प्रश्न आपके, उत्तर हमारे

प्रश्न आपके, उत्तर हमारे

यह ‘प्रश्न आपके और उत्तर हमारे’ का पहला भाग है। यहाँ अब 4000 के क़रीब टिप्पणियाँ हो गयी हैं, जिस वजह से नया सवाल पूछना और पूछे हुए सवालों के उत्तर तक पहुँचना आपके लिए एक मुश्किल भरा काम हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब ‘प्रश्न आपके और उत्तर हमारे: भाग 2‘ को शुरू किया जा रहा है। आपसे अनुरोध है कि अब आप अपने सवाल वहीं पूँछे।

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3,996 विचार “प्रश्न आपके, उत्तर हमारे&rdquo पर;

    1. रेडियो सिग्नल का बर्फ़ की दीवार के पार जाना उसकी आवृत्ति (frequency), बर्फ़ की मोटाई और उसमें मौजूद पानी पर निर्भर करता है। यह कहना कि “रेडियो सिग्नल बर्फ़ के पार नहीं जाता” हर स्थिति में सही नहीं है।

      कम आवृत्ति (Low Frequency) के रेडियो सिग्नल

      AM, FM, VHF और UHF जैसे कम आवृत्ति वाले रेडियो सिग्नल सामान्य बर्फ़ के अंदर से काफी हद तक गुजर जाते हैं। इसलिए बर्फ़ीले क्षेत्रों में भी रेडियो संचार संभव होता है।

      उच्च आवृत्ति (High Frequency) के सिग्नल

      Wi-Fi (2.4 GHz, 5 GHz), 5G के कुछ बैंड, और माइक्रोवेव सिग्नल बर्फ़ से अधिक प्रभावित होते हैं। यदि बर्फ़:

      बहुत मोटी हो,
      गीली (Wet Snow) हो,
      या उसमें पानी की मात्रा अधिक हो,

      तो सिग्नल काफी कमजोर हो जाता है।

      ऐसा क्यों होता है?

      रेडियो तरंगें विद्युतचुंबकीय (Electromagnetic) तरंगें हैं। जब वे बर्फ़ में प्रवेश करती हैं, तो तीन बातें होती हैं:

      कुछ ऊर्जा अवशोषित (Absorption) हो जाती है।
      कुछ ऊर्जा बिखर (Scattering) जाती है।
      कुछ ऊर्जा परावर्तित (Reflection) हो जाती है।

      गीली बर्फ़ में पानी के अणु रेडियो तरंगों की ऊर्जा को अधिक अवशोषित करते हैं, इसलिए सिग्नल तेजी से कमजोर होता है।

      उदाहरण
      ❄️ 10–20 सेमी सूखी बर्फ़: FM रेडियो लगभग सामान्य रूप से काम करेगा।
      ❄️ कई मीटर मोटी हिमनद (Glacier): उच्च आवृत्ति वाले सिग्नल काफी कमजोर हो सकते हैं।
      🌨️ गीली बर्फ़ या बर्फ़ीला तूफ़ान: सैटेलाइट टीवी और माइक्रोवेव लिंक में रुकावट आ सकती है।
      रोचक तथ्य

      अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में वैज्ञानिक बहुत कम आवृत्ति (VHF/UHF) और विशेष परिस्थितियों में रेडार (Radio Detection and Ranging) का उपयोग करके बर्फ़ की कई किलोमीटर मोटी परतों के नीचे की संरचना का अध्ययन करते हैं। इसका अर्थ है कि रेडियो तरंगें बर्फ़ के पार जा सकती हैं, लेकिन उनकी सफलता तरंग की आवृत्ति और बर्फ़ के गुणों पर निर्भर करती है।

      निष्कर्ष:
      रेडियो सिग्नल बर्फ़ की दीवार के पार जा सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बर्फ़ की मोटाई, घनत्व, पानी की मात्रा और सिग्नल की आवृत्ति बढ़ती है, सिग्नल का क्षय (attenuation) भी बढ़ता जाता है। इसलिए कुछ परिस्थितियों में ऐसा लगता है कि सिग्नल बर्फ़ के पार नहीं जा रहा है।

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  1. रामायण के अनुसार रावण ने ग्रहों को बंदी बना लिया था जिसमें उन सभी का उल्लेख भी है जो आज हम पड़ रहे है । ग्रह क्रमशः बुध, शुक्र, प्रथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, अरुण है । ये बात उस समय केसे पता चली कि ग्रह आठ होते है । क्या उस समय सच में इंसान प्रथ्वी से बाहर जा सकते थे ।

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    1. पुराणों में जिन नवग्रहों का उल्लेख है वे है, सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र,गुरु, मंगल, शनि, राहु और केतु
      इसमें सूर्य ग्रह नही है, चन्द्रमा उपग्रह है, राहु और केतु का अस्तित्व नही है।
      अरुण या वरुण ग्रह का किसी पुराण में कोई उल्लेख नही है।

