पृथ्वी


अपोलो १७ से ली गयी तस्वीर  

पृथ्वी पर आपका स्वागत है, जो सुर्य नामक तारे का तिसरा ग्रह है। पृथ्वी का आकार मोसंबी के जैसा है और मुख्यत: पत्थर(सीलीका) से बना हुआ है। पृथ्वी की सतह ७०% से ज्यादा जल से आच्छादित है। इस ग्रह का वातावरण मुख्यतः आक्सीजन और नायट्रोजन से बना हुआ है। पृथ्वी का एक चन्द्रमा है जिसका व्यास पृथ्वी के व्यास का एक चौथाई है। पृथ्वी की सतह से उसका आकार सुर्य के आकार के समान ही दिखाई देता है। जल की प्रचुरता के कारण पृथ्वी मे जिवन पाया जाता है, जिसमे मनुष्य और डालफिन जैसे बुद्धीमान जीव भी शामील है। पृथ्वी पर आपकी यात्रा सुखद रहे !

4 विचार “पृथ्वी&rdquo पर;

    1. गुरुत्वाकर्षण से पृथ्वी का सारा पदार्थ पृथ्वी के केंद्र की ओर खिंचा जाता है और उससे पृथ्वी को गोलाकार मिलाता है।
      वैसे पृथ्वी गोल नहीं वह मोसम्बी के जैसे ध्रुवो पर चपटी है। यह चपटापन उसके अपनेअक्ष पर घूर्णन से उत्पन्न है।

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      1. यदि 1 किलोग्राम लोहा और 1 किलोग्राम रूई को सामान्य वातावरण (हवा में) एक ही ऊँचाई से एक साथ गिराया जाए, तो लोहा पहले जमीन पर पहुँचेगा।

        इसका कारण वज़न नहीं, बल्कि वायु प्रतिरोध (Air Resistance) है।

        ऐसा क्यों होता है?

        दोनों का द्रव्यमान (Mass) 1 kg है, इसलिए गुरुत्वाकर्षण दोनों पर लगभग समान त्वरण (9.8 m/s²) लगाता है।

        लेकिन अंतर उनके आकार (Shape) और आयतन (Volume) में है:

        1 kg लोहा बहुत सघन (Dense) होता है, इसलिए उसका आकार छोटा होता है। उस पर हवा का प्रतिरोध कम लगता है।
        1 kg रूई का आयतन बहुत बड़ा होता है। उसका सतह क्षेत्र (Surface Area) अधिक होने के कारण हवा का प्रतिरोध बहुत अधिक लगता है।

        हवा का यह प्रतिरोध रूई की गति को काफी कम कर देता है, इसलिए वह धीरे-धीरे गिरती है।

        यदि निर्वात (Vacuum) में गिराएँ?

        जहाँ हवा बिल्कुल न हो, वहाँ 1 kg लोहा और 1 kg रूई दोनों एक साथ जमीन पर पहुँचेंगे।

        यही प्रयोग 1971 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री David Scott ने हथौड़े और पंख के साथ किया था। चूँकि चंद्रमा पर लगभग कोई वायुमंडल नहीं है, इसलिए दोनों एक साथ गिरे।

        निष्कर्ष
        सामान्य वातावरण (हवा में): लोहा पहले गिरेगा, क्योंकि उस पर वायु प्रतिरोध कम लगता है।
        निर्वात में: दोनों बिल्कुल साथ गिरेंगे, क्योंकि वहाँ हवा का प्रतिरोध नहीं होता।

        ध्यान दें: यदि रूई को अच्छी तरह दबाकर लोहे के समान छोटा और सघन बना दिया जाए, तो दोनों के गिरने के समय का अंतर बहुत कम हो जाएगा।

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