2022 भौतिकी नोबेल पुरस्कार : एलेन अस्पेक्ट(Alain Aspect), जॉन ऍफ़ क्लाउसर( John F. Clauser) और एंटन ज़िलिंगेर(Anton Zeilinger)


वर्ष 2022 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार क्वांटम मेकेनिक्स पर केंद्रित है, इस बार यह पुरस्कार संयुक्त रूप से एलेन अस्पेक्ट(Alain Aspect), जॉन ऍफ़ क्लाउसर( John F. Clauser) और एंटन ज़िलिंगेर(Anton Zeilinger) को दिया जा रहा है। 4 अक्टूबर 2022 भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 को यह घोषणा की गई।

2022 भौतिकी नोबेल पुरस्कार क्वांटम मेकेनिक्स के एक विचित्र गुण एन्टेंगल्ड फोटोन (आपस में गुंथे हुए फोटोन) पर किये गए प्रयोगो पर दिया गया है। इन प्रयोगो ने बेल असमानता नियम के उल्लंघन (violaation of Bell inequality)को स्थापित किया है और क्वांटम सूचना विज्ञान में क्रान्ति लाई है।

एन्टेंगल्ड अवस्था(Entangled states) : सिद्धांत से तकनीक तक

एलेन अस्पेक्ट, जॉन ऍफ़ क्लाउसर और एंटन ज़िलिंगेर ने एन्टेंगल्ड क्वांटम अवस्था पर क्रांतिकारी प्रयोग किये है जिनमे दो मूलभूत कण एक जैसा व्यवहार करते है, भले ही वह दोनों कण एक दूसरे अरबो किलोमीटर दूर हो। दो एन्टेंगल्ड कणो में एक में आया कोई परिवर्तन तत्क्षण दूसरे कण पर दिखाई देता है, इन दोनों कणो के मध्य की दूरी महत्त्व नहीं रखती है।इन वैज्ञानिकों द्वारा किये गए प्रयोगो के परिणामों ने क्वांटम सूचना के आधार पर नई तकनीक के लिए राह बनाई है। इस तकनीक के द्वारा शून्य समय में अरबो करोडो किमी दूरी पर तत्काल सूचना भेजी जा सकती है।

अब तक क्वांटम भौतिकी या क्वांटम यांत्रिकी प्रयोगशाला तक ही सिमित थी, यहाँ एक खूबसूरत लेकिन विचित्र विज्ञान है। लेकिन अब इस विज्ञान का प्रवेश आम विश्व में होने जा रहा है, इससे जुडी तकनिको को हम आम जीवन में आते देख रहे है। अब तकनीक की दुनिया में क्वांटम विश्व से जुड़े अनेक विषयो पर शोध हो रहे है, जिसमे क्वांटम कंप्यूटर , क्वांटम नेटवर्क और क्वांटम कूट रूप(एन्क्रिप्टेड) में संचार शामिल है।

इन प्रयोगो में सबसे महत्वपूर्ण है की किस तरह से क्वांटम यांत्रिकी दो कणो को एक विचित्र अवस्था में रहने देती है। इस विचित्र अवस्था को एन्टेंगल्ड अवस्था (आपस में उलझी हुई अवस्था) कहते है। इन एन्टेंगल्ड कणो में किसी एक में आया कोई भी परिवर्तन तत्क्षण दूसरे कण को प्रभावित करता है, चाहे वो कण कितनी ही दूर हो।

