खगोल भौतिकी 24 : निहारीकायें और उनके प्रकार( NEBULAE AND THEIR TYPES)


लेखिका:  सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar)

प्रकृति अपनी खूबसूरती से हमे आश्चर्य चकित करने का कोई मौका नही खोती है और इन प्रकृति द्वारा निर्मित इन खूबसूरतीयों मे से एक है निहारिकायें(Nebulae)। ’मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’ शृंखला के चौबीसवें लेख मे हम इन अद्भूत खगोलीय निहारीकाओं की खूबसूरती और प्रकार की चर्चा करेंगे।

निहारिका वास्तविकता मे एक अंतरखगोलीय बादल है जिसमे 90% हायड्रोजन, 10% हिलियम और अन्य भारी तत्वो की नगण्य सी मात्रा होती है। ये ऐसे विचित्र गैसीय बादल है जो कभी चमकीले और आकर्षक होते है, तो कभी अंधकारमय गहरे होते है। इनकी ब्रह्मांड के विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका रही है क्योंकि इन्ही मे तारों और ग्रहों के निर्माण के लिये आवश्यक सामग्री होती है। ये रात्रि आकाश मे विशिष्ट और सुस्पष्ट धब्बे की तरह या किसी अन्य प्रकाशित पिंड की पृष्ठभूमी मे एक चमकीली छाया-आकृति के रूप मे दिखाई देते है।

इस शृंखला के सभी लेखों को आप इस लिंक पर पढ़ सकते है।

निरीक्षण इतिहास(Observational History)

निहारिकाओं का निरीक्षण का इतिहास हजारो वर्ष पुराना है। दूसरी ईसवी शताब्दि मे टालेमी(Ptolemy) ने पांच निहारिकाओं का उल्लेख किया है, उसके 800 वर्ष पश्चात अब्न अल रहमान सूरी(Abn al-Rahman Suri) ने देव्यानी आकाशगंगा(Andromeda Galaxy) के स्थान पर एक छोटे बादल का उल्लेख किया है। 1610 मे निकोलस क्लाउदे फ़ैब्री पेयर्सेक(Nicolas-Claude Fabri de Peiresc) ने पहली बार दूरबीन से ओरायन निहारिका का निरीक्षण किया था। इसके पश्चात अठारवी सदी मे खगोल शास्त्रीयों द्वारा निहारीकाओं के निरीक्षण की बाढ आ गई थी। आरंभ मे सभी बादलो जैसी संरचनाओं को निहारिका माना जाया था। लेकिन 1920 मे एडवीन हब्बल(Edwin P. Hubble) के कार्य से निहारीकाओं के वास्तविक गुणधर्मो का पता चला।

निहारिकाओं का वर्गीकरण

सामान्य रूप से निहारिकाओं को दो श्रेणीयों मे बांटा जाता है, आकाशगंगीय निहारिकायें (Galactic Nebulae)तथा बाह्यआकाशगंगीय निहारिकाये(Extragalactic Nebulae)। बाह्यआकाशगंगीय निहारिकाओं के बारे मे ज्यादा कुछ ज्ञात नही है लेकिन आकाशगंगीय निहारिकाओं को दो उपवर्गो मे बांटा गया है जोकि विसरित नीहारिका( Diffuse Nebulae) और सामान्य निहारिकायें है।

विसरित नीहारिका (Diffuse Nebulae)

नाम के अनुसार ये वह खगोलीय गैस के बादल है जिनका कोई विशेष सामान्य आकार नही होता है। इन निहारिकाओं के भी दो प्रकार होते है, प्रकाशिय (Luminous) और अंधेरी(dark) निहारिकाये। प्रकाशिय निहारिकायेंदीप्तीवान, चमकदार और आसानी से दृश्य होती है। ये निहारिकाये विसरित अर्थात फ़ैली हुई होती है, ये अनियमित आकार की और हमारी आकाशगंगाओं की सर्पिलाकार बाहों मे पाई जाती है।

परावर्तन नीहारिका(Reflection Nebulae)

