सापेक्षतावाद : सापेक्षतावाद और ब्रह्मांड


रात के अंधेरे में जब हम तारों भरे आकाश को देखते हैं, तो यह शांत और स्थिर दिखाई देता है। लेकिन आधुनिक भौतिकी हमें बताती है कि यह दृश्य एक भ्रम है। वास्तव में, ब्रह्मांड लगातार बदल रहा है—फैल रहा है, विकसित हो रहा है और गुरुत्वाकर्षण की अदृश्य डोर से बंधा हुआ है। इस महान ब्रह्मांडीय नाटक को समझने की कुंजी है—सापेक्षतावाद का सिद्धांत, जिसे महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रस्तुत किया था।

आधुनिक खगोल भौतिकी में सापेक्षतावाद वह सिद्धांत है जिसने ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संरचना, विकास और भविष्य को समझने का वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रतिपादित सामान्य सापेक्षतावाद (General Relativity) ने यह बताया कि गुरुत्वाकर्षण वास्तव में कोई साधारण बल नहीं है, बल्कि यह स्थान-समय (Space-Time) की वक्रता है। इसी सिद्धांत के आधार पर वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के विस्तार, बिग बैंग, आकाशगंगाओं की संरचना और ब्रह्मांड के संभावित भविष्य का अध्ययन किया।

सापेक्षतावाद सिद्धांत ने न केवल स्थान (Space) और समय (Time) की हमारी पारंपरिक धारणाओं को बदला, बल्कि यह भी बताया कि गुरुत्वाकर्षण (Gravity) वास्तव में क्या है और ब्रह्मांड कैसे कार्य करता है। सापेक्षतावाद के कारण ही हम ब्लैक होल, ब्रह्मांड का विस्तार, गुरुत्वीय तरंगें और ब्रह्मांड की उत्पत्ति जैसी घटनाओं को समझ पाए हैं।

यह सिद्धांत केवल गणितीय समीकरणों का संग्रह नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संरचना और भविष्य को समझने का एक शक्तिशाली उपकरण है। पढ़ना जारी रखें सापेक्षतावाद : सापेक्षतावाद और ब्रह्मांड

महिला दिवस विशेष : हेनरीटा स्वान लेविट (1868-1921)


हार्वर्ड कॉलेज वेधशाला ने 1895 में हेनरीटा स्वान लेविट को स्वयंसेवक के रूप में नियुक्त किया, जो कॉलेज में पढ़ाई के दौरान बीमार पड़ने के बाद बहरी हो गई थी। लेविट को निदेशक एडवर्ड पिकरिंग द्वारा प्रति घंटे 30 सेंट का मामूली, लेकिन नियमित भुगतान दिया गया, लेकिन केवल उसके सात साल के परिश्रम के बाद। वेधशाला के फोटोग्राफिक फोटोमेट्री विभाग का नेतृत्व जल्द ही लेविट ने किया, जिन्होंने रैडक्लिफ कॉलेज से स्नातक किया था।

1868 में मैसाचुसेट्स में जन्मी लीविट उन चंद अमेरिकी महिलाओं में से एक थीं जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम थीं। 4 जुलाई 2025 को उनकी आयु 157 वर्ष हो जाती। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के महिला विद्यालय में दाखिला लेने से पहले, जिसका बाद में नाम बदलकर रैडक्लिफ कर दिया गया, लीविट ने ओबरलिन कॉलेज में पढ़ाई की। वहाँ उन्होंने गणित, दर्शन, कला और भाषा का अध्ययन किया। लीविट ने अपने अंतिम वर्ष के दौरान हार्वर्ड कॉलेज वेधशाला में खगोल विज्ञान पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। पढ़ना जारी रखें महिला दिवस विशेष : हेनरीटा स्वान लेविट (1868-1921)

कर्क निहारिका(Crab Nebula)

खगोल भौतिकी 24 : निहारीकायें और उनके प्रकार( NEBULAE AND THEIR TYPES)


लेखिका:  सिमरनप्रीत (Simranpreet Buttar) प्रकृति अपनी खूबसूरती से हमे आश्चर्य चकित करने का कोई मौका नही खोती है और इन प्रकृति द्वारा निर्मित इन खूबसूरतीयों मे से एक है निहारिकायें(Nebulae)। ’मूलभूत खगोलभौतिकी (Basics of Astrophysics)’ शृंखला के चौबीसवें लेख मे … पढ़ना जारी रखें खगोल भौतिकी 24 : निहारीकायें और उनके प्रकार( NEBULAE AND THEIR TYPES)

ब्लैक होल्स खोजे तो ‘बिग बैंग’ पर उठा सवाल!


महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि मनुष्य स्वभावतः जिज्ञासु प्राणी  है तथा उसकी सबसे बड़ी इच्छा ब्रह्माण्ड की व्याख्या करना है। ब्रह्माण्ड की कई संकल्पनाओं ने मानव मस्तिष्क को हजारों वर्षों से उलझन में डाल रखा है। वर्तमान … पढ़ना जारी रखें ब्लैक होल्स खोजे तो ‘बिग बैंग’ पर उठा सवाल!

इनसाईट खगोल फोटोग्राफ़र पुरस्कार -2016(Insight Astronomy Photographer of the Year 2016)


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हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला

हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला की 22 वीं वर्षगांठ : करीना निहारिका(Carina Nebula)


24 अप्रैल 1900 को डीस्कवरी स्पेश शटल ने हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला को पृथ्वी की कक्षा तथा इतिहास मे स्थापित किया था। हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला की 22 वीं वर्षगांठ पर पेश … पढ़ना जारी रखें हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला की 22 वीं वर्षगांठ : करीना निहारिका(Carina Nebula)