2025 की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ


वर्ष 2025 विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ। इस वर्ष अनुसंधान का केंद्र केवल नई खोजें ही नहीं, बल्कि उन खोजों का समाज, पर्यावरण और मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव भी रहा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी से लेकर ऊर्जा तक—हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली।
वर्ष 2025 की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि जब अनुसंधान, तकनीक और मानव-मूल्य एक साथ चलते हैं, तो प्रगति टिकाऊ और व्यापक होती है। यह वर्ष केवल नई खोजों का नहीं, बल्कि विज्ञान को समाज के हर स्तर तक पहुँचाने का भी रहा। आने वाले वर्षों के लिए 2025 ने एक मज़बूत, जिम्मेदार और नवोन्मेषी आधार तैयार किया। पढ़ना जारी रखें 2025 की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अपने महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान के तहत 14 जुलाई को चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण करने जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसे 14 जुलाई 2023 दोपहर 2:35 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा।

शुरुआती दो अभियान – चंद्रयान 1 और चंद्रयान- 2 के बाद यह तीसरी बार है, जब भारत इस दिशा में कोशिश कर रहा है।

इससे पहले ज़ाहिर है, साल 2019 में चंद्रयान-2 अभियान के दौरान लैंडर के सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफलता नहीं मिल पाई थी। यही कारण है कि चंद्रयान-3 मिशन को भारत के लिए अहम माना जा रहा है और इससे काफ़ी उम्मीदें भी जुड़ी हैं।

भारत का तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन, LVM3 चंद्रयान-3, प्रक्षेपण यान के चौथे परिचालन मिशन (M4) में उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस अभियान में इसरो सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन कर नई सीमाएं पार करने का प्रयास कर रहा है

इस अभियान का एक उद्देश्य इसके चंद्र मॉड्यूल द्वारा चंद्रमा की सतह और चंद्र भूभाग पर घूमना प्रहै। इसके इसरो के भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए सहायक होने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त रोवर की तैनाती और इन-सीटू(in-सीटू) वैज्ञानिक प्रयोग से चंद्र अभियानों में नई ऊंचाइयों को छुएंगे। जी हां, इसरो चंद्रमा को हमारे करीब ला रहा है। पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान

अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन


अपोलो 11 मिशन के क्रू सदस्य रहे अंतरिक्षयात्री माइकल कोलिंस का निधन हो गया है। उन्होंने 28 अप्रैल को आख़िरी सांस ली। 90 वर्षीय कोलिंस के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कोलिंस के परिवार ने बताया, “वो लंबे समय से कैंसर से बड़ी बहादुरी से लड़ रहे थे लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने आख़िरी दिन शांति से अपने परिवार के साथ बिताए।”

अपोलो मिशन के दौरान कोलिंस चंद्रमा की कक्षा में ही रुके थे जबकि उनके सहयोगी नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे थे। पढ़ना जारी रखें अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन

विक्रम लैंडर साफ़्ट लैंडीग

चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता


भारत शनिवार 7 सितंबर 2019 की सुबह इतिहास रचने से दो क़दम दूर रह गया। अगर सब कुछ ठीक रहता तो भारत विश्व का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के क़रीब उतरता। 978 … पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता

चंद्रमा पर मानव के 50 वर्ष विशेष : मानव का यह एक नन्हा कदम, मानवता की एक लम्बी छलांग है।


20 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर पहली बार मानव के कदम पड़े। नासा के अभियान अपोलो-11 से नील आर्मस्ट्रॉन्ग, माइकल कॉलिन्स और एडविन एल्ड्रिन पहली बार चंद्रमा पर पहुंचे। मानव को चंद्रमा पर पहुंचाने की पहली कोशिश के तहत 16 … पढ़ना जारी रखें चंद्रमा पर मानव के 50 वर्ष विशेष : मानव का यह एक नन्हा कदम, मानवता की एक लम्बी छलांग है।

चंद्रमा पर मानव के 50 वर्ष विशेष : चंद्रयात्रियों ने चंद्रमा के वातावरण का अभ्यास कैसे किया ?


चंद्रमा पर अवतरण से पहले चंद्रयात्रीयों ने  पृथ्वी  पर ही एक स्थान पर चंद्रमा के वातावरण का अभ्यास किया था। वह जगह है आइसलैंड। 20 जुलाई 1969 को अमरीकी अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्ट्रांग अपोलो-11 के चंद्रयान ईगल से बाहर निकले और … पढ़ना जारी रखें चंद्रमा पर मानव के 50 वर्ष विशेष : चंद्रयात्रियों ने चंद्रमा के वातावरण का अभ्यास कैसे किया ?