खगोल भौतिकी 30 :खगोलभौतिकी की शीर्ष 5 अनसुलझी समस्यायें


लेखक : ऋषभ
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यह मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’ शृंखला का तींसवाँ और अंतिम लेख है। हमने खगोलभौतिकी के बुनियादी प्रश्नो से आरंभ किया था और प्रश्न किया था कि खगोलभौतिकी क्या है? हमने इस विषय को समझने मे सहायक कुछ सरल आधारभूत उपकरणो की चर्चा की थी जिसमे विद्युत चुंबकीय वर्णक्रम(EM Spectrum), दूरी, परिमाण की अवधारणा, हर्ट्जस्प्रंग रसेल आरेख(Hertzsprung Russell Diagram) और कुछ अन्य उपकरण का समावेश है। इसके पश्चात हमने सूर्य की संरचना, सूर्य का वातावरण, तारों मे चल रही नाभिकिय अभिक्रिया. तारकीय विकास(stellar evolution), ब्लैक होल का र्निमाण, ब्लैक होल के प्रकार, क्वासर, आकाशगंगा, निहारिका(nebulae), CMB विकिरण की चर्चा की। इस शृंखला का अंत हम खगोलभौतिकी की शीर्ष 5 अनसुलझी समस्याओं से करेंगे।

मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’इस शृंखला के सारे लेखों को पढने के लिये इस लिंक पर क्लिक करें।

5. मेग्नेटार के चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत(ORIGIN OF MAGNETAR MAGNETIC FIELD)

मेग्नेटार अत्याधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र वाले न्यूट्रान तारे होते है। किसी औसत मेग्नेटार का चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति 1-100 टेस्ला(Tesla) ही होती है। तुलना के लिये हम किसी प्रयोगशाला मे अब तक विशिष्ट अवस्थाओं के अंतर्गत कुछ सौ टेस्ला शक्ति के चुंबकीय क्षेत्र का ही निर्माण कर पाये है। न्यूट्रान तारों के जैसे ही मेग्नेटार लगभग 20 किमी व्यास के और सूर्य से दो से तीन गुने द्रव्यमान के होते है। इसका अर्थ है कि उनका घनत्च अत्याधिक होता है। इनके पदार्थ की एक चम्मच मात्रा का द्रव्यमान 10 करोड़ टन होगा।

मेग्नेटार का कल्पित चित्र

मेग्नेटार का कल्पित चित्र

इतने शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत की परिकल्पना न्यूट्रान तारो के अशांत, अत्याधिक घनत्व वाले सुचालक द्रव मे चलनी वाली मेग्नेटोहायड्रोडायनामिक प्रक्रिया से की जाती है जोकि न्यूट्रान तारों के संतुलित अवस्था मे पहुचने से पहले तक उपस्थित रहती है। किसी मेग्नेटार का चुंबकिय क्षेत्र इतना अधिक शक्तिशाली होता है कि इससे 1000 किमी दूरी पर भी घातक होगा, वह किसी भी प्राणी के शरीर मे उपस्थित परमाणुओं के इलेक्ट्रान बादल को इस तरह से विकृत कर देगा कि सारी जैवरासायनिक प्रक्रिया असंभव हो जायेंगी। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी के आधे मे ही मेग्नेटार पृथ्वी पर के सभी क्रेडीट कार्ड की चुंबकीय पट्टी से सूचनाओं को उड़ा देगा। वर्तमान मे ब्रह्मांड के ज्ञात समस्त चुंबकीय पिंडो मे ये सबसे शक्तिशाली चुंबकीय पिंड है।

4. आकाशगंगा घूर्णन आरेख और श्याम पदार्थ(GALAXY ROTATION CURVE AND DARK MATTER)

तारों की आकाशगंगा केंद्र की परिक्रमा गति और उनके केंद्र से दूरी मे मध्य के आरेख को आकाशगंगा घूर्णन आरेख कहते है। उदाहरण के लिये सौर मंडल मे बुध ग्रह सूर्य की परिक्रमा मे 88 दिन मे करता है जबकि नेपच्युन 165 वर्ष ले लेता है। बुध से नेपच्युन तक ग्रहों की कक्षीय गति कम होते जाती है, अर्थात सूर्य से दूरी के अनुपात के साथ परिक्रमा गति कम होते जाती है। लेकिन यह आकाशगंगा के तारों पर लागु नही होता है। तारे अपने आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा समान या अधिक होती हुई गति के साथ करते है, उनकी कक्षीय गति पर केंद्र से दूरी का कोई असर नही दिखाई पडता है ।