लंबे समय तक, यह सवाल था कि क्या सहसंबंध इसलिए था क्योंकि एन्टेंगल्ड कणों में कुछ ऐसे छिपे हुए कारक होते है, या ऐसे छुपे निर्देश होते है जो उन्हें बताते हैं कि उन्हें प्रयोग में कौन सा परिणाम देना चाहिए। ये छुपे कारक या निर्देश उनके मध्य के व्यवहार को नियंत्रित करते है। 1960 के दशक में, जॉन स्टीवर्ट बेल ने अपने नाम पर गणितीय असमानता सिद्धांत(mathematical inequality ) विकसित की। यह बताता है कि यदि छिपे हुए कारक इन्हे नियंत्रित कर रहे हैं, तो बड़ी संख्या में प्रयोगो के मापन द्वारा उत्पन्न परिणामों के बीच का संबंध कभी भी एक निश्चित मूल्य से अधिक नहीं होगा। हालांकि, क्वांटम यांत्रिकी भविष्यवाणी करता है कि एक निश्चित प्रकार का प्रयोग बेल की असमानता का उल्लंघन करेग। इस प्रकार दोनों कणो के मध्य अन्य प्रकार के भी मजबूत सहसंबंध के कारक संभव होंगे।

जॉन क्लॉसर ने जॉन बेल के विचारों पर कार्य किया, जिससे एक व्यावहारिक प्रयोग संभव हुआ। जब उन्होंने प्रयोगो में मापन किया , तो उन्होंने बेल असमानता का स्पष्ट रूप से उल्लंघन होते हुए क्वांटम यांत्रिकी का परिणाम मिला। इसका मतलब है कि क्वांटम यांत्रिकी को केवल एक सिद्धांत द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है, अर्थात जो छिपे हुए कारको के अतिरिक्त भी इन्हे नियंत्रित करने वाले सिद्धांत होने चाहिए।

जॉन क्लॉसर के प्रयोग के बाद कुछ खामियां रह गईं। एलान एस्पेक्ट ने अपने प्रयोग व्यवस्था को इस तरह से विकसित किया कि उसने एक गलती होने के महत्वपूर्ण मार्ग को बंद कर दिया एक एन्टेंगल्ड कणो की जोड़ी में प्रयोग करने के बाद ऐसा कोई मार्ग नहीं बचता था कि वह परिणाम को प्रभावित नहीं कर सके।

परिष्कृत उपकरणों और प्रयोगों की लंबी श्रृंखला का उपयोग करते हुए, एंटोन ज़िलिंगर ने उलझी हुई(एन्टेंगल्ड) क्वांटम अवस्थाओं का उपयोग करना शुरू कर दिया। अन्य बातों के अलावा, उनके शोध समूह ने क्वांटम टेलीपोर्टेशन नामक एक घटना का प्रदर्शन किया है, जिससे क्वांटम अवस्था को एक कण से एक दूरी पर स्थानांतरित करना संभव हो जाता है।

भौतिकी के लिए नोबेल समिति के अध्यक्ष एंडर्स इरबैक कहते हैं

“यह तेजी से स्पष्ट हो गया है कि एक नई तरह की क्वांटम तकनीक उभर रही है। हम देख सकते हैं कि क्वांटम यांत्रिकी की व्याख्या के बारे में बुनियादी सवालों से परे भी, उलझी हुई क्वांटम अवस्थाओं के साथ पुरस्कार विजेताओं का काम बहुत महत्वपूर्ण है ”।

  • एलेन एस्पेक्ट, 1947 में एजेन, फ्रांस में पैदा हुए। पेरिस-सूद विश्वविद्यालय, ओरसे, फ्रांस से 1983 में पीएचडी। यूनिवर्सिटी पेरिस-सैकले और इकोले पॉलीटेक्निक, पलाइसेउ, फ्रांस में प्रोफेसर है
  • जॉन एफ क्लॉसर, 1942 में पासाडेना, सीए, यूएसए में पैदा हुए। १९६९ कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क, यूएसए से पीएचडी । रिसर्च फिजिसिस्ट, जे.एफ. क्लॉसर एंड असोक।, वॉलनट क्रीक, सीए, यूएसए।
  • एंटोन ज़िलिंगर, 1945 में ऑस्ट्रिया के रीड इम इनक्रेइस में पैदा हुए। विएना विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रिया से पीएचडी 1971। ऑस्ट्रिया के विएना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।

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