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बिजली(तडित पात) : 1 मिनट मे 28 बार!


कहते तो ये हैं कि आसमान में बिजली(तड़ित) एक जगह पर दो बार नहीं चमकती। लेकिन आपको जानकर अचरज होगा कि दक्षिण अमरीकी देश वेनेज़ुएला की एक झील के ऊपर किसी भी तूफ़ानी रात को एक घंटे में हज़ारों बार बिजली चमकती है। इस हैरान करने वाले ‘करिश्मे‘ को “बीकन ऑफ़ मैराकाइबो” या “कैटाटुम्बो लाइटनिंग”…

चंद्रशेखर वेंकट रामण

सर चंद्रशेखर वेंकटरमन : आधुनिक युग के महानतम भारतीय वैज्ञानिक


लेखक : प्रदीप सन् 1921 की बात है। एक भारतीय वैज्ञानिक को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड से विश्वविद्यालयीन कांग्रेस में भाग लेने के लिए निमंत्रण प्राप्त हुआ। इसी सिलसिले में वह इंग्लैंड गया। जब वह वापस पानी के जहाज से भारत लौट रहा था, तब रास्ते-भर वह भूमध्यसागर के जल के रंग को ध्यानपूर्वक देखता रहा…

सत्येंद्रनाथ बोस,Satyendra-Nath-Bose

बोसॉन के जनक : सत्येन्द्र नाथ बोस


सत्येंद्र नाथ बोस प्रसिद्ध गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री थे। भौतिक शास्त्र में दो प्रकार के अणु माने जाते हैं- बोसॉन और फर्मियान। इनमें से बोसॉन सत्येन्द्र नाथ बोस के नाम पर ही है। सत्येंद्र नाथ बोस का जन्म 1 जनवरी 1894 को कोलकाता में हुआ था। मृत्यु 4 फ़रवरी 1974 को हुयी थी। उपलब्धियां सत्येन्द्र नाथ…

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कैलेंडर, संवंत या पंचांग : एक विवेचन


1 जनवरी अर्थात ग्रेगोरियन कैलेंडर का नववर्ष, नया संवंत, नया कैलेंडर। आइये जानते है इन कैलेंडरो के बारे मे। कैलेंडर(पंचांग) एक प्रणाली है जो समय को व्यवस्थित करने के लिये प्रयोग की जाती है। कैलेंडर का प्रयोग सामाजिक, धार्मिक, वाणिज्यिक, प्रशासनिक या अन्य कार्यों के लिये किया जा सकता है। यह कार्य दिन, सप्ताह, मास,…

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वशिष्ठ अरुंधति तारे : दो नही कुल छः तारे!


वशिष्ठ, जिसका बायर नामांकन “ज़ेटा अर्से मॅजोरिस” (ζ UMa या ζ Ursae Majoris) है, सप्तर्षि तारामंडल(Big Dipper/Ursa Major) का चौथा सब से दीप्तिमान तारा है, जो पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से 70वाँ सब से दीप्तिमान तारा भी है। शक्तिशाली दूरबीन से देखने पर ज्ञात हुआ है कि यह वास्तव में 4 तारों का एक…

कुछ ही दूर सोमब्रेरो(sombrero) आकाशगंगा है, जिसे एम 104 भी कहते हैं। यह करीब 2.8 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। इस आकाशगंगा का फैलाव करीब 50 हज़ार प्रकाश वर्ष है और इसका आकार 800 अरब सूर्यों के आकार जितना है।

ब्रह्माण्ड की 11 अद्भुत आकाशगंगाएँ


पृथ्वी से दूर स्थित अलग-अलग आकाशगंगाओं की रोशनी हम तक लाखों, करोड़ों साल में पहुँचती है। इसीलिए जब हम रात में आसमान को देखते हैं तो हम दरअसल समय की गहराई में झांक रहे होते हैं। नासा की शक्तिशाली हब्बल टेलिस्कोप ने अंतरिक्ष की कई आकाशगंगाओं की तस्वीरों को लेने का अद्भुत काम किया है।…

आदित्य-1

आदित्य-1: इसरो की सूर्य पर पहुंचने की तैयारी


सूर्य प्रभांमडल(कॅरोना) का अध्ययन एवं धरती पर इलेक्ट्रॉनिक संचार में व्यवधान पैदा करने वाली सौर-लपटों की जानकारी हासिल करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आदित्य-1 उपग्रह छोड़ेगा। इसका प्रक्षेपण वर्ष 2012-13 में होना था मगर अब इसरो ने इसका नया प्रक्षेपण कार्यक्रम तैयार किया है। इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा है…