 सर्पिलाकार आकाशगंगा M33 का आकाशगंगा घूर्णन आरेख जिसमे पीले और नीले बिंदुओ द्वारा निरीक्षित तारों की गति दर्शाई गई है, भूरी रेखा द्वारा दृश्य पदार्थ के अनुसार अपेक्षित गति दर्शाई गई है। इन दोनो आरेखो मे विसंगति की व्याख्या आकाशगगा के दृश्य पदार्थ के सभी ओर डार्क मैटर के मण्डल को जोड़कर हो सकती है।


सर्पिलाकार आकाशगंगा M33 का आकाशगंगा घूर्णन आरेख जिसमे पीले और नीले बिंदुओ द्वारा निरीक्षित तारों की गति दर्शाई गई है, भूरी रेखा द्वारा दृश्य पदार्थ के अनुसार अपेक्षित गति दर्शाई गई है। इन दोनो आरेखो मे विसंगति की व्याख्या आकाशगगा के दृश्य पदार्थ के सभी ओर डार्क मैटर के मण्डल को जोड़कर हो सकती है।

इस विसंगतता के दो निहितार्थ है। या तो न्यूटन के शास्त्रीय यांत्रिकी(classical mechanics) के नियम समस्त ब्रह्मांड पर लागु नही होते है, या ब्रह्मांड मे ऐसा अतिरिक्त पदार्थ है जो हमारे लिये अदृश्य है। इस अदृश्य पदार्थ को हम श्याम पदार्थ या डार्क मैटर (dark matter) के रूप मे जानते है। आकाशगंगा घूर्णन आरेख मे पाई गई यह विसंगतता श्याम पदार्थ का प्रथम प्रमाण थी।

3. अत्याधिक ऊर्जा वाली कास्मिक किरणे( ULTRA HIGH ENERGY COSMIC RAYS)

अत्याधिक ऊच्च ऊर्जा वाली कास्मिक किरणे(Ultra High Energy Cosmic Rays (UHECR)) वे ब्रह्मांडीय किरणे जिनकी ऊर्जा कल्पना से परे है। यह ऊर्जा ए़क्सा इलेक्ट्रान वोल्ट(exa electron volt (10^18 eV) से भी अधिक है। 15 अक्टूबर 1991 को उटाह विश्वविद्यालय(University of Utah) के डगवे प्रोविंग ग्राउंड (Dugway Proving Ground) पर चल रहे फ़्लाईज आई प्रयोग(Fly’s Eye experiment) मे एक उच्च ऊर्जावान कण देखा गया था जिसे ओह माई गाड कण(Oh My God particle) नाम दिया गया था। यह कण खगोलभौतिकी वैज्ञानिको के लिये एक झटका था, उन्होने इस कण की ऊर्जा का अनुमान 3.2×10‍^20 eV (50 J) लगाया था। सरल शब्दो मे इसकी तुलना 100 किमी प्रतिघंटा गति से गतिमान 142 ग्राम की एक बेसबाल गेंद की गतिज ऊर्जा के तुल्य परमाणु नाभिक से की जा सकती है। ऐसे कणो का स्रोत एक रहस्य है। यह खगोलभौतिकी के अनसुलझे रहस्यो मे से एक है।

2. सौर प्रभामंडल उष्णता समस्या(SOLAR CORONA HEATING PROBLEM)

सूर्य का प्रभामंडल सौर वातावरण का सबसे बाहरी भाग है। इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण मे देखा जा सकता है। समस्या यह है कि प्रभामंडल का तापमान लाखों केल्विन है जबके सूर्य की सतह फोटोस्फियर का तापमान 5,900 K मात्र है। उष्मा का प्रवाह शीतल भाग से उष्ण पिंड तक कैसे हो सकता है? उष्मागतिकी के सबसे आधारभूत नियम का उल्लंघन कैसे संभव है ? क्या सूर्य के प्रभामंडल मे कोई अन्य क्रियाविधि कार्यशील है ? यदि हाँ तो वह कौनसी क्रियाविधि है ? क्या इसके पीछे अल्फ़वेन(Alfwen) तरंग है ?

