ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 08 : श्याम ऊर्जा(Dark Energy)


ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)
ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सबसे प्रचलित तथा मान्य सिद्धांत के अनुसार अरबो वर्ष पहले सारा ब्रह्माण्ड एक बिंदू के रूप मे था। किसी अज्ञात कारण से इस बिंदू ने एक विस्फोट के साथ विस्तार प्रारंभ किया और ब्रह्माण्ड आस्तित्व मे आया। ब्रह्माण्ड का यह विस्तार वर्तमान मे भी जारी है। इसे हम महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory) कहते है। एडवीन हब्बल द्वारा किये गये निरिक्षणो तथा आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत ने इस सिद्धांत को प्रायोगिक तथा तार्किक आधार दिया।

1990 दशक के मध्य मे कुछ खगोलशास्त्रीयों ने ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मापने के लिए कुछ प्रयोग किये। गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान को आकर्षित करता है, इसलिए अधिकतर वैज्ञानिको का मानना था कि गुरुत्वाकर्षण बल ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति को मंद कर देगा या इस गति को स्थिर कर देगा।

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बृहस्पति,मंगल,बुध और शुक्र एक रेखा मे !


शुक्रवार 13 मई 2011, को चार ग्रह बृहस्पति, मंगल, बुध और शुक्र एक रेखा मे आ जायेंगे। यह दुर्लभ घटना दक्षिणी गोलार्ध मे देखी जा सकेगी। यह दुर्लभ घटना हर … पढ़ना जारी रखें बृहस्पति,मंगल,बुध और शुक्र एक रेखा मे !

दृश्य प्रकाश के रंग और विद्युत चुंबकिय विकिरण

बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !


अंतरिक्ष की गहराईयो मे यह विशालकाय बिल्ली की आंख(Cat’s Eye Nebula) के जैसी ग्रहीय निहारिका(planetary nebula) पृथ्वी से तीन हजार प्रकाश वर्ष दूर है। इस निहारिका को एन जी सी ६५४३(NGC 6543) भी कहते है। यह निहारिका सूर्य के जैसे … पढ़ना जारी रखें बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 07 : श्याम पदार्थ (Dark Matter) का ब्रह्माण्ड के भूत और भविष्य पर प्रभाव


श्याम पदार्थ की खोज आकाशगंगाओं के द्रव्यमान की गणनाओं मे त्रुटियों की व्याख्या मात्र नही है। अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सभी प्रचलित सिद्धांतों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिये हैं। श्याम पदार्थ का अस्तित्व ब्रह्माण्ड के भविष्य पर प्रभाव डालता है।

महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory)

1950 के दशक के मध्य मे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का नया सिद्धांत सामने आया, जिसे महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang) नाम दिया गया। इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एक महा-विस्फोट के साथ हुयी। इस सिद्धांत के पीछे आकाशगंगाओं के प्रकाश मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव(Dopler Effect) का निरीक्षण था। इसके अनुसार किसी भी दिशा मे दूरबीन को निर्देशित करने पर भी आकाशगंगाओं के केन्द्र से आने वाले प्रकाश मे लाल विचलन(Red Shift) था। (आकाशगंगाओं के  दोनो छोरो मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव आकाशगंगा का घूर्णन संकेत करता है।) हर दिशा से आकाशगंगाओं के केन्द्र के प्रकाश मे पाया जाने वाला लाल विचलन यह दर्शाता है कि वे हमसे दूर जा रही हैं। अर्थात हर दिशा मे ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है।

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चंद्रमा उत्तरी गोलार्ध मे(न्युयार्क)

क्या दक्षिणी गोलार्ध मे चंद्रमा उल्टा दिखेगा ?


यह दोनो चित्र चंद्रमा के है! क्या आप दोनो चित्रों मे अंतर पता कर सकते है ? उपर वाला चित्र उत्तरी गोलार्ध (न्युयार्क स. रा. अमरीका) … पढ़ना जारी रखें क्या दक्षिणी गोलार्ध मे चंद्रमा उल्टा दिखेगा ?

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 06 : श्याम पदार्थ (Dark Matter)


1928 मे नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी मैक्स बार्न ने जाट्टीन्जेन विश्वविद्यालय मे कहा था कि

“जैसा कि हम जानते है, भौतिकी अगले छः महिनो मे सम्पूर्ण हो जायेगी।”

उनका यह विश्वास पाल डीरेक के इलेक्ट्रान की व्यवहार की व्याख्या करने वाले समीकरण की खोज पर आधारित था। यह माना जाता था कि ऐसा ही समिकरण प्रोटान के लिए भी होगा। उस समय तक इलेक्ट्रान के अतिरिक्त प्रोटान ही ज्ञात मूलभूत कण था। इस समिकरण के साथ सैद्धांतिक भौतिकी(Theoritical Physics) का अंत था, इसके बाद जानने के लिए कुछ भी शेष नही रह जाता। लेकिन कुछ समय बाद एक नया कण न्यूट्रॉन खोजा गया। इसके बाद मानो भानूमती का पिटारा खूल गया! इतने सारे नये कण खोजे गये कि उनके नामकरण के लीए लैटीन अक्षर कम पढ़ गये।

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