। ऊर्जा के नए नए स्रोत उपयोग में लाए जा रहे हैं। मुख्यत:, पिछले कुछ वर्षों में परमाणुशक्ति का प्रयोग भी विद्युत्शक्ति के लिए बड़े पैमाने पर किया गया है, और बहुत से देशों में परमाणुशक्ति द्वारा संचालित बिजलीघर बनाए गए हैं। ज्वार भाटों एवं ज्वालामुखियों में निहित असीम ऊर्जा का उपयोग भी विद्युत्शक्ति के जनन के लिए किया गया है। विद्युत्शक्ति के उत्पादन के लिए इन सब शक्ति साधनों का उपयोग, विशालकाय विद्युत् जनित्रों द्वारा ही हाता है, जो मूलत: फैराडे के ‘चुंबकीय क्षेत्र में घूमते हुए चालक पर वेल्टता प्रेरण सिद्धांत पर आधारित है।
        फ़ैराडे का यह सिद्धांत निम्नलिखित रूप में व्यक्त किया जा सकता है :
        ‘यदि कोई चालक किसी चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाए, तो उसमें एक वि.वा.ब. (विद्युत् वाहक बल) की उत्पत्ति होती है; और संवाहक का परिपथ पूर्ण होने की दशा में उसमें धारा का प्रवाह भी होने लगता है’
        इस प्रकार विद्युत् शक्ति के जनन के लिए तीन मुख्य बातों की आवश्यकता है :
        १. चुंबकीय क्षेत्र, जिसमें चालक घुमाया जाए,
        २. चालक तथा
        ३. चालक को चुंबकीय क्षेत्र में घुमानेवाली यांत्रिक शक्ति।

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  15. सर, गुरुत्वाकृषण बल क्या है, ये किसके द्वारा लगाया जाता है।इसके तकनीकी कारण क्या है। क्या हम कृत्रिम गुरुत्वाकृषण बल बना सकते है। क्या पृथ्वी के गुरुत्वाकृषण बल को कम या ज्यादा किया जा सकता है?

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    • विश्व का प्रत्येक कण प्रत्येक दूसरे कण को अपनी ओर आकर्षित करता रहता है। दो कणों के बीच कार्य करनेवाला आकर्षण बल उन कणों की संहतियों के गुणनफल का (प्रत्यक्ष) समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग का व्युत्क्रमानुपाती होता है। कणों के बीच कार्य करनेवाले पारस्परिक आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) तथा उससे उत्पन्न बल को गुरुत्वाकर्षण बल (Force of Gravitation) कहा जाता है। न्यूटन द्वारा प्रतिपादित उपर्युक्त नियम को “न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम” (Law of Gravitation) कहते हैं। कभी-कभी इस नियम को “गुरुत्वाकर्षण का प्रतिलोम वर्ग नियम” (Inverse Square Law) भी कहा जाता है।
      कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण बल बनाना संभव हो सकता है लेकिन अभी तक उसे बनाया नही जा सका है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को कम ज्यादा नही कर सकते है।

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    • ्बिजली की खोज कीसी एक व्यक्ति ने नही की है. इस ऊर्जा से मानव प्राग ऐतिहासीक काल से परिचित है, लेकिन वर्तमान युग मे बिजली के प्रायोगिक उपयोग के लिये बेंजामीन फ्रैंकलीन, निकोला टे्स्ला, एडीसन, मैक्स्वेल, माईकल फैराडे (सूची अधूरी है)इत्यादि को श्रेय दे सकते है.

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    • किसी भी वस्तु(ठोस, जल, वायु) का रंग उसके कणो द्वारा परावर्तित प्रकाश के रंग पर निर्भर होता है. सामान्य वायु के कण कोई भी प्रकाश रंग का परावर्तन नही करते है. एक कारण उसके कणो के घनत्व का बहुत कम होना है. लेकिन कुछ गैस जैसे क्लोरीन के कण पीले-हरे रंग का परावर्तन करते है इसलिये वह पीले हरे रंग की दिखायी देती ्है

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  16. पिगबैक: प्रश्न आपके, उत्तर हमारे – avijitnews.com

  17. हम जानतें हैं कि किसी विद्धुत चालक मे विद्धुत प्रवाह उसमे मौजुद free electrons के प्रवाह को कहते हैं।लेकिन इस कारन तो एक दिन उस विद्धुत चालक के सभी free electrons समाप्त हो जाने चाहिए और वह विद्धुत चालक विद्धुत अचालक मे बदल जाना चाहिए।क्या एसा सच मे होता है?यदि नहीं तो क्युं?

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    • दैनिक जीवन में आपको कैलकुलस का उपयोग नज़र नहीं आयेगा लेकिन आप जितने भी उपकरण प्रयोग कर रहे है जैसे माइक्रोवेव, मोबाइल, विद्युत, पुल निर्माण, इमारत निर्माण हर जगह कैलकुलस का प्रयोग होता है! उदाहरण के लिये २ किमी दूरी पर स्थान के मध्य विद्युत तार की लंबाई २ किमी से ज़्यादा होगी क्योंकि विद्युत खंबो के मध्य तार लटकते रहता है, इस लंबाई की गणना कैलकुलस से होती है!

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    • इसके लिये बहुत से कारक है! पृथ्वी और मंगल के मध्य की दूरी एक जैसी नही रहती है। इन दोनो के मध्य की दूरी सबसे कम उस समय होती है जब दोनो सूर्य के एक ही ओर होते है। इस अवस्था मे पृथ्वी से मंगल जाने मे वर्तमान के राकेटो को छह महीने से एक साल तक का समय लग जाता है। हमारा मंगलयान नौ महीने का समय लेगा।

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    • प्रियम , द्रव्यमान(mass) अर्थात पदार्थ की मात्रा! यह हर जगह समान होती है, किसी १ किग्रा वस्तु का द्रव्यमान पृथ्वी , चंद्रमा, सूर्य हर जगह १ किग्रा ही होगा! जबकि भार(weight) किसी वस्तु पर लगाया गया गुरुतव बल है, इसे न्युटन/मीटर में मापते है! भार बदलते रहता है, किसी वस्तु का भार चंद्रमा पर पृथ्वी की तुलना में छठा भाग रह जायेगा!

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  18. मैं यह H.C. Verma के किताब से यह जानता हूँ
    कि कैसे
    dt’=dt/√{1-(v^2/c^2)
    पर इस किताब मे सिर्फ इसी equation को prove
    कर और सभी equation जैसे t’=t/√{1-(v^2/c^2)},
    L’=L/√{1-(v^2/c^2)} और सभी इस तरह के
    equations को सही मान लिया गया है।
    क्या वास्तव मे सिर्फ dt”=dt/√{1-(v^2/c^2)}
    equation को सही देखकर ही और सभी equation
    जैसे t’=t/√{1-(v^2/c^2)},
    L’=L/√{1-(v^2/c^2)} और सभी इस तरह के
    equations को सही माना गया है(theory of
    relativity मे)?
    अगर नहीं तो यह बताए कि कैसे t’=t/√{1-(v^2/
    c^2)},
    L’=L/√{1-(v^2/c^2)}

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  19. मैं यह H.C. Verma के किताब से यह जानता हूँ कि कैसे
    dt’=dt/√{1-(v^2/c^2)
    पर इस किताब मे सिर्फ इसी equation को prove कर और सभी equation जैसे t’=t/√{1-(v^2/c^2)},
    L’=L/√{1-(v^2/c^2)} और सभी इस तरह के equations को सही मान लिया गया है।
    क्या वास्तव मे सिर्फ dt”=dt/√{1-(v^2/c^2)} equation को सही देखकर ही और सभी equation जैसे t’=t/√{1-(v^2/c^2)},
    L’=L/√{1-(v^2/c^2)} और सभी इस तरह के equations को सही माना गया है(theory of relativity मे)?
    अगर नहीं तो यह बताए कि कैसे t’=t/√{1-(v^2/c^2)},
    L’=L/√{1-(v^2/c^2)}

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    • विपुल, पदार्थ और ऊर्जा दोनो एक ही है। ऊर्जा को आप दो प्रकार मे बांट सकते है, गति करती ऊर्जा और स्थिर ऊर्जा। द्रव्यमान केवल स्थिर ऊर्जा का ही होता है, इसी स्थिर ऊर्जा को हम पदार्थ कहते है। जब स्थिर ऊर्जा गति करती हुयी ऊर्जा मे परिवर्तित होती है तब द्रव्यमान ही बल मे परिवर्तित हो जाता है।

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  20. सर में ये जानना चाहता हू के असल में ब्रह्मांड क्या है? और में ये सुनता और पढ़ता हू के ब्रह्मांड अनेक है कहाँ है सर अनेक ब्रह्मांड में सर उठा के देखता हू तो मुझको तो केवल एक ही ब्रह्मांड दिखाई देता है, इस ब्रह्मांड की अवधारणा क्या है.
    दूसरा प्रश्न – क्या हमारी मंदाकिनी के बीच में कोई श्याम विवर है अगर नही तो इस मंदाकिनी के समस्त ग्रह, तारे आदि किस के चक्कर लगा रहे है और क्या ये आवश्यक है के प्रत्येक आकाशगंगा के केन्द में कोई श्याम विवर हो ही?