सूर्यग्रहण मे दृश्य प्रभामंडल(corona)

सूर्यग्रहण मे दृश्य प्रभामंडल(corona)

1. ब्लैक होल (BLACK HOLES)

खगोलभौतिकी के सबसे महत्वपूर्ण अनसुलझी समस्याओं मे एक ब्लैक होल से संबधित है। ब्लैक होल की सबसे पहली अवधारणा साधारण सापेक्षतावाद के समीकरणो के हल के रूप मे आई थी। इस क्षेत्र मे बहुत सी शोध जारी है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या साधारण सापेक्षतावाद द्वारा अनुमानित गणितिय ब्लैक होल का अस्तित्व संभव है या वे अनन्तकाल तक संपिड़ित होते हुये पिंड(eternally collapsing objects) मात्र है ? वैज्ञानिक समुदाय दो भागो मे विभाजित है जिनमे से एक वर्ग का मानना है कि निरीक्षित ब्लैक होल साधारण सापेक्षतावाद द्वारा अनुमानित गणितिय ब्लैक होल है जिसके केंद्र मे सिंगुलरैटी होती है; जबकि दूसरा वर्ग उन्हे साधारण सापेक्षतावाद द्वारा अनुमानित गणितिय ब्लैक होल नही मानता है, उनके अनुसार ये अनंत रूप से सपिंडित होते हुये पिंड है। ब्लैक होल के निरीक्षण से ज्ञात कुछ गतिविधियों की व्याख्या पहली अवधारणा से नही होती है जिसमे से एक ब्लैक होल के चुंबकीय क्षेत्र की क्षमता है। कोई ब्लैक होल इतना अधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र कैसे उत्पन्न कर सकता है जब उसका स्रोत केवल अक्रिशन डिस्क के कण ही है ?

ब्लैक होल की प्रथम तस्वीर - अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 10 अप्रैल २०१९ को ब्लैकहोल की पहली तस्वीर जारी की। आकाशगंगा एम87 में 53.5 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद इस विशालकाय ब्लैक होल की तस्वीर जारी की गई है। वैज्ञानिकों ने ब्रसल्ज, शंघाई, तोक्यो, वॉशिंगटन, सैंटियागो और ताइपे में एकसाथ प्रेस वार्ता की और जिस दौरान इस तस्वीर को जारी किया गया।

ब्लैक होल की प्रथम तस्वीर – अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 10 अप्रैल २०१९ को ब्लैकहोल की पहली तस्वीर जारी की। आकाशगंगा एम87 में 53.5 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद इस विशालकाय ब्लैक होल की तस्वीर जारी की गई है। वैज्ञानिकों ने ब्रसल्ज, शंघाई, तोक्यो, वॉशिंगटन, सैंटियागो और ताइपे में एकसाथ प्रेस वार्ता की और जिस दौरान इस तस्वीर को जारी किया गया।

यह भी पढ़े : ब्लैक होल के तीन वर्ग

सिंगुलरैटी वाले ब्लैक होल की बजाय अनन्तकाल तक संपिडित होते पिंड से कई निरीक्षणो की सफ़ल व्याख्या होती है और उसे बेहतर माडल माना जाता है। लेकिन यह माडले सर्वमान्यता प्राप्त माडल बनने से कोसो दूर है।

यह खगोलभौतिकी के 5 शीर्ष अनसूलझे प्रश्न है।

लेखक का संदेश

इसके साथ ही मूलभूत खगोलभौतिकी शृंखला समाप्त होती है। तीस लेखो की यह शृंखला हमारे लिये चुनौतीपुर्ण कार्य रही है। इतने विस्तृत विषय को 30 सरल सभी की समझ मे आ जाने वाले लेखो मे समेटना कठीन था। हमे इस शृंखला को मिले प्रतिसाद से संतोष है। इस शृंखला का एक मूल उद्देश्य इस क्षेत्र मे भौतिकी के महत्व को रेखांकित करना था; साथ ही इस शाखा के विस्तार को दिखाना था। आम तौर पर खगोलभौतिकी एक ग्लेमरस चकाचौंध वाला विषय माना जाता है जैसा कि विज्ञान फ़तांशी मे दर्शाया जाता है। लेकिन यह इस सबसे बहुत अधिक और बहुत भिन्न है जो इस लेख शृंखला मे स्पष्ट है।

यह शृंखला समाप्त होती है लेकिन लेकिन ज्ञान यात्रा जारी रहेगी। हम इस तरह की किसी अन्य विषय पर एक नई शृंखला लेकर उपस्थित होंगे। तब तक हमसे जुड़े रहीये।

मूल लेख : Top 5 Unsolved Problems In Astrophysics

लेखक परिचय

लेखक : ऋषभ

Rishabh Nakra

Rishabh Nakra

लेखक The Secrets of the Universe के संस्थापक तथा व्यवस्थापक है। वे भौतिकी मे परास्नातक के छात्र है। उनकी रूची खगोलभौतिकी, सापेक्षतावाद, क्वांटम यांत्रिकी तथा विद्युतगतिकी मे है।

Admin and Founder of The Secrets of the Universe, He is a science student pursuing Master’s in Physics from India. He loves to study and write about Stellar Astrophysics, Relativity, Quantum Mechanics and Electrodynamics.

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