3I/ATLAS: अंतरखगोलीय धूमकेतु  या एलियन अंतरिक्ष यान?


3I/ATLAS  एक प्राकृतिक अंतरखगोलीय धूमकेतु है। नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य संस्थानों के खगोलविद बताते हैं कि इसके दृश्यमान कोमा, धूल की पूंछ और गैस उत्सर्जन धूमकेतु के व्यवहार के अनुरूप हैं, भले ही इसकी रासायनिक संरचना असामान्य हो। इसमें कृत्रिम प्रणोदन, संचार संकेतों या संरचनात्मक विशेषताओं का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

अधिकांश वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि हालाँकि इसकी विसंगतियाँ अध्ययन के योग्य हैं, लेकिन असाधारण दावों के लिए असाधारण प्रमाण की आवश्यकता होती है , और वर्तमान अवलोकनों को अंतरखगोलीय धूमकेतुओं की संरचना और उत्पत्ति में प्राकृतिक विविधताओं के माध्यम से समझाया जा सकता है।
असामान्य उत्पत्ति के बावजूद 3I/ATLAS ब्रह्माण्ड के अध्ययन के एक असाधारण वैज्ञानिक अवसर का प्रतिनिधित्व करता है। यह शोधकर्ताओं को किसी अन्य तारे के चारों ओर निर्मित पदार्थ का विश्लेषण करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे ग्रह प्रणालियों की विविधता और उन्हें आकार देने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं के बारे में सुराग मिलते हैं। चाहे अंततः यह एक एलियन कलाकृति साबित हो या अंतरखगोलीय निर्माण का एक प्राकृतिक अवशेष हो, यह पिंड 3I/ATLAS ब्रह्मांड के बारे में मानवता की समझ को विस्तार देता  है और हमें याद दिलाता है कि हम अपने सौर मंडल से परे के विशाल ब्रह्मांड के बारे में वास्तव में कितना कम जानते हैं।
3I/ATLAS पर बहस पृथ्वी से परे जीवन के बारे में मानव की निरंतर जिज्ञासा और वैज्ञानिक संशयवाद तथा कल्पनाशील अन्वेषण के बीच की महीन रेखा को दर्शाती है। हालाँकि वर्तमान साक्ष्य एक प्राकृतिक पिंड की अवधारणा का दृढ़ता से समर्थन करते हैं, ऐसे अंतरखगोलीय मेहमानों का खुले दिमाग से किया गया अध्ययन यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई एलियन यान कभी हमारे सौर मंडल में प्रवेश करता है, तो हम उसे पहचानने के लिए तैयार रहेंगे। इस अर्थ में, 3I/ATLAS न केवल एक अंतरखगोलीय यात्री है, बल्कि ब्रह्मांड और उसमें हमारे स्थान के बारे में ज्ञान की हमारी अपनी खोज को प्रतिबिंबित करने वाला एक दर्पण भी है। पढ़ना जारी रखें 3I/ATLAS: अंतरखगोलीय धूमकेतु  या एलियन अंतरिक्ष यान?

चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अपने महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान के तहत 14 जुलाई को चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण करने जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसे 14 जुलाई 2023 दोपहर 2:35 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा।

शुरुआती दो अभियान – चंद्रयान 1 और चंद्रयान- 2 के बाद यह तीसरी बार है, जब भारत इस दिशा में कोशिश कर रहा है।

इससे पहले ज़ाहिर है, साल 2019 में चंद्रयान-2 अभियान के दौरान लैंडर के सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफलता नहीं मिल पाई थी। यही कारण है कि चंद्रयान-3 मिशन को भारत के लिए अहम माना जा रहा है और इससे काफ़ी उम्मीदें भी जुड़ी हैं।

भारत का तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन, LVM3 चंद्रयान-3, प्रक्षेपण यान के चौथे परिचालन मिशन (M4) में उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस अभियान में इसरो सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन कर नई सीमाएं पार करने का प्रयास कर रहा है

इस अभियान का एक उद्देश्य इसके चंद्र मॉड्यूल द्वारा चंद्रमा की सतह और चंद्र भूभाग पर घूमना प्रहै। इसके इसरो के भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए सहायक होने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त रोवर की तैनाती और इन-सीटू(in-सीटू) वैज्ञानिक प्रयोग से चंद्र अभियानों में नई ऊंचाइयों को छुएंगे। जी हां, इसरो चंद्रमा को हमारे करीब ला रहा है। पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-3 : इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान

2022 की सबसे खूबसूरत तस्वीर : जेम्स वेब अंतरिक्ष वेधशाला(James Webb Space Telescope – JWST)


जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope – JWST) द्वारा ली गई इस चमकते तारे की तस्वीर को लेकर नासा (NASA) ने कहा कि दूरबीन के 18 षट्कोणीय दर्पण अब संरेखित(align) हो चुके हैं। वो एकसाथ काम कर रहे हैं, यानी वो अब 18 दर्पण मिल कर एक दर्पण बन चुके हैं। हमें जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं ज्यादा बेहतर तस्वीरें मिल रही हैं। यह हैरान करने वाला और खुशी देने वाला है।

JWST की टीम ने कहा कि हमारी आकाशगंगा के दूसरे छोर पर मौजूद जिस नारंगी तारे (Orange Star) की तस्वीर जेम्स वेब टेलिस्कोप ने ली है, वह धरती से करीब 2000 प्रकाश वर्ष दूर है। इस तारे का नाम 2MASS J17554042+6551277है। इसकी दृश्य चित्र को बेहतर बनाने के लिए लाल फिल्टर का उपयोग किया गया था। ताकि तारे की चमक और अंतरिक्ष का अंधेरा आपस में ना मिलें। इस चमकते तारे के पीछे कई आकाशगंगाएं और तारे भी दिख रहे हैं। पढ़ना जारी रखें 2022 की सबसे खूबसूरत तस्वीर : जेम्स वेब अंतरिक्ष वेधशाला(James Webb Space Telescope – JWST)

अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन


अपोलो 11 मिशन के क्रू सदस्य रहे अंतरिक्षयात्री माइकल कोलिंस का निधन हो गया है। उन्होंने 28 अप्रैल को आख़िरी सांस ली। 90 वर्षीय कोलिंस के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कोलिंस के परिवार ने बताया, “वो लंबे समय से कैंसर से बड़ी बहादुरी से लड़ रहे थे लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने आख़िरी दिन शांति से अपने परिवार के साथ बिताए।”

अपोलो मिशन के दौरान कोलिंस चंद्रमा की कक्षा में ही रुके थे जबकि उनके सहयोगी नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा पर उतरे थे। पढ़ना जारी रखें अपोलो 11 अभियान के सदस्य रहे माइकल कोलिंस का 90 साल की उम्र में निधन

विक्रम लैंडर साफ़्ट लैंडीग

चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता


भारत शनिवार 7 सितंबर 2019 की सुबह इतिहास रचने से दो क़दम दूर रह गया। अगर सब कुछ ठीक रहता तो भारत विश्व का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के क़रीब उतरता। 978 … पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई


भारत आज अंतरिक्ष अभियान में अग्रणी राष्ट्रो मे शामिल  है । 22 जुलाई को भारत ने चंद्रयान-2 लॉच कर अंतरिक्ष में एक नई छलांग लगाई है। क्या आपको पता है, भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले … पढ़ना जारी रखें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई