स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 05 : परिचय


आवर्धन के स्तर 1.सामान्य स्तर - पदार्थ 2.आण्विक स्तर 3.परमाण्विक स्तर - प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान 4.परा-परमाण्विक स्तर - इलेक्ट्रान 5.परा-परमाण्विक स्तर - क्वार्क 6.स्ट्रींग स्तर

आवर्धन के स्तर 1.सामान्य स्तर – पदार्थ 2.आण्विक स्तर 3.परमाण्विक स्तर – प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान 4.परा-परमाण्विक स्तर – इलेक्ट्रान 5.परा-परमाण्विक स्तर – क्वार्क 6.स्ट्रींग स्तर

स्ट्रींग सिद्धांत के पिछे आधारभूत तर्क यह है कि मानक प्रतिकृति के सभी मूलभूत कण एक मूल वस्तु के भिन्न स्वरूप है : एक स्ट्रींग। सरल हिन्दी मे इसे एक महीन तंतु, एक धागे जैसी संरचना कह सकते है। लेकिन यह कैसे संभव है ?

सामान्यतः हम इलेक्ट्रान को को एक बिन्दु के जैसे मानते है जिसकी कोई आंतरिक संरचना नही होती है। एक बिंदु गति के अतिरिक्त कुछ भी क्रिया करने मे असमर्थ होता है। इसे शून्य आयामी संरचना( 0 dimension object) माना जाता है। लेकिन यदि स्ट्रींग सिद्धांत सही है और यदि हम इलेक्ट्रान को एक अत्यंत शक्तिशाली सुक्ष्मदर्शी(microscope) से देख पाये तो हम उसे एक बिंदु के जैसे नही एक स्ट्रींग के वलय अर्थात तंतु के वलय (Loop of String) रूप मे पायेंगे। यह तंतु एक आयाम की संरचना है, इसकी एक निश्चित लंबाई भी है। एक तंतु गति के अतिरिक्त भी क्रियायें कर सकता है, वह भिन्न तरीकों से दोलन कर सकता है। यदि एक तंतु वलय एक विशेष तरीके से दोलन करे तो कुछ दूरी पर हम यह नही जान पायेंगे की वह एक इलेक्ट्रान बिंदू है या एक तंतु वलय। लेकिन वह किसी और तरह से दोलन करे तो उसे फोटान कहा जा सकता है, तीसरी तरह से दोलन करने पर वह क्वार्क हो सकता है। अर्थात एक तंतु वलय भिन्न प्रकार से दोलन करे तो वह सभी मूलभूत कणो की व्याख्या कर सकता है। यदि स्ट्रींग सिद्धांत सही है, तब समस्त ब्रह्माण्ड कणो से नही तंतुओ से बना है।

शायद स्ट्रींग सिद्धांत के बारे मे सबसे विचित्र यह है कि यह आसान सा तथ्य कार्य करता है। मानक प्रतिकृति(Standard Model) मे छोटे से बदलाव के साथ ही उसे स्ट्रींग सिद्धांत मे बदला जा सकता है। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि आज तक एक भी प्रायोगिक प्रमाण नही है, जो यह कह सके कि स्ट्रींग सिद्धांत ब्रह्माण्ड की सही व्याख्या करता है। इसके पीछे एक संभावित कारण यह है कि यह सिद्धांत अभी भी विकास की अवस्था मे है, यह अभी पूरी तरह से परिपक्व नही हुआ  है। हम इस सिद्धांत के टुकड़ो मे जानते है लेकिन अभी पूर्ण तस्वीर बनना शेष है। इस कारण से हम निश्चित अनुमान नही कर सकते है। हाल के कुछ वर्षो मे इस सिद्धांत पर कार्य की गति मे एक त्वरण आया है और हम इस सिद्धांत को  ज्यादा बेहतर रूप से जानते है।

स्ट्रींग सिद्धांत निम्नलिखित प्रश्नो का उत्तर देने का प्रयास करता है:

  1. चारों मूलभूत बलों का श्रोत क्या है?
  2. प्रकृति को ढेर सारे मूलभूत कणों की आवश्यकता क्यों है ?
  3. कणों के पास द्रव्यमान और आवेश क्यों होता है?
  4. हम चार आयाम वाले काल-अंतराल मे क्यों है ?
  5. काल-अंतराल और गुरुत्वाकर्षण की प्रकृति क्या है?

क्या है स्ट्रींग ?

