यह एक ग्रहीय निहारिका है जो एक तारे की मृत्यु के पश्चात बनी है। इस निहारिका का नाम एन जी सी 3132 है। इसे दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula) भी कहा जाता है। इसे निर्माण करने वाला श्वेत वामन तारा … पढ़ना जारी रखें दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula)
श्याम विवर का जन्म सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात होता है।
जब तक तारे जीवित रहते है तब वे दो बलो के मध्य एक रस्साकसी जैसी स्थिति मे रहते है। ये दो बल होते है, तारो की ‘जीवनदायी नाभिकिय संलयन से उत्पन्न उष्मा’ तथा तारों का जन्मदाता ‘गुरुत्वाकर्षण बल’। तारे के द्रव्यमान से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण उसे तारे पदार्थ को केन्द्र की ओर संपिड़ित करने का प्रयास करता है, इस संपिड़न से प्रचण्ड उष्मा उत्पन्न होती है, जिसके फलस्वरूप नाभिकिय संलयन प्रक्रिया प्रारंभ होती है। यह नाभिकिय संलयन प्रक्रिया और ऊर्जा उत्पन्न करती है। इस ऊर्जा से उत्पन्न दबाव की दिशा केन्द्र से बाहर की ओर होती है। इस तरह से तारे के गुरुत्व और संलयन से उत्पन्न ऊर्जा की रस्साकशी मे एक संतुलन उत्पन्न हो जाता है। तारे नाभिकिय संलयन के लिए पहले हायड़ोजन, उसके बाद हिलियम,लीथीयम के क्रम मे लोहे तक के तत्वो का प्रयोग करता है। विभिन्न तत्वों का नाभिकिय संलयन परतो मे होता है, अर्थात सबसे बाहर हायड़ोजन, उसके नीचे हीलीयम और सबसे नीचे लोहा।
अमरीका का अंतरिक्ष यान अटलांटिस अपनी अंतिम यात्रा पर रवाना हो गया है। ये पिछले 30 साल से जारी अमरीकी अंतरिक्ष यानों के अभियान में किसी यान की 135वीं और अंतिम उड़ान है। अटलांटिस ने शुक्रवार 8 जुलाई 2011 स्थानीय … पढ़ना जारी रखें अटलांटिस अपनी अंतिम ऐतिहासिक उड़ान पर रवाना
कल्पना कीजिए की आप किसी श्याम विवर की सुरक्षित दूरी पर(घटना क्षितीज Event-Horizon से बाहर) परिक्रमा कर रहे है। आप को आकाश कैसा दिखायी देगा ? साधारणतः आपको पृष्ठभूमी के तारे निरंतर खिसकते दिखायी देंगे, यह आपकी अपनी कक्षिय गति के कारण है। लेकिन किसी श्याम विवर के पास गुरुत्वाकर्षण दृश्य को अत्यधिक रूप से परिवर्तित कर देता है।
श्याम विवर का परिकल्पित चित्र
श्याम विवर के समीप से गुजरने वाली प्रकाश किरणे उसके गुरुत्व की चपेट मे आ जाती है और निकल नही पाती है। इस कारण श्याम विवर के आसपास का क्षेत्र एक काली चकती(Dark Disk) के जैसा दिखायी देता है। श्याम विवर से थोड़ी दूरी पर से गुजरने वाली प्रकाश किरणे गुरुत्व की चपेट मे तो नही आती लेकिन उसके प्रभाव से उनके पथ मे वक्रता आ जाती है। इस प्रभाव के कारण श्याम विवर की पृष्ठभूमि मे तारामंडल विकृत नजर आता है, मनोरंजनगृहों के दर्पणो की तरह। इस प्रभाव से कुछ तारो की एकाधिक छवी दिखायी देती है। आप एक तारे की दो छवियाँ श्याम विवर के दो विपरीत बाजूओं मे देख सकते है क्योंकि श्याम विवर के दोनो ओर से जाने वाली प्रकाश किरणे आपकी ओर मुड़ गयी है। कुछ तारो की कभी कभी असंख्य छवियाँ बन जाती है क्योंकि उनसे निकलने वाली प्रकाश किरणे श्याम विवर के चारो ओर से आपकी ओर मोड़ दी जाती है। पढ़ना जारी रखें “ब्रह्माण्ड की संरचना भाग 13 : श्याम विवर के विचित्र गुण”