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    • राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस हर वर्ष 22 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन अर्थात 22 जुलाई, 1947 को राष्‍ट्रीय ध्‍वज तिरंगे को भारत के संविधान द्वारा अपनाया (अंगीकृत) गया था!

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  21. sirji is topic par jarur bole… study
    class-2 me failed
    class-9 me failed class-11 isme dono lagatar 2 year failed
    B.Sc.-1year me failed
    polytechnic 2year ab failed ho gaya ye sab sir mathematics ke padne se fail ho jata hun…baki k subject ko padne ko mann hi nhi karta mathematics padne mast ho jata hun…finally batao tumhe kya lagta he kya behtar karna mujhe…..sir poor family se belong karta hun….sir jarur kuchh to boliye science ka question man kar maths bhi science ka अद्वितीय hissa गौस ne sahi kaha h

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    • फैराडे का विद्युत अपघटन का प्रथम नियम

      विद्युत पघटन में विद्युताग्रों (एलेक्ट्रोड्स) पर जमा हुए पदार्थ की मात्रा धारा की मात्रा समानुपाती होती है। ‘धारा की मात्रा’ का अर्थ आवेश से है न कि विद्युत धारा से ।
      फैराडे का विद्युत अपघटन का द्वितीय नियम

      ‘धारा की मात्रा’ समान होने पर विद्युताग्रों पर जमा/हटाये गये पदार्थ की मात्रा उस तत्व के तुल्यांकी भार के समानुपाती होती है। (किसी पदार्थ का तुल्यांकी भार उसके मोलर द्रव्यमान को एक पूर्णांक से भाग देने पर मिलता है। यह पूर्णांकिस बात पर निर्भर करता है कि वह पदार्थ किस तरह की रासायनिक अभिक्रिया करता है।)

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  22. sirji ye question meri pakad se bahar h iska jabab vistrat dena
    sukr sani rahu ketu pandit log future isse related baat karte he kya ye sab science ki den bhi mani jati h…aur iska jikra kare history bhi batay…aur jo humne to pada h sormandal aur grahon ke bare me jese sukr mangal budh prathvi etc. ye sab batein ved se kis rup me judi hui hain…kon he is jadu ka janamdata jo kundali se lekar janam aur death ke bare me jagrat karta he…

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    • यदि ज्योतिष को ग्रहों की गति की गणना के लिये प्रयोग करें तो वह विज्ञान है लेकिन किसी मनुष्य के भविष्य की गणना के लिये करें तो वह क्षद्म विज्ञान(झुठा विज्ञान) है!
      राहु-केतु इन दोनो ग्रहों का भौतिक अस्तित्व नही है, लेकिन जब सूर्य या चंद्र गहण होता है तब पृथ्वी/चंद्रमा की छाया को राहु/केतु माना जाता रहा है लेकिन इनका मनुष्य के भाग्य पर कोई प्रभाव नही पढता है।
      किसी भी ग्रह, नक्षत्र का किसी मनुष्य के भाग्य पर प्रभाव को विज्ञान नही मानता है।ग्रह शांति पूजा, भविष्य, जादू टोना कुछ लोगो की रोजी रोटी का साधन मात्र है, इसका विज्ञान से कोई लेना देना नही है, विज्ञान इन्हे नहीं मानता है। विज्ञान जादू टोना, मंत्र, भूत-प्रेत को नही मानता है।
      वेदो मे प्राकृतिक शक्तियों की पूजा के लिये मंत्र है, उनमे विज्ञान ढुंढने का प्रयास ना करें।

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    • ब्रह्मगुप्त ने दो विशेष ग्रन्थ लिखे: ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त (सन ६२८ में) और खण्डखाद्यक या खण्डखाद्यपद्धति (सन् ६६५ ई में)। ‘ब्रह्मस्फुटसिद्धांत’ उनका सबसे पहला ग्रन्थ माना जाता है जिसमें शून्य का एक अलग अंक के रूप में उल्लेख किया गया है । यही नहीं, बल्कि इस ग्रन्थ में ऋणात्मक (negative) अंकों और शून्य पर गणित करने के सभी नियमों का वर्णन भी किया गया है । ये नियम आज की समझ के बहुत करीब हैं। हाँ, एक अन्तर अवश्य है कि ब्रह्मगुप्त शून्य से भाग करने का नियम सही नहीं दे पाये: ०/० = ०.
      “ब्रह्मस्फुटसिद्धांत” के साढ़े चार अध्याय मूलभूत गणित को समर्पित हैं। १२वां अध्याय, गणित, अंकगणितीय शृंखलाओं तथा ज्यामिति के बारे में है। १८वें अध्याय, कुट्टक (बीजगणित) में आर्यभट्ट के रैखिक अनिर्धार्य समीकरण (linear indeterminate equation, equations of the form ax − by = c) के हल की विधि की चर्चा है। (बीजगणित के जिस प्रकरण में अनिर्धार्य समीकरणों का अध्ययन किया जाता है, उसका पुराना नाम ‘कुट्टक’ है। ब्रह्मगुप्त ने उक्त प्रकरण के नाम पर ही इस विज्ञान का नाम सन् ६२८ ई. में ‘कुट्टक गणित’ रखा।) ब्रह्मगुप्त ने द्विघातीय अनिर्णयास्पद समीकरणों ( Nx2 + 1 = y2 ) के हल की विधि भी खोज निकाली। इनकी विधि का नाम चक्रवाल विधि है। गणित के सिद्धान्तों का ज्योतिष में प्रयोग करने वाला वह प्रथम व्यक्ति था। उसके ब्रह्मस्फुटसिद्धांत के द्वारा ही अरबों को भारतीय ज्योतिष का पता लगा।

