प्रकाशगति से तेज न्युट्रिनो ?: क्रांतिकारी खोज या प्रायोगिक गलती ?


ओपेरा कण जांचक( OPERA particle detector)
ओपेरा कण जांचक( OPERA particle detector)

अपडेट मार्च 17,2012: आइंस्टाइन का सिद्धांत कि प्रकाशगति से तेज यात्रा असंभव  है, अभी तक सही है, प्रकाशगति से तेज न्युट्रिनो प्रयोग के पीछे एक उपकरण की गलती थी। इस प्रयोग मे प्रयुक्त एक फाइबर आप्टिक केबल ढीला होने से समय की सही गणना नही हो पा रही थी, जिससे प्रकाशगति से तेज न्युट्रीनो का भ्रम उत्पन्न हो रहा था।

जेनेवा स्थित भौतिकी की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला सर्न(CERN) में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने परमाण्विक कण (Subatomic Particles) न्यूट्रिनो की गति प्रकाश की गति से भी ज़्यादा पाई है।

अगर ऐसा सच हुआ तो ये भौतिकी के मूलभूत नियमों को पलटने वाली खोज होगी। शोधकर्ता स्वीकार कर रहे हैं कि वे इस नतीजे से काफ़ी आश्चर्यचकित हैं और इसीलिए उन्होंने कोई दावा नहीं करते हुए अन्य लोगों से स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करने की अपील की है।

आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार कोई भी कण प्रकाशगति से तेज नही चल सकता है। यदि यह निरीक्षण सत्य है तब भौतिकी की किताबो को नये सीरे से लिखना होगा। पढ़ना जारी रखें “प्रकाशगति से तेज न्युट्रिनो ?: क्रांतिकारी खोज या प्रायोगिक गलती ?”

स्टार ट्रेक मे टेलीपोर्टेशन

टेलीपोर्टेशन : विज्ञान फंतासी कथाओं मे विज्ञान


स्टार ट्रेक मे टेलीपोर्टेशन
स्टार ट्रेक मे टेलीपोर्टेशन

स्टार ट्रेक की कहानी एक अंतरिक्षयान यु एस एस एन्टरप्रायज के यात्राओं पर आधारित होती है। यह अंतरिक्षयान ब्रह्माण्ड की अनंत गहराईयों मे जीवन की खोज मे घूमता रहता है। जब इस की कहानी लिखी जा रही थी, तब अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाने और वापिस आने के तरिको पर विचार किया जा रहा था। सबसे आसान उपाय राकेटो का था लेकिन राकेट के लांच होने और “एन्टरप्रायज” तक पहुंचने या “एन्टरप्रायज” से राकेट/शटल यान के निकलने और ग्रह तक पहुंचने के फिल्मांकन की परेशानीयाँ थी। यह फिल्मांकन तकनीकी रूप से संभव था लेकिन महंगा था। इस धारावाहिक मे लगभग हर एपिसोड मे इस तरह की राकेट/शटल यात्रा दिखाना बजट की रीढ़ तोड़े जा रहा था।

एंटरप्रायज अंतरिक्ष यान से इन छोटी यात्राओं के विकल्प के रूप मे टेलीपोर्टेशन को प्रस्तुत किया गया। टेलीपोर्टेशन का फिल्मांकन आसान था, कैप्टन किर्क एक बटन दबाते ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाते।

टेलीपोर्टेशन के कुछ उदाहरण धार्मिक कथाओं मे भी मीलते है। इन कथाओ मे कई ऐसे प्रसंग है जिसमे देवता एक स्थान पर अंतर्धान हो कर दूसरे स्थान पर प्रकट होते है। थीयासोफीकल सोसायटी के मानने वालो के अनुसार कुछ सिद्ध पुरुष जिन्हे वे ’महात्मा’ कहते है, ’टेलीपोर्टेशन’ की क्षमता रखते है। परमहंस योगानंद की पुस्तक आटोबायोग्राफी आफ़ ए योगी मे भी कुछ स्थानो पर टेलीपोर्टेशन का वर्णन है। पढ़ना जारी रखें “टेलीपोर्टेशन : विज्ञान फंतासी कथाओं मे विज्ञान”

स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)

विज्ञान फंतासी कथाओं मे विज्ञान


स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)
स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)

विज्ञान फतांसी कथायें सामान्यतः ऐसी कल्पित कहानियाँ होती है,जिसकी घटनाये वैज्ञानिक आधार पर संभव होती हैं और वे विज्ञान के मूलभूत नियमो का उल्लंघन नही करती हैं। इन कथाओं का घटनाक्रम भविष्य, भविष्य का विज्ञान और तकनिकी ज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा अथवा परग्रही प्राणीयों पर केन्द्रित होता है। कभी कभी वैज्ञानिक आविष्कारों के परिणामो का अध्ययन भी इन कथाओं का उद्देश्य होता है।

विज्ञान गल्प मे तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत समांतर विश्व या भविष्य का भी समावेश होता है। यह जादुई या तिलस्मी कहानीयों के जैसे ही लेकिन भिन्न होती है क्योंकि इस गल्पो की घटनायें वैज्ञानिक आधार पर संभव होती है। इन कहानीयों का घटनाक्रम और पात्र काल्पनिक होते है लेकिन वे विज्ञान के मूलभूत नियमों का पालन करते है।

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मुंबई मे हिग्स बोसान रहस्योद्घाटन : क्या स्टीफन हांकिंग अपनी हारी शर्त जीत गये है ?


