सापेक्षतावाद : न्यूटोनियन भौतिकी की सीमाएँ


विज्ञान का इतिहास निरंतर विकास और सुधार की कहानी है। प्रत्येक नया सिद्धांत पुराने सिद्धांतों को पूरी तरह नकारता नहीं, बल्कि उनकी सीमाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाता है। न्यूटोनियन भौतिकी से सापेक्षतावाद तक की यात्रा इसी वैज्ञानिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

17वीं शताब्दी में सर आइज़ैक न्यूटन ने गति और गुरुत्वाकर्षण के नियम देकर भौतिकी को एक ठोस गणितीय आधार प्रदान किया। लगभग दो सौ वर्षों तक न्यूटन के नियमों को “पूर्ण सत्य” माना गया।

न्यूटोनियन भौतिकी ने गति, बल और गुरुत्वाकर्षण को समझने के लिए एक अत्यंत सफल ढाँचा प्रदान किया। यह सिद्धांत सदियों तक यांत्रिकी का आधार रहा और आज भी दैनिक जीवन की अधिकांश घटनाओं को समझाने में उपयोगी है।

परंतु जैसे-जैसे विज्ञान ने सूक्ष्म कणों, अत्यधिक वेगों और विशाल खगोलीय पिंडों का अध्ययन किया, यह स्पष्ट होने लगा कि न्यूटोनियन भौतिकी कुछ परिस्थितियों में असफल हो जाती है। इन्हीं सीमाओं को दूर करने के लिए नए सिद्धांत की आवश्यकता महसूस हुई।

न्यूटोनियन भौतिकी की मूल मान्यताएँ

न्यूटन की प्रमुख उपलब्धियाँ

न्यूटन ने भौतिकी को तीन मूल नियम दिए:

  1. गति का प्रथम नियम (जड़त्व) :कोई वस्तु अपनी विराम अवस्था (स्थिर) या एकसमान गति (सीधी रेखा में एक समान वेग से गति) की अवस्था में तब तक बनी रहेगी, जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे; इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं, क्योंकि यह वस्तुओं के अपनी अवस्था में बने रहने की प्रवृत्ति (जड़त्व) को बताता है।
  2. गति का द्वितीय नियम( F=maF = ma): किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बल के समानुपाती होती है और यह परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल लगाया जाता है, जिसे गणितीय रूप से F = ma (बल = द्रव्यमान × त्वरण) सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसका मतलब है कि जितना ज़्यादा बल लगेगा, वस्तु उतनी ही तेज़ी से त्वरित होगी, और ज़्यादा द्रव्यमान वाली वस्तु को त्वरित करने के लिए ज़्यादा बल की ज़रूरत होती है।
  3. गति का तृतीय नियम (क्रिया–प्रतिक्रिया) : प्रत्येक क्रिया की सदैव समान एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।

इसके साथ ही उन्होंने सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया:F=Gm1m2r2F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}इन नियमों की सहायता से:

  • ग्रहों की गति समझाई गई
  • प्रक्षेप्य गति और मशीनों का विश्लेषण हुआ
  • इंजीनियरिंग और खगोल विज्ञान का विकास हुआ

न्यूटन की भौतिकी निम्नलिखित प्रमुख मान्यताओं पर आधारित थी:

  1. समय निरपेक्ष (Absolute Time) है – सभी प्रेक्षकों के लिए समय समान रूप से बहता है।
  2. स्थान निरपेक्ष (Absolute Space) है – अंतरिक्ष स्थिर और अपरिवर्तनीय है।
  3. वेगों का साधारण योग नियम लागू होता है।
  4. गुरुत्वाकर्षण एक बल है जो दो द्रव्यमानों के बीच तुरंत कार्य करता है।
  5. प्रकाश की गति अनंत या सामान्य गति के समान मानी जाती थी।

न्यूटोनियन भौतिकी की सीमाएँ

19वीं शताब्दी के अंत तक कुछ गंभीर समस्याएँ सामने आने लगीं।

1. प्रकाश की प्रकृति की समस्या

न्यूटन के सिद्धांत में प्रकाश की गति के लिए कोई विशेष स्थान नहीं था।
परंतु प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ कि:

  • प्रकाश की गति सभी दिशाओं में समान है
  • यह प्रेक्षक या स्रोत की गति पर निर्भर नहीं करती

यह परिणाम न्यूटोनियन वेग-जोड़ नियम के विरुद्ध था।

उदाहरण:
एक बस 40 km/h की गति से चल रही है। बस के अंदर बच्चा 5 km/h से आगे चलता है।

