ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 08 : श्याम ऊर्जा(Dark Energy)


ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)
ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति(महाविस्फोट से लेकर)

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सबसे प्रचलित तथा मान्य सिद्धांत के अनुसार अरबो वर्ष पहले सारा ब्रह्माण्ड एक बिंदू के रूप मे था। किसी अज्ञात कारण से इस बिंदू ने एक विस्फोट के साथ विस्तार प्रारंभ किया और ब्रह्माण्ड आस्तित्व मे आया। ब्रह्माण्ड का यह विस्तार वर्तमान मे भी जारी है। इसे हम महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory) कहते है। एडवीन हब्बल द्वारा किये गये निरिक्षणो तथा आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत ने इस सिद्धांत को प्रायोगिक तथा तार्किक आधार दिया।

1990 दशक के मध्य मे कुछ खगोलशास्त्रीयों ने ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मापने के लिए कुछ प्रयोग किये। गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान को आकर्षित करता है, इसलिए अधिकतर वैज्ञानिको का मानना था कि गुरुत्वाकर्षण बल ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति को मंद कर देगा या इस गति को स्थिर कर देगा।

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ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 07 : श्याम पदार्थ (Dark Matter) का ब्रह्माण्ड के भूत और भविष्य पर प्रभाव


श्याम पदार्थ की खोज आकाशगंगाओं के द्रव्यमान की गणनाओं मे त्रुटियों की व्याख्या मात्र नही है। अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सभी प्रचलित सिद्धांतों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिये हैं। श्याम पदार्थ का अस्तित्व ब्रह्माण्ड के भविष्य पर प्रभाव डालता है।

महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory)

1950 के दशक के मध्य मे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का नया सिद्धांत सामने आया, जिसे महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang) नाम दिया गया। इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एक महा-विस्फोट के साथ हुयी। इस सिद्धांत के पीछे आकाशगंगाओं के प्रकाश मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव(Dopler Effect) का निरीक्षण था। इसके अनुसार किसी भी दिशा मे दूरबीन को निर्देशित करने पर भी आकाशगंगाओं के केन्द्र से आने वाले प्रकाश मे लाल विचलन(Red Shift) था। (आकाशगंगाओं के  दोनो छोरो मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव आकाशगंगा का घूर्णन संकेत करता है।) हर दिशा से आकाशगंगाओं के केन्द्र के प्रकाश मे पाया जाने वाला लाल विचलन यह दर्शाता है कि वे हमसे दूर जा रही हैं। अर्थात हर दिशा मे ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है।

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ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 06 : श्याम पदार्थ (Dark Matter)


1928 मे नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी मैक्स बार्न ने जाट्टीन्जेन विश्वविद्यालय मे कहा था कि

“जैसा कि हम जानते है, भौतिकी अगले छः महिनो मे सम्पूर्ण हो जायेगी।”

उनका यह विश्वास पाल डीरेक के इलेक्ट्रान की व्यवहार की व्याख्या करने वाले समीकरण की खोज पर आधारित था। यह माना जाता था कि ऐसा ही समिकरण प्रोटान के लिए भी होगा। उस समय तक इलेक्ट्रान के अतिरिक्त प्रोटान ही ज्ञात मूलभूत कण था। इस समिकरण के साथ सैद्धांतिक भौतिकी(Theoritical Physics) का अंत था, इसके बाद जानने के लिए कुछ भी शेष नही रह जाता। लेकिन कुछ समय बाद एक नया कण न्यूट्रॉन खोजा गया। इसके बाद मानो भानूमती का पिटारा खूल गया! इतने सारे नये कण खोजे गये कि उनके नामकरण के लीए लैटीन अक्षर कम पढ़ गये।

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ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 05 : मानक प्रतिकृति की कमियाँ और आलोचनाएं


मानक प्रतिकृति(Standard Model) एक सफल सिद्धांत है लेकिन इसमे कुछ कमीयां है। यह कुछ मूलभूत प्रश्नो का उत्तर देने मे असमर्थ है जैसे द्रव्यमान का श्रोत, मजबूत CP समस्या, न्युट्रीनो का दोलन, पदार्थ-प्रतिपदार्थ असममिती और श्याम पदार्थ तथा श्याम उर्जा का श्रोत।

एक समस्या मानक प्रतिकृति(Standard Model) के गणितिय समिकरणो मे है जो साधारण सापेक्षतावाद सिद्धांत(Theory of General Relativity) से मेल नही खाती है। ये सिद्धांत (एक या दोनो) कुछ विशेष परिस्थितियों (महाविस्फोट के दौरान(During Big Bang), श्याम विवर के घटना क्षितिज के पास (Event Horizons of Black Hole)) की व्याख्या नही कर पाते है और असामान्य परिणाम दर्शाते है। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 05 : मानक प्रतिकृति की कमियाँ और आलोचनाएं”

मानक प्रतिकृति (Standard Model)

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 04 : मानक प्रतिकृति(Standard Model)


इस श्रंखला मे अब तक मूलभूत कण तथा मूलभूत बल की चर्चा हुयी है। मानक प्रतिकृति (Standard Model) मूलभूत बल तथा मूलभूत कणों के सम्पूर्ण ज्ञात सिद्धांतो का समावेश करता है। अब तक के लेखो मे वर्णीत महा एकीकृत सिद्धांत(Grand Unified Theory)  मानक प्रतिकृती का ही एक भाग है। यह सिद्धांत 20 वी शताब्दी की शुरुवात से लेकर मध्य तक विकसीत हुआ है तथा 1970 मे क्वार्क के आस्तित्व के प्रायोगिक निरीक्षण के पश्चात मान्य हुआ है। इसके पश्चात बाटम क्वार्क (1977), टाप क्वार्क(1995) तथा टाउ न्युट्रीनो(2000) की खोज के बाद इस सिद्धांत को प्रामाणिकता मिली है। इस सिद्धांत द्वारा विभिन्न प्रायोगिक निरीक्षणो को सैद्धांतिक रूप से सत्यापन करने मे मिली सफलता के कारण इसे पूर्ण सिद्धांत माना जाता है। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 04 : मानक प्रतिकृति(Standard Model)”

ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 03 : मूलभूत बल – महा एकीकृत सिद्धांत(GUT)


महा एकीकृत सिद्धांत(Grand Unified Theory) विद्युत-चुंबकिय बल, कमजोर नाभिकिय बल तथा मजबूत नाभिकिय बल के एकीकरण का सिद्धांत है। यह नाम प्रचलित है लेकिन उचित नही है क्योंकि यह महा नही है ना ही एकीकृत है। यह सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण का समावेश नही करता है अर्थात पूर्ण एकीकरण नही हुआ है। यह सिद्धांत पूर्ण सिद्धांत भी नही है क्योंकि इस सिद्धांत मे बहुत से कारक ऐसे है जिनके मूल्य की गणना नही की जा सकती है, उल्टे उन्हे प्रयोग की सफलता के लिए चुना जाता है! फिर भी यह पूर्ण एकीकृत सिद्धांत की ओर एक कदम है। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 03 : मूलभूत बल – महा एकीकृत सिद्धांत(GUT)”