      ब्रह्मगुप्त का ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त (संस्कृत पाठ , संस्कृत एवं हिन्दी में टीका)
      खण्डखाद्यक : पृथूदक स्वामीकृत टीका सहित

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    • भारत मे ही नही समस्त विश्व मे लोगो की औसत आयु बढी है। रोगो की संख्या मे कमी आयी है।

      १९६० मे भारत मे आम आदमी की औसत आयु ४३ वर्ष थी वर्तमान मे वह ६४ वर्ष है।

      पहले महामारी(चेचक, प्लेग, हैजा इत्यादि) बीमारीयों मे शहर के शहर साफ हो जाते थे, हजारों की तादाद मे मौते हुआ करती थी, अब आधुनिक दवाईयों से ऐसा नही हो रहा है। बहुत सी बीमीरीयां जड़ से साफ हो गयी है, पिछले कुछ दशको से उनका कोई मरीज नही पाया गया है। भारत मे पोलीयो का कोई नया मरीज पिछले दो वर्षो मे नही मीला है।
      वर्तमान मे लोग बीमार हो रहे है उसके पीछे आयुर्वेदिक/अंग्रेजी दवाई नही है, वह है लोगो के रहन सहन मे बदलाव। लोग शारीरिक मेहनत नही करते है, आलसी होते जा रहे है, खानपान मे बदलाव आया है।
      मै आयुर्वेद और एलोपैथी मे कौन बेहतर है , इस विवाद मे नही पढुंगा। लेकिन दोनो मे दी जाने वाली दवाईयों मे कुछ रसायन होते है, आयुर्वेद मे वे प्राकृतिक होते है, जबकि ऐलोपैथी मे वे कृत्रिम होते है। विज्ञान की दृष्टि मे दोनो समान है।

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    • प्राचीन भारत मे ज्योतिष का अर्थ खगोल शास्त्र था, वह ग्रहों की गति, नक्षत्र के आकाश मे गति, सूर्य चन्द्र के उदय अस्त, ग्रहण होने की गणना जैसे शुद्ध विज्ञान से संबंधित था। भविष्यवाणी का अर्थ था कि सूर्य चन्द्रमा कब किस नक्षत्र मे उदित होगा, कब ग्रहण होगा इत्यादि। धन्धेबाज़ लोगों ने मनुष्य के भविष्य को ज्योतिष से जोड़कर उसे बदनाम कर दिया।

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    • विज्ञान की दृष्टि से ‘काच’ की परिभाषा बहुत व्यापक है। इस दृष्टि से उन सभी ठोसों को काच कहते हैं जो द्रव अवस्था से ठण्डा होकर ठोस अवस्था में आने पर क्रिस्टलीय संरचना नहीं प्राप्त करते।
      सबसे आम काच सोडा-लाइम काच है जो शताब्दियों से खिड़कियाँ और गिलास आदि बनाने के काम में आ रहा है। सोडा-लाइम काच में लगभग 75% सिलिका (SiO2), सोडियम आक्साइड (Na2O) और चूना (CaO) और अनेकों अन्य चीजें कम मात्रा में मिली होती हैं।
      काँच यानी SiO2 जो कि रेत का अभिन्न अंग है। रेत और कुछ अन्य सामग्री को एक भट्टी में लगभग 1500 डिग्री सैल्सियस पर पिघलाया जाता है और फिर इस पिघले काँच को उन खाँचों में बूंद-बूंद करके उंडेला जाता है जिससे मनचाही चीज़ बनाई जा सके। मान लीजिए, बोतल बनाई जा रही है तो खाँचे में पिघला काँच डालने के बाद बोतल की सतह पर और काम किया जाता है और उसे फिर एक भट्टी से गुज़ारा जाता है।