👉 बाहर खड़े व्यक्ति के लिए बच्चे की गति = 45 km/h

यह न्यूटोनियन नियम से सही है।

न्यूटन के अनुसार: वेग जुड़ते हैं।

लेकिन प्रकाश के साथ ऐसा नहीं होता।

उदाहरण:

यदि एक टॉर्च लेकर में 1,00,000 km/s से चलें,
तो भी प्रकाश की गति सभी के लिए 3×10⁸ m/s ही दिखेगी। आपके लिए वह 3×10⁸ m/s होगी। किसी स्थिर निरीक्षक के लिए भी वह 3×10⁸ m/s होगी। आप की गति प्रकाश गति में नहीं जुड़ेगी!

2. समय और स्थान की निरपेक्षता पर प्रश्न

न्यूटन मानते थे कि समय सभी के लिए एक-सा बहता है। लेकिन तेज़ गति से चलने वाली वस्तुओं के लिए:

  • घड़ियाँ धीमी चलती हैं
  • लंबाइयाँ छोटी हो जाती हैं

इन प्रभावों को न्यूटोनियन भौतिकी नहीं समझा पाई।

उदाहरण (अंतरिक्ष यात्री):

  1. दोनों जुड़वाँ (पिंटू और चिंटू) एक ही उम्र के हैं
  2. चिंटू एक रॉकेट में बैठकर बहुत तेज़ गति (प्रकाश गति के समीप गति ) से चला जाता है
  3. कुछ समय बाद चिंटू वापस पृथ्वी लौट आता है
  4. वापस आने पर देखा जाता है कि:
    • पिंटू ज़्यादा बूढ़ा हो गया
    • चिंटू कम उम्र का रह गया

👉 यानी, दोनों की उम्र अलग हो गई, जबकि वे जुड़वाँ थे!

✔ कारण : समय सबके लिए समान नहीं होता

  • पृथ्वी पर समय सामान्य गति से चलता है
  • तेज़ गति से चलने वाले रॉकेट में समय धीमा चलता है

इसे 👉 समय प्रसार (Time Dilation) कहते हैं

3. गुरुत्वाकर्षण

न्यूटन के अनुसार ब्रह्मांड की हर दो वस्तुएँ एक-दूसरे को खींचती हैं। इस खिंचाव को ही गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) कहते हैं। न्यूटन के अनुसार गुरुत्व:

  • बिना माध्यम के
  • तुरंत कार्य करता है

यह विचार:

  • प्रकाश की सीमित गति से टकराता था
  • कारण–कार्य सिद्धांत के विपरीत था

4. खगोलीय प्रेक्षणों की असफल व्याख्या

कुछ घटनाएँ न्यूटन से पूरी तरह नहीं समझाई जा सकीं, जैसे:

  • बुध ग्रह की कक्षा का अतिरिक्त अग्रगमन – बुध ग्रह सूर्य के चारों ओर अंडाकार (elliptical) कक्षा में घूमता है। लेकिन यह अंडाकार हर चक्कर में बिल्कुल उसी दिशा में नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे आगे खिसकता जाता है। बुध सूर्य की परिक्रमा करता है, हर चक्कर के बाद उसकी कक्षा का “सबसे नज़दीकी बिंदु” (जिसे perihelion कहते हैं) थोड़ा-सा आगे बढ़ जाता है, इस धीरे-धीरे घूमने को ही अग्रगमन (Precession of orbit) कहते हैं।
  • न्यूटन के गुरुत्व नियम से ग्रहों की कक्षाएँ समझ आईं लेकिन बुध की कक्षा का पूरा precession नहीं समझाया जा सका। न्यूटन के नियम से बाकी ग्रहों का असर जोड़ने पर भी 43 आर्कसेकंड प्रति शताब्दी कम पड़ जाता था।
  • सूर्य के पास से गुजरते प्रकाश का झुकाव या गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग : ग्रेविटेशनल लेंसिंग (गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग) एक खगोलीय घटना है जहाँ किसी विशाल वस्तु (जैसे आकाशगंगा या ब्लैक होल) का गुरुत्वाकर्षण बल अपने पीछे से आने वाले प्रकाश को मोड़ देता है, जिससे वह वस्तु एक लेंस की तरह काम करती है और प्रकाश के स्रोत (जैसे दूर की आकाशगंगा) की कई, विकृत या बड़ी छवियां बनती हैं।