परावर्तन नीहारिका(Reflection Nebulae) ऐसे गैसीय बादल होते है जो आसपास के तारों के या उत्सर्जन निहारिकाओं के प्रकाश को परावर्तित करते है। ये निहारिकायें B वर्ग के तारो द्वारा प्रकाशित होती है जो अपने आप मे अत्याधिक दीप्तीमान होते है लेकिन इनका तापमान 25000K से कम होता है जोकि इन निहारिकाओं की गैस को आयोनाइज्ड करने के लिये पर्याप्त नही होता है लेकिन गैस कणो से प्रकाश बिखर (scattering)कर निहारिका के गैस कणो को दीप्तीमान बनाने मे सक्षम होता है।
उदाहरण : विच हेड निहारिका( Witch Head Nebula)

विच हेड निहारिका( Witch Head Nebula)

विच हेड निहारिका( Witch Head Nebula)

उत्सर्जन नीहारिका (Emission Nebulae)

यदि कोई B1 वर्ग से पहले का तारा आकाशगंगा के प्रतल के पास हो तो उसके साथ एक विसरित उत्सर्जन निहारिका(diffuse emission nebula) होती है। इन उष्ण तारो का शक्तिशाली पराबैंगनी विकिरण इतना शक्तिशाली होता है कि निहारिका की गैस को आयोनाइज्ड कर देता है जिससे वह प्रतिदीप्ती(fluorescence ) प्रभाव से दृश्य प्रकाश का उत्सर्जन करने लगती है। यह प्रक्रिया निआन लाईट या ट्युब लाईट के जैसे ही होती है।
उत्सर्जन नीहारिका (Emission Nebulae) के दो प्रकार होते है; HII क्षेत्र तथा सुपरनोवा अवशेष।

HII क्षेत्र( H II Region)

HII क्षेत्र विशालकाय कम घनत्व के बादल होते है जिसकी गैस हाल ही मे पास ही मे किसी तारे के निर्माण की प्रक्रिया से आयोनाइज्ड हई होती है। अल्प आयु वाले नीले तारे से इतना पराबैंगनी विकिरण निकलता है कि वे अपने आसपास की गैस आयोनाइज्ड कर देते है। इस क्षेत्र का नाम HII क्षेत्र रखा गया है क्योंकि इसमे आयोनाइज्ड हायड्रोजन गैस की प्रचुर मात्रा होती है। HII क्षेत्र कुछ हजार लाख वर्ष के अंतराल मे हजारो तारों को जन्म दे सकते है। अंत मे सुपरनोवा विस्फोट और पास के विशालकाय तारो से प्रवाहीत होती तेज तारकीय वायु(stellar winds) HII क्षेत्र की गैसो को विसरित कर देती है और अंत मे केवल नये जन्म लिये तारों का तारापुंज बचता है।
उदाहरण : ओरायन निहारिका और चील(Eagle) निहारिका

चील(Eagle) निहारिका

चील(Eagle) निहारिका

सुपरनोवा अवशेष (Supernova Remnants)

भारी महाकाय तारों का अंत सुपरनोवा के रूप मे होता है, इसमे एक विस्फोट के साथ तारों की बाह्य परते अंतरखगोलीय क्षेत्र मे फ़ेंक दी जाती है। सुपरनोवा अवशेष ऐसी ही निहारिका होती है जो सुपरनोवा विस्फोट के समय उत्पन्न गैसीय मलबे से बनी होती है। इस गैसीय निहारिका मे सुपरनोवा विस्फोट के दौरान तारे की बाह्य परतों के मलबे के अलावा अंतरतारकीय माध्यम(Interstellar Medium) से मृत होते तारे द्वारा उत्पन्न शाकवेव(Shockwave) द्वारा इकठ्ठा पदार्थ भी होआ है। इन निहारिका मे दृश्य आप्टिकल तरंगदैर्ध्य से अदृश्य लेकिन शक्तिशाली एक्स किरण और रेडीयो विकिरण उत्सर्जन हो सकता है जोकि इस निहारिका के आसपास के अंतरतारकीय माध्यम से प्रतिक्रिया से उत्पन्न होता है। सुपरनोवा से फ़ेंका गया मलबा अंतरतारकीय माध्यम मे गति करते हुये घर्षण और गुरुत्वाकर्षण से धीमा होता है और इस मलबे मे उपस्थित भारी पदार्थो के नाभिक अंतरतारकीय माध्यम से प्रतिक्रिया करते है। इस तरह से जमा पदार्थ अगली पिढ़ी के तारों के लिये कच्चा माल का कार्य करता है।
उदाहरण : कर्क निहारिका(Crab Nebula)

