फर्मी विरोधाभास या पैराडॉक्स


फर्मी विरोधाभास, जिसे फर्मी पैराडॉक्स भी कहा जाता है, अंतर खगोलीय विकसित सभ्यताओं के अस्तित्व की उच्च संभावना और उनके अस्तित्व के प्रमाणों के अभाव के बीच का विरोधाभास है। यह प्रश्न उठाता है कि ब्रह्मांड की विशालता और आयु के बावजूद, मनुष्य ने अन्य बुद्धिमान जीवन के कोई संकेत क्यों नहीं खोजे हैं। इस विरोधाभास को सबसे पहले 1950 में भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने उजागर किया था, जिन्होंने प्रसिद्ध प्रश्न पूछा था, “सब लोग कहाँ हैं?” पढ़ना जारी रखें फर्मी विरोधाभास या पैराडॉक्स

कैरोलीन हर्शेल (1750-1848) – धूमकेतु की पहचान करने वाली पहली महिला


कैरोलीन हर्शेल (जन्म 16 मार्च, 1750,  हनोवर [जर्मनी] – मृत्यु 9 जनवरी, 1848, हनोवर) एक जर्मन मूल की ब्रिटिश खगोलशास्त्री थीं। उन्हें पहली पेशेवर महिला खगोलशास्त्री माना जाता है। अपनी कड़ी मेहनत के लिए कैरोलीन रॉयल सोसाइटी की सदस्यता से सम्मानित होने वाली पहली महिला थीं जोकि एक रूढ़िवादी संगठन था जिसमें तब तक केवल पुरुष सदस्य थे।

कैरोलीन ने अपने भाई सर विलियम हर्शेल के काम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अकेले ही 1783 में दूरबीन से तीन नीहारिकाओं का पता लगाया और 1786 में वे धूमकेतु की खोज करने वाली पहली महिला बनीं ; अगले 11 वर्षों में उन्होंने सात अन्य धूमकेतुओं को देखा। पढ़ना जारी रखें कैरोलीन हर्शेल (1750-1848) – धूमकेतु की पहचान करने वाली पहली महिला

चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अपने महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान के तहत 14 जुलाई को चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण करने जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसे 14 जुलाई 2023 दोपहर 2:35 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा।

शुरुआती दो अभियान – चंद्रयान 1 और चंद्रयान- 2 के बाद यह तीसरी बार है, जब भारत इस दिशा में कोशिश कर रहा है।

इससे पहले ज़ाहिर है, साल 2019 में चंद्रयान-2 अभियान के दौरान लैंडर के सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफलता नहीं मिल पाई थी। यही कारण है कि चंद्रयान-3 मिशन को भारत के लिए अहम माना जा रहा है और इससे काफ़ी उम्मीदें भी जुड़ी हैं।

भारत का तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन, LVM3 चंद्रयान-3, प्रक्षेपण यान के चौथे परिचालन मिशन (M4) में उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस अभियान में इसरो सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन कर नई सीमाएं पार करने का प्रयास कर रहा है

इस अभियान का एक उद्देश्य इसके चंद्र मॉड्यूल द्वारा चंद्रमा की सतह और चंद्र भूभाग पर घूमना प्रहै। इसके इसरो के भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए सहायक होने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त रोवर की तैनाती और इन-सीटू(in-सीटू) वैज्ञानिक प्रयोग से चंद्र अभियानों में नई ऊंचाइयों को छुएंगे। जी हां, इसरो चंद्रमा को हमारे करीब ला रहा है। पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान

2022 की सबसे खूबसूरत तस्वीर : जेम्स वेब अंतरिक्ष वेधशाला(James Webb Space Telescope – JWST)


जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope – JWST) द्वारा ली गई इस चमकते तारे की तस्वीर को लेकर नासा (NASA) ने कहा कि दूरबीन के 18 षट्कोणीय दर्पण अब संरेखित(align) हो चुके हैं। वो एकसाथ काम कर रहे हैं, यानी वो अब 18 दर्पण मिल कर एक दर्पण बन चुके हैं। हमें जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं ज्यादा बेहतर तस्वीरें मिल रही हैं। यह हैरान करने वाला और खुशी देने वाला है।

JWST की टीम ने कहा कि हमारी आकाशगंगा के दूसरे छोर पर मौजूद जिस नारंगी तारे (Orange Star) की तस्वीर जेम्स वेब टेलिस्कोप ने ली है, वह धरती से करीब 2000 प्रकाश वर्ष दूर है। इस तारे का नाम 2MASS J17554042+6551277है। इसकी दृश्य चित्र को बेहतर बनाने के लिए लाल फिल्टर का उपयोग किया गया था। ताकि तारे की चमक और अंतरिक्ष का अंधेरा आपस में ना मिलें। इस चमकते तारे के पीछे कई आकाशगंगाएं और तारे भी दिख रहे हैं। पढ़ना जारी रखें 2022 की सबसे खूबसूरत तस्वीर : जेम्स वेब अंतरिक्ष वेधशाला(James Webb Space Telescope – JWST)

विज्ञान : 2021 एक अवलोकन


2021 विज्ञान और तकनीक के विकास के लिए एक उल्लेखनीय वर्ष रहा है, इस वर्ष बहु प्रतीक्षित जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन का प्रक्षेपण हुआ साथ ही मानव निर्मित यान ने सूर्य के प्रभामंडल को छूने मे मे सफलता पाई है। जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती जाती है, नई-नई वैज्ञानिक खोज और नई अवधारणाओं के अस्तित्व में आने की गति भी बढ़ती जाती है।

प्रस्तुत है वर्ष 2021 में विज्ञान विश्व मे घटित घटनाओं, नई खोज और आविष्कार की एक सूची । पढ़ना जारी रखें विज्ञान : 2021 एक अवलोकन

जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन ( JWST ) : मानव निर्मित समय यान


नासा की बहुप्रतीक्षित महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष दूरबीन “जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप(JWST)” 25 दिसंबर 2021 को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किये जाने की संभावना है। इस अंतरिक्ष दूरबीन से वैज्ञानिकों को काफी उम्मीदें हैं। वर्तमान में, नासा के हबल अंतरिक्ष दूरबीन को अंतरिक्ष में स्थापित अब तक का सबसे शक्तिशाली दूरबीन माना जाता है।

इसका असली नाम अगली पीढ़ी का अंतरिक्ष दूरदर्शी (Next Generation Space Telescope (NGST)) था, जिसका सन 2002 में नासा के द्वितीय प्रशासक जेम्स एडविन वेब (1906-1992) के नाम पर दोबारा नामकरण किया गया। जेम्स एडविन वेब ने केनेडी से लेकर ज़ोंनसन प्रशासन काल (1961-68) तक नासा का नेतृत्व किया था। उनकी देखरेख में नासा ने कई महत्वपूर्ण प्रक्षेपण किए, जिसमे जेमिनी कार्यक्रम के अंतर्गत बुध के सारे प्रक्षेपण एवं प्रथम मानव युक्त अपोलो उड़ान शामिल है।

यह आश्चर्य की बात नहीं है कि जेम्स वेब की तुलना हबल से की जाती है। यह माना जाता है कि यह दूरबीन हबल दूरबीन का उत्तराधिकारी है। यह आंशिक रूप से सत्य है, क्यों कि जेम्स वेब टेलीस्कोप हब्स अंतरिक्ष दूरबीन से बहुत भिन्न है। दोनों में अलग-अलग क्षमताएं हैं। हबल अंतरिक्ष दूरबीन की बात करें तो इसकी अंतरिक्ष मे स्थापना वर्ष 1990 में पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO)में हुई थी। पिछले 31 वर्षों में, हबल ने 14 लाख निरीक्षण किए हैं, जिसमें तारे के मध्य के पिंडों का अवलोकन, बृहस्पति से टकराने वाले धूमकेतुओं का निरीक्षण और उनकी खोज करना शामिल है। पढ़ना जारी रखें जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन ( JWST ) : मानव निर्मित समय यान