पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल पर चहलकदमी प्रारंभ की


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्षयान पर्सिवियरेंस मंगल ग्रह की सतह पर 19 फरवरी 2021 को उतर चुका है। 8 मार्च 2021 पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर चलना यानी खोज करना शुरू कर दिया है।

एजेंसी के अनुसार, रोवर बहुत दूर नहीं गया है। इसने अब तक कुल 6.5 मीटर यानी 21 फ़ीट का सफ़र किया है। लेकिन नासा की वरिष्ठ वैज्ञानिक केटी स्टैक मॉर्गन ने इसे एक ‘महत्वपूर्ण उपलब्धि’ बताया है।

मंगल तक पहुंचने के लिए सात महीने पहले धरती से गए इस अंतरिक्षयान ने तक़रीबन आधा अरब किलोमीटर की दूरी तय की है। ‘पर्सिवियरेंस रोवर’ मंगल ग्रह पर एक गहरे क्रेटर यानी गड्ढ़े में उतरा है जो कि मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा जेज़ेरो के नज़दीक है। मंगल ग्रह की सतह पर उतरने के बाद रोवर ने एक तस्वीर ट्वीट की है। ये रोवर एक पुरानी सूख चुकी झील की ज़मीन की जांच करने के साथ-साथ अरबों साल पहले मंगल पर माइक्रो-ऑर्गानिज़्म्स की किसी भी गतिविधि यानी जीवन के होने के चिन्हों की जांच करेगा और उन्हें पृथ्वी पर भेजेगा।

ये अंतरिक्षयान जैस ही मंगल ग्रह की ज़मीन पर उतरा, वैसे ही नासा के कंट्रोल सेंटर में बैठे वैज्ञानिकों के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। 1970 के बाद नासा का यह पहला मिशन है जो मंगल ग्रह पर जीवन के निशान तलाशने के लिए गया है।

“अंतरिक्षयान की अच्छी ख़बर ये है कि मुझे लगता है कि ये बिल्कुल सही हालत में है।”

मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर मैट वालेस

छह पहियों वाला ये रोवर आगामी 25 महीनों में मंगल के पत्थरों और चट्टानों की खुदाई करेगा ताकि उन सबूतों को तलाशा जा सके जो इस बात की ओर इशारा करते हों कि यहां कभी जीवन संभव था। ऐसा माना जाता है कि अरबों साल पहले जेज़ेरो के पास एक विशाल झील हुआ करती थी। और जहां पानी होता है, वहां इस बात की संभावना रहती है कि वहां कभी जीवन भी रहा होगा।

प्रथम चित्र

नासा में अंतरिक्षयान नियंत्रित करने वालों को संकेत मिले थे कि पर्सिवियरेंस रोवर’ शाम 8:55 (जीएमटी) पर सुरक्षित मंगल ग्रह पर उतर चुका है।

सामान्य दिन होते तो खुशी के मौक़े पर वो संभवत: गले मिलते और हाथ मिलाते। लेकिन कोरोना वायरस प्रोटोकॉल की वजह से यहां सोशल डिस्टेंस का पालन किया जा रहा है। हालांकि, मिशन के सदस्यों ने एक दूसरे से मुट्ठियां लड़ाकर अपनी ख़ुशी का इज़हार किया।

इसके बाद रोवर के इंजीनियरिंग कैमरों की ओर से ली गई मंगल की दो “लो-रिज़ॉल्युशन” तस्वीरें स्क्रीन पर सामने आईं। तस्वीरों से पता चलता है कि कैमरे के लेंस के आगे काफ़ी धूल जमी थी लेकिन रोवर के सामने और पीछे समतल ज़मीन दिखाई दी।

लैंडिंग के बाद किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि रोवर जेज़ेरो में डेल्टा क्षेत्र के दक्षिणपूर्वी हिस्से की ओर दो किलोमीटर का सफर तय कर चुका है।