कर्क निहारिका(Crab Nebula)

कर्क निहारिका(Crab Nebula)

अंधेरी या गहरी निहारिका (Dark Nebulae)

अंधेरी निहारिका अंतरतारकीय गैस और धुल के ऐसे घने बादल होते है जो अपनी पृष्ठभूमी के दृश्य प्रकाश को पूरी तरह से रोक देते है। ये बादल गहरे रंग के दिखाई देते है क्योंकि इनके सूक्ष्म धुल के कणो पर कार्बन डाय आक्साईड और ठोस नाईट्रोजन की परत होती है जोकि सारे पृष्ठभूमी प्रकाश की दृश्य प्रकाश तरंगदैर्ध्य को अवशोषित कर लेते है। इन धुल कणो का औसत घनत्व 100-300 अणु/घन सेमी और तापमान 7-15K होता है। ये बादल पूरी तरह से अदृश्य होते है लेकिन इनके घटको द्वारा उत्सर्जित माइक्रोवेव विकिरण से देखे जा सकते है।
उदाहरण : हार्सहेड निहारिका(Horsehead nebula)

हार्सहेड निहारिका(Horsehead nebula)

हार्सहेड निहारिका(Horsehead nebula)

ग्रहीय नीहारिकाएं (Planetary Nebulae)

पूरी तरह से अनियमित आकार वाली उत्सर्जन निहारिकाओं से भिन्न ग्रहीय नीहारिकाएं (Planetary Nebulae) मोटे तौर पर सुव्यवस्थित आकार वाली उत्सर्जन निहारिका होती है। इनके मध्य मे एक अत्याधिक उष्णता वाला नीला तारा होता है, इस केंद्र को निहारिका केंद्र कहते है। मूल रूप से यह वलय के आकार की निहारिका होती है जोकि किसी बुढ़े होते तारे के फ़ैलते हुये गैसीय खोल से बनी होती है। इसे ग्रहीय (Planetary) नाम इसे किसी ग्रह के जैसे गोल आकार के कारण दिया गया है लेकिन इसका ग्रह से कोई संबंध नही है। जैसे ही महाकाय तारे का वातावरण पूरी तरह से विसरित हो कर छंट जाता है, तारे के दीप्तीमान उष्ण केंद्रक से निकलता पराबैंगनी विकिरण फ़ेंके गये पदार्थ हो आयोनाइज्ड कर देता है। अवशोषित पराबैंगनी विकिरण तारे के निहारिकीय गैस को ऊर्जावान कर देता है जिससे वह चमकीले रंग वाली निहारिका के रूप मे दिखाई देता है।
उदाहरण : एस्किमो नेबुला(The Eskimo Nebula)

एस्किमो नेबुला(The Eskimo Nebula)

एस्किमो नेबुला(The Eskimo Nebula)

लेखिका का संदेश

निहारिकाओं का अध्ययन किसी भी आकाशगंगा के विकास को समझने के लिये महत्वपूर्ण है। वे ना केवल तारों के आरंभिक बिंदु है बल्कि तारों के अंतिम बिंदु भी हो सकते है। इस लेख मे हमने इन निहारिकाओं के विभिन्न वर्गो की चर्चा की है आशा है कि इस लेख ने आपको रात्रि आकाश को एक नई परिप्रेक्ष्य से देखने की प्रेरणा दी होगी।

मूल लेख : NEBULAE AND THEIR TYPES

लेखक परिचय

सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar)
संपादक और लेखक : द सिक्रेट्स आफ़ युनिवर्स(‘The secrets of the universe’)

लेखिका भौतिकी मे परास्नातक कर रही है। उनकी रुचि ब्रह्मांड विज्ञान, कंडेस्ड मैटर भौतिकी तथा क्वांटम मेकेनिक्स मे है।

Editor at The Secrets of the Universe, She is a science student pursuing Master’s in Physics from India. Her
interests include Cosmology, Condensed Matter Physics and Quantum Mechanics

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