कर्क निहारिका(Crab Nebula)

खगोल भौतिकी 24 : निहारीकायें और उनके प्रकार( NEBULAE AND THEIR TYPES)


लेखिका:  सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar) प्रकृति अपनी खूबसूरती से हमे आश्चर्य चकित करने का कोई मौका नही खोती है और इन प्रकृति द्वारा निर्मित इन खूबसूरतीयों मे से एक है निहारिकायें(Nebulae)। ’मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’ शृंखला के चौबीसवें लेख मे हम इन अद्भूत खगोलीय निहारीकाओं की खूबसूरती और प्रकार की चर्चा करेंगे। निहारिका वास्तविकता मे…

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आकाशगंगाओं का वर्गीकरण : हब्बल का ट्युनिंग फ़ार्क(Hubble's tuning fork)

खगोल भौतिकी 23 : आकाशगंगा और उनका वर्गीकरण


लेखिका:  सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar) अपने स्कूली दिनो से हम जानते है कि हम पृथ्वी मे रहते है जोकि सौर मंडल मे है और सौर मंडल एक विशाल परिवार मंदाकिनी आकाशगंगा(Milkyway Galaxy) का भाग है। लेकिन हममे से अधिकतर लोग नही जानते है कि आकाशगंगा या गैलेक्सी क्या है ? इसके अतिरिक्त मंदाकिनी आकाशगंगा ब्रह्माण्ड मे…

कृतिका तारापुंज(The Pleiades)

खगोल भौतिकी 22 : तारापुंज(STAR CLUSTERS) : सक्षिप्त परिचय


लेखिका:  सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar) अब तक हमने युग्म तारों, न्यूट्रान तारो , ब्लैक होल तथा भिन्न तारों की जीवनक्रम के साथ कई अन्य विषयों की चर्चा की है। अब समय है कि हम तारों से संबधिक एक और महत्वपूर्ण विषय की चर्चा करें, यह विषय है : तारा पुंज या तारा गुच्छ(Star Cluster).’मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics…

सुपरनोवा के अवशेष

खगोल भौतिकी 21 : सुपरनोवा और उनका वर्गीकरण


लेखिका:  सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar) जब भी हम रात्रि आकाश मे देखते है, सारे तारे एक जैसे दिखाई देते है, उन तारों से सब कुछ शांत दिखाई देता है। लेकिन यह सच नही है। यह तारों मे होने वाली गतिविधियों और हलचलो की सही तस्वीर नही है। तारों की वास्तविक तस्वीर भिन्न होती है। हर तारा…

खगोल भौतिकी 20 : तीन तरह के ब्लैक होल


लेखक : ऋषभ ब्लैक होल का वर्गीकरण पिछले कुछ लेखों मे तारकीय खगोलभौतिकी पर विस्तार से चर्चा के पश्चात हम लोकप्रिय विज्ञान से सबसे पसंदीदा विषय की ओर नजर डालते है : ब्लैक होल। इसके पहले के लेख मे हमने देखा था कि किस तरह ब्लैक होल बनते है, यह ब्लैक होल तारकीय द्रव्यमान वाले…

फिलीपींस में मिली आदि मानव की नई प्रजाति


हम आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) पिछले दस हजार सालों से एकमात्र मानव प्रजाति होने के इस कदर अभ्यस्त हो चुके हैं कि किसी दूसरी मानव प्रजाति के बारे में कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के आरंभ में मानव वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों ने हमारी इस सोच को बदलते हुए बताया कि…

इंसानी करतूतों से जैव प्रजातियों पर मंडराता लुप्त होने का खतरा


हमारा जैव मंडल एक विशाल इमारत की तरह है। हम इंसान इस इमारत के सबसे ऊपरी मंजिल पर बैठे हैं। अगर हम इस इमारत में से जीवों की कुछ प्रजातियों को मिटा भी देते हैं, तो इमारत से सिर्फ कुछ र्इंटें ही गायब होंगी, इमारत तो फिर भी खड़ी रहेगी। परंतु यदि लाखों-लाख की संख्या…