“हमारा रोवर समतल क्षेत्र में है। अब तक वाहन 1.2 डिग्री पर झुका है। हमें रोवर को उतारने के लिए जगह मिल गई और हमने आसानी से अपना रोवर ग्राउंड पर उतार दिया। इस उल्लेखनीय काम के लिए मैं अपनी टीम पर बहुत गर्व करता हूं।”

लैंडिंग टीम का नेतृत्व करने वाले एलन चैन

नासा के अंतरिम प्रशासक स्टीव जर्केज़्क ने भी इस सफलता के लिए वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी है।

उन्होंने कहा है, “टीम ने बेहतरीन काम किया है। कितनी शानदार टीम है ये जिसने कोविड-19 की चुनौतियों के बीच रोवर को मंगल गृह पर उतारने की मुश्किलों पर पार पाते हुए ये काम कर दिखाया।”

नासा की जेट प्रोपल्शन लैब के निदेशक माइक वाटकिंस ने कहा है, “हमारे लिए ये शुरुआती दिन बेहद ख़ास हैं क्योंकि हमने इस रोवर के रूप में पृथ्वी के एक प्रतिनिधि को मंगल गृह पर ऐसी जगह पर उतारा है, जहां पहले कोई कभी नहीं गया।”

मंगल गृह पर उतरना कभी आसान नहीं रहा। लेकिन नासा इस मामले में विशेषज्ञ की तरह बन चुकी है। हालांकि, पर्सिवियरेंस टीम ने गुरुवार को अपने काम को लेकर बेहद संभल कर बात की।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की ओर से मंगल गृह पर उतारा गया ये दूसरा एक टन वज़न का रोवर है।

मंगल गृह पर उड़ेगा हेलिकॉप्टर?


इससे पहले क्युरियोसिटी रोवर को साल 2012 में मंगल ग्रह के एक दूसरे क्रेटर पर उतारा गया था।

नियंत्रक आने वाले दिनों में एक नये रोवर पर काम करेंगे और देखने की कोशिश करेंगे कि कहीं ज़मीन पर उतरने की प्रक्रिया में रोवर का कोई पुर्जा क्षतिग्रस्त तो नहीं हो गया है।

तस्वीरें लेने के लिए पर्सिवियरेंस का मास्ट और इसका मुख्य कैमरा सिस्टम ऊपर की तरफ उठा हुआ होना चाहिए। साथ ही रोवर को एक ख़ास सॉफ़्टवेयर के ज़रिए मंगल तक पहुंचाया गया है, इस सॉफ़्टवेयर को भी अब बदला जाना होगा ताकि रोवर को मंगल की सतह पर चलाने का प्रोग्राम चालू किया जा सके।

मंगल की सतह पर रोवर

इसके साथ ही पर्सिवियरेंस से उम्मीद है कि वह अगले हफ़्ते में मंगल ग्रह के सतह की कई तस्वीरें लेगा ताकि वैज्ञानिक आसपास के इलाक़े को बेहतर समझ सकें।

इस रोवर का एक उद्देश्य मंगल पर कम वज़न वाले एक हेलिकॉप्टर को उड़ाना भी है। पर्सिवियरेंस अपने साथ एक छोटे-से हेलिकॉप्टर को लेकर गया है। रोवर इस हेलिकॉप्टर को उड़ाने का प्रयास करेगा जो कि किसी अन्य ग्रह पर इस तरह की पहली उड़ान होगी।

मंगल ग्रह के लिहाज़ से ये राइट ब्रदर्स क्षण जैसा क्षण हो सकता है, ठीक वैसा जब पृथ्वी पर राइट बंधुओं ने पहली बार उड़ान भरी थी और उड़ने की संभावना के सपने को साकार किया था।

मुख्य अभियान

इसके बाद ही रोबोट इस मिशन के मुख्य काम करने की शुरुआत करेगा और जेज़ेरो में उस ओर जाएगा जहां डेल्टा क्षेत्र है।