अपडेट :4 जुलाई 2012″ स्टीफन हाकिंस अपनी शर्त हार चुके है। हिग्स बोसान खोज लिया गया है।

LHC मे उच्च ऊर्जा पर मूलभूत कणो का टकराव
LHC मे उच्च ऊर्जा पर मूलभूत कणो का टकराव

कुछ वर्षो पहले के समाचारो के अनुसार अविख्यात ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी स्टीफन हाकिंग ने एक शर्त लगायी थी कि CERN का लार्ज हेड्रान कोलाइडर(LHC) हिग्स बोसान की खोज मे असफल रहेगा। हिग्स बोसान जिसे “ईश्वर कण(God particle)” भी कहा जाता है, को शुरुवाती ब्रह्माण्ड मे भारी कणो के द्रव्यमान के लिए उत्तरदायी माना जाता है।

स्टीफन हाकिंग के इस दावे ने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र मे एक हलचल मचा दी थी। स्काटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्स ने इसे निजी चुनौती के रूप से लिया क्योंकि यह कण उन्ही के नाम पर है। उन्के अनुसार यह स्टीफन हाकिंग की चुनौती “मृत राजकुमारी डायना की आलोचना” के जैसी  है।

अधिकतर भौतिक विज्ञानी मानते है कि हिग्स बोसान का आस्तित्व है तथा इसका प्रायोगिक सत्यापन एक औपचारिकता मात्र है। यह औपचारिकता लार्ज हेड्रान कोलाइडर(LHC) को चलाने के पश्चात पूरी हो जायेगी और हिग्स बोसान खोज लिया जायेगा। अधिकतर वैज्ञानिक मानते है कि स्टीफ़न हाकिंग विवादास्पद और धारा के विपरीत विचारो के लिए जाने जाते है और यह(शर्त) भी उन्ही प्रयासो मे से एक है।

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ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन

द्रव, ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन:राकेट कैसे कार्य करते हैं ? : भाग 2


ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन

ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन
ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन

ठोस ईंधन वाले राकेट इंजन मानव द्वार निर्मित प्रथम इंजन है। ये सैकड़ो वर्ष पूर्व चीन मे बनाये गये थे और तब से उपयोग मे है। युद्ध मे प्रक्षेपास्त्र के रूप मे इनका प्रयोग भारत मे टीपू सुल्तान ने किया था।

ठोस ईंधन वाले राकेट इंजिन की कार्यप्रणाली जटिल नही है। इसे बनाने के लिए आपको कुछ ऐसा करना है कि ईंधन तीव्रता से जले लेकिन उसमे विस्फोट ना हो। बारूद मे विस्फोट होता है, जो कि 75% नाइट्रेट, 15% कार्बन तथा 10% गंधक(सल्फर) से बना होता है। राकेट इंजिन मे विस्फोट नही होना चाहिये इसलिये बारूद मे यदि 72% नाइट्रेट, 24% कार्बन तथा 4% गंधक का प्रयोग हो तो विस्फोट नही होता है बल्कि ऊर्जा सतत रूप से लम्बे समय तक प्राप्त होती है। अब यह मिश्रण बारूद ना होकर राकेट ईंधन के रूप मे प्रयुक्त हो सकता है। यह मिश्रण तिव्रता से जलेगा लेकिन विस्फोट नही होगा।

साथ मे दिये गये चित्र मे आप बायें प्रज्वलन से पहले तथा पश्चात राकेट को देख सकते है। ठोस ईंधन को पीले रंग मे दिखाया गया है। यह ईंधन के मध्य एक सीलेंडर के आकार मे सुरंग बनायी गयी है। जब ईंधन का प्रज्वलन होता है तब वह इस सुरंग की दिवारो के साथ जलता है। जलते हुये ईंधन की दिशा इस सुरंग की ओर से राकेट की बाह्य दिवारो की दिशा ओर होती है। एक छोटे राकेट प्रतिकृति मे ईंधन कुछ सेकंड जलता है लेकिन अंतरिक्ष शटल के सहायक बुस्टर राकेट मे यह लाखों किग्रा ईंधन 2 मिनिट तक जलता है।

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राकेट इंजिन

न्युटन का तीसरा नियम : राकेट कैसे कार्य करते हैं ?: भाग 1


अंतरिक्ष यात्रा मानव इतिहास के सबसे अद्भूत प्रयासो मे एक है। इस प्रयास मे सबसे अद्भूत इसकी जटिलता है। अंतरिक्ष यात्रा को सुगम और सरल बनाने के लिये ढेर सारी समस्या को हल करना पडा़ है, कई बाधाओं को पार करना पड़ा है। इन समस्याओं और बाधाओं मे प्रमुख है:

  1. अंतरिक्ष का निर्वात
  2. उष्णता नियंत्रण और उससे जुड़ी समस्याएं
  3. यान की वापिसी से जुड़ी कठिनाइयाँ
  4. यान की कक्षिय गति और यांत्रिकी
  5. लघु उल्कायें तथा अंतरिक्ष कचरा
  6. ब्रह्मांडीय तथा सौर विकिरण
  7. भारहीन वातावरण मे टायलेट जैसी मूलभूत सुविधाएँ

लेकिन सबसे बड़ी कठीनाई अंतरिक्ष यान को धरती से उठाकर अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिये ऊर्जा का निर्माण है। राकेट इंजीन यही कार्य करता है।

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