पदार्थ और प्रतिपदार्थ (हायड्रोजन और प्रति हायड्रोजन)

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 09 :प्रति पदार्थ(Anti matter)


प्रकृति(१) ने इस ब्रह्माण्ड मे हर वस्तु युग्म मे बनायी है। हर किसी का विपरीत इस प्रकृति मे मौजूद है। भौतिकी जो कि सारे ज्ञान विज्ञान का मूल है, इस धारणा को प्रमाणिक करती है। भौतिकी की नयी खोजों ने सूक्ष्मतम स्तर पर हर कण का प्रतिकण ढूंढ निकाला है। जब साधारण पदार्थ का कण प्रतिपदार्थ के कण से टकराता है दोनो कण नष्ट होकर ऊर्जा मे परिवर्तित हो जाते है।

प्रतिपदार्थ की खोज ने शताब्दीयों पुरानी धारणा जो पदार्थ और ऊर्जा को भिन्न भिन्न मानती थी की चूलें हिला दी। अब हम जानते है कि पदार्थ और ऊर्जा दोनो एक ही है। ऊर्जा विखंडित होकर पदार्थ और प्रतिपदार्थ का निर्माण करती है। इसे सरल गणितिय रूप मे निम्न तरिके से लिखा जा सकता है

पदार्थ और प्रतिपदार्थ (हायड्रोजन और प्रति हायड्रोजन)
पदार्थ और प्रतिपदार्थ (हायड्रोजन और प्रति हायड्रोजन)
  1. ऊर्जा = पदार्थ + प्रतिपदार्थ
  2. E=mc(E= ऊर्जा, m = पदार्थ का द्रव्यमान, c =प्रकाशगति) पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 09 :प्रति पदार्थ(Anti matter)”
गुरुत्विय लेंस द्वारा किसी प्रकाश श्रोत की चमक मे बढोत्तरी

अंतरिक्ष मे भटकते बंजारे : बृहस्पति के आकार के आवारा ग्रह


वर्षो से हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के केन्द्र के निरिक्षण मे लगे खगोलविज्ञानियो ने एक नयी खोज की है। इसके अनुसार हमारी आकाशगंगा मे अरबो बृहस्पति के आकार के ’आवारा ग्रह’ हो सकते है जो किसी तारे के गुरुत्वाकर्षण से बंधे हुये नही है। एक तथ्य यह भी है कि ऐसे आवारा ग्रहो की संख्या आकाशगंगा के तारों की संख्या से दूगनी हो सकती है, तथा इन आवारा ग्रहों की संख्या तारों की परिक्रमा करते सामान्य ग्रहों से भी ज्यादा है।

विज्ञान पत्रिका नेचर(Nature) मे खगोलभौतिकी मे माइक्रोलेंसींग निरीक्षण (Microlensing Observations in Astrophysics- MOA)’ प्रोजेक्ट द्वारा इस खोज के परिणाम प्रकाशित हुये है। इस प्रोजेक्ट मे किसी तारे के प्रकाश मे उसकी परिक्रमा करते ग्रह से आयी प्रकाश के निरीक्षण वाली तकनीक का प्रयोग नही हुआ है। माइक्रोलेंसींग पृष्ठभूमी मे स्थित तारे पर किसी दूरस्थ ग्रह(१) के प्रभाव का अध्यन करती है। पढ़ना जारी रखें “अंतरिक्ष मे भटकते बंजारे : बृहस्पति के आकार के आवारा ग्रह”

ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 08 : श्याम ऊर्जा(Dark Energy)


ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)
ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सबसे प्रचलित तथा मान्य सिद्धांत के अनुसार अरबो वर्ष पहले सारा ब्रह्माण्ड एक बिंदू के रूप मे था। किसी अज्ञात कारण से इस बिंदू ने एक विस्फोट के साथ विस्तार प्रारंभ किया और ब्रह्माण्ड आस्तित्व मे आया। ब्रह्माण्ड का यह विस्तार वर्तमान मे भी जारी है। इसे हम महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory) कहते है। एडवीन हब्बल द्वारा किये गये निरिक्षणो तथा आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत ने इस सिद्धांत को प्रायोगिक तथा तार्किक आधार दिया।

1990 दशक के मध्य मे कुछ खगोलशास्त्रीयों ने ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मापने के लिए कुछ प्रयोग किये। गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान को आकर्षित करता है, इसलिए अधिकतर वैज्ञानिको का मानना था कि गुरुत्वाकर्षण बल ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति को मंद कर देगा या इस गति को स्थिर कर देगा।

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दृश्य प्रकाश के रंग और विद्युत चुंबकिय विकिरण

बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !


अंतरिक्ष की गहराईयो मे यह विशालकाय बिल्ली की आंख(Cat’s Eye Nebula) के जैसी ग्रहीय निहारिका(planetary nebula) पृथ्वी से तीन हजार प्रकाश वर्ष दूर है। इस निहारिका को एन जी सी ६५४३(NGC 6543) भी कहते है। यह निहारिका सूर्य के जैसे … पढ़ना जारी रखें बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 07 : श्याम पदार्थ (Dark Matter) का ब्रह्माण्ड के भूत और भविष्य पर प्रभाव


श्याम पदार्थ की खोज आकाशगंगाओं के द्रव्यमान की गणनाओं मे त्रुटियों की व्याख्या मात्र नही है। अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सभी प्रचलित सिद्धांतों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिये हैं। श्याम पदार्थ का अस्तित्व ब्रह्माण्ड के भविष्य पर प्रभाव डालता है।

महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory)

1950 के दशक के मध्य मे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का नया सिद्धांत सामने आया, जिसे महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang) नाम दिया गया। इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एक महा-विस्फोट के साथ हुयी। इस सिद्धांत के पीछे आकाशगंगाओं के प्रकाश मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव(Dopler Effect) का निरीक्षण था। इसके अनुसार किसी भी दिशा मे दूरबीन को निर्देशित करने पर भी आकाशगंगाओं के केन्द्र से आने वाले प्रकाश मे लाल विचलन(Red Shift) था। (आकाशगंगाओं के  दोनो छोरो मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव आकाशगंगा का घूर्णन संकेत करता है।) हर दिशा से आकाशगंगाओं के केन्द्र के प्रकाश मे पाया जाने वाला लाल विचलन यह दर्शाता है कि वे हमसे दूर जा रही हैं। अर्थात हर दिशा मे ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है।

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ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 06 : श्याम पदार्थ (Dark Matter)


1928 मे नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी मैक्स बार्न ने जाट्टीन्जेन विश्वविद्यालय मे कहा था कि

“जैसा कि हम जानते है, भौतिकी अगले छः महिनो मे सम्पूर्ण हो जायेगी।”

उनका यह विश्वास पाल डीरेक के इलेक्ट्रान की व्यवहार की व्याख्या करने वाले समीकरण की खोज पर आधारित था। यह माना जाता था कि ऐसा ही समिकरण प्रोटान के लिए भी होगा। उस समय तक इलेक्ट्रान के अतिरिक्त प्रोटान ही ज्ञात मूलभूत कण था। इस समिकरण के साथ सैद्धांतिक भौतिकी(Theoritical Physics) का अंत था, इसके बाद जानने के लिए कुछ भी शेष नही रह जाता। लेकिन कुछ समय बाद एक नया कण न्यूट्रॉन खोजा गया। इसके बाद मानो भानूमती का पिटारा खूल गया! इतने सारे नये कण खोजे गये कि उनके नामकरण के लीए लैटीन अक्षर कम पढ़ गये।

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