बंद स्ट्रींग और खुली स्ट्रींग

बंद स्ट्रींग और खुली स्ट्रींग

सामान्यत: इलेक्ट्रान के जैसे मूलभूत कणो को बिंदु के जैसे शून्य आयाम की संरचना माना जाता है। मूलभूत स्ट्रींग एक आयामी संरचना होती है। इनकी मोटाई नही होती है लेकिन लंबाई होती है, जो कि 10 -33 सेमी के तुल्य होती है।[10 -33 सेमी अर्थात दशमलव बिंदू के पश्चात 32 शून्य और 1]। सामान्यत: हम जो भी मापन करते है उसकी तुलना मे यह अत्यंत लघु है, यह इतनी छोटी संरचना है कि यह समस्त व्यवहारिक कारणो से बिंदु कणो के जैसे लगती है। लेकिन उनके स्ट्रींग अथवा तंतुनुमा व्यवहार के महत्वपूर्ण निहितार्थ को हम अब देखने जा रहे है।

ये स्ट्रींग/ततुं खुले या बंद हो सकते है। जब यह काल अंतराल मे गति करते है तब एक कल्पित सतह ’विश्वप्रतल(Worldsheet)’ का निर्माण करते हैं।

स्पिन 2 के द्रव्यमान रहित कण :ग्रेवीटान स्ट्रींग

स्पिन 2 के द्रव्यमान रहित कण :ग्रेवीटान स्ट्रींग

इस स्ट्रींग की कुछ विशिष्ट स्पंदन विधियाँ होती है जो उसके विभिन्न गुणधर्मो जैसे द्रव्यमान, स्पिन को निर्धारित करती हैं। इस सिद्धांत का आधार यह है कि हर स्पंदन विधि एक सुनिश्चित मूलभूत कण के क्वांटम गुणधर्मो को जन्म देती है, निर्धारित करती है। यह एक अंतिम एकीकरण है जिसमे सभी मूलभूत कणो को एक ही वस्तु से समझा जा सकता है ,जिसे स्ट्रींग कहते है। इसे किसी वायोलीन के तार से उत्पन्न विभिन्न ध्वनियों के जैसा माना जा सकता है। वायोलीन का एक ही तार विभिन्न ध्वनीयों को उत्पन्न करता है। स्ट्रींग की स्पंदन विधियाँ वायोलीन की ध्वनियों की तरह है, जिसमे हर मूलभूत कण इन ध्वनीयों मे किसी एक ध्वनी से संबधित होता है।

उदाहरण के लिए एक बंद स्ट्रींग को लेते है जो दिखाये गये चित्र के जैसा है। इस की स्पंदन विधी स्पिन 2 के द्रव्यमान रहित कण ग्रेवीटान के जैसी है, जो गुरुत्वाकर्षण बल का वाहक कण है। स्ट्रींग सिद्धांत की विशेषता है कि यह गुरुत्वाकर्षण का भी मूलभूत बलों के रूप मे समावेश करता है। स्टैण्डर्ड माडेल(मानक प्रतिकृति) गुरुत्वाकर्षण का समावेश नही करती है।

कण भौतिकी और स्ट्रींग सिद्धांत मे कणो/स्ट्रींगों के मध्य प्रतिक्रियायें

कण भौतिकी और स्ट्रींग सिद्धांत मे कणो/स्ट्रींगों के मध्य प्रतिक्रियायें

एकाधिक स्ट्रींग जुड़कर और अलग होकर प्रतिक्रिया करती है। उदाहरण के लीये दो बंद स्ट्रींग जुड़कर एक बंद स्ट्रींग का निर्माण करे तो यह कुछ चित्र मे दिखाये अनुसार होगा। ध्यान दें कि इस प्रतिक्रिया का ’विश्वप्रतल’ एक सपाट सतह होगा। यह प्रक्रिया स्ट्रींग सिद्धांत का एक और महत्वपूर्ण गुणधर्म दर्शाती है, इसमे क्वांटम सिद्धांत की तरह अनंत (∞– infinity) नही आता है। क्वांटम कण भौतिकी मे इस तरह की प्रतिक्रियाये शून्य दूरी पर होती है, जिसे सींगुलरैटी भी कहते है। सींगुलरैटी द्वारा समीकरणो मे ∞ का प्रादुर्भाव होता है। चित्र मे यह स्थिती तीन विश्वरेखाओं के मिलाप बिंदु द्वारा प्रदर्शित है। कण भौतिकी के समीकरण उच्च ऊर्जा पर इस बिंदु के फलस्वरूप कार्य करना बंद कर देते है अर्थात उनके उत्तर मे ∞ आना शुरू हो जाता है।

