श्रेणी: ब्रह्माण्ड
ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 14 : श्याम विवर कैसे बनते है?

जब तक तारे जीवित रहते है तब वे दो बलो के मध्य एक रस्साकसी जैसी स्थिति मे रहते है। ये दो बल होते है, तारो की ‘जीवनदायी नाभिकिय संलयन से उत्पन्न उष्मा’ तथा तारों का जन्मदाता ‘गुरुत्वाकर्षण बल’। तारे के द्रव्यमान से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण उसे तारे पदार्थ को केन्द्र की ओर संपिड़ित करने का प्रयास करता है, इस संपिड़न से प्रचण्ड उष्मा उत्पन्न होती है, जिसके फलस्वरूप नाभिकिय संलयन प्रक्रिया प्रारंभ होती है। यह नाभिकिय संलयन प्रक्रिया और ऊर्जा उत्पन्न करती है। इस ऊर्जा से उत्पन्न दबाव की दिशा केन्द्र से बाहर की ओर होती है। इस तरह से तारे के गुरुत्व और संलयन से उत्पन्न ऊर्जा की रस्साकशी मे एक संतुलन उत्पन्न हो जाता है। तारे नाभिकिय संलयन के लिए पहले हायड़ोजन, उसके बाद हिलियम,लीथीयम के क्रम मे लोहे तक के तत्वो का प्रयोग करता है। विभिन्न तत्वों का नाभिकिय संलयन परतो मे होता है, अर्थात सबसे बाहर हायड़ोजन, उसके नीचे हीलीयम और सबसे नीचे लोहा।
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ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 13 : श्याम विवर के विचित्र गुण
श्याम विवर कैसे दिखता है ?
कल्पना कीजिए की आप किसी श्याम विवर की सुरक्षित दूरी पर(घटना क्षितीज Event-Horizon से बाहर) परिक्रमा कर रहे है। आप को आकाश कैसा दिखायी देगा ? साधारणतः आपको पृष्ठभूमी के तारे निरंतर खिसकते दिखायी देंगे, यह आपकी अपनी कक्षिय गति के कारण है। लेकिन किसी श्याम विवर के पास गुरुत्वाकर्षण दृश्य को अत्यधिक रूप से परिवर्तित कर देता है।

श्याम विवर के समीप से गुजरने वाली प्रकाश किरणे उसके गुरुत्व की चपेट मे आ जाती है और निकल नही पाती है। इस कारण श्याम विवर के आसपास का क्षेत्र एक काली चकती(Dark Disk) के जैसा दिखायी देता है। श्याम विवर से थोड़ी दूरी पर से गुजरने वाली प्रकाश किरणे गुरुत्व की चपेट मे तो नही आती लेकिन उसके प्रभाव से उनके पथ मे वक्रता आ जाती है। इस प्रभाव के कारण श्याम विवर की पृष्ठभूमि मे तारामंडल विकृत नजर आता है, मनोरंजनगृहों के दर्पणो की तरह। इस प्रभाव से कुछ तारो की एकाधिक छवी दिखायी देती है। आप एक तारे की दो छवियाँ श्याम विवर के दो विपरीत बाजूओं मे देख सकते है क्योंकि श्याम विवर के दोनो ओर से जाने वाली प्रकाश किरणे आपकी ओर मुड़ गयी है। कुछ तारो की कभी कभी असंख्य छवियाँ बन जाती है क्योंकि उनसे निकलने वाली प्रकाश किरणे श्याम विवर के चारो ओर से आपकी ओर मोड़ दी जाती है। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 13 : श्याम विवर के विचित्र गुण”
श्याम विवर(Black Hole) ने तारे को निगला
ब्रिटेन के खगोलविदों ने श्याम विवर में फंस कर एक तारे की मौत होने के सबूत जुटाने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि … पढ़ना जारी रखें श्याम विवर(Black Hole) ने तारे को निगला
ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 12 : श्याम विवर (Black Hole) क्या है?

श्याम विवर (Black Hole) एक अत्याधिक घनत्व वाला पिंड है जिसके गुरुत्वाकर्षण से प्रकाश किरणो का भी बच पाना असंभव है। श्याम विवर मे अत्याधिक कम क्षेत्र मे इतना ज्यादा द्रव्यमान होता है कि उससे उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण किसी भी अन्य बल से शक्तिशाली हो जाता है और उसके प्रभाव से प्रकाश भी नही बच पाता है।
श्याम विवर की उपस्थिति का प्रस्ताव 18 वी शताब्दी मे उस समय ज्ञात गुरुत्वाकर्षण के नियमो के आधार पर किया गया था। इसके अनुसार किसी पिंड का जितना ज्यादा द्रव्यमान होगा या उसका आकार जितना छोटा होगा, उस पिंड की सतह पर उतना ही ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल महसूस होगा। जान मीशेल तथा पीयरे सायमन लाप्लास दोनो ने स्वतंत्र रूप से कहा था कि अत्याधिक द्रव्यमान या अत्याधिक लघु पिंड के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से किसी का भी बचना असंभव है, प्रकाश भी इससे बच नही पायेगा। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 12 : श्याम विवर (Black Hole) क्या है?”
सूरज हुआ मद्धम!

क्या हो रहा है सूर्य को ? क्या सौर गतिविधीयाँ बंद हो रही है?
नयी जानकारीयाँ इसी दिशा की ओर संकेत दे रही है कि सौर गतिविधियाँ हमेशा के लिए तो नही लेकिन अल्पकाल के लिए बंद हो रही हैं। वर्तमान मे सूर्य सौर गतिविधियाँ के चक्र के चरम(2013) मे पहुंच रहा है और हम सौर गतिविधियोँ मे वृद्धि देख रहे है, ज्यादा सौर धब्बे, ज्यादा सौर ज्वाला इत्यादि। लेकिन यह सौर गतिविधियाँ सामान्य से कम है। इस बात के भी मजबूत संकेत मिले हैं कि सौर गतिविधियाँ का अगला चरम (2022 या पश्चात) और भी कमजोर होगा या यह चरम होगा ही नही।