डेल्टा क्षेत्र नदियों द्वारा बनाए जाते हैं जब वे समुद्र में गिरते हुए अपने साथ लाये सेडिमेंट्स को किनारे पर छोड़ देती हैं। वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि जेज़ेरो के डेल्टा इन सेडिमेंट्स से बने हैं, जो कि किसी भी क्षेत्र में कभी जीवन होने के बड़े संकेत हो सकते हैं।

पर्सिवियरेंस डेल्टा का सैंपल लेगा और क्रेटर के किनारे की ओर बढ़ेगा।

सैटेलाइट्स के ज़रिए की गई छानबीन में पता चला है कि इस जगह पर कार्बोनेट रॉक्स हैं जो कि पृथ्वी पर जैविक प्रक्रियाओं को समाहित रखने में काफ़ी अच्छे माने जाते हैं।

पर्सिवियरेंस रोवर में वे सभी उपकरण हैं जो कि इन सभी संरचनाओं का गहनता के साथ माइक्रोस्कोपिक स्तर तक अध्ययन कर सकते हैं।

जेज़ेरो क्रेटर ख़ास क्यों है?


मंगल गृह पर मौजूद पैंतालीस किलोमीटर चौड़े क्रेटर का नाम बोस्निया – हरज़ेगोविना के एक कस्बे के नाम पर रखा गया है। स्लोविक भाषा में जेज़ेरो शब्द का अर्थ झील होता हैं जो कि इस नाम में विशेष रुचि होने की वजह बताने के लिए काफ़ी है।

जेज़ेरो में कई तरह की चट्टानें होती हैं जिनमें चिकनी मिट्टी और कार्बोनेट चट्टानें होते हैं। इनमें ऑर्गेनिक अणुओ को सहेजने की क्षमता होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल के जेज़ेरो में उन्हें वो अणु मिल सकते हैं जो वहां जीवन के संकेतों के बारे में बता सकते हैं।

रोवर सबसे पहले इस ढेर में दिख रहीं चट्टानों का अध्ययन कर सकता है

इसमें वो सेडिमेंट्स अहम हैं जिन्हें ‘बाथटब रिंग’ कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये मंगल ग्रह की पुरानी झील का तटीय क्षेत्र रहा होगा। इस जगह पर पर्सिवियरेंस को वो सेडिमेंट्स मिल सकते हैं जिन्हें पृथ्वी पर स्ट्रोमेटोलाइटिस कहते हैं।

अमेरिकी प्रांत इंडियाना के वेस्ट लफ़ायेट इलाक़े में स्थित परड्यू यूनिवर्सिटी से जुड़ीं साइंस टीम की सदस्य डॉ. ब्रायनी हॉर्गन कहती हैं, “कुछ झीलों में आपको माइक्रोबियल मैट्स मिलती हैं और कार्बोनेट्स आपस में प्रतिक्रिया करटी हैं जिससे बड़ी संरचनाएं जन्म लेती हैं। और ये परत दर परत ढेर (माउल्ड) पैदा होते हैं। अगर हमें जेज़ेरो में ऐसी कोई संरचना मिलती है तो हम सीधे उसी ओर जाएंगे। क्योंकि ये मंगल की खगोल जैवशास्त्र के रहस्यों की खान साबित हो सकते हैं।”

पर्सिवियरेंस जिन दिलचस्प चट्टानों को खोजेगा, उनके कुछ हिस्सों को ज़मीन पर बायीं ओर रखीं पतली ट्यूब्स में रखेगा।

नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने एक योजना बनाई है जिसके तहत इन सिलेंडरों को वापस पृथ्वी पर लाया जाएगा। इस परियोजना में काफ़ी धन खर्च होगा।

ये एक काफ़ी जटिल प्रयास होगा जिसमें एक अन्य रोवर, एक मार्स रोवर, और एक विशालकाय सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि जेज़ेरो की चट्टानों को पृथ्वी तक लाया जा सके।

वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल को समझने के लिए इन नमूनों को वापस लाना तार्किक कदम है। अगर पर्सिवियरेंस को कोई ऐसी चीज़ मिलती है जो कि एक बायो-सिग्नेचर जैसी होती है, तब भी उस सबूत की जाँच की जाएगी।

ऐसे में उन चट्टानों को वापस लाकर पृथ्वी पर अत्याधुनिक ढंग से जांच की जाएगी जिससे मंगल ग्रह पर कभी जीवन होने या नहीं होने से जुड़े सभी कयासों पर विराम लग सके।

चहलकदमी आरंभ

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर चलना यानी खोज करना शुरू कर दिया है।

एजेंसी के अनुसार, रोवर बहुत दूर नहीं गया है। इसने अब तक कुल 6.5 मीटर यानी 21 फ़ीट का सफ़र किया है। लेकिन नासा की वरिष्ठ वैज्ञानिक केटी स्टैक मॉर्गन ने इसे एक ‘महत्वपूर्ण उपलब्धि’ बताया है।

पर्सिवियरेंस रोवर के मंगल ग्रह की सतह पर चलने के निशान

मॉर्गन ने कहा, “पर्सिवियरेंस रोवर को अब भी बहुत सी तकनीकी जाँचों से गुज़रना पड़ रहा है। लेकिन जैसे ही इसके रबड़ के पहिये घूमना शुरू होंगे, हम ख़ुद को इसके ज़रिए मंगल ग्रह का खोजकर्ता मान सकते हैं।”

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की ओर से मंगल ग्रह पर उतारा गया ये दूसरा एक टन वज़न का रोवर है। पर्सिवियरेंस रोवर नासा द्वारा मंगल ग्रह की सतह पर उतारा गया अब तक का सबसे तेज़ रोवर भी है।
पर्सिवियरेंस रोवर से उम्मीद है कि वो अगले हफ़्ते में मंगल ग्रह की सतह की कई तस्वीरें लेगा, ताकि वैज्ञानिक आसपास के इलाक़े को बेहतर समझ सकें।

गुरुवार को इस रोवर ने कुछ दूरी तय की, जिसके बाद इसने 150 डिग्री का मोड़ लिया और वापस अपनी जगह पर लौट आया।

“पहियों के निशान कभी भी हमें इतने अच्छे नहीं लगे होंगे, जितने इस रोवर के पहियों के निशान लग रहे हैं जो इसने मंगल ग्रह की सतह पर छोड़े हैं। यह बेशक इस मिशन की एक बड़ी उपलब्धि है। हमारी पूरी टीम इससे ख़ुश है। सालों तक ना जाने कितने लोगों ने इस दिन को देखने का इंतज़ार किया।”

इस बारे में बात करते हुए रोवर की मोबिलिटी इंजीनियर एनाइस ज़ारिफ़ियन
  • 19 फ़रवरी को नासा का यह पर्सिवियरेंस रोवर मंगल ग्रह की सतह पर उतरा था।
  • मंगल तक पहुँचने के लिए सात महीने पहले धरती से गये इस रोवर ने तक़रीबन आधा अरब किलोमीटर की दूरी तय की।
  • ये रोवर एक पुरानी सूख चुकी झील की ज़मीन की जाँच करने के साथ-साथ अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर माइक्रो-ऑर्गानिज़्म्स की किसी भी गतिविधि यानी जीवन के होने के चिन्हों की जाँच करेगा और उन्हें पृथ्वी पर भेजेगा।
  • 1970 के बाद नासा का यह पहला मिशन है, जो मंगल ग्रह पर जीवन के निशान तलाशने के लिए गया है।
  • एजेंसी की ओर से बताया गया है कि यह रोवर क़रीब दो वर्ष के काल-खण्ड में मंगल ग्रह की सतह पर तक़रीबन 15 किलोमीटर चलेगा।

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