दो बंद स्ट्रींगो का एकीकरण और अलगाव

दो बंद स्ट्रींगो का एकीकरण और अलगाव

 क्वांटम व्यतिक्रम सिद्धांत(perturbation theory) 

यदि हम दो मूल बंद स्ट्रींगों को एक साथ जोड़े, तब हम ऐसी प्रक्रिया मीलती है जिसमे दो बंद स्ट्रींग एक अस्थायी मध्यवर्ती बंद स्ट्रींग बनाती है, जो बाद मे दो बंद स्ट्रींगो मे बंट जाती है। यह प्रक्रिया साथ वाले चित्र मे दर्शायी गयी है। यह प्रक्रिया व्यतिक्रम सिद्धांत(perturbation theory) समझने के लिए आवश्यक है।

क्वांटम यांत्रिकी मे, व्यतिक्रम सिद्धांत कुछ सन्निकटिकरण प्रणालीयों का समुच्चय(set of approximation schemes), है जो जटिल क्वांटम तंत्र को सरल तंत्र के रूप मे वर्णित करता है। यह गणितिय व्यतिक्रम सिद्धांत पर ही आधारित है।

व्यतिक्रम सिद्धांत(perturbation theory) के अनुसार क्वांटम-यांत्रिकी-आयाम(quantum mechanical amplitudes) की गणना के लिए उच्च स्तर क्वांटम प्रक्रियाओं के योगदानों को जोड़ा जाता है। जब यह योगदान लघु से लघु होते जाते है तथा क्वांटम प्रक्रियाओं का स्तर बढते जाता है , तब व्यतिक्रम सिद्धांत के परिणाम बेहतर होते जाते है। इस स्थिति मे हमे कुछ प्रथम आकृतियों की गणना से ही सटिक परिणाम प्राप्त होते है। स्ट्रींग सिद्धांत मे उच्च स्तर की आकृतियां विश्वप्रतल मे निर्मित वलयों की संख्या से संबधित होती है।

क्वांटम-यांत्रिकी-आयाम(quantum mechanical amplitudes) की गणना

क्वांटम-यांत्रिकी-आयाम(quantum mechanical amplitudes) की गणना

व्यतिक्रम सिद्धांत के हर स्तर के लिए स्ट्रींग सिद्धांत मे एक ही आकृति होती है। कण भौतिकी मे उच्च स्तरों के लिए आकृतियों की संख्या चरघातांकी(exponentially) रूप से बढते जाती है। लेकिन ऐसी आकृतियों से जिसमे दो से ज्यादा वलय हों परिणाम प्राप्त करना जटिल होते जाता है क्योंकि इससे जुड़ी ‘सतह(पृष्ठ) संबधित गणित‘ जटिल है। व्यतिक्रम सिद्धांत ‘कमजोर-नाभिकिय बल‘ के अध्ययन के लीये एक अच्छा उपकरण है। कण-भौतिकी की अधिकतर जानकारी और स्ट्रींग सिद्धांत इसी पर आधारित है। लेकिन यह सिद्धांत अधूरा है। इस सिद्धांत से जुड़े अनेक प्रश्नो का उत्तर इस सिद्धांत के सम्पूर्ण होने पर ही संभव होगा।

अगले भाग मे स्ट्रींग सिद्धांत का इतिहास और विकास पर चर्चा

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9 विचार “स्ट्रींग सिद्धांत(String Theory) भाग 05 : परिचय&rdquo पर;

  1. हिंदी में विज्ञान के बहुत कम चिट्टा है आप की ये कोशिश सराहनीय है ये हम जेसे जो इंग्लिश में इस तरहे के चिट्टा नहीं पढ़ पाते उनके लिए तो ये ज्ञान का भंडार है आप का बहोत शुक्रिया

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  2. पाण्डेय जी की राय से सहमत हूँ। स्ट्रिंग सिद्धान्त का इतनी सरल हिन्दी में प्रस्तुतिकरण अत्यन्त महत्व रखता है। मुझे हिन्दी में समझने में अंग्रेजी के स्थान पर अधिक आसानी रही।

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  3. बहुत श्रमसाध्य कार्य कर रहे हैं आप हिन्दी में स्ट्रिंग थियरी पर लिख कर। कुछ लोग जो क्लीन स्लेट से प्रारम्भ कर रहे होंगे उन्हे हिन्दी में समझने में सुगमता होगी।

    हमारे जैसे कुछ हैं जो इसे रिवर्स ट्रांसलेशन से समझने का प्रयास करते हैं। भाषायी पंगु रहे हम! 😦

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