जाक डुबोशे(Jacques Dubochet), योआखिम फ्रैंक(Joachim Frank) और रिचर्ड हेंडरसन(Richard Henderson)

नोबेल पुरस्कार 2017: रसायन का नोबेल पुरस्कार क्रायो माइक्रोस्कोपी के आविष्कारकों को


  2017 का रसायन का नोबेल पुरस्कार जाक डुबोशे(Jacques Dubochet), योआखिम फ्रैंक(Joachim Frank) और रिचर्ड हेंडरसन(Richard Henderson) को संयुक्त रूप से दिया गया है। इन तीनों को क्रायो इल्केट्रॉन माइक्रोस्कोपी के विकास के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। यह … पढ़ना जारी रखें नोबेल पुरस्कार 2017: रसायन का नोबेल पुरस्कार क्रायो माइक्रोस्कोपी के आविष्कारकों को

2016 रसायन नोबेल :जीन पिअरे सावेज, फ़्रेजर स्टोडार्ट तथा बर्नार्ड फ़ेरिंगा


  फ़्रेंच वैज्ञानिक जीन पिअरे सावेज(Jean-Pierre Sauvage) , ब्रिटेन मे जन्मे फ़्रेजर स्टोडार्ट(Fraser Stoddart) तथा डच वैज्ञानिक बर्नार्ड फ़ेरिंगा(Bernard “Ben” Feringa) को 2016 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हे यह पुरस्कार आण्विक पैमाने पर कार्य करने वाली नन्ही मशीनो … पढ़ना जारी रखें 2016 रसायन नोबेल :जीन पिअरे सावेज, फ़्रेजर स्टोडार्ट तथा बर्नार्ड फ़ेरिंगा

2016 चिकित्सा नोबल पुरस्कार : योशिनोरी ओसुमी


  जापान के वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी को वर्ष 2016 के चिकित्सा नोबल पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें ये पुरस्कार कोशिकाओं के क्षरण( डिग्रेडेशन) और पुन:चक्रण( … पढ़ना जारी रखें 2016 चिकित्सा नोबल पुरस्कार : योशिनोरी ओसुमी

भविष्य की ऊर्जा : नाभिकिय संलयन(nuclear fusion) से पूरी होगी ऊर्जा की आवश्यकतायें


मानव को विकास चाहिए। विकास के लिए आवश्यक है ऊर्जा। ऊर्जा हमें ईंधन से मिलती है। आज दुनिया में कई तरह के ईंधन काम में लाए जा रहे हैं। सबसे ज़्यादा जिनका इस्तेमाल हो रहा है वो है कोयला और … पढ़ना जारी रखें भविष्य की ऊर्जा : नाभिकिय संलयन(nuclear fusion) से पूरी होगी ऊर्जा की आवश्यकतायें

सतीश धवन

प्रो सतीश धवन : इसरो की नींव बनाने वालो मे एक प्रमुख नाम


सतीश धवन (जन्म- 25 सितंबर, 1920; मृत्यु- 3 जनवरी, 2002) भारत के प्रसिद्ध रॉकेट वैज्ञानिक थे। देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाने में उनका बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान था। एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ प्रोफ़ेसर सतीश … पढ़ना जारी रखें प्रो सतीश धवन : इसरो की नींव बनाने वालो मे एक प्रमुख नाम

7. इस सारी प्रक्रिया मे रेडीयो सक्रिय पदार्थ की अल्प मात्रा के अतिरिक्त किसी अन्य ऊर्जा/इंधन की आवश्यकता नही होती है।

भविष्य के विमान नाभिकिय शक्ति से चालित हो सकते है: बोइंग द्वारा पेटेंट प्राप्त


जुलाई 2015 के प्रथम सप्ताह मे सं रां अमरीका के पेटेंट कार्यालय ने विमान निर्माता कंपनी बोइंग के राबर्ट बुडिका, जेम्स हर्जबर्ग तथा फ़्रैंक चांडलर के “लेजर तथा नाभिकिय शक्ति” से चलने वाले विमान इंजन के पेटेंट आवेदन को अनुमति दे दी है।

विमान निर्माता कंपनी सामान्यत: अपने उत्पादो को उन्नत बनाने के लिये हमेशा नयी और पहले से बेहतर तकनीक की तलाश मे रहती है, इसी क्रम मे लेजर तथा नाभिकिय शक्ति से चालित विमान इंजन बोइंग के इंजिनीयरो का नया आइडीया है।

आधुनिक विमान जैसे बोइंग ड्रीमलाईनर मे एकाधिक टर्बोफ़ैन इंजन होते है। इन इंजनो मे पंखो और टर्बाइन की एक श्रृंखला होती है जो हवा के संपिड़न तथा ईंधन के प्रज्वलन से प्रणोद(Thrust) उत्पन्न करते है।

बोइंग के नये पेटेंट किये गये नये इंजन मे प्रणोद एक पुर्णतय भिन्न तथा अभिनव तरिके से किया जायेगा। पेटेंट आवेदन के अनुसार यह लेक्जर नाभिकिय इंजन राकेट, प्रक्षेपास्त्र तथा अंतरिक्षयान मे भी प्रयोग किया जा सकेगा।

वर्तमान मे यह इंजन केवल पेटेंटे के दस्तावेजो मे दर्ज है। इसे बनाने की तकनीक भी उपलब्ध है लेकिन इसे कोई बनायेगा या नही अभी स्पष्ट नही है।

अब देखते है कि यह इंजन कैसे कार्य करेगा। पढ़ना जारी रखें “भविष्य के विमान नाभिकिय शक्ति से चालित हो सकते है: बोइंग द्वारा पेटेंट प्राप्त”