नाभिकिय संलयन : भविष्य की ऊर्जा


नाभिकिय संलयन प्रक्रिया ब्रह्मांड मे सूर्य तथा अन्य सभी तारो की ऊर्जा का मूल है। इस प्रक्रिया को पृथ्वी पर एक लघु पैमाने पर भी अपनाने पर एक साफ़सुथरी, सस्ती तथा अनंत ऊर्जा का स्रोत मिल जायेगा। प्रस्तुत है एक अवलोकन नाभिकिय संलयन से जुड़ी आशाओं ,चुनौतियों तथा इस दिशा मे चल रहे उन प्रयोगों…

तापमान : ब्रह्माण्ड मे उष्णतम से लेकर शीतलतम तक


उष्ण होने पर परमाणु और परमाण्विक कण तरंगीत तथा गतिमान होते है। वे जितने ज्यादा उष्ण रहेंगे उतनी ज्यादा गति से गतिमान रहेंगे। वे जितने शीतल रहेंगे उनकी गति उतनी कम होगी। परम शून्य तापमान पर उनकी गति शून्य हो जाती है। इस तापमान से कम तापमान संभव नही है। यह कुछ ऐसा है कि…