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  2. सर प्रकाश विद्युत चुम्बकीय तरंग है और इसके स्पेक्ट्रम से हमे पता चलता है कि सूर्य से विभिन्न प्रकार की तरंगे आती है जिसमे एक्स किरणे भी होती है जो उच्च ऊर्जा की होती है वो पृथ्वी तक क्यों नहीं पहुंचती हैं केवल दृश्य प्रकाश क्षेत्र ही पंहुचता है

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    1. सूर्य के केंद्र मे ऊर्जा गामा किरण के रूप मे बनती है लेकिन सतह तक आते तक वह पराबैंगनी(अल्ट्रा वायलेट) तक कम ऊर्जा वाली हो जाती है। पराबैंगनी(अल्ट्रा वायलेट) किरणों को ओज़ोन परत रोक देती है।
      लेकिन सूर्य के कोरोना से भी एक्स रे पृथ्वी तक पहुँचती है। यह घटना कभी कभार सौर ज्वाला (सोलर फ्लेयर) के समय कुछ घंटों के लिए होती है। इससे उपग्रहों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रभाव पढ़ता है!

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    1. बहुत अच्छा प्रश्न है। इसका उत्तर यह है कि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (Mass) होता है, लेकिन वह प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की तुलना में इतना छोटा होता है कि अधिकांश गणनाओं में उसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

      द्रव्यमान की तुलना
      प्रोटॉन का द्रव्यमान ≈ 1.67×10
      −27
      kg
      न्यूट्रॉन का द्रव्यमान ≈ 1.675×10
      −27
      kg
      इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान ≈ 9.11×10
      −31
      kg

      अर्थात,

      1 प्रोटॉन ≈ 1836 इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान के बराबर होता है।

      इसलिए एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का केवल लगभग 0.055% है।

      उदाहरण

      कार्बन-12 (Carbon-12) परमाणु में:

      6 प्रोटॉन
      6 न्यूट्रॉन
      6 इलेक्ट्रॉन

      यदि केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान जोड़ें, तो लगभग 12 परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) मिलता है।

      6 इलेक्ट्रॉनों का कुल द्रव्यमान केवल लगभग 0.0033 u होता है, जो कुल द्रव्यमान का मात्र 0.03% है।

      इसी कारण स्कूल और कॉलेज स्तर पर परमाणु द्रव्यमान को लगभग प्रोटॉन + न्यूट्रॉन के बराबर माना जाता है।

      क्या वैज्ञानिक इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान को बिल्कुल नहीं गिनते?

      गिनते हैं।

      जब बहुत अधिक सटीक (High Precision) मापन किए जाते हैं, जैसे:

      मास स्पेक्ट्रोमीटर (Mass Spectrometer) से परमाणु का द्रव्यमान मापना,
      परमाणु घड़ियाँ,
      या कण भौतिकी के प्रयोग,

      तो इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान को भी शामिल किया जाता है। यहाँ तक कि इलेक्ट्रॉनों की बंधन ऊर्जा (Binding Energy) के कारण होने वाले सूक्ष्म द्रव्यमान परिवर्तन का भी ध्यान रखा जाता है।

      एक रोचक तथ्य

      परमाणु का लगभग 99.95% से अधिक द्रव्यमान उसके नाभिक (Nucleus) में होता है, जहाँ प्रोटॉन और न्यूट्रॉन रहते हैं। इलेक्ट्रॉन पूरे परमाणु का बहुत बड़ा आयतन घेरते हैं, लेकिन उसके द्रव्यमान में उनका योगदान बहुत कम होता है।

      निष्कर्ष:
      इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान शून्य नहीं है। उसे इसलिए अक्सर नहीं गिना जाता क्योंकि वह प्रोटॉन या न्यूट्रॉन की तुलना में लगभग 1836 गुना हल्का होता है। सामान्य गणनाओं में उसका प्रभाव नगण्य होता है, जबकि अत्यधिक सटीक वैज्ञानिक मापों में उसे अवश्य शामिल किया जाता है।

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  3. सर जी क्या मनुष्य के मस्तिष्क की मेमोरी को हम किसी पेन ड्राइव में सेव कर सकते हैं। और सर जी इसे पूर्ण करने में अभी तक कितनी रिसर्च कर चुके हैं वैज्ञानिक।

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    1. उसे किसी टैंक, तालाब की ओर मोड़ा जाए। अंडरग्राउंड टैंक में जमा करें। या छोटे छोटे पिट में जमा कर जमीन को सोखने दे।

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  4. नमस्कार सर,
    मेरा एक सवाल है, यदि कोई asteroid धरती की तरफ बढ़ने लगे और यदि समय पर उसका पता चल जाए तो क्या उसको मिसाइल से मारकर धरती पर टकराने से रोका जा सकता है? और यदि हां, तो ये क्षमता किन किन देशों के पास है, क्या भारत के पास भी है,और इसे कैसी मिसाइल से मारा जा सकता है?