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    • सायनाईड एक ऐसा रासायनिक यौगिक है जिसमे CN(कार्बन -नायट्रोजन अणु) होते है, इसमे कार्बन के परमाणु के नायट्रोजन के परमाणु के साथ तीन बंधन होते है, कार्बन का चौथा बांड किसी धातु जैसे पोटेशीयम, मैग्नेशीयम के साथ होता है। सायनाईड के उदाहरण पोटेशीयम साईनाईड(KCN), सोडीयम साइनाईड(NaCN) है। ये अत्याधिक जहरीले यौगिक होते है। ये शरीर की कोशीकाओ के माईटोकान्ड्रीया मे स्थित लोहे के परमाणू से प्रक्रिया करते है और ऊर्जा के प्रवाह को रोक देते है, इसके फलस्वरूप कोशीकाये आक्सीजन नही ले पाती है। इसके फलस्वरूप अंग जिन्हे आक्सीजन की अत्याधिक जरूरत होती है जैसे दिल, नर्वस सीस्टम कार्य करना बंद कर देते है और मृत्यु होने की संभावना बढ जाती है।

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  23. sirji advice dein….government bteup branche- glass and ceramic engineering diploma se final year h
    in my future i want be mathematician
    mera maths priye subject h….to batay me yahan se kis field me study continue …. karu mathematician ban ne k liye….kya diploma k baad b.e. {bachelor of engineering} karne ka baad maths se Ph.D. kar sakta hun….branch glass and ceramic engineering h

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    • प्रसिद्ध गणितज्ञ कार्ल गास(Carl Friedrich Gauss (1777–1855)) ने गणित को विज्ञान की रानी(“the Queen of the Sciences”) कहा था। विज्ञान और गणित दोनो एक दूसरे के पूरक है, दोनो अलग नही है। हर विज्ञान के सिद्धांत के पीछे गणित है, हर गणित का सूत्र विज्ञान है।
      कह सकते हैं कि दोनो का जन्म एक साथ हुआ है।

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    • cos(2π/7)+cos(4π/7)+cos(6π/7)= -1/2
      [a] sin (π-x) = sin x —-used in step 9
      [b] sin (π+x) = -sin x —-used in step 8
      [c] sin (-x) = -sin x —-used in step 6 (twice)
      [d] sin 2x = 2 sin x cos x —-used in step 4
      [e] sin x cos y = (1/2)sin(x+y) + (1/2)sin(x-y) —-used in step 5 (twice)

      1. cos(2π/7) + cos(4π/7) + cos(6π/7) =
      2. 2sin(2π/7)[(cos(2π/7) + cos(4π/7) + cos(6π/7)] / 2sin(2π/7) =
      3. [2sin(2π/7)cos(2π/7) + 2sin(2π/7)cos(4π/7) + 2sin(2π/7)cos(6π/7)] / 2sin(2π/7) =
      4. [sin(4π/7) + 2sin(2π/7)cos(4π/7) + 2sin(2π/7)cos(6π/7)] / 2sin(2π/7) =
      5. [sin(4π/7) + sin(6π/7) + sin(-2π/7) + sin(8π/7) + sin(-4π/7)] / 2sin(2π/7) =
      6. [sin(4π/7) + sin(6π/7) – sin(2π/7) + sin(8π/7) – sin(4π/7)] / 2sin(2π/7) =
      7. [sin(6π/7) – sin(2π/7) + sin(8π/7)] / 2sin(2π/7) =
      8. [sin(6π/7) – sin(2π/7) – sin(π/7)] / 2sin(2π/7) =
      9. [sin(π/7) – sin(2π/7) – sin(π/7)] / 2sin(2π/7) =
      10. -sin(2π/7) / 2sin(2π/7) =
      11. -1/2

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  24. क्वांटम कंप्यूटर किस सिद्धांत पर आधारित हैं और यह हमारे आज के कंप्यूटर से किस प्रकार भिन्न होंगे? और आज क्या इन्हें बनाया जा चुका है?