न्यूटोनियन भौतिकी की कमियों का निराकरण

यह भाग अति संक्षेप में दिया गया है। आने वाले लेखो में इस भाग को विस्तार से बताया जाएगा।

माइकलसन–मॉर्ले प्रयोग (1887) ने यह सिद्ध कर दिया कि:

  • प्रकाश की गति स्थिर है
  • “ईथर” जैसा कोई माध्यम नहीं है

इसने शास्त्रीय भौतिकी की नींव को हिला दिया।

1. आइंस्टीन का विशेष सापेक्षतावाद (1905)

आइंस्टीन ने दो क्रांतिकारी सिद्धांत दिए:

  1. भौतिकी के नियम सभी जड़त्वीय प्रेक्षकों के लिए समान हैं
  2. निर्वात में प्रकाश की गति सभी के लिए समान है

2. न्यूटोनियन अवधारणाओं का रूपांतरण

विशेष सापेक्षतावाद ने बताया कि:

  • समय सापेक्ष है (Time Dilation)
  • लंबाई सापेक्ष है (Length Contraction)
  • एक साथ घटने की धारणा सापेक्ष है

यहाँ से स्पेस–टाइम की अवधारणा जन्मी।

3. द्रव्यमान–ऊर्जा संबंध

E=mc2E = mc^2इसने यह स्पष्ट किया कि:

  • द्रव्यमान ऊर्जा का ही एक रूप है
  • न्यूटन का द्रव्यमान स्थिर नहीं है

4. सामान्य सापेक्षतावाद (1915)

आइंस्टीन ने गुरुत्व को नए रूप में समझाया:

गुरुत्व कोई बल नहीं है,
बल्कि द्रव्यमान और ऊर्जा द्वारा
स्पेस–टाइम की वक्रता है।

वस्तुएँ इस वक्र स्पेस–टाइम में सबसे सरल पथ का अनुसरण करती हैं।

5. न्यूटोनियन गुरुत्व का उन्नत रूप

सामान्य सापेक्षतावाद ने:

  • बुध की कक्षा की समस्या हल की
  • प्रकाश के गुरुत्वीय झुकाव की भविष्यवाणी की
  • गुरुत्वीय समय प्रसार समझाया

6. आधुनिक खोजें

इसी सिद्धांत से:

  • ब्लैक होल
  • गुरुत्वीय तरंगें
  • ब्रह्मांड का विस्तार

जैसी अवधारणाएँ संभव हुईं।


न्यूटन और आइंस्टीन : विरोध नहीं, विस्तार

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि:

  • सापेक्षतावाद न्यूटन को गलत नहीं ठहराता
  • यह उसे विशेष सीमा में समाहित करता है

जब:

  • गति बहुत कम हो
  • गुरुत्व कमजोर हो

तो सापेक्षतावादी समीकरण न्यूटन के नियमों में बदल जाते हैं।

न्यूटोनियन भौतिकी से सापेक्षतावाद की ओर यात्रा विज्ञान की परिपक्वता का प्रतीक है। न्यूटन ने हमें यांत्रिकी की नींव दी, जबकि आइंस्टीन ने समय, स्थान और गुरुत्व की हमारी समझ को पूरी तरह बदल दिया। आज की आधुनिक भौतिकी—चाहे वह GPS तकनीक, खगोल भौतिकी या ब्रह्मांड विज्ञान हो—इसी यात्रा का परिणाम है।

न्यूटोनियन भौतिकी अपने क्षेत्र में अत्यंत सफल और उपयोगी है, किंतु यह उच्च वेग, अत्यधिक गुरुत्व और ब्रह्मांडीय पैमानों पर अपूर्ण सिद्ध होती है। विशेष सापेक्षतावाद ने समय, स्थान और गति की समस्याओं का समाधान किया, जबकि साधारण (सामान्य) सापेक्षतावाद ने गुरुत्वाकर्षण को एक बिल्कुल नई और गहन व्याख्या प्रदान की।

इस प्रकार, सापेक्षतावाद न्यूटोनियन भौतिकी को नकारता नहीं, बल्कि उसे एक विशेष सीमा (कम गति, कमजोर गुरुत्वाकर्षण) में समाहित करता है—और यही आधुनिक भौतिकी की सुंदरता है।

इस प्रकार, न्यूटन से आइंस्टीन तक की यह यात्रा न केवल सिद्धांतों की, बल्कि मानव सोच की सीमाओं के विस्तार की कहानी है।

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