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    1. मिसाइल से एस्टरॉयड को गिराना भयावह होगा। एस्टरॉयड बड़े क्षेत्र में नुकसान पहुचायेगा।
      वर्तमान में ये क्षमता किसी के पास नही है। ब्रूस विलिस भी कुछ नही कर सकेगा।

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  5. जब लगभग सभी पेड़ पौधे दिन में co2 लेते है और रात में O2 तो रात में मनुष्य जिंदा कैसे रहते है???
    क्योंकि रात को तो पेड़ भी ऑक्सीजन लेरे और हम दिन रात ओ2, इतनी ऑक्सीजन कहाँ से है???

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    1. आक्सीजन की मात्रा वायुमंडल का 20% है, जबकि कार्बन डाई आक्साइड केवल 0.4%। ऑक्सीजन की मात्रा बहुत है।
      वैसे बहुत से जीवाणु कार्बनिक पदार्थो से आक्सीजन मुक्त भी करते है।

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    1. सबसे पहले ज्योतिष मे जो नौ ग्रह है उसमें सूर्य, चंद्रमा ग्रह नही है। सूर्य तारा है, चंद्रमा उपग्रह। राहु और केतु नाम के कोई ग्रह नही है। ज्योतिष में युरेनस, नेप्च्यून का अस्तित्व नही है जो कि उपस्थित है।
      ज्योतिष में पृथ्वी को ग्रह नही माना गया है।
      विज्ञान प्रमाणों पर चलता है, ज्योतिष के पास ग्रहों द्वारा मानव जीवन पर प्रभाव पड़ने के कोई प्रमाण नही है।

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    1. फोटोवोल्टिक सेल द्वारा प्रकाश से विद्युत, और विद्युत से चुम्बकीय ऊर्जा।
      प्रकाश से सीधे चुम्बकीय ऊर्जा नही बनेगी।

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    1. आप नील्स बोह्र मॉडल की बात कर रहे है जो कि गलत साबित हो चुका है। इलेक्ट्रान गोलाकार कक्षा में नही नाभिक के चारो ओर एक बादल रूपी सरंचना में रहते है। जिन्हें आप ऑर्बिट मान रहे है वे एनर्जी स्टेटस है।

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  6. sir
    mera que. Ye hai ki jab light se jyada speed kisi ki nahi hoti to scientist log kaise jan lete hai ki ANDROMEDA ya other galaxy per kya incidence hua ,jabki waha per light ko bhi pahunchane me milion trilion year lag jate hai to ye kaise possible hai sir..ya phir frequency ki speed light se bhi tez hai.
    meri is ziggyasha ko jaroor sant kare sir…

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    1. पदार्थ परमाणुओं से बना होता है। हर परमाणु अपने आप मे चुंबक होता है। जब किसी पदार्थ के सारे परमाणु एक दिशा मे संरेखित हो जाते है तब वह पदार्थ चुंबकीय हो जाता है।

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  7. 1-पृथ्वी निर्माणका तत्व:

    अक्सिजन : २८.२ %
    फलाम: ३४.१%
    सिलिकन :१७.२ %
    म्यागनेसियम: १५.९%
    निकेल : १.६ %
    क्यालसियम :१.६ %
    सिलाबर : १.५%
    सल्फर: ०.७०%
    सोडियम: ०.२५ %
    टाइटेनियम: ०.०७१%
    पोटासियम : ०.०१९ %
    अरु पदार्य: ०.५३ %

    2- सूर्य निर्माण कि तत्व:

    हाइड्रोजनः 74%
    हिलियमः 25%
    अन्यः1%

    ……….

    सर, मेरा जिज्ञाशा एह है कि, अगर पृथ्वी सुरजका टुटा हुवा अंश है तोह बनाने वाला तत्व अलग-अलग क्यूँ है !

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    1. यह एक गलतफ़हमी है कि पृथ्वी सूर्य का टूकड़ा है। तथ्य यह है कि सूर्य , पृथ्वी और सभी ग्रह एक ही बड़े गैस के बादल से बने है जिसे निहारिका या नेबुला कहते है। यह बादल परिक्रमा कर रहा था और किसी हलचल से यह संपिड़ित होना शुरु हुआ और इस प्रक्रिया मे सूर्य के साथ सभी ग्रह बने। आंतरिक ग्रहो के पास भारी तत्व अधिक जमा हुये और बाह्य ग्रहो के पास हल्के तत्व।
      सूर्य अपवाद है क्योंकि इसका आकार अन्य ग्रहो के कुल द्रव्यमान का ९८% है। इसमे भी भारी तत्व है लेकिन द्रव्यमान की अधिकता के कारण प्रतिशत कम है।

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    1. रात में हवाई जहाज की आवाज आती है। लेकिन रात में उड़ानों की संख्या कम होती है, दूसरा नींद में हम उन आवाज को सुन नही पाते है।

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    1. त्रिज्या अपने आप मे कोई भौतिक राशी नही है। यह वृत्त के आकार को मापने प्रयुक्त होती है। वृत्त केंद्र से वृत्त की परिधी की दूरी त्रिज्या कहलाती है।

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