    और एक सिद्धांत है जिसका मुझे नाम नहीं पता । पर वो शायद कुछ ऐसा है कि एक कण के साथ जो होता है वही किसी दुसरे के साथ भी होता है। और शायद इसकी खोज आइन्स्टीन ने की थी। तो यह सिद्धांत सही से वास्तव में क्या है और इसका नाम क्या है ये मुझे नहीं पता। कृपया इसे बताएं।

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    • आर्कमीडीज के सिद्धांत से! लोहे के जहाज़ का आयतन उसके भार से अधीक होता है। लोहे का जहाज़ अपने आयतन के बराबर पानी विस्थापित करता है, यह विस्थापित जल अपने आयतन के तुल्य बल जहाज़ पर लगाता है जिससे जहाज़ पानी पर तैरता है। जबकि लोहे के टुकड़े का आयतन उसके भार से कम होता है।

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    • अम्ल एक रासायनिक यौगिक है जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन(H+) देता है. इसका pH मान 7.0 से कम होता है. परिभाषा के अनुसार, अम्ल वह रासायनिक यौगिक है जो प्रतिकारक यौगिक(क्षार) को हाइड्रोजन आयन(H+) प्रदान करता है. जैसे- एसीटिक अम्ल(सिरका में) और सल्फ्यूरिक अम्ल(बैटरी में). अम्ल, ठोस, द्रव या गैस, किसी भी भौतिक अवस्था में पाए जा सकते हैं. वे शुद्ध रुप में या घोल के रूप में रह सकते हैं. जिस पदार्थ या यौगिक में अम्ल के गुण पाए जाते हैं वे (अम्लीय) कहलाते हैं।
      मोटे हिसाब से अम्ल (ऐसिड) उन पदार्थों को कहते हैं जो पानी में घुलने पर खट्टे स्वाद के होते हैं (अम्ल = खट्टा), हल्दी से बनी रोली (कुंकम) को पीला कर देते हैं, अधिकांश धातुओं पर (जैसे जस्ते पर) अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं और क्षारक को उदासीन (न्यूट्रल) कर देते हैं। मोटे हिसाब से क्षारक (बेस) उन पदार्थों को कहते हैं जिनका विलयन चिकना-चिकना सा लगता है (जैसे बाजा डिग्री सोडे का विलयन), स्वाद कड़ुआ होता है, हल्दी को लाल कर देते हैं और अम्लों को उदासीन करते हैं। उदासीन करने का अर्थ है ऐसे पदार्थ (लवण) का बनाना जिसमें न अम्ल के गुण होते हैं, न क्षारक के।
      ऐसे भी कुछ अम्ल हैं जो खट्टे होने के बदले मीठे होते हैं। ऐसा एक अम्ल ऐमिडो-फोस्फरिक अम्ल है। कुछ ऐसे भी अम्ल हैं जो क्षारहर नहीं होते। कुछ ऐसे भी क्षार हैं जिनका हाइड्रोजन धातुओं से विस्थापित हो जाता है। फिटकरी अम्ल नहीं है। इसमें विस्थापित होनेवाला कोई हाइड्रोजन भी नहीं है। पर यह स्वाद में खट्टा और क्रिया में क्षारहर होता है। यह नीले लिटमस को लाल भी कर देता है। इसी प्रकार सोडियम बाईसल्फाइड खट्टा और क्षारहर होता है। यह नीले लिटमस को लाल करता है। इसमें विस्थापित होनेवाला हाइड्रोजन भी है, पर यह अम्ल नहीं है। मिथेन अम्ल नहीं है, पर इसका हाइड्रोजन जस्ते से विस्थापित हो जाता है और इस प्रकार ज़िंक डाइमेथिल बनता है जो लवण नहीं है।

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  25. आशीष जी,
    मुझे अक्सर Sleep paralysis होता है नीँद की सुरुआत मेँ, (लगभग 3 दिन मे 1 बार) मुझे नीँद मेँ पता चल जाता है कि मैँ सपना देख रही हूँ इस कारण मैँ जाग जाती हूँ पर पूरी तरह नही मैँ अपनी आँखे भी खोल सकती हूँ पर BODY पर CONTROL नही रहता एक शोर सुनाई देता है मैँ जागने की बहुत कोशिस करती हूँ पर बडी मुश्किल से जाग पाती हूँ पर फिर भी इतनी ज्यादा नीँद होती है कि अगर मेँ जल्दी से उठकर नहीँ बैठी तो फिर से उसी स्तिथि मेँ पहुँच जाती हूँ। क्या ये NORMAL है? या कोई बीमारी की शुरुआत। क्रपया जानकारी देँ

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    • भूत प्रेत के अस्तित्व को विज्ञान नही मानता है। अधिकतर मामलो मे यह मानसिक बिमारीयां होती है। जिस तरह हम सपने देखते है उसी तरह मानसिक रूग्ण व्यक्ति जागते हुये भी भूत प्रेत जैसी कल्पना कर सकता है, महसूस कर सकता है। इस तरह की परेशानी से गुजरने वाले व्यक्ति को किसी मानसिक चिकित्सक को दिखाना चाहीये।

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    • जब हम निद्रा अवस्था मे होते है तब हमारा मस्तिष्क शरीर के कई अंगो को सुप्त अवस्था मे भेज देता है, जैसे हमारे हाथ पैर। हमारे निंद्रा अवस्था से जागृत होने पर ये अंग सक्रिय हो जाते है। लेकिन कभी कभी किसी अनजाने कारणो से ऐसा नही होता है और हमारे जागने के पश्चात भी ये अंग सुप्त रहते है जिसे स्लीप पैरालीसीस कहते है।

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    • यदि हम पृथ्वी की सतह से एक कण को उसके केन्द्र की ओर गिराये तो वह कण केन्द्र की ओर अपनी गति मे त्वरण करते हुये जायेगा, उसके पश्चात वह पृथ्वी की दूसरी ओर यात्रा प्रारंभ करेगा लेकिन अब उसकी गति मे कमी आते जायेगी। जब वह कण पृथ्वी की दूसरी सतह पर पहुंचेगा तब उसकी गति शून्य हो जायेगी और कण वापिस केंद्र की ओर जाने लगेगा। इस तरह वह कण एक सतह से दूसरी सतह के मध्य दोलन करते रहेगा।

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    • साँप के कान नहीं होते लेकिन वो अपनी जीभ और त्वचा से ध्वनि कंपन महसूस करते है। साँप बीन की धुन पर नहीं नाचता है, वह तो सँपेरे की बीन पर हमला करने के मौक़े की तलाश मे डोलता है। संपेरा साँप के सामने बीन बजाते हुये बीन को लहराता है, साँप को लगता है की बीन उनपर हमला करेगी, वह उससे बचकर पलटवार की तलाश मे होता है।
      यह एक भ्रामक जानकारी है कि साँप बीन की आवाज़ सुनकर बाहर आते है।

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    • स्पेस या अंतरिक्ष, अंतराल यह सभी खगोलीय पिंडों के मध्य का स्थान है। ब्रह्मांड या यूनिवर्स मे खगोलीय पिंड जैसे तारे, ग्रह, आकाशगंगा और अंतरिक्ष दोनो का समावेश है! इसके अलावा ब्रह्मांड की सीमा के बाहर जहाँ कोई पदार्थ नहीं है रिक्त स्थान void कहलाता है, इस क्षेत्र मे समय का भी आस्तित्व नहीं होता।

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      • प्रभात, कैंसर (कर्क रोग) तब होता है जब शरीर के किसी भाग में कोशिकाओं की कोई असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होती है। हालांकि कैंसर (कर्क रोग) के कई प्रकार हैं, वो सभी असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण शुरू होते हैं।
        शरीर की सामान्य कोशिकाएँ एक क्रमबद्ध तरीके से बढ़ती हैं, विभाजित होती हैं, मरती हैं और कई तरह के कारक इन्हें नियंत्रित करते हैं।
        कैंसरीय (कर्क रोग संबंधी) कोशिकाएँ एक असामान्य तरीके से बढ़ती और विभाजित होती हैं और सामान्य कोशिकाओं से अलग हैं। कैंसर (कर्क रोग) का मुख्य कारण क्षति या कुछ बदलाव हैं जो किसी कोशिका की डी एन ए के रूप में बुलाई जाने वाली पैतृक(जीनेटिक) सामग्री में सहज रूप से होते हैं। डी एन ए हर कोशिका के नाभिक में होता है और डी एन ए कोशिका विभाजन से लेकर कोशिका की सभी गतिविधियों को निर्देशित करते हैं। अक्सर जब डी एन ए क्षतिग्रस्त होता है, तो शरीर इसकी मरम्मत कर लेता है लेकिन कैंसर (कर्क रोग) कोशिकाओं में, क्षतिग्रस्त हुए डी एन ए की मरम्मत नहीं होती है। लोग क्षतिग्रस्त डी एन ए को वंशागत में पा सकते हैं, जो वंशागत में पाए गए कैंसरों (कर्क रोगों) की व्याख्या करता है। सामान्य रूप से, किसी व्यक्ति के डी एन ए बाहरी वातावरण, जैसे धूम्रपान करने, विकिरण, रसायनों, दवाओं आदि को उघाड़ा जाने से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इस तरह से, दोनों पित्रैकीय (जीनेटिक) और पर्यावर्णीय कारक कैंसर (कर्क रोग) के विकास में एक भूमिका निभाते हैं।

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  26. sir ,maine fb ek pos padi jismain ek aise viman ki khoj ke bare main bataya gya ki jo ki 5000 sal purana hai aur bhartiya sabhyata mahabhart main jikra kya hua viman hai aur jo ki voice ,commande se chalta ,aur aaj ki tak nic se bahut behtar hai,,,uske barein main hamko hindi main bistar se batyein sir ……………….
    “From the ancient accounts found in the Sanskrit epic The Mahabharata, we know that a Vimana measured twelve cubits in circumference, with four strong wheels. Apart from its ‘blazing missiles’, The Mahabharata records the use of its other deadly weapons that operated via a circular ‘reflector’. When switched on, it produced a ‘shaft of light’ which, when focused on any target, immediately ‘consumed it with its power’.”

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    • ये सब मिथक है, इसमें सच्चाई संदिग्ध है। उस समय तकनीक इतनी विकसित नहीं थी कि विमान या जटिल मशीने बनाई जा सके। आप शायद एरीक वान डीकेंस की Ancient Astronauts या उस पर आधारित पुस्तक/लेख की बात कह रहे है। यह पुस्तक /लेख छद्म इतिहास और छद्म विज्ञान पर है, सच से कोसों दूर! वैज्ञानिक और इतिहासकार उन्हे गंभीरता से नहीं लेते है।

      आपकी दूसरी टिप्पणी मै प्रकाशित नहीं कर रहा हुँ।

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    • दो संभावनाये है
      १. आप समय यात्रा कर भूतकाल मे अपने ही ब्रह्मांड मे पहुँचते है तब आप झंडा देख पायेंगे।
      २. आप समय यात्रा करते है लेकिन संभव है कि आप अपने ब्रह्मांड मे ना पहुँच किसी समांतर ब्रह्मांड मे पहुँचते है, तब कुछ कहा नहीं जा सकता, इस बार आपको झंडी दिख सकता है या नहीं भी क्योंकि इस समांतर ब्रह्मांड मे तय नहीं है कि आपके प्रतिरूप ने झंडा गाड़ा है या नहीं

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    • यदि आप एक कम्पयुटर को किसी तार से या वायरलेस तकनीक से दूसरे कम्पयुटर से जोड़ दे जिससे वो एक दूसरे को संदेश भेज सके तो एक कम्पयुटर नेटवर्क बनता है। आप इस नेटवर्क मे और जयादा कम्पयुटर जोड़ सकते है, आपका नेटवर्क बढता जायेगा। इंटरनेट इसी तरह का एक विश्वव्यापी नेटवर्क है जिसमें सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़े हुये है।
      अंतरजाल (इंटरनेट), एक दूसरे से जुड़े कम्पयुटर का एक विशाल विश्व-व्यापी नेटवर्क या जाल है। इसमे कई संगठनो, विश्वविद्यालयो, आदि के सरकारी और निजी कम्पयुटर जुडे हुए है। इंटरनेट से जुडे हुए संगणक आपस मे इंटरनेट नियमावली (Internet Protocol) के जरिए सूचना का आदान-प्रदान करते है। इंटरनेट के जरिए मिलने वाली सूचना और सेवाओ मे इंटरनेट पृष्ठ, ईमेल और बातचीत सेवा प्रमुख है। इनके साथ-साथ चलचित्र, संगीत, विडियो के इलेक्ट्रनिक स्वरुप का आदान-प्रदान भी इंटरनेट के जरिए होता है।

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      • हा तो आप internet की बात कर रहे है तो एक computer से दुसरे computer सुचना अदन प्रदान कैसे होती है ………………..? और google एक platform पर ये कैसे कम करता है और ऐसी कोई platform भारत के पास क्यों नहीं है plzz help

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      • क्रिष्णा, एक कंप्युटर से दूसरे कंप्युटर मे सूचना भेजने और इंटरनेट मे सूचना भेजने मे कोई अंतर नही होता है। कंप्युटर से जब भी कोई सूचना भेजी जाती है, इंटरनेट पर, या कंप्युटर से मोबाईल पर या कहीं और , वह हमेशा शून्य और एक के रूप मे होती है।
        सूचना भेजने के अनेक माध्यम होते है, यदि WiFi के माध्यम से सूचना भेजी जा रही है तो शून्य और एक को रेडियो संकेतो के रूप मे भेजते है।
        किसी तार से भेज रहे है तो शून्य एक को विद्युत संकेतो के रूप मे भेजते है।

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  27. sir maine pada hai ki hum jo vastu dekhte hai vastav mein vo tatkal ki nahi hoti jaise surya ki tatkal chhavi ko hum vastav mein 8 minut e baad dekhte hai. Antriksh ke paripreksh mein jo taare akashgangae ya aur bahut kuch jinki doori hajaro prakashvarsh hai vastav mein hum unki hajaro sal purani chhavi dekhte hai kyoki unke tatkal chhatvi ke prakash ko hum tak aane mein hajaro sal lagenge. Bramhand mein hum jitni adhik door dekhte jayenge vastav mein hum utne purane atit ki chhavi dekh rahe hote hai. Sir main is topic par aapke vichar